Sunday, October 1, 2023
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गांधी जयंती: अन्य को अनन्य बनाते गांधी!

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gandhi jayanti
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 गांधी जयंती (2 अक्तूबर) पर विशेष

प्रो. गिरीश्वर मिश्र 

महात्मा गांधी का लिखा समग्र साहित्य का हिंदी संस्करण सत्तानबे खंडों के कई हज़ार पृष्ठों में समाया हुआ है। इसका बहुत बड़ा हिस्सा उनके आत्म-संवाद का है जहाँ वह जीवन के अपने अनुभव की पुनर्यात्रा करते दिखाई पड़ते हैं। जीवन का पूर्वकथन संभव नहीं पर आगे के लिए नवीन रचना की कोशिश तो हो ही सकती है। यही सोच कर गांधी जी बार–बार अपने अनुभवों की मनोयात्रा में आवाजाही करते हैं। यह बड़ा दिलचस्प है कि ऐसा करते हुए वे खुद अपनी परीक्षा भी करते रहते थे। उन्होंने अपनी ग़लतियों को स्वीकार करते हुए स्वयं को कई बार दंडित किया था और प्रायश्चित्त भी किया था। आत्म-विमर्श का उनकी निजी जीवनचर्या में एक ज़रूरी स्थान था। वे अपने में दोष-दर्शन भी बिना घबड़ाए कर पाते थे। इस तरह आत्मान्वेषण उनके स्वभाव का अंग बन गया था। सतत आत्मालोचन की पैनी निगाह के साथ गांधी जी ने जो ब्रत लिए उन पर एक तपस्वी की भाँति डटे रहे। उपवास, मौन रहना, प्राकृतिक चिकित्सा, समाज-सेवा और शारीरिक श्रम को चुनना उनका निजी फ़ैसला था। वे अपनी कमियों को पहचानने, उनको स्वीकार करने, उनको बदलने का निश्चय करने, बदलने की चेष्टा करने, परिवर्तन लाने और उसे स्थिर करने का विस्तृत विवरण देते हैं। वस्तुतः वे आरंभ से ही इस तरह के पुनरावलोकन का अभ्यास करते आ रहे थे। यदि व्यवस्थित रूप में देखें तो दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह के इतिहास  के साथ इस अभ्यास का आरंभ हुआ था जो हिंद स्वराज और सत्य के साथ प्रयोग  के साथ आगे भी बढ़ता रहा। अपनी रचनाओं, वक्तव्यों, पत्रों, प्रवचनों और अन्य लेखन में भी गांधी जी व्योरा देते हुए अमूर्त सिद्धांत की जगह जीवन की ठोस घटनाओं, व्यक्तियों और परिस्थितियों में गुँथे पारस्परिक रिश्तों की तहक़ीक़ात करते हुए मिलते हैं। वे रिश्तों को जीवन-पट के ताने-बाने के रूप में पहचान रहे थे और सामाजिक यथार्थ को रचने-गढ़ने में प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे थे। थोड़ा गौर से विचार करें तो विभिन्न स्तरों पर इन रिश्तों को बनाना, बिगड़े हुए रिश्तों को सुधारना-सुलझाना और बन रहे रिश्तों को सुदृढ़ करना उनके निजी, राजनीतिक और सामाजिक जीवन का मुख्य उद्देश्य बना रहा। गांधी जी मानव सम्बंधों की ऊष्मा में ही रचनात्मकता का अवसर भी ढूँढते रहे। एक तरह से यही उनके जीवन की मुख्य साधना हो गई थी। उनकी अतुलनीय लोकप्रियता का राज भी इसी में छिपा था । इस विवरण का आशय यह बताना है कि गांधी जी को दूसरों या ‘अन्य’ की बड़ी चिंता थी और उनके सुख दुःख से वे भी सुखी दुखी होते थे और उसके अनुसार ज़रूरी कदम उठाते थे। अपने सुख दुःख की अनुभूति की समानता (आत्मौपम्य) के आधार पर वह दूसरों की स्थिति को समझते थे। दूसरों के साथ रिश्ते बनाने, उसे जीवित रखने और संजोने का दायित्व निरंतर समायोजन, सहयोग, दान-प्रतिदान पर टिका होता है। गांधी जी धैर्य और सहनशीलता के साथ इस कार्य में आजीवन लगे रहे। वे अपने खान-पान, पहनावा, बातचीत, व्यवहार और नीति आदि सबमें बदलाव ले आए और लोक के साथ तादात्म्य स्थापित किया। उनकी अपार लोकस्वीकृति का यह एक बड़ा कारण बना।

गांधी जी ने अपने अनुभवों के बीच सर्वव्यापकता का महत्व पहचाना और उसी के अनुसार उनके सामाजिक कार्य की परिधि में समाज के सभी वर्ग शामिल होते गए थे। वस्तुतः वे समाज की बुनावट में विद्यमान विविधता के विविध रूपों को जगह देने की लगातार कोशिश कर रहे थे। इतिहास गवाह है कि एक व्यापक दृष्टि के साथ अपने व्यवहार की सवेदनशीलता और संवाद की कुशलता द्वारा गांधी जी समाज में एक संक्रामक प्रभाव पैदा कर सके। वे विभिन्न धर्मावलम्बी जनों समेत गरीब, दलित, और ग्रामीण सभी के निकट पहुँचते रहे। अहंकार के साथ ऐसा कर पाना कदापि आसान न था। अपना सामाजिक दायरा विस्तृत करने के लिए उन्होंने अपने अहं का अतिक्रमण किया और उसके इर्द-गिर्द फैले आवरण को हटाया। भारत आने के बाद चंपारन में निलहे किसानों के प्रति अत्याचार के विरुद्ध जो पहला आंदोलन भारत में उनके द्वारा किया गया वह ऐसा ही बताता है। स्वयं को पारदर्शी बनाते हुए गांधी जी ने अपनी ख़ास जीवन शैली अपनाई। वह साधारण आदमी जैसा जीवन जीने की राह पर चल पड़े और लगभग उसी रूप में आगे के जीवन में भी दिखते रहे। इसके लिए उन्होंने संयम की एक आत्म-संस्कृति को चुना जो उनके अपने अनुभव और प्रयोग के आधार पर आकार पाई। इस बदलाव का दुहरा असर था। वह खुद भी बदले और समाज की नब्ज टटोलने का अवसर पा सके। परंतु इसका दूरगामी और चमत्कारी परिणाम यह हुआ कि व्यापक भारतीय समाज गांधी जी में अपनी छवि देखने लगा। एक ही चेतन सत्ता का आलोक सबको प्रकाशित कर रहा था!  

