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हिमांतर

हिमालयी विविधता पूर्ण समाज और संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता हैं, देश में उत्तर से लेकर पश्चिम तक का हिमालयी समाज अपने-आप में बहुत बड़ी जनसख्यां का निर्धारण करता हैं, साथ ही देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने का जिम्मा जिस समाज को है उसमें प्रमुख रूप से हिमालय में निवास करने वाला ही समाज है जो सदियों से देश की सीमाओं का सजग प्रहरी की भांति कार्य कर रहा हैं। अनेक जातियों, धर्म और परिवेश को अंगीकार किये ये वृहत समाज आज भी अनेक प्रकार की समस्याओं से जूझ रहा है, किन्तु अभी तक कोई स्थाई रीति-नीति इस महत्त्वपूर्ण समाज के हित में देश और प्रदेशों की सरकारों द्वारा नहीं बनाई गयी! इस क्रम में इस हिमालयी समाज की संस्कृति के विभिन्न रूपों से देश और दुनिया अभी तक ठीक से परिचित नहीं हो पाई, हमारा प्रयास इस समाज के विभिन्न पहलुओं से देश और दुनिया को परिचित कराना है।


 

संपादक  :  डॉ. मनमोहन सिंह रावत
प्रवक्ता, जीव विज्ञान
रा.ई. कॉलेज, बड़कोट,  उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
E-mail: [email protected] 

कार्यकारी संपादक  :  डॉ.  प्रकाश उप्रेती
सहायक प्रोफेसर
रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
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फोन: 7042616767

सहायक संपादक : श्रीमती मंजू काला
फूड ब्लागर, स्टोरी टेलर एवं ट्रेकर
देहरादून (उत्तराखंड)

संपादन सहयोग :  ललित फुलारा
चीफ सब एडिटर (वेब)
अमर उजाला, नोएडा
E-mail: [email protected]  

प्रबंध निदेशक :  सीमा रावत
प्रबंधक— यमुना वैली पब्लिक स्कूल, नौगांव
उत्तरकाशी (उत्तराखंड)
E-mail: [email protected] 

संपादकीय सलाहकार

यमुना पुत्र आचार्य सुरेश उनियाल
अध्यक्ष
श्री यमुना गौलोक धाम भक्ति आश्रम
A -116, शिवमंदिर, महिंद्रा इंक्लेव शास्त्री नगर, गाजियाबाद
श्री यमुना गौलोक धाम भक्ति आश्रम, दिनकर विहार विकासनगर, देहरादून (उत्तराखण्ड)
श्री यमुना गौलोक धाम भक्ति आश्रम, पुरोला, उत्तरकाशी
+91 7011782359, 9891804615, 9457363435

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अध्यक्ष, आगाज़ फेडरेशन
लेन नंबर-3, शांति विहार, नियर ऑटिज्म वेलफेयर सोसाइटी
कौलागढ़, देहरादून -248195
E-mail: [email protected]

महाबीर रवांल्टा
वरिष्ठ साहित्यकार
‘संभावना’—महरगांव,
पत्रालय—मोल्टाड़ी, पुरोला (उत्तराखंड) 249185
मो. — 8894215441
E-mail: [email protected] 

डॉ. विजया सती
सेवानिवृत्त प्रोफेसर
हिंदू कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय
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डॉ.  कुसुम जोशी
वरिष्ठ साहित्यकार
वसुंधरा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
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डॉ. गिरिजा किशोर पाठक
सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक
भोपाल
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डॉ. रेखा उप्रेती
एसोसिएट प्रोफेसर,
हिंदी विभाग, इन्द्रप्रस्थ कॉलेज,
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
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निर्मल बंग ग्रुप
नोएडा, उत्तर प्रदेश
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नीलम पांडेय ‘नील’
साहित्यकार एवं समाज सेविका
देहरादून, उत्तराखंड
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हरिद्वार, उत्तराखंड
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देहरादून, उत्तराखंड
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अध्यापक एवं साहित्यकार
बड़कोट, उत्तरकाशी, उत्तराखंड
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                            :  नरेश नौटियाल

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  1. Mahabeer Ranwalta says:

    अच्छा कार्य। प्रशंसनीय। अनुकरणीय। हार्दिक बधाई।

  2. Bhagwati Kundlia says:

    हिमालयी विविधता पूर्ण समाज और संस्कृति को परिचित कराने का आपका प्रयास सराहनीय है।चायनीज बैम्बू के बारे में दी गई जानकारी स्वरोजगार एवं पर्यावरण दोनों के लिए लाभकारी है।
    धन्यवाद।

  3. Jai Prakash Tripathi says:

    माननीय सम्पादक जी,
    हिमातंर को लेकर आपके उद्देश्य पढ़ कर अच्छा लगा,
    आप अपने इस उद्देश्य में सफल हों यहीं शुभकामनाएं है ,आपको बधाई !!
    सादर

  4. डॉ॰पुष्पलता भट्ट ‘पुष्प’ says:

    बहुत ही सराहनीय प्रयास है । पहाड़ की संस्कृति बहुत ही समृद्ध व भव्य संस्कृति है ।मैंने तो पी॰ एच॰डी॰ एवं डी॰ लिट कुमाऊँनी लोक साहित्य पर ही किया है । मेरे पिताजी डॉ. नारायणदत्त पालीवाल ( प्रथम सचिव हिन्दी अकादमी ) जी की हार्दिक इच्छा थी कि मैं कुमाऊँनी लोक साहित्य पर ही काम करूँ।पहाड़ पर तो जितना लिखा जाये उतना कम है ।

  5. Apilchauhan Rawanlta says:

    पढ़ कर बहुत ही सुंदर लगा, आप ने हमारे हिमालय को स्वर्गभूमि पुनः स्थापित करने में तपोभूमि ,देवभूमि उत्तराखंड के पर्वत को देव लोकों के शब्द में व्यख्यान कर आप का धन्यवाद ,
    आप के द्वारा निर्धारित लोगों के विचारों के लिए एक पथगामी सुगमता से वह पथ निर्माण किया ,जिस से मै आप का आभार प्रकट करता हु।

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