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कीवी मेन! विक्रम बिष्ट के स्वरोजगार मॉ​डल नें पलायन को दिखाया आईना, पहाड़ में रोजगार सृजन की जगा रहे हैं अलख

ग्राउंड जीरो से संजय चौहान कुछ लोगों को पहाड़ आज भी पहाड़ नजर आता है. वहीं दूसरी ओर हमारे बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना किसी शोर शराबे के चुपचाप अपनी मेहनत और हौंसलों से पहाड़ की परिभाषा because ही बदल कर रख दी है. ऐसे लोग आज पलायन की पीडा से कराह […]
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हिसालू की जात बड़ी रिसालू

उत्तराखंड के अमृतफल हिसालू का वनौषधि के रूप में परिचय  डॉ. मोहन चंद तिवारी जिस भी उत्तराखंडी भाई का बचपन पहाड़ों में बीता है तो उसने हिसालू का खट्टा-मीठा स्वाद जरूर चखा होगा और इस फल को तोड़ते समय इसकी टहनियों में लगे टेढ़े और नुकीले काटों की खरोंच भी जरूर खाई होगी. वे दिन […]
खेती-बाड़ी हिमाचल-प्रदेश

भारत में पहली बार ‘मॉन्क फल’ की खेती

सीएसआईआर–आईएचबीटी, पालमपुर द्वारा की पहल जे.पी. मैठाणी/हिमाचल ब्यूरो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) (World Health Organization (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 422 मिलियन लोग मधुमेह से पीड़ित हैं. अतिरिक्त गन्ना शर्करा के सेवन से इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप 2 मधुमेह, यकृत की समस्याएं, चयापचय सिंड्रोम, हृदय रोग आदि जैसी अनेक जानलेवा बीमारियां हो सकती […]
खेती-बाड़ी ट्रैवलॉग

उत्तराखंड में स्‍वरोजगार का जरिया बन सकती है कैमोमाइल की खेती

मंजू दिल से… भाग-17 मंजू काला जहाँ… कैमोमाइल का फूल सुंदरता, सादगी because और शांति का प्रतीक माना जाता है, वहीं निकोटिन रहित होने के कारण  यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है. पेट के रोगों के लिए यह रामबाण औषधि है, वहीं त्वचा रोगों में भी कैमोमाइल काफी लाभकारी है. यह जलन, अनिद्रा, घबराहट […]
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पहाड़ की कृषि आर्थिकी को संवार सकता है मंडुआ

चन्द्रशेखर तिवारी उत्तराखण्ड में पृथक राज्य की मांग के लिए जब व्यापक जन-आंदोलन चल रहा था तब उस समय यह नारा सर्वाधिक चर्चित रहा था – ’मंडुआ बाड़ी खायंगे उत्तराखण्ड राज्य बनायेंगे’. because स्थानीय लोगों के अथक संघर्ष व शहादत से अलग पर्वतीय राज्य तो हासिल हुआ परन्तु विडम्बना यह रही कि राज्य बनने के […]
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उत्तराखंड में जैविक खेती को 6100 क्लस्टर बनाये जाएंगे!

डॉ. राजेंद्र कुकसाल मुख्यमंत्री की कृषकों के हित में सराहनीय एवं स्वागत योग्य पहल, राज्य में गतिमान 3900 जैविक कलस्टरों की हकीकत उत्तराखंड कृषि प्रदान राज्य है जहां पर अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि पर ही निर्भर है. राज्य का अधिकांश भाग पर्वतीय है जहां पर 65 प्रतिशत वन आच्छ्यादित हैं. पर्वतीय क्षेत्रों में बर्षाbecause […]
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पहाड़ में स्‍वरोजगार का बेहतर जरिया हो सकती है लहसुन की जैविक  

डॉ. राजेंद्र कुकसाल लहसुन  पहाड़ी क्षेत्रों  की एक प्रमुख नगदी/व्यवसायिक फसल है. पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली लहसुन जैविक होने के साथ ही अधिक पौष्टिक, स्वादिष्ट व औषधीय गुणों से because भरपूर भी होती है जिस कारण बाजार में इसकी मांग अधिक रहती है. उद्यान विभाग के बर्ष 2015 – 16 में दर्शाये गये […]
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उत्‍तराखंड में कीवी की बागवानी…

डॉ. राजेन्द्र कुकसाल कीवी फल (चायनीज गूजबेरी) का उत्पति स्थान चीन है, पिछले कुछ दशकों से ये फल विश्वभर में अत्यन्त लोकप्रिय हो गया है. न्यूजीलैण्ड इस फल के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि इस देश ने कीवी फल को व्यवसायिक रूप दिया इसका उत्पादन व निर्यात न्यूजीलैंड में बहुत अधिक है. कीवी फल भारत में […]
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पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद है बड़ी इलायची का उत्पादन

डॉ. राजेंद्र कुकसाल बड़ी इलायची या लार्ज कार्डेमम को मसाले की रानी कहा जाता है. इसका उपयोग भोजन का स्वाद बढाने के लिए किया जाता है साथ ही इसमें औषधीयय गुण भी होते है. बड़ी इलायची से बनने वाली दवाईयों का उपयोग पेट दर्द, वात, कफ, पित्त, अपच, अजीर्ण, रक्त और मूत्र आदि रोगों को […]
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बहुत ही लोकप्रिय थी बेरीनाग की चाय!

‘मालदार’ दान सिंह बिष्ट प्रकाश चन्द्र पुनेठा जिला पिथौरागढ़ के पूर्व दिशा में 36 किलोमीटर दूर काली नदी के किनारे झूलाघाट नाम का कस्बा है. काली नदी हमारे देश भारत और नेपाल के मध्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा रेखा का कार्य करती है. काली नदी के किनारे हमारे कस्बे को झूलाघाट कहते है. और काली नदी के […]