गांधी जी समाज से जुड़ने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ते थे। यह भी उल्लेखनीय है कि गांधी जी जीवन में कभी एक स्थान पर स्थिर हो कर टिके नहीं रहे, सिर्फ़ वर्धा में बारह वर्षों की अवधि बिताई। वे जीवन भर यात्रा करते रहे और उसके ज़रिए देश, काल और पात्र तीनों से रूबरू होते रहे। इस अर्थ में वे अतिसामाजिक कहे जा सकते हैं कि वे लोक से सम्पर्क बनाये रहने की हर कोशिश करते रहे। भरसक लोक में ही रमते हुए ही वह जीवन जिए। शुरू-शुरू में दक्षिण अफ़्रीका में ज़रूर उनको झिझक लगी थी और वहाँ की पहली सभा में पैर और ज़ुबान दोनों ही लड़खड़ाए थे पर जब उन्होंने आगे कदम बढ़ाए तो फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। यह राह आसान न थी। उनकी आत्म-कथा से पता चलता है कि न केवल उनके निजी जीवन में मुश्किलों की भरमार लगी रही बल्कि सामाजिक जीवन में भी चुनौतियाँ मिलती रहीं। इन सबके बीच वे परम सामाजिक बनते रहे। वे बिना कोई अवसर गँवाये अपनी ओर से पहल कर के समाज के पास जाते थे और सम्पर्क साधते थे। इसी उद्देश्य के लिए वह जहां भी रहे उन्होंने अख़बार निकाला। इंडियन ओपिनियन, नव जीवन और हरिजन का प्रकाशन यही बताता है। वे जनता के बीच में रह कर काम करते रहे। वस्तुतः अन्य को अपना अंश बनाने की कोशिश गांधी जी के काम में लगातार देखी जा सकती है। यह कई स्तरों पर चलती रही। चर्खा, खादी, कुटीर उद्योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसे उपाय अपनाने के पीछे गांधी जी का उद्देश्य इसी से जुड़ा था। स्मरणीय है कि स्वयं और अन्य के बीच भेद को दूर करना भारतीय चिंतन की प्रमुख विशेषता रही है। वेदांत में यह बात प्रमुख रूप से अभिव्यक्त हुई है। मैं ही ब्रह्म हूँ (अहं ब्रह्मास्मि!) और सब कुछ ब्रह्म ही है (सर्वं खल्विदं ब्रह्म!) जैसे गंभीर कथनों का एक आशय यह भी है कि आत्मबोध के स्तर पर समस्त अस्तित्व में एकता का अनुभव किया जाना चाहिए।

गांधी जी मनुष्यता के स्तर पर व्यवहार में लाए जा सकने वाले सद्विचार के आधार पर जुड़ने को तत्पर रहते थे। इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका में विदेश की धरती पर अंग्रेजों के साथ व्यवहार करते हुए भी वे इन सद्विचारों को कसौटी के रूप में उपयोग में लाते थे। कई विदेशी उनके मित्र और सहयोगी भी बने और उनके काम में हाथ बँटाया। उदार चरित वाले आत्मजयी गांधी मनुष्य मनुष्य के बीच भेद न करते हुए अन्य को अनन्य बनाने में माहिर थे।

मनुष्य की आंतरिक एकता की स्वीकृति के ही चलते विरोधियों और दुश्मनों से मिल कर उनका हृदय-परिवर्तन करना गांधी जी के कार्य का एक बड़ा हिस्सा था। तब भारतीय समाज में जाति, धर्म, क्षेत्र, वर्ग आदि के आधार पर सामाजिक भेद बुरी तरह से व्याप्त थे। इस तरह के भेद की खाई को पाटना कठिन था। सबको ईश्वर की संतान समझ गांधी जी ज़रूर भेद-बुद्धि को नकारते रहे। आत्म और अन्य या अपने-पराए के बीच के फ़ासले को वे भरसक मिटाते रहे। वे धर्म, जाति और नस्ल के अंतरों को सतही नज़रिए तथा विवेक और भरोसे की कमी का परिणाम मानते थे। गांधी जी भारत को समग्रता में देख पा रहे थे। इस तरह की दृष्टि के लिए संयम और आत्म-नियंत्रण की ज़रूरत थी। तभी वह देश और समाज के साथ एकाकार हो पा रहे थे। देश-योगी सरीखे गांधी जी अपने को देश में और देश को अपने में देख पा रहे थे। गांधी जी मनुष्यता के स्तर पर व्यवहार में लाए जा सकने वाले सद्विचार के आधार पर जुड़ने को तत्पर रहते थे। इंग्लैंड और दक्षिण अफ़्रीका में विदेश की धरती पर अंग्रेजों के साथ व्यवहार करते हुए भी वे इन सद्विचारों को कसौटी के रूप में