
उत्तराखंड हिमालय के जलस्रोतों से अनुप्रेरित वैदिक सभ्यता के आदिस्रोत
भारत की जल संस्कृति-2डॉ० मोहन चन्द तिवारी"या सृष्टिः स्रष्टुराद्या वहति
विधिहुतं या हविर्या च होत्री,
ये द्वे कालं विधत्तः श्रुतिविषयगुणा
या स्थिता व्याप्य विश्धम्.
यामाहुः सर्वबीजप्रकृतिरिति
यया प्राणिनः प्राणवन्तः,
प्रत्यक्षाभिः प्रसन्नस्तनुभिरवतु
वस्ताभिरष्टाभिरीशः ॥"
-'अभिज्ञानशाकुंतलम्',1.1
आज 'अन्तर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस' है. महाकवि कालिदास के विश्व प्रसिद्ध नाटक 'अभिज्ञान शाकुंतलम्' में आए उपर्युक्त अष्टमूर्ति शिव की वंदना से ही मैं अपनी पर्यावरण के मुख्य तत्त्व जल की चर्चा प्रारम्भ करता हूं.महाकवि कालिदास ने 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' के इस नांदीश्लोक में शिव की जिन आठ मूर्तियों की वंदना से अपने नाटक का प्रारम्भ किया है,उनके नाम हैं- जल, अग्नि, यजमान, सूर्य, चंद्रमा, वायु, आकाश और पृथ्वी.इनमें भी सबसे पहली मूर्ति जलरूपा 'आद्यासृष्टि' है. सृष्टिविज्ञान की दृष्टि स...









