पड़ाव आर्ट मेंटरिंग प्रोग्राम 2026 : हिमालयी युवा कलाकारों के लिए सीख, संवाद और रचनात्मक चिंतन का साझा मंच

padav-art-mentoring-program

 

  • हिमांतर ब्यूरो, देहरादून

देहरादून। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न शहरों और पहाड़ी कस्बों से आए 20 युवा कलाकारों की उपस्थिति ने इस वर्ष के पड़ाव आर्ट मेंटरिंग प्रोग्राम 2026 को एक विशेष स्वरूप दिया। देहरादून स्थित काया लर्निंग सेंटर में आयोजित इस छह दिवसीय आवासीय कार्यक्रम ने युवा कलाकारों को एक साथ रहने, एक-दूसरे को समझने, अपने अनुभव साझा करने और समकालीन कला के अनेक पहलुओं पर विचार करने का अवसर दिया। अलग-अलग सांस्कृतिक और भौगोलिक पृष्ठभूमि से आए ये कलाकार अपने साथ अपने-अपने क्षेत्रों की स्मृतियाँ, लोक परंपराएँ, जीवन के अनुभव और प्रकृति के प्रति गहरी संवेदनाएँ लेकर आए थे।

padav-art-mentoring-program

कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों में आदर्श नेगी और वैशाली नेगी (कोटद्वार), चेतन जोशी, गर्विता बानी, हिमांशु बिष्ट, काशिश रियाज़ और शानू शर्मा (नैनीताल), कनिका शर्मा और स्नेहा सिस्ता (शिमला), कुंदन ग्यात्सो (लेह, लद्दाख), मुस्कान सिंह, सुनंदा रॉय और विजय विक्रम सिंह (ऊधम सिंह नगर), निशा चौहान और शिवानी मारोठिया (बागेश्वर), राहुल नेगी और ऋषभ रावत (देहरादून), रितिशराज ठाकुर (मंडी), शिवम शर्मा (बरोला, जम्मू-कश्मीर) तथा सिमरन सेन (मनाली) शामिल रहे।

काया लर्निंग सेंटर परिसर में इन प्रतिभागियों की उपस्थिति हिमालयी समाज की विविध सांस्कृतिक छवियों को एक साथ सामने ला रही थी। कोई कुमाऊँ की पहाड़ियों से आया था, कोई गढ़वाल की घाटियों से, कोई हिमाचल के पर्वतीय नगरों से और कोई लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाकों से। बातचीत के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि उनकी कलात्मक चिंताओं में पहाड़, नदियाँ, जंगल, लोक जीवन, परिवार, बदलते सामाजिक संबंध, पलायन और मनुष्य के रोज़मर्रा के अनुभव गहराई से मौजूद हैं। उनकी कला की भाषाएँ अलग थीं, माध्यम अलग थे और अनुभव भी अलग थे, फिर भी कला के प्रति जिज्ञासा और सीखने की इच्छा उन्हें एक-दूसरे के निकट ला रही थी।

पड़ाव आर्ट मेंटरिंग प्रोग्राम का उद्देश्य युवा कलाकारों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहाँ वे कला को जीवन, समाज और संस्कृति के व्यापक संदर्भों में समझ सकें। इसी सोच के साथ कार्यक्रम में प्रत्येक प्रतिभागी के साथ व्यक्तिगत संवाद और मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया गया। जगमोहन बंगानी और पूनम शर्मा ने प्रत्येक युवा कलाकार के साथ अलग-अलग बैठकर बातचीत की, उनके कार्यों को देखा और इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि उनकी कला-प्रक्रिया को किस प्रकार आगे बढ़ाया जा सकता है। इन एकल सत्रों में प्रतिभागियों ने अपने विचार, संकोच, प्रश्न और भविष्य की योजनाएँ खुलकर साझा कीं। वरिष्ठ कलाकारों के साथ इस प्रकार का सीधा संवाद उनके लिए सीखने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर बना।

