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वह सिंधुघाटी के ‘आद्य शिव’ नहीं, कत्यूरीकालीन ‘वृषानना’ योगिनी है

प्रेस विज्ञप्ति लेख डा. मोहन चंद तिवारी 5 मार्च ,2022 को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र (Doon Library And Research Centre) से जुड़ी एक प्रेसवार्ता के अनुसार उत्तरकाशी (Uttarkashi) के देवल गांव (deval village) से पत्थर की महिष (भैंसा) मुखी एक because चतुर्भुज मानव प्रतिमा खोजने का समाचार सामने
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कुमाऊं की ओखलियों में संरक्षित है वैदिक सभ्यता का इतिहास

डॉ. मोहन चंद तिवारी मेरे लिए दिनांक 28 अक्टूबर,2020 का दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इस दिन रानीखेत-मासी मोटर मार्ग में लगभग 40 कि.मी.की दूरी पर स्थित सुरेग्वेल के निकट ‘मुनिया चौरा’ में पुरातात्त्विक महत्त्व की महापाषाण कालीन तीन ओखलियों के पुनरान्वेषण में मुझे सफलता मिल पाई. सुरेग्वेल से एक किमी दूर ‘मुनिया चौरा’ […]
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सल्ट क्रांति : ग्राम स्वराज का क्रांतिकारी आंदोलन

सल्ट क्रांति दिवस (5 सितंबर) पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी देश की आजादी को लेकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जब भी आंदोलन शुरू हुआ तो उसमें उत्तराखंड के क्रांतिवीरों की अहम भूमिका रही है. समूचे देश में कुली बेगार,आंदोलन हो या गांधी जी का ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन, सीमा से लगे सल्ट क्षेत्र ने इसमें […]
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आखिर क्यों भूल गये हम ‘कालू महर’ को

चन्द्रशेखर तिवारी भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में उत्तराखण्ड के काली कुमाऊं यानि वर्तमान चम्पावत जनपद का अप्रतिम योगदान रहा है. स्थानीय जन इतिहास के आधार पर माना जाता है कि लोहाघाट के निकटवर्ती सुई-बिसुंग इलाके के लोगों की स्वाधीनता संग्राम में बहुत ही सक्रिय भूमिका रही थी. इनमें कालू महर का नाम प्रमुखता से लिया जाता […]
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भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 79वीं वर्षगांठ पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी अगस्त के महीने का भारत की आजादी के आंदोलनों से बहुत पुराना संबंध है. हमें जब आजादी नहीं मिली थी तब आज से 79 वर्ष पूर्व सन् 1942 में इसी महीने में नौ अगस्त को गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के […]
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हैदराबाद निजाम की सेना से कुमाऊँ रेजिमेंट तक, कुमाउँनियों की सैनिक जीवन यात्रा

प्रकाश चन्द्र पुनेठा विश्व के इतिहास का अध्यन करने से ज्ञात होता है कि इतिहास में उस जाति का नाम विशेषतया स्वर्ण अक्षरों से उल्लेखित किया गया है, जिस जाति ने वीरतापूर्ण कार्य किए हैं. विश्व के but इतिहास में अनेक प्रकार की युद्ध की घटनाओं का विस्तृत वर्णन मिलता हैं. इन युद्ध की घटनाओं […]
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हिंदोस्ता की सामुद्रिक विरासत (मैसोपोटामिया टू मुजरिस ) 

मंजू दिल से… भाग-15 मंजू काला सदियों से समंद हिंदुस्तान की जन-आस्थाओं के साथ पूरे परिवेश के साथ जुड़े रहे हैं. समंदर का भारतीय सभ्यता, संस्कृति, धर्म और अर्थ के क्षेत्र में विशेष स्थान रहा है. because रत्नाकर के रूप में सागर भारत भूमि को अनादिकाल से धन-धान्य से समृद्ध करते रहे हैं. सभ्यता के […]
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पहाड़ों में शिकार पर फ़िरंगी राजकुमार: 1876

स्वीटी टिंड्डे हिंदुस्तान के कई हिस्सों के आलीशान राजाओं और उनके दरबारों का मजा लेते हुए राजकुमार 7 फरवरी 1876 में ट्रेन से मुरादाबाद, नैनीताल और कुमाऊं होते हुए नेपाल because तराई के घने जंगलों में बाघ और हाथी का शिकार करते हुए गुजरना था जो डाकुओं, बाग़ियों, so और ख़ूँख़ार जानवरों के लिए जाना […]
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इतिहास के पन्नों से : दिल्ली, दून और नहर की लड़ाई

स्वीटी टिंड्डे  वर्ष था 1841, देहरादून का वो हिस्सा जो यमुना और सीतला नदी के बीच का था वो बंजर था, न खेती और न ही जंगल. कृषि विकास में अंग्रेजों का जमींदारों पर because से विश्वास ख़त्म हो चुका था और सरकार धड़ल्ले से नहर की खुदाई करवा रही थी. देहरादून में ही एक […]
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तिलाड़ी कांड: जब यमुना किनारे निहत्थों पर बरसाई गईं गोलियां

तिलाड़ी कांड 30 मई पर विशेष सुनीता भट्ट पैन्यूली सीमांत जनपद उत्तरकाशी के रवांई घाटी के बड़कोट नगरपालिका के अन्तर्गत यमुना नदी के तट पर बसा हुआ एक स्थान है तिलाड़ी, जो अपने नैसर्गिक सौंदर्य और सघन वन because संपदा के लिए प्रसिद्ध है किंतु दु:ख कि बात है कि तिलाड़ी अपनी दूसरी वजह से […]