Tag: उत्तरकाशी

तिलाड़ी कांड: जब यमुना किनारे निहत्थों पर बरसाई गईं गोलियां

तिलाड़ी कांड: जब यमुना किनारे निहत्थों पर बरसाई गईं गोलियां

इतिहास
तिलाड़ी कांड 30 मई पर विशेषसुनीता भट्ट पैन्यूलीसीमांत जनपद उत्तरकाशी के रवांई घाटी के बड़कोट नगरपालिका के अन्तर्गत यमुना नदी के तट पर बसा हुआ एक स्थान है तिलाड़ी, जो अपने नैसर्गिक सौंदर्य और सघन वन because संपदा के लिए प्रसिद्ध है किंतु दु:ख कि बात है कि तिलाड़ी अपनी दूसरी वजह से हिन्दुस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों विशेषकर गढ़वाल और कुमाऊं के साप्ताहिक पत्रों में सुर्खियों में आया जिसके 30 मई 1930 के रक्त रंजित इतिहास से हम उत्तराखंड के अधिकांश बाशिंदे शायद आज भी अनभिज्ञ हैं.आजादीउत्तराखंड के तिलाड़ी कांड के उस काले धब्बेनुमा इतिहास की मेरे सामान्य ज्ञान में अभिवृद्धि नहीं हो पाती यदि मैंने बृज भूषण गैरोला की “रियासती षड्यंत्रों का इतिहास” और स्व. विद्यासागर नौटियाल का “यमुना के बागी बेटे” न पढ़ा होता सोचा तिलाड़ी because कांड का इतिहास उससे जुड़े लोगों की शहादत, उनके अपन...
उत्तरकाशी जिले में ऑक्सीजन की कमी नहीं— जिलाधिकारी

उत्तरकाशी जिले में ऑक्सीजन की कमी नहीं— जिलाधिकारी

उत्तरकाशी
कोरोना की तीसरी लहर आने की भी आशंका को देखते हुए पुख्ता इंतजाम, सीएचसी चिन्यालीसौड़ में 06 ऑक्सीजन बैड हैं, अगले तीन सप्ताह के भीतर 40-50 बैड बढ़ाने because का कार्य गतिमान है. उधर नौगाँव/बड़कोट में 24 ऑक्सीजन बैड व पुरोला में 12 ऑक्सीजन बैड हैंनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीकोरोना संक्रमण की बढ़ती आशंकाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता तैयारी की है. जिला अस्पताल के अलावा जनपद की सीएचसी चिन्यालीसौड़, पुरोला,नौगाँव व कोविड अस्पताल so गढ़वाल मंडल विकास निगम उत्तरकाशी में आक्सीजन बैंड की क्षमता को बढ़ाया गया है.मूलांक जिला अस्पताल में 95 ऑक्सीजन बैड है तो वहीं कोविड अस्पताल जीएमवीएन में 30 ऑक्सीजन बैड है. सीएचसी चिन्यालीसौड़ में 06 ऑक्सीजन बैड है अगले तीन सप्ताह के भीतर 40-50 बैड बढ़ाने का कार्य गतिमान है. उधर नौगाँव/बड़कोट में 24 ऑक्सीजन बैड व पुरोला में 12 ऑक्सीजन बैड वर्तमान में है....
जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप किया लांच

जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप किया लांच

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी उत्तरकाशी में कोविड-19 संक्रमण के प्रभावी नियंत्रण को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा अच्छी पहल की गई है. जनपद को कोरोना से मुक्त करने हेतु आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए एप जारी किया है. रविवार को जिलाधिकारी मयूर दीक्षित व पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने कोविड फ्री उत्तरकाशी ऐप जारी किया. इस मोबाइल ऐप के माध्यम से शहरी व सुदरवर्ती क्षेत्रों में कोविड के लक्षण दिखने पर कोई भी नागरिक अपनी सूचना एप के माध्यम से कोविड कंट्रोल रूम को दे सकता है. तथा त्वरित उपचार, मेडिसिन प्राप्त कर सकता है. गांव में बुखार,जुकाम,खांसी से पीड़ित व्यक्ति अपनी सूचना एप के माध्यम से त्वरित दे सकता है जिसका संज्ञान तत्काल लिया जाएगा. जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कहा कि वैश्विक महामारी से निपटने के लिए यह एप बेहद उपयोगी साबित होगा. इस एप के माध्यम से सूचना मिलते ही कम समय में हम मरीज के पास पहुँच ...
उत्तरकाशी में 18 से 44 वर्ष के 897 लोगों लगी पहले दिन पहली डोज

