August 7, 2020
Home Articles posted by Himantar
उत्तराखंड

संकट में सीमांत

सुमन जोशी बरसात का मौसम है. खिड़कियों के शीशों पर पड़ी बूंदों को देखते हुए अदरक-इलायची वाली चाय की चुस्कियों के बीच अपनी पसंदीदा किताब पढ़ने के दिन. और उसी के साथ म्यूजिक स्टोर से, “रिम-झिम गिरे सावन,  सुलग-सुलग जाए मन,  भीगे आज इस मौसम में,  लगी कैसी ये अगन”. गीत सुनते-सुनते कहीं
समसामयिक

राजनीति में अदला बदली

भाग—2 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र  राजनीति में परिवर्तन आंतरिक अंतर्विरोध के कारण भी होता है. यह अंतर्विरोध पार्टी विशेष कम होकर व्यक्तिगत रूप में ज्यादा दिखता है, जब एक प्रभावशाली नेता अपनी ही पार्टी से संबंध विच्छेद कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है. उस वक्त नेता के समर्थक जितने भी सांसद/विधायक होते हैं, […]
संस्मरण

अब कौन ‘नटार’ से डरता है…

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—40 प्रकाश उप्रेती पहाड़ में खेती हो न हो लेकिन “नटार” हर खेत में होता था. “नटार” मतलब खेत से चिड़ियों को भगाने के लिए बनाया जाने वाला ढाँचा सा. तब खेतों में जानवरों से ज्यादा चिड़ियाँ आती थीं. एक -दो नहीं बल्कि पूरा दल ही आता था. झुंगर, […]
आधी आबादी

महिलायें, पीरियड्स और क्वारंटीन

डॉ. दीपशिखा जोशी वैसे तो लगभग हमारे देश के हर हिस्से में महिलाओं को माहवारी के दिनों में अछूत माना जाता है, मगर पहाड़ी इलाक़ों में ख़ासकर बात करूँगी उत्तराखण्ड के बहुत जगहों पर इस प्रथा का बहुत सख़्ती से पालन होता है. बहुत से लोग जो अब शहरों में रहते हैं या जिनका कभी […]
किस्से/कहानियां

मालपा की ओर

कहानी एम. जोशी हिमानी मालपा मेरा गरीब मालपा रातों-रात पूरे देश में, शायद विदेशों में भी प्रसिद्व हो गया है. मैं बूढ़ा, बीमार बेबस हूँ. बाईपास सर्जरी कराकर लौटा हूँ. बिस्तर पर पड़े-पड़े सिवाय आहत होने और क्रंदन करने के मैं मालपा के लिए कर भी क्या सकता हूँ? अन्दर कमरे से पत्नी गंगा और […]
लोक पर्व/त्योहार

स्मृति मात्र में शेष रह गए हैं ‘सी रौता’ और थौलधार जातर

दिनेश रावत सी रौता बाई! सी रौता!! कितना उल्लास, उत्सुकता और कौतुहल होता था. गाँव, क्षेत्र के सभी लोग ख़ासकर युवाजन जब हाथों में टिमरू की लाठियाँ लिए ढोल—दमाऊ की थाप पर नाचते, गाते, थिरकते, हो—हल्ला करते हुए अपार जोश—खरोश के साथ गाँव से थौलधार के लिए निकलते थे. कोटी से निकला यह जोशीला जत्था […]
स्मृति शेष

उत्तराखंड की संस्कृति पर गुमान था कवि गुमानी को

डॉ. मोहन चंद तिवारी अगस्त का महीना आजादी,देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावनाओं से जुड़ा एक खास महीना है. इसी महीने का 4 अगस्त का दिन मेरे लिए इसलिए भी खास दिन है क्योंकि इस दिन 24 वर्ष पूर्व 4 अगस्त,1996 को गुमानी पंत के योगदान पर राष्ट्रीय समाचार पत्र ‘हिदुस्तान’ के रविवासरीय परिशिष्ट में ‘अपनी […]
सोशल मीडिया

आभासी दुनिया के बेगाने परिन्दे

भुवन चन्द्र पन्त जमीनी हकीकत से दूर आज हम एक ऐसे काल खण्ड में प्रवेश कर चुके हैं, जहां हमारे चारों तरफ सब कुछ है भी, और नहीं भी. बस यों समझ लीजिए कि आप दर्पण के आगे खड़े हैं, दर्पण में आपकी स्पष्ट छवि दिख रही है, आपको अपना आभास भी हो रहा है, […]