कार्यक्रम के पहले दिन काया लर्निंग सेंटर के संस्थापक संतोष पासी ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए काया की अवधारणा और उसके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया तब अधिक अर्थपूर्ण होती है, जब उसमें संवाद, साझेदारी और अनुभवों का आदान-प्रदान शामिल हो। उन्होंने काया को एक ऐसे स्थान के रूप में प्रस्तुत किया, जहाँ सीखने और सृजन की प्रक्रियाएँ साथ-साथ चलती हैं।

इसके बाद बंगानी आर्ट फाउंडेशन (BAF) का परिचय प्रस्तुत किया गया। फाउंडेशन के संस्थापक एवं निदेशक जगमोहन बंगानी और कलाकार एवं कला-शिक्षिका पूनम शर्मा ने फाउंडेशन की विभिन्न पहलों और उद्देश्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से कला शिक्षा, युवा कलाकारों के मार्गदर्शन और समकालीन भारतीय कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने यह भी साझा किया कि पड़ाव आर्ट मेंटरिंग प्रोग्राम का यह चौथा वर्ष है और पिछले वर्षों में इस कार्यक्रम से जुड़े अनेक युवा कलाकार आज अपनी स्वतंत्र कला-यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।

प्रतिभागियों के बीच परिचय और आत्मीयता बढ़ाने के लिए कला-शिक्षक और रंगकर्मी सुभाष रावत ने कई रचनात्मक गतिविधियों का संचालन किया। इन गतिविधियों में बातचीत, समूह अभ्यास और सहभागिता आधारित प्रक्रियाएँ शामिल थीं। इन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों ने एक-दूसरे को जाना, अपने अनुभव साझा किए और समूह में काम करने की प्रक्रिया को समझा। कुछ ही समय में विभिन्न राज्यों से आए युवा कलाकारों के बीच एक आत्मीय रिश्ता बनने लगा।

दिन के दूसरे सत्र में बंगानी आर्ट फाउंडेशन की कोर टीम के सदस्य आकर्षण बोरा, सुगम गौर और आकाश ने कैनवास स्ट्रेचर तैयार करने और उस पर कैनवास चढ़ाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को चित्र निर्माण की एक महत्त्वपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया को निकट से समझने का अवसर दिया। बाद में इन युवा कलाकारों ने अपनी व्यक्तिगत कला यात्राएँ भी प्रतिभागियों के साथ साझा कीं। उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों, अभ्यास, प्रयोगों और सीखने की प्रक्रिया पर खुलकर बातचीत की। उनकी बातें युवा प्रतिभागियों के लिए प्रेरणादायक रहीं।

कार्यक्रम का एक प्रमुख सत्र जगमोहन बंगानी ने संचालित किया। उन्होंने उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मौंडा बांगाण गाँव से लेकर लंदन प्रवास तक की अपनी जीवन यात्रा और अनुभवों को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। इसके बाद उन्होंने अपनी 26 वर्षों की कला यात्रा को स्लाइड प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों, संघर्षों, यात्राओं, प्रयोगों और कलात्मक अनुभवों पर विस्तार से चर्चा की। कला, भाषा, स्मृति, अध्यात्म और सकारात्मक सोच के संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कलाकार अपने अनुभवों, संवेदनाओं और स्मृतियों से अपनी कला की भाषा विकसित करता है। उन्होंने प्रतिभागियों को अपने भीतर झाँकने, अपने अनुभवों को पहचानने और उन्हें रचनात्मक रूप देने के लिए प्रेरित किया।

पूनम शर्मा ने भी अपनी कला यात्रा के अनेक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि कला के क्षेत्र में धैर्य, अभ्यास और आत्मविश्वास का बहुत महत्त्व है। उन्होंने युवा कलाकारों को अपने आसपास के जीवन को ध्यान से देखने, छोटे-छोटे अनुभवों को समझने और अपनी संवेदनाओं पर भरोसा करने की सलाह दी। उनका सत्र प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत बना।

