खलाड़ी में जागमाता महाअनुष्ठान संपन्न: पांच दिवसीय पूजा में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंज उठी रवांई घाटी

jagmata Anusthan

 

  • नीरज उत्तराखंडी, पुरोला

प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था का अद्भुत संगम एक बार फिर रवांई घाटी में देखने को मिला। खलाड़ी गांव में आयोजित जागमाता का पांच दिवसीय विशेष पूजा एवं महाअनुष्ठान सोमवार को पूर्ण विधि-विधान, गहरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालु विभिन्न क्षेत्रों से यहां पहुंचे और माता के जयकारों से पूरी घाटी भक्तिमय माहौल में डूबी रही।

समुद्र तल से लगभग 1772 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलाड़ी गांव का यह प्राचीन शक्तिपीठ आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल 15वीं शताब्दी से भी पूर्व का है। शक्तिपीठ परिसर के आसपास नेपाल और विक्टोरिया काल के प्राचीन सिक्कों के रोपित होने की मान्यता इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है।

महाअनुष्ठान की विशेषता इसकी सांस्कृतिक और पारंपरिक निरंतरता रही। यहां पूजा-अर्चना का संचालन हिमाचल प्रदेश के नेरवा तहसील अंतर्गत किरण पट्टी, ग्राम पंचायत मनेवटी के पांडे ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है। अनुष्ठान में शिकारू नाग महाराज की डोली के साथ चंद्रेश्वर और महेश्वर देवता की उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

हर पांच वर्ष में आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन की शुरुआत 23 अप्रैल से हुई थी। पांच दिनों तक चले अनुष्ठान में जागमाता के साथ ‘जोगड़िया’, ‘आछरी’, ‘मांतरी’ और ‘परियों’ की विशेष पूजा संपन्न कराई गई। इसके साथ ही गांव के प्रवेश द्वारों, घाटों और पारंपरिक स्थलों की पूजा की प्राचीन परंपरा का भी निर्वहन किया गया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शक्तिपीठ से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता। रवांई, जौनपुर, जौनसार और पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में भक्त अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं और माता से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

आयोजन के दौरान विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति एवं ग्रामीणों ने दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष बिहारी लाल शाह, पूर्व विधायक मालचंद तथा प्रसिद्ध लोकगायक अनिल बेसारी सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

लोक मान्यताओं के अनुसार जागमाता चार बहनों के रूप में पूजी जाती हैं, जिनके शक्तिपीठ छजाण, थंगाण, बामसू और खलाड़ी में स्थित हैं। मान्यता है कि ये शक्तियां मूल रूप से सिरमौर क्षेत्र से यहां स्थापित हुई थीं और आज भी लोकविश्वास का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं।

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