हिमालय के लैण्डस्केप का आईना है बण्डीधुर्रा ट्रेक

Bandi dhura Trek

 

jp Maithani

जे. पी. मैठाणी

फोटो- अजय भण्डारी, सिद्धार्थ नेगी एवं अमन नेगी

अरे भाई साब जयदीप से कह देना जरा एक टैंट चाहिए हमारी टीम फिर से बण्डीधुर्रा ट्रेक पर जा रही है। मुझे याद है अजय भण्डारी की यह टीम मार्च 2020-21 में भी इस ट्रेक पर गये थे। उधर मैंने जयदीप से टैंट की बात की और इधर हमारे गाँव के युवाओं की टीम नौरख के पदानखोला (देश की आजादी से पहले हर गाँव में एक मुखिया होता था जिसे प्रधान या गढ़वाली  में पदान कहते थे) यानी पीपलकोटी नौरख गाँव के सबसे ऊपर वाले घर के आंगन में तैयार हैं बण्डीधुर्रा ट्रेक पर जाने के लिए।

पीपलकोटी (अब नगर पंचायत पीपलकोटी) से उत्तर पश्चिम में अलकनन्दा नदी बहती है। ठीक दक्षिण में किरूली-पांचुला बुग्याल बांज, बुरांस और रिंगाल के घने जंगलों के बीच स्थित है। और उत्तर-पूर्व दिशा में बण्डीधुर्रा फैला हुआ है जो आगे लॉर्ड कर्जन पास के साथ-साथ पुराने रूपकुण्ड ट्रेक के अलावा औली-गोरसों ट्रेक से मिल जाता है। यही नहीं औली-गोरसों ट्रेक से पहले शिलाखर्क मोल्टा, गणाई, पाताल गंगा और गरूड़ गंगा का ट्रेक भी जुड़ता है।

हालांकि पीपलकोटी को बद्रीनाथ एवं हेमकुण्ड का प्रमुख पड़ाव माना जाता है लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि पीपलकोटी के आसपास कई शानदार रोचक कम जाने जाने वाले ट्रैकिंग रूट्स हैं। इन्हीं में से एक बेहद रोमांचक थोड़ा कठिन लेकिन शानदार ट्रैकिंग रूट है पीपलकोटी बण्डीधुर्रा लॉर्ड कर्जन पास ट्रेक। पीपलकोटी में बायोटूरिज्म पार्क से नौरख, सल्ला-सोड़ियाणी तक ट्रैकिंग रूट सामान्य है और अधिकतर नौरख, सल्ला और सोडियाणी गाँव के बीच से होकर गुजरता है। सल्ला-सोड़ियाणी तक बीच में पानी के जल स्रोत हैं लेकिन सोड़ियाणी से घुड़धार और बण्डीधुर्रा तक बीच में पानी के स्रोत नहीं हैं. ये खड़ी चढ़ाई बेहद थकाने वाली दुर्गम लेकिन रोमांचक ट्रैकिंग रूट से होकर गुजरती है। जैसे ही आप घुड़धार की ओर बढ़ने लगते हैं बण्ड क्षेत्र का पूरा एरिया बर्ड आई व्यू में दिखता है। पीपलकोटी मुख्य बाजार से 8-9 किमी पहले बिरही, कौड़िया, बटुला, मायापुर, श्रीकोट, लुवां, दिगोली, मेहर गाँव, चातोली, किरूली, कम्यार, गडोरा, अमरपुर, अगथला, गढ़ी, सल्ला, रैतोली, किसान कूड़ा, नौरख, पीपलकोटी, तुनली, मठ, झड़ेता बजनी, कांडा, कुणखेत, सुरेण्डा, गुनियाला, बेमरू, लुदाउं और स्यूंण गाँवों के क्षेत्र को बण्ड क्षेत्र के नाम से जाना जा सकता है। घुड़धार से नीचे बण्ड क्षेत्र की विस्तृत घाटी अलकनंदा के साथ दिखाई देती है। नदी के उस पार रामचरण जिसको रमछाणा का डांडा कहते हैं और जो हाट गाँव के ऊपर स्थित है उस सारे पहाड़ पर पीपलकोटी-विष्णुगाड़ जल-विद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों के घावों से भरा है मानो पूरे पहाड़ पर विकास के धब्बे लगे हों. घुड़धार की ऊँचाई समुद्रतल से लगभग 3800 मीटर होगी।

