October 30, 2020
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आधी आबादी

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ये तो पापा की परी है…

विश्व बेटी दिवस पर विशेष डॉ. दीपा चौहान राणा यूँ  तो बेटी हर किसी कीbecauseलाडली होती है, पर क्या आप जानते हैं कि एक बेटी अपने पिता की जान होती है. आज बेटियों के लिए बेहद खास दिन है, क्योंकि आज डॉटर्स-डे यानी विश्‍व बेटी दिवस है. दुनिया भर में यह दिन अलग-अलग महीनों में […]
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लड़ना होगा और आगे बढ़ना होगा

भावना मसीवाल एक ओर देश कोरोना महामारी से जुझ रहा है, दूसरी ओर अपराध की बढ़ती जघन्य से जघन्य घटनाएँ आपको भीतर तक उद्वेलित कर देती हैं. हम अपने आसपास कितने सुरक्षित हैं इसका अंदाजा लूटपाट, हत्या और यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं से लगाया जा सकता है. जिसमें बुजुर्ग से लेकर बच्चें तक असुरक्षित […]
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पर्यावरण आंदोलन और पहाड़ी महिलाएं

भावना मसीवाल पहाड़ का जीवन देखने में हमें जितना शांत और खूबसूरत लगता है, अपने भीतर वह बहुत सी हलचलों और दबावों को समेटे है. यह दबाव एक ओर प्रकृति का प्रकोप है जो भूकंप और बाढ़ के रूप में देखा जाता है तो दूसरी ओर पहाड़ पर बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप है जो केदारनाथ, बद्रीनाथ और रूद्रप्रयाग […]
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स्‍त्री श्रम का बढ़ता अवमूल्‍यन

भावना मासीवाल  कोविड-19 महामारी का सबसे ज्यादा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ा है. इसके कारण वैश्विक स्तर पर देश की सीमाओं से लेकर व्यापार तक को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया, जिसका सीधा प्रभाव देश की आर्थिक स्थिति पर देखने को मिल रहा है. अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. […]
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महिलायें, पीरियड्स और क्वारंटीन

डॉ. दीपशिखा जोशी वैसे तो लगभग हमारे देश के हर हिस्से में महिलाओं को माहवारी के दिनों में अछूत माना जाता है, मगर पहाड़ी इलाक़ों में ख़ासकर बात करूँगी उत्तराखण्ड के बहुत जगहों पर इस प्रथा का बहुत सख़्ती से पालन होता है. बहुत से लोग जो अब शहरों में रहते हैं या जिनका कभी […]
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माँ तुम झूठी हो!

डॉक्टर दीपशिखा जोशी माँ तुम ने विदाई के समय गले लगा बोला था, जा बिटिया वहाँ तुझे मिलेगी दूसरी माँ. मुझ में और उन में कभी अंतर ना करना. जा बिट्टो तुझे कभी ना खलेगी मेरी कमी, ना आएगी याद! कुछ समय लगेगा ज़रूर, मगर तू निभा लेगी मुझे पता है. मैं भी एक दिन […]
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औरत कोई देवी नहीं

डॉ. दीपशिखा नहीं वो कोई देवी नहीं,  इंसान है बस. उसको केवल कन्या-पूजन में मत पूजो. ताकि वो ज़िंदगी भर देवत्व के भ्रम-बोझ में बंध-दब अपनी ज़िंदगी खुल के ना जी पाए. जैसे आप कोई देवता नहीं इंसान हैं. जैसे आप को होता है दर्द. आप से होती हैं ग़लतियां. वैसी ही हैं वो भी. […]
आधी आबादी संस्मरण साहित्यिक हलचल

हर दिल अजीज थी वह

अनीता मैठाणी  ये उन दिनों की बात है जब हम बाॅम्बे में नेवी नगर, कोलाबा में रहते थे। तब मुम्बई को बाॅम्बे या बम्बई कहा जाता था। श्यामली के आने की आहट उसके पांव में पड़े बड़े-बड़े घुंघरूओं वाले पाजेब से पिछली बिल्डिंग से ही सुनाई दे जाती थी। उसका आना आमने-सामने की बिल्डिंग में […]