उत्तरकाशी में 18 से 44 वर्ष के 897 लोगों लगी पहले दिन पहली डोज

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीजनपद में कोरोना संक्रमण महामारी से बचाव के लिये 10 मई 2021 से 18 से 45 वर्ष के नागरिकों हेतु कोविड-19 टीकाकरण का शुभारंभ हो चुका है. पहले दिन 1000 के सापेक्ष 897 नागरिकों द्वारा पहली डोज लगवायी गई. डा.  डी.पी. जोशी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा बताया गया कि युवाओं में कोविड वैक्सीनेशन लगाये जाने हेतु काफी जोश दिखाई दे रहा है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा समस्त 18 से 44 वर्ष के नागरिक से अपील की गई कि selfregistration.cowin.gov.in अथवा aarogya setu app के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर अपने नजदीकी टीकाकरण केन्द्र पर कोविड वैक्सीन लगाये जाने हेतु अग्रिम स्लाॅट अवश्य बुक करें l तदोपरान्त् ही उनको वैक्सीन लगायी जायेगी. जनपद मे दिनांक 13.05.2021 से प्रत्येक दिन अपराह्न 12 बजे के उपरान्त् टीकाकरण केन्द्रों के ऑनलाइन स्लॉट बुक किये जा सकेंगे. एक मोबाइल पर अधिकतम 04 ...
मलबे की चपेट में आया  मैक्स वाहन, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में फटे बादल

मलबे की चपेट में आया  मैक्स वाहन, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में फटे बादल

रुद्रप्रयाग
हिमांतर ब्यूरो, रुद्रप्रयाग/उत्तरकाशीउत्तराखंड के रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में बादल फटने की घटनाएं हुई हैं. रुद्रप्रया के नरकोटा और सम्राट होटल के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऊपर पहाड़ी पर बादल फटने से अत्यधिक because मलबा आने की खबर है. बताया जा रहा है कि इस मलबे की चपेट में एक मैक्स वाहन UK07R7318 आ गया था, जिसमें कि वाहन चालक सहित कुल 4 लोग सवार थे, जिनको कि स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया तथा वाहन मलबे के साथ बहकर नदी किनारे चला गया है. स्वरोजगारमौके पर पुलिस उपाधीक्षक गुप्तकाशी, because उपजिलाधिकारी रुद्रप्रयाग, प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रुद्रप्रयाग, कोतवाली रुद्रप्रयाग पुलिस, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, डीडीआरएफ की टीमें मौजूद हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग को खोलने और यातायात सुचारू किए जाने का प्रयास किया जा रहा है, जेसीबी कार्य कर रही है. स्वरोजगार आज शाम राष्ट्र...
संघर्ष और मेहनत की बदौलत दिल्ली में सफल उद्यमी बना पहाड़ का बेटा

संघर्ष और मेहनत की बदौलत दिल्ली में सफल उद्यमी बना पहाड़ का बेटा

अभिनव पहल, उत्तरकाशी
शशि मोहन रवांल्‍टाउत्तराखंड के सीमांत जनपद उत्तरकाशी के नौगांव ब्लॉक के तुनाल्का गांव में जन्में जगमोहन बिजल्वाण दिल्ली में एक सफल उद्यमी हैं. अपने उत्साह, संघर्ष और कारोबारी सोच की बदौलत उन्होंने खुद का सफल बिजनेस खड़ा किया. वह कहते हैं कि एक सफल कारोबार के लिए सबसे अहम है- जीवन में जोखिम लेना और बाधाओं से because बिल्कुल भी नहीं घबराना. अक्सर उद्यमी सोच के युवा भी आराम दायक नौकरी और भविष्य को सुरक्षित करने के चक्कर में अपनी रचनात्मकता और कारोबारी प्रतिभा को मार लेते हैं, जबकि होना इसके उलट चाहिए. युवाओं को अपनी प्रतिभा का उपयोग स्वरोजगार के लिए करना चाहिए, क्योंकि हम जिस वक्त में रह रहे हैं यह उद्यमशीलता का वक्त है. जो युवा जोखिम उठाते हैं, उनको सफलता जरूर मिलती है.स्वरोजगार कंपनी सेक्रेटरी की नौकरी छोड़  खड़ा किया बिजनेस जगमोहन बताते हैं कि वह एक बड़ी कंपनी में कंपनी सेक्रेटरी लीग...
गढ़वाल की प्रमुख बोलियाँ एवं उपबोलियाँ

गढ़वाल की प्रमुख बोलियाँ एवं उपबोलियाँ

साहित्‍य-संस्कृति
संकलनकर्ता : नवीन नौटियालउत्तराखंड तैं मुख्य रूप सै गढ़वाळ और कुमौ द्वी मंडलूं मा बंट्यु च, जौनसार क्षेत्र गढ़वाळ का अधीन होणा बावजूद अपणी अलग पैचाण बणाण मा सफल रै। इले ही यु अबि बि विवादौकु बिसै च कि जौनसारी एक स्वतंत्र भाषा च कि गढ़वळी की एक उपबोली च। [उत्तराखंड को मुख्य रूप से गढ़वाल और कुमाऊँ दो मंडलों में विभाजित किया गया है, जौनसार क्षेत्र गढ़वाल के अधीन होने के बावज़ूद अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने में सफल हुआ है। इसीलिए यह अभी भी विवाद का विषय है कि जौनसारी एक स्वतंत्र भाषा है या गढ़वाली की ही एक उपबोली है।]गढ़वळी का अंतर्गत आंण वळी मुख्य बोली और उपबोली ई छन – [गढ़वाली के अंतर्गत आने वाली प्रमुख बोलियाँ और उपबोलियाँ इस प्रकार हैं –] #जौनसारी - गढ़वाल मंडल के देहरादून जिले के पश्चिमी पर्वतीय क्षेत्र जौनसार-बावर में #जौनपुरी - टिहरी जिले के जौनपुर क्षेत्र में #रवाँल्टी - उत्तरकाशी ज...
‘चलो गांव की ओर’ मुहिम के तहत डॉ. जोशी ने  उत्तरकाशी में लगाया फ्री मेडिकल हैल्थ कैम्प

