March 5, 2021
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    Krishna Dabral says:

    बंधुवर,
    14 फरवरी 2021 को हिमांतर के लोकार्पण के अवसर पर मैं हिमांतर से परिचित हुआ।
    हिमांतर के प्रकाशन में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी महानुभावों को बहुत-बहुत बधाई और भविष्य के लिए सुभकामनाएं ।

    हिमांतर के दोनों अंक पढ़ने के पश्चात मुझे अत्यंत हर्ष की अनुभूति हुई। लेख और कविताओं में उत्तराखंड की बोली-भाषा के शब्दों का समिश्रण हृदय को छू गया। मुझे आशा है कि पाठकों की उम्मीदों पर यह पत्रिका अवश्य ही खरी उतरेगी और भविष्य में यह एक सफल पत्रिका के रूप में जानी जायेगी।

    एक ओर, उत्तराखंड की बोली-भाषा और जनता के सरोकारों को हिमांतर में स्थान मिल रहा है, तो दूसरी ओर, एक हिन्दी पत्रिका होने के नाते लुप्त होती हिन्दी भाषा की सेवा भी आपके द्वारा की जा रही है।
    इसके लिये आप सब धन्यवाद के पात्र हैं।

    मेरा एक छोटा सा सुझाव भी है कि हिमांतर में प्रकाशित किसी भी गद्य या पद्य में वाक्य के पूरे होने पर FULL STOP (.) के स्थान पर पूर्ण विराम (। ) का प्रयोग करना ज्यादा उपयुक्त होगा। यदि संपादक मण्डल को मेरा सुझाव उचित लगे तो इस पर अवश्य विचार कीजिएगा ।

    बहुत-बहुत धन्यवाद।

    हिमांतर के अगले अंक की प्रतीक्षा में ….

    कृष्णा डबराल

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