कार्यक्रम में नई दिल्ली के शोधकर्ता, कला प्रशासक, लेखक और क्यूरेटर विकाश कुमार की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उन्होंने समकालीन कला जगत, क्यूरेटोरियल प्रक्रियाओं, प्रदर्शनियों के निर्माण और सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने पेशेवर अनुभवों के आधार पर बताया कि कला के क्षेत्र में कलाकार, शोधकर्ता, क्यूरेटर और सांस्कृतिक संस्थाएँ किस प्रकार मिलकर काम करती हैं। उनकी प्रस्तुति ने प्रतिभागियों को समकालीन कला के व्यापक परिदृश्य और उसके अनेक आयामों से परिचित कराया।

देश के प्रमुख समकालीन चित्रकार अभिजीत पाठक ने अपनी लगभग दो दशकों की कलात्मक यात्रा पर आधारित विस्तृत स्लाइड प्रस्तुति प्रस्तुत की। उन्होंने अपने कला-जीवन के विभिन्न चरणों, प्रयोगों, संघर्षों और अनुभवों को सरल और संवेदनशील ढंग से साझा किया। प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि एक कलाकार की दृष्टि समय के साथ विकसित होती है और हर अनुभव उसके रचनात्मक संसार को नई दिशा देता है। उनकी प्रस्तुति ने युवा कलाकारों को निरंतर सीखने और अपनी कला के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम के दौरान उषार्थ आर्ट फाउंडेशन द्वारा निर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द वे आई सी : सेलिब्रेटिंग अंबादास’ की विशेष स्क्रीनिंग भी आयोजित की गई। कलाकार अंबादास के जीवन और कला पर आधारित इस फिल्म ने प्रतिभागियों को भारतीय आधुनिक कला के एक महत्त्वपूर्ण अध्याय से परिचित कराया। फिल्म में शामिल कलाकारों और लेखकों के विचारों ने यह समझने का अवसर दिया कि कला का इतिहास स्मृतियों, संवादों और अनुभवों के सहारे आगे बढ़ता है।

समकालीन कला जगत के व्यावहारिक पक्षों को समझने के लिए निधि पाँता ने प्रतिभागियों के साथ एक विचारपूर्ण सत्र किया। उन्होंने कला बाज़ार, कला संग्रह, मूल्य निर्धारण और कला को दीर्घकालिक सांस्कृतिक निवेश के रूप में देखने की दृष्टि पर चर्चा की। उन्होंने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि कलाकारों के लिए अपनी कला को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करना और उसके बारे में संवाद स्थापित करना आज के समय की एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है।

इस पूरे कार्यक्रम के दस्तावेजीकरण में भी कई लोगों का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। पुणे, महाराष्ट्र से विशेष रूप से आए फोटोग्राफर और फिल्ममेकर हिमांशु त्रिवेदी ने छह दिनों तक कार्यक्रम की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की ज़िम्मेदारी संभाली। उन्होंने प्रतिभागियों की गतिविधियों, प्रस्तुतियों, चर्चाओं, कार्यशालाओं और रोज़मर्रा के अनुभवों को अपने कैमरे में सहेजा। उनकी उपस्थिति ने इस पूरे कार्यक्रम की स्मृतियों को व्यवस्थित रूप से संजोने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। बंगानी आर्ट फाउंडेशन उनके सहयोग, समर्पण और आत्मीय सहभागिता के लिए तहे दिल से आभार व्यक्त करता है।

छह दिनों तक चले इस आवासीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने एक-दूसरे के अनुभवों से सीखा, अपने विचार साझा किए और समकालीन कला की अनेक संभावनाओं को नए दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया। देहरादून में बिताए गए ये छह दिन उनके लिए केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ऐसी साझा यात्रा रहे, जहाँ कला के माध्यम से नए विचार, नए संबंध और भविष्य की नई संभावनाएँ आकार लेती दिखाई दीं।

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *