October 30, 2020
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न्याय प्रियता ने राजा गोरिया को भगवान बना दिया   

डॉ. गिरिजा किशोर पाठक   18वीं सदी के जनेवा के महान becauseराजनीतिक दार्शनिक जॉन जैकब रूसो ने मनुष्य के बारे में कहा था कि ‘मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है किन्तु हर तरफ वह जंजीरों में जकड़ा राहत है.’ मनुष्य स्वयं को जंजीरों में जकड़ा जाना इसलिए स्वीकार करता है और अपनी स्वतंत्रता को राज्य जैसी
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पाताल भुवनेश्वर : पृथ्वी के आदि और अंत का चित्रण 

ऋचा जोशी धरती पर एक जगह ऐसी भी है जहां एक ही स्थान पर पूरी सृष्टि के दर्शन होते हैं. सृष्टि की रचना से लेकर कलयुग का अंत कब और कैसे होगा इसका पूरा वर्णन यहां पर है. आइए आज आपको ऐसी जगह ले चलती हूं. बात हो रही है भारत के उत्तरी राज्य उत्तराखंड के […]
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पूर्वजों की आस्था का केन्द्र : कटारमल सूर्य मंदिर

शशि मोहन रावत ‘रवांल्‍टा’ जैसा कि हम सभी जानते हैं कि कोणार्क का सूर्य मंदिर अपनी बेजोड़ वास्तुकला के लिए भारत ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व में प्रसिद्ध है. भारत के ओड़िसा राज्य में स्थित यह पहला सूर्य मंदिर है जिसे भगवान सूर्य की आस्था का प्रतीक माना जाता है. ऐसा ही एक दूसरा सूर्य […]
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एक ऐतिहासिक-पुरातात्विक नगरी ‘लाखामण्डल’

इन्द्र सिंह नेगी यमुना को यह वर प्राप्त है कि जिधर से भी इसका प्रवाह आगे बढ़ेगा, वहाँ समृद्ध सभ्यता/संस्कृति का विकास स्वतः ही होता चला जायेगा. उसके उद्भव से लेकर संगम तक के स्थान अपने आप में ऐतिहासिक-सामाजिक- सांस्कृतिक रूप से समृद्धशाली हैं. हिन्दुओं में यह भी मान्यता है कि ‘यम द्वितीया’ के दिन […]
उत्तराखंड धर्मस्थल समाज/संस्कृति

सुरक्षा कवच के रूप में द्वार लगाई जाती है कांटिली झांड़ी

आस्था का अनोख़ा अंदाज  – दिनेश रावत देवलोक वासिनी दैदीप्यमान शक्तियों के दैवत्व से दीप्तिमान देवभूमि उत्तराखंड आदिकाल से ही धार्मिक, आध्यात्मिक, वैदिक एवं लौकिक विशष्टताओं के चलते सुविख्यात रही है। पर्व, त्यौहार, उत्सव, अनुष्ठान, मेले, थौलों की समृद्ध परम्पराओं को संजोय इस हिमालयी क्षेत्र में होने वाले धार्मिक, अनुष्ठान एवं लौकिक आयोजनों में वैदिक […]
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गढ़वाल में बद्री-केदार तो कुमाऊं में प्रसिद्ध है छिपला केदार

— दिनेश रावत भारत भू-भाग का मध्य हिमालय क्षेत्र विभिन्न देवी-देवताओं की दैदीप्यमान शक्ति से दीप्तिमान है। इसी मध्य हिमालय के लिए ‘हिमवन्त’ का वर्णन किया गया है. धार्मिक साहित्य यथा ‘केदारखंड’ (अ.101) में ‘हिमवत्-देश’ कभी केवल केदारदेश को ही माना गया है. हिमवन्त  के अंतर्गत अनेक पर्वतों का वर्णन है। जिनमें से कुछ इस […]
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लोक के विविध रंगों से रंगा एक महोत्सव

– दिनेश रावत उत्तराखंड का रवांई क्षेत्र अपने सांस्कृतिक वैशिष्टय के लिए सदैव विख्यात रहा है. लोकपर्व, त्योहार, उत्सव, मेले, थोले यहां की संस्कृति सम्पदा के अभिन्‍न अंग कहे जा सकते हैं. कठिन दैनिकचर्या की चक्की में पीसता मानव इन्हीं अवसरों पर अपने आमोद-प्रमोद, मनरंजन, मेल-मिलाप हेतु वक्त चुराकर न केवल शारीरिक, मानसिक थकान मिटाकर […]
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जहां विराजते हैं सूर्य सुता यमुना व शनि

— दिनेश रावत देवभूमि उत्तराखंड के दिव्यधाम सदियों के लोगों के आस्था एवं विश्वास के केन्द्र रहे हैं. सांसारिक मोह-माया में फंसा व्यक्ति, आत्मीकशांति की राह तलाशते हुए अन्ततः इसी क्षेत्र का रूख करता है. कारण पंचब्रदी, पंचकेदार, पंचप्रयाग तथा अनेकानेक देवी-देवताओं के दैवत्व से दैदीप्यमान, ऋषि-मुनियों के तपोबल से तरंगित, पांडवों के पराक्रम को […]
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त्रिजुगी नारायण के अवतार माने जाते हैं कौल देवता!

दिनेश सिंह रावत लोक मान्यतानुसार कौंल देवता का संबंध केदारनाथ से है. इन्हें त्रिजुगी नारायण का अवतार माना जाता है और इसी के चलते हर बारहवें वर्ष कौंल देवता से केदारनाथ की यात्रा करवाई जाती है। सालरा के अतिरिक्त आराकोट, बरनाली तथा धारा में भी कौंल देवता का प्राचीन मन्दिर अवस्थित हैं.   देवभूमि उत्तराखण्ड […]