January 18, 2021
Home Posts tagged culture of uttarakhand
उत्तराखंड संस्मरण

ईजा के जीवन में ओखली

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—14 प्रकाश उप्रेती ये है-उखो और मुसो. स्कूल की किताब में इसे ओखली और मूसल पढ़ा. मासाब ने जिस दिन यह पाठ पढ़ाया उसी दिन घर जाकर ईजा को बताने लगा कि ईजा उखो को ओखली और मुसो को मूसल कहते हैं. ईजा ने बिना किसी भाव के बोला […]
संस्मरण

‘नाई’ और ‘तामी’ का पहाड़

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—13 प्रकाश उप्रेती ये हैं- ‘नाई’ और ‘तामी’. परिष्कृत बोलने वाले बड़े को ‘नाली’ कहते हैं. ईजा और गांव के निजी तथा सामाजिक जीवन में इनकी बड़ी भूमिका है. नाई और तामी दोनों पीतल और तांबे के बने होते हैं. गांव भर में ये अनाज मापक यंत्र का काम […]
संस्मरण

रामलीला पहाड़ की

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—6 रेखा उप्रेती रंगमंच की दुनिया से पहला परिचय रामलीला के माध्यम से हुआ. हमारे गाँव ‘माला’ की रामलीला बहुत प्रसिद्ध थी उस इलाके में. अश्विन माह में जब धान कट जाते, पराव के गट्ठर महिलाओं के सिर पर लद कर ‘लुटौं’ में चढ़ बैठते तो खाली खेतों पर रंगमंच खड़ा […]
अभिनव पहल उत्तराखंड समाज/संस्कृति हिमालयी राज्य

सांस्कृतिक संपदा के संरक्षण का अनूठा प्रयास

दिनेश रावत रवाँई लोक महोत्सव ऐसे युवाओं की सोच व सक्रियता का प्रतिफल है, जो शारीरिक रूप से किन्हीं कारणों के चलते अपनी माटी व मुल्क से दूर हैं, मगर रवाँई उनकी सांसों में रचा-बसा है। रवाँई के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई वैशिष्ट को संरक्षित एवं सवंर्धित करने सउद्देश्य प्रति वर्ष महोत्सव का आयोजन किया […]
उत्तराखंड समाज/संस्कृति संस्मरण

पहाड़ की अनूठी परंपरा है ‘भिटौली’

दीपशिखा गुसाईं मायके से विशेष रूप से आए उपहारों को ही ‘भिटौली’ कहते हैं। जिसमें नए कपड़े, मां के हाथों  से बने कई तरह के पकवान आदि  शामिल हैं। जिन्हें लेकर भाई अपनी बहिन के घर ले जाकर उसकी कुशल क्षेम पूछता है। एक तरफ से यह त्यौहार भाई और बहिन के असीम प्यार का […]
उत्तराखंड पर्यावरण समाज/संस्कृति

मेरी फूलदेई मेरा बचपन 

प्रकाश चंद्र पहाड़ का जीवन, सुख- दुःख और हर्षोउल्लास सब समाया होता है। जीवन का उत्सव प्रकृति का उत्सव है और प्रकृति, जीवन का अविभाज्य अंग। इसलिए पहाड़ी जीवन के रंग में प्रकृति का रंग घुला होता है। बिना प्रकृति के न जीवन है न कोई उत्सव और त्यौहार। पहाड़ों की रौनक उसके जीवन में […]
संस्मरण हिमाचल प्रदेश

किन्नौर का कायाकल्प करने वाला डिप्टी कमिश्नर

कुसुम रावत मेरी मां कहती थी कि किसी की शक्ल देखकर आप उस ‘पंछी’ में छिपे गुणों का अंदाजा नहीं लगा सकते। यह बात टिहरी रियासत के दीवान परिवार के दून स्कूल से पढ़े मगर सामाजिक सरोकारों हेतु समर्पित प्रकृतिप्रेमी पर्वतारोही, पंडित नेहरू जैसी हस्तियों को हवाई सैर कराने वाले और एवरेस्ट की चोटी की […]