Bandi dhura Trek

पीपलकोटी मुख्य बाजार से लगभग 3 किमी0 के ठीक ठाक और सरल ट्रेक के बाद घुड़धार के लिए दुर्गम और थकाने वाली 5 किमी0 की कठिन चढ़ाई शुरू होती है। रास्ता बेहद थकाने वाला है और ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ तेज हवा भी चलने लगती है। जो ट्रेकर्स के लिए काफी चुनौती पैदा कर देती है। लेकिन दूसरी तरफ मैं सोचता हूँ घुड़धार के ठीक नीचे प्रतिदिन सल्ला, रैतोली, अगथला और कभी-कभी गडोरा की महिलायें आज भी घास लेने जाती हैं और वापसी में पीठ पर 40 से 50 किलो घास-लकड़ी लादकर लाती हैं। किरूली के रिंगाल हस्तशिल्पी देव रिंगाल लेने के लिए बण्डीधुर्रा के नीचे भतना, शिलाखर्क तक जाते हैं। उनके लिए बण्डीधुर्रा और उसके आसपास आना-जाना तो रोज की दिनचर्या है इससे पहाड़ में महिलाओं पर कार्यबोझ और रिंगाल हस्तशिल्पियों की आजीविका कमाने की कठिनाई का अनुमान लगाया जा सकता है।

हाल ही के मार्च महीने में नौरख पीपलकोटी से अजय भण्डारी के नेतृत्व में सिद्धार्थ नेगी, अनीस नेगी और कृष्णा नेगी प्रकृति प्रेमी ट्रेकर्स का एक ग्रुप बण्डीधुर्रा ट्रेक पर गये थे। वैसे तो यह ट्रेक 5 दिन का है लेकिन सभी युवा स्थानीय थे और पहाड़ के परिवेश से परिचित भी। इन्होंने 2 दिन में ही पूरा ट्रेक कर डाला। बण्डीधुर्रा से 4-5 किमी0 नीचे बुग्याल के बेस पर भतना खर्क है। यह टैन्ट लगाने के लिए सुरक्षित स्थान है साथ ही पानी का स्रोत भी है। मार्च 2026 के तीसरे हफ्ते तक भी बण्डीधुर्रा बर्फ से ढका हुआ था। बण्डीधुर्रा से उत्तर और पूर्व में ऊंची-ऊंची हिमाच्छादित बर्फीली चोटियां जैसे- नंदा देवी (7814 मी0), नंदा घुंघटी (6309 मी0), चैखम्बा (7138 मी0), कामेट (7756 मी.), माणा पर्वत (7273 मी0), द्रोणागिरी (6489 मी0), बेथरतोली (6352 मी0), नीलकंठ (6596 मी0) हाथी (6727 मी0), घोड़ी पर्वत (6790 मी0) सहित कई अनाम चोटियां इस ट्रेक से दिखाई देती हैं। ऊपर नीला आसमान और सामने दिखती पर्वत श्रृंखलायें मानो आपका आह्वाहन कर रही हों।

ट्रेक पर गये युवा ट्रेकर सिद्धार्थ नेगी रोमांच से चिल्लाते बताते हैं- क्या जबर्दस्त 180 डिग्री का हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं का विस्तारित रिज व्यू है। यहाँ से गंगोत्री रेंज भी दिखाई दे रही है। मुझे तो यह स्थान स्टार गेजिंग के लिए बेहद अनुकूल लगा। बहरहाल इस समय यहाँ पांवों के नीचे अनछुई बर्फ है और बर्फ के नीचे मखमली बुग्याल की सोई हुई सुनहरी घास। यही घास बर्फ पिघलते ही नयी हरी पत्तियों के साथ फैल कर मखमली बुग्याल बनाती है। लेकिन अभी इसका आभास मार्च के इस तीसरे हफ्ते में नहीं हो पा रहा है। हाँ, बर्फ की शीतल बयारों के बीच पीछे नीचे जंगलों में बुरांस खिलकर झड़ गये हैं और कच्चे हरे काफल की याद यकायक पसर गयी।

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बण्डीधुर्रा से दिख रहा यह शानदार प्राकृतिक दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो कहीं और ही आ गये हैं और लगता नहीं है कि यह जगह पीपलकोटी से महज 14 किमी0के ट्रेक के बाद शुरू हो जाती है। यहाँ से लॉर्ड कर्जन पास तक का 12 किमी0 का क्षेत्र गढ़वाल के स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले चोपता को भी मात देता है। इस ट्रेक ंकी यह विशेषता है कि आप अपनी सुविधा, संसाधन और समय के अनुसार ट्रेक की लम्बाई और दिनों की संख्या तय कर सकते हैं।

मैंने वर्ष 2000 और उससे पहले 1998 में जब ये ट्रेक किया था तब पहली बार औली-गोरसों से झींझी बिरही घाटी और दूसरी बार नौरख पीपलकोटी में आयोजित नंदा अष्टमी उत्सव 2002 के समय बड़ा गांव जोशीमठ से बण्डीधुर्रा होते हुए ब्रह्मकमल लेकर गांव के कैलपीर मंदिर पहुंचे थे। इस दल में सबसे अनुभवी गाइड स्व0 श्री अवतार सिंह नेगी जी, सहयात्री श्री प्रबोध सिंह राणा जी, शिशु मंदिर के प्राध्यापक श्री भरत सिंह सजवाण, श्री बलवन्त सिंह कंडेरी जी के साथ हमने ये ट्रेक किया था। तब बरसात के बाद का समय था। पूरा बुग्याल हरी मखमली घास से लकदक था। अजय भंडारी से हुई बातचीत और छायाचित्रों के साथ-साथ छोटे-छोटे वीडियो देखकर इस ट्रेक की पुरानी यादें फिर से तरोताजा हो गयी। नंदा अष्टमी के दौरान के ट्रेक में हम इतना थक गये थे कि मैं अपने साथ मैगी बनाने के लिए ले जाई गयी लोहे की कढ़ाही को वहीं ट्रेक के रास्ते पर छोड़ कर आ गया था।

