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काशी विश्वनाथ परिसर लोकार्पण: जीवंत संस्कृति नगरी काशी

काशी विश्वनाथ परिसर के लोकार्पण (13 दिसंबर) पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  अर्ध चंद्राकार उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर बसी काशी या ‘बनारस’ को सारी दुनिया से न्यारी नगरी कहा गया है. काल के साथ अठखेलियाँ करता यह नगर धर्म, शिक्षा, संगीत, साहित्य, कृषि, because और उद्योग-धंधे यानी संस्कृति और सभ्यता
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जसुली शौकयाणी की मन्याओं का इतिहास

  कुमाऊं में मनिया मंदिर: एक पुनर्विवेचना -4 डॉ. मोहन चंद तिवारी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार ‘मन्याओं’ का सबसे अधिक निर्माण दारमा जोहार क्षेत्र की महान दान वीरांगना जसुली शौकयाणी के द्वारा किया गया. लला (आमा) के नाम से विख्यात जसुली शौकयाणी ने कुमाऊ, गढ़वाल, नेपाल तक मन्याओं because और […]
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फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

कुमाऊं में मनिया मंदिर: एक पुनर्विवेचना -3 डॉ. मोहन चंद तिवारी द्वाराहाट के ‘मनिया मंदिर समूह’ के सन्दर्भ में पिछली दो पोस्टों में विस्तार से चर्चा की गई है.किंतु मन्याओं के बारे में इतिहास और पुरातत्त्व के विद्वानों द्वारा कोई खास जानकारी नहीं दी गई है. because इसी सन्दर्भ में फेसबुक के माध्यम से कुमाऊं […]
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द्वाराहाट, सुरेग्वेल और जालली क्षेत्र की मन्याओं का इतिहास

कुमाऊं में मनिया मंदिर : एक पुनर्विवेचना-2 डॉ. मोहन चंद तिवारी द्वाराहाट के ऐतिहासिक स्थलों से सम्बंधित शोध योजना के अंतर्गत मैंने वर्ष 2017 के 30 मई से 3 जून, की अवधि में सुरेग्वेल  और जालली के मंदिर और वहां स्थित विलुप्त ‘मन्याओं’ का सर्वेक्षण किया, तो इस क्षेत्र के मन्या मंदिरों के बारे में […]
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द्वाराहाट के ‘मन्या’ मंदिर : एक पुनर्विवेचना

डॉ. मोहन चंद तिवारी बीस-पच्चीस वर्ष पूर्व जब मैं अपनी पुस्तक ‘द्रोणगिरि:इतिहास और संस्कृति’ के लिए द्वाराहाट के मंदिर समूहों के सम्बंध में जानकारी जुटा रहा था, तो उस समय मेरे लिए ‘मन्या’ या ‘मनिया’because नामक मंदिर समूह के नामकरण का औचित्य ज्यादा स्पष्ट नहीं हो पाया था. द्वाराहाट के इतिहास के बारे में जानकार […]
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निर्धनों, वंचितों और समाज के शोषितों के न्याय प्रदाता राजा ग्वेल

डॉ. मोहन चंद तिवारी राजा ग्वेल देवता खुशहाल,समतावादी और न्यायपूर्ण, राज्य व्यवस्था के प्रतिमान हैं. राजा ग्वेलदेव ने समाज के रसूखदारों और दबंगों को खबरदार करते हुए कहा मेरे राज्य में कोई भी बलवान निर्बल को और धनवान निर्धन को नहीं सता सकता-  “न दुर्बलं कोऽपि बली मनुष्यो, बलेन बाधेत मदीयराज्ये.” ज्योतिष कुमाऊंनी दुदबोली के […]
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गोरिल के पिता हालराई थे या झालराई?

एक गवेषणात्मक विवेचना डॉ. मोहन चंद तिवारी न्याय देवता गोरिल से सम्बंधित चर्चा के संदर्भ में प्रायः यह जिज्ञासा प्रकट की जाती रही है कि गोरिल के पिता का नाम हालराई था अथवा झालराई? यह जिज्ञासा इसलिए भी स्वाभाविक है कि मैंने प्रो.हरि नारायण दीक्षित जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘श्रीग्वल्लदेवचरितम्’ के संदर्भ में जो समालोचनात्मक चर्चा चलाई है,उसके […]
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पर्यावरण संरक्षिका मां दुनागिरि

डॉ. मोहन चंद तिवारी द्रोणाचल पर बास तिहारा, उत्तराखण्ड तुझको अति प्यारा. देवि पूजि पद कमल तुम्हारे! पर्यावरण दिवस भारत में वैष्णव शक्तिपीठ के नाम से दो शक्तिपीठ हैं एक जम्मू कश्मीर स्थित वैष्णो देवी और दूसरा उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में रानीखेत से 37 किमी की दूरी पर द्वाराहाट स्थित ‘द्रोणगिरि’ because शक्तिपीठ, जिसे […]
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काशी विश्वनाथ के समान उत्तराखंड का तीर्थधाम विभाण्डेश्वर महादेव

डॉ. मोहन चंद तिवारी ‘श्रीग्वल्लदेवचरितम्’ महाकाव्य में विभाण्डेश्वर महादेव का तीर्थ माहात्म्य’ बहुत दुःख के साथ कहना पड़ता है कि आधुनिक संस्कृत साहित्य के लब्धप्रतिष्ठ विद्वान साहित्यकार और साहित्य अकादमी से सम्मानित रचनाकार डा. हरिनारायण दीक्षित because जी हमारे बीच नहीं रहे, पिछले वर्ष एक लंबी बीमारी के कारण उनका देहांत हो गया. किन्तु कवियश […]
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कुमाऊंनी लोकसाहित्य में प्रतिबिंबित ग्वेलदेवता का राजधर्म

राज्य में किया दबंगई का उन्मूलन, प्रजा को दिलाया इंसाफ का राज डॉ. मोहन चंद तिवारी आज इस लेख के माध्यम से कुमाऊंनी भाषा के लोककवियों के आधार पर उत्तराखंड के न्याय देवता ग्वेलज्यू के राजधर्म की अवधारणा पर चर्चा की जा रही है. कुमाऊं भाषा के जाने माने रंगकर्मी तथा साहित्यकार स्व. श्री ब्रजेन्द्र […]