‘चलो गांव की ओर’ मुहिम के तहत डॉ. जोशी ने  उत्तरकाशी में लगाया फ्री मेडिकल हैल्थ कैम्प

Uncategorized
‘विचार एक नई सोच’ संस्था ने बांटे मास्क और सैनिटाइजर, कोरोना को लेकर किया लोगों को जागरूकहिमांतर ब्‍यूरो, देहरादूनडॉक्‍टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है. कुछ लोग इसको साकार करते हुए दिखाई दे रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं डॉक्‍टर एसडी जोशी. उत्तराखंड के लोकप्रिय फिजीशियन डॉ. एसडी जोशी किसी पहचान के मोहताज नहीं है. अपने व्यवहार और समर्पण से मरीजों में खासा लोकप्रिय डॉ. जोशी की लोकप्रियता का अंदाजा आप but इस बात से लगा सकते हैं कि जिन-जिन जनपदों में इन्होंने अपने रिटायरमेंट से पहले सेवाएं दे वहां से आज भी मरीज इनकी सलाह लेने या इनको दिखाने के लिये देहरादून स्थित इनके शंकर क्लीनिक में आते हैं. डॉ. जोशी भी किसी को निराश नहीं करते हैं. चिकित्सा सेवा के तमाम संगठनों से जुड़े डॉ. एसडी जोशी प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के 2 बाद निर्विरोध अध्यक्ष भी रह चुके हैं.उत्तरकाशी में लगाया फ्री...
प्रदूषित गंगा और हम!

प्रदूषित गंगा और हम!

पर्यावरण
कमलेश चंद्र जोशीकहते हैं प्रकृति हर चीज का संतुलन बनाकर रखती है. लेकिन अधिकतर देखने में यह आया है कि जहां-जहां मनुष्य ने अपना हाथ डाला वहां-वहां असंतुलन या फिर समस्याएं पैदा हुई हैं. इन समस्याओं का सीधा संबंध मनुष्य की आस्था, श्रद्धा, स्वार्थ या तथाकथित प्रेम से रहा है. गंगा को हमने मॉं कहा और गंगा के प्रति हमारे प्रेम ने उसको उस मुहाने पर लाकर छोड़ दिया जहां उसकी सफ़ाई को लेकर हर दिन हो-हल्ला होता है लेकिन न तो हमारे कानों में जूं रेंगती है और न ही सरकार के. गंगा को हमने उसके प्राकृतिक स्वरूप में प्रकृति की गोद में बहने के लिए छोड़ दिया होता और उसके पानी का इस्तेमाल सिर्फ अपनी जरूरतों की पूर्ति के लिए किया होता तो आज गंगा इस दशा में न होती कि उसकी सफाई के लिए प्रोजेक्ट चलाने पड़ते. ये सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि गंगा को हमने अपनी अंधी आस्था और स्वार्थसिद्धी का विषय बनाकर उसका दोहन करना शु...
उत्‍तराखंड में कीवी की बागवानी…

उत्‍तराखंड में कीवी की बागवानी…

खेती-बाड़ी
डॉ. राजेन्द्र कुकसालकीवी फल (चायनीज गूजबेरी) का उत्पति स्थान चीन है, पिछले कुछ दशकों से ये फल विश्वभर में अत्यन्त लोकप्रिय हो गया है. न्यूजीलैण्ड इस फल के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इस देश ने कीवी फल को व्यवसायिक रूप दिया इसका उत्पादन व निर्यात न्यूजीलैंड में बहुत अधिक है. कीवी फल भारत में 1960 में सर्वप्रथम बंगलौर में लगाया गया था लेकिन बंगलौर की जलवायु में प्रर्याप्त शीतकाल (चिलिंग) न मिल पाने के कारण सफलता नहीं मिली. वर्ष 1963 में राष्ट्रीय पादप अनुवांशिक संसाधन ब्यूरो, क्षेत्रीय संस्थान के शिमला स्थित केन्द्र फागली में कीवी की सात प्रजातियों के पौधे आयातित कर लगाये गये जहां पर कीवी के इन पौधों से सफल उत्पादन प्राप्त किया गया. उत्तराखंड में वर्ष 1984-85 में भारत इटली फल विकास परियोजना के तहत राजकीय उद्यान मगरा टेहरी गढ़वाल में इटली के वैज्ञानिकों की देख.रेख में इटली से आयतित कीवी क...