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लोक पर्व-त्योहार

लोक पर्व-त्योहार

नवरात्रि: प्रत्येक रूप और प्रत्येक नाम में एक ही चेतना के उत्सर्ग की अनुभूति दुर्गा होना है

सुनीता भट्ट पैन्यूली शक्ति वह शस्त्र है जिससे स्वयं व दूसरों के कल्याण के लिए  समस्त विसंगतियों का समूल नाश किया जा सकता है. यह तय है कि जहां शक्ति का उपार्जन होता है वहीं आत्मविश्वास भी जन्म लेता है और आत्मविश्वास जब अनुशासित व सकारात्मक होता है, सफलता निश्चित ही उसका अनुगमन करती है. […]
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जौनसार-बावर: कीमावणा….

डॉ. लीला चौहान “दस्तूर उल अमल एवं वाजिब उल अर्ज 1883 ई0” दो ऐसे पुराने शासकीय दस्तावेज थे जिनका जौनसार-बावर में भूमि सुधार और रीति-रिवाज़ के लिए प्रयोग किया जाता था. यहां के लोग अपने सेवन के लिए सुर (शराब) भी बना सकते थे यह इन्हीं दस्तावेजों का आधार था.जिसमें (लगभग दो लीटर कच्ची शराब) […]
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कर्मयोगी श्रीकृष्ण: जियो तो ऐसे जियो !

कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  सुख की चाह और दुःख से दूरी बनाए रखना जीवित प्राणी का सहज स्वाभाविक व्यवहार है और पशु मनुष्य सब में दिखाई पड़ता है. यह सूत्र जीवन के सम्भव होने की शर्त की तरह काम करता है. पर इसके आगे की कहानी हम सब खुद रचते […]
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जीवन-जगत में हरियाली का प्रतीक ‘हरेला’

प्रकाश उप्रेती ईजा ने आज हरेला ‘बूत’ (बोना) दिया. जो लोग 10वे दिन हरेला काटते हैं उन्होंने 7 तारीख और हम 9वे दिन हरेला काटते हैं इसलिए ईजा ने आज यानि 8 तारीख को बोया. हरेला का अर्थ हरियाली से है. यह हरियाली जीवन के सभी रूपों में बनी रहे उसी का द्योतक यह लोकपर्व […]
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मौण मेला : आस्था, परम्परा और प्रकृति का जश्न

बचन सिंह नेगी उत्तरकाशी जिले के पांच गांव – नानई, बिंगसारी, खरसाड़ी, रमाल गांव और डोभाल गांव के लोग कई सदियों से बड़ी धूमधाम व खुशी से परम्परागत रीति-रिवाज के साथ मौण मेला मनाते हैं. यह मेला हर वर्ष जेठ के महीने में 20  गते अर्थात 2 या 3 जून को पड़ता है. यह मेला […]
बागेश्‍वर लोक पर्व-त्योहार

स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

स्याल्दे बिखौती मेला : 13-14-15 अप्रैल पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी सांस्कृतिक नगरी द्वाराहाट (Dwarahat) में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला स्याल्दे-बिखौती (Syalde Bikhauti Mela) का ऐतिहासिक मेला पिछले दो वर्षों से कोरोना (Corona Virus) प्रकोप के चलते प्रतीकात्मक रूप से ही मनाया जा रहा था. किन्तु इस वर्ष मेला समिति के निर्णयानुसार मेला विशेष […]
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कुमाऊं में आज भी संरक्षित है ‘उत्तरैंणी’ से ‘भारतराष्ट्र’ की पहचान

उत्तरायणी पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी कुमाऊं उत्तराखण्ड में मकर संक्रान्ति का because पर्व ‘उत्तरैंणी’, ‘उत्तरायणी या ‘घुघुती त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। उत्तराखंड हिमालय का क्षेत्र अनादिकाल से धर्म इतिहास और संस्कृति का मूलस्रोत रहता आया है। ज्योतिष भारत मूलतः सूर्योपासकों का देश होने के because कारण यहां मकर संक्रान्ति या […]
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बैतूल में पांडवों के वंशज’, कांटों की सेज पर लेटकर निभाते हैं अनूठी परंपरा

मध्य प्रदेश के बैतूल के एक गांव में अंधविश्वास की परम्परा के चलते लोग इक्कीसवीं सदी में भी कांटो पर लेट कर परीक्षा देते है. यहां आज भी आस्था के नाम पर एक दर्दनाक खेल खेला जा रहा है. अपने आप को पांडवों का वंशज कहने वाले रज्जड़ समाज के लोग अपनी मन्नत पूरी कराने […]
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छठ: भारतराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा लोकपर्व

छठ पूजा पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी चार दिनों तक आयोजित होने वाले छठ पूजा के पर्व की 8 नवंबर को शुरुआत हो चुकी है,जिसका समापन 11 नवंबर को प्रातःकालीन सूर्य अर्घ्य के साथ होगा. सूर्य देवता और षष्ठी देवी को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के […]
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सदियों पुरानी परम्परा है दीपावली उत्सव मनाने की 

दीपावली पर विशेष डॉ. विभा खरे जी-9, सूर्यपुरम्, नन्दनपुरा, झाँसी-284003 दीपावली का उत्सव कब से मनाया जाता है? इस प्रश्न का कोई निश्चित उत्तर पौराणिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में नहीं मिलता हैं, लेकिन अनादि काल से भारत में कार्तिक because मास की अमावस्या के दिन दीपावली के उत्सव को मनाने की परम्परा हैं. कई पुरा-कथाएँ, […]