बण्डीधुर्रा में मखमली बुग्यालों के निकट जैसे ही आप अलस्सुबह अपने टैन्ट के दरवाजे खोलते हैं तो सामने हिमालय की चोटियों पर सूरज की किरणें सुनहरा प्रकाश फैलाने लगती हैं। ठण्डी बर्फीली हवायें बदन में झुरझुरी पैदा करती हैं। बुग्यालों को चढ़ते हुए और वापसी में हालांकि आजकल बांज, बुरांस, मोरू, खर्सु, अयांर, भोजपत्र, कैल, थुनेर के सदाबहार वन क्षेत्र आपकी थकान को मिटा देते हैं। और बर्फीले पानी की हाड़ जमा देने वाली ठंड आपको जीवन का अलग ही अनुभव कराती है। आप थोड़ा साहसी हैं तो लगभग 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बण्डीधुर्रा से 7 किमी0 आगे लॉर्ड कर्जन पास की तरफ जा सकते हैं।

गैलगढ़ टॉप (3690 मी0) लॉर्ड कर्जन के पास था लेकिन आजकल वहाँ बहुत बर्फ होने की वजह से आगे जाना बेहद रिस्की हो सकता था। बिना ट्रैकिंग उपस्करों और अनुभवी गाइड के कहीं भी हिमालय में स्नो-ट्रेक करने से बचना चाहिए। और इस टीम ने भी यही निर्णय लिया।

इस बार की युवाओं की इस टीम जिसमें- अजय भण्डारी, सिद्धार्थ नेगी, अनीस नेगी, अमन नेगी और कृष्णा नेगी शामिल थे, इन साथियों ने यह पूरा ट्रेक मार्च के तृतीय सप्ताह में तीन दिन में सम्पन्न कर लिया। अजय बताते हैं- नये उगे लेंगुड़े (हिमालय में उगने वाला फर्न) की सब्जी का भी आनन्द लिया। चंद्रा/ हिमालयन पियोनी -पियोनिया इमोडी Paeonia emodi इसकी कोमल पत्तियों से हरी सब्जी बनाते हैं) की कोंपले अभी जमीन से फूट रही हैं। थुनेर, कैल, देवदार, देव रिंगाल, बुरांस और कुछ-कुछ भोज पत्र आदि के पेड़ अभी भी उन पर जमी बर्फ की वजह से सोये हुए से लग रहे हैं।

Bandi dhura Trek

इस ट्रैकिंग रूट पर मध्य हिमालय की कई प्रकार की वनस्पतियां, जीव-जंतु – घुरड़, काकड़, थार (नील गाय) और पशु-पक्षी जैसे मोनाल, तीतर, जंगली मुर्गी देखने को मिलते हैं। लेकिन इसके लिए इत्मीनान से कम से कम पांच दिवसीय ट्रेक होना चाहिए। ट्रैकिंग दल के सदस्यों के साथ मोबाइल पर हुई चर्चा के दौरान मैं खुद भी पुनः बण्डीधुर्रा की स्मृतियों में खो गया। वापसी में बण्ड क्षेत्र के बीच से राष्ट्रीय राजमार्ग के समानान्तर बहती अलकनन्दा शांत रूप से पहाड़ों से विदा हो रही है वैसे जैसे बण्डीधुर्रा की साफ क्रिस्टल क्लियर बर्फ को हम विदा कह रहे हैं।

क्विक फैक्ट्स

  1. कुल दूरी – 20 से 24 किमी0
  2. अधिकतम ऊँचाई- 3800 मीटर (लगभग 12500 फीट)
  3. शुरूआती बिंदु – नौरख पीपलकोटी गाँव
  4. समापन बिंदु- लॉर्ड कर्जन पास का बेस कैम्प- बण्डीधुर्रा
  5. कठिनाई स्तर- मध्यम कठिनाई
  6. अवधि- कम से कम 5 दिन
  7. सबसे अच्छा समय- विंटर ट्रेक 15 मार्च से 15 अप्रैल

मानसून ट्रेक- 20 जुलाई से 20 सितम्बर

उपकरण- जो इस ट्रेक के लिए आवश्यक हैं। टैन्ट, रूकसैक, स्लीपिंग बैग, विंडचीटर, जूते, टोपी, चश्मा, टॉर्च, फस्र्ट एड किट, पानी के लिए पर्याप्त बर्तन।

(लेखक पीपलकोटी के आसपास के अनजाने ट्रैकिंग रूट्स को विकसित और प्रचारित-प्रसारित करने हेतु बायोटूरिज़्म पार्क की स्थापना कर पिछले दो दशकों से प्रयासरत् हैं)

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