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पिथौरागढ़

किताबें दुनिया की तरफ खुलने वाली खिड़कियां हैं

विनोद उप्रेती  ‘यायावर’ यह किताब 1967 का संस्करण है, जो 1969 में रीप्रिंट होकर आया होगा. जब यह किताब छप रही थी तब दुनिया भर के  Peace Corps volunteers नेपाल में जीवन की बेहतरी के लिए अपनी समझ के हिसाब से कुछ काम कर रहे थे. काम जो भी कर रहे होंगे, तस्वीरें बहुत उम्दा […]
देहरादून

आजीविका वर्धन हेतु बांस एवं रिंगाल संसाधनों पर आधारित  विचार मंथन सत्र आयोजित

उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) (Uttarakhand Science Education and Research Centre(USERC)) द्वारा राष्ट्रीय हिमालयन अध्ययन मिशन परियोजना के अन्तर्गत राज्य में आजीविका वर्धन हेतु बांस एवं रिंगाल संसाधनों पर आधारित काश्तकारों के सामाजिक आर्थिक उन्नयन हेतु उनके द्वारा बनाये जाने वाले पारम्परिक उत्पादों के मूल्यवर्धन, क्षमता विकास एवं विपणन हेतु
साहित्‍य-संस्कृति

बुद्ध का स्मरण संतप्त जीवन की औषधि है

बद्ध पूर्णिमा पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  हम सभी अच्छी तरह जीना चाहते हैं परन्तु दिन प्रतिदिन की उपलब्धियों का हिसाब लगाते हुए संतुष्टि नहीं होती है. दिन बीतने पर खोने पाने के बारे में सोचते हुए और जीवन में अपनी भागीदारी पर गौर करते हुए आश्वस्ति कम और आक्रोश, because घृणा, असहायता, कुंठा और […]
टिहरी गढ़वाल

उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य के लिए  टिहरी की भिलंगना घाटी के “सूर्य प्रकाश सेमवाल” को मिले मौका

बिजेंद्र सिंह रावत “दगड़या” उत्तराखंड के “उत्तरायणी” पर्व को विगत 20 वर्षो से दिल्ली एनसीआर और राष्ट्र स्तर पर पहचान दिलाने वाले कर्मयोगी, यशस्वी , समाज सेवी मानव भाई “सूर्य प्रकाश सेमवाल” को इस बार भाजपा की और से टिहरी राज्य सभा सांसद के लिए आगे आना चाहिए. समाज सेवा भावना , अपनी जड़ों से […]
साहित्‍य-संस्कृति

जीवन का प्रयोजन है आत्म विस्तार  

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  गोस्वामी तुलसीदास रामचरितमानस के किष्किंधा काण्ड में प्रश्न करते हैं कि शरीर धारण करने का क्या परिणाम है और कहते हैं  इसका प्रयोजन राम भक्ति है : धरे कर यह फलु भाई, because भजिय राम सब काम बिहाई . यहाँ  शरीर की उपादेयता या देह धारण करने की फलश्रुति सब कुछ छोड़ […]
ट्रैवलॉग

चोखी ढाणी : राजस्थान की समृद्ध विरासत और रंगीली संस्कृति की झलक

सुनीता भट्ट पैन्यूली कुछ यात्रायें किसी मनोरंजन व मन के परिवर्तन के लिए नहीं वरन अपनी  संतति के प्रति ज़िम्मेदारियों के वहन हेतु भी होती हैं.इस प्रकार की परिसीमित, निर्धारित व व्यवस्थित  यात्राओं में घुमक्कड़ी की कोई रूपरेखा या because बुनावट नहीं होती है किंतु फिर भी आनन-फानन में समय की तंगी और बोझिलता के […]
साहित्‍य-संस्कृति

अल्मोड़ा अंग्रेज आयो… टैक्सी में

विनोद उप्रेती ‘वागाबोंड’ अल्मोड़ा में अंग्रेज टैक्सी से आया या घोड़े पर, यह तो काल-यात्रा से ही पता लगेगा लेकिन उसका यहां तक पहुंचना, औपनिवेशिक विस्तार के बहुत बड़े आख्यान का छोटा सा हिस्सा भर है. जब अंग्रेज अल्मोड़ा आ रहा था, तब वह because सातों महाद्वीपों पर कहीं न कहीं और भी जा रहा […]
पुस्तक-समीक्षा

शास्त्र और सुघड़ के बरक्स लोक और अनगढ़

प्रकाश उप्रेती ‘उम्मीद’ और ‘सपना’ दोनों शब्द हर दौर में नए अर्थों के साथ because अपनी उपस्थिति साहित्य में दर्ज कराते रहे हैं. वेणु गोपाल की एक कविता है- “न हो कुछ / सिर्फ एक सपना हो/ तो भी हो सकती है/ शुरुआत/ और/ ये शुरुआत ही तो है कि / यहाँ एक सपना है”. […]
उत्तरकाशी

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रवांई की कई शख्सियतों का सम्मान

युवा सामाजसेवी रूद्रा because एग्रों स्वायत्त सहकारिता के संस्थापक नरेश नौटियाल की पहल लाई रंग  नीरज उत्तराखंडी, देवसारी नौगांव रूद्रा एग्रो स्वायत्त सहकारिता और सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा)  ने  नौगांव ब्लाक के देवसारी गांव में नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया. ज्योतिष समारोह में होटल मैनेजमेंट सर्टीफिकेट वितरण, रवांई के पारम्परिक […]
पुस्तक-समीक्षा

रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं!- रवांई के लोक की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार…

ग्राउंड जीरो से संजय चौहान! शिक्षक, लेखक, कवि, लोकसंस्कृतिकर्मी और लोक से because जुड़े दिनेश रावत नई-नई पुस्तक रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं को पढने का सौभाग्य मिला. पांच अध्याय में लिखी गयी इस पुस्तक में आपको रवाई घाटी की अनमोल सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का मौका मिलेगा साथ ही यहाँ की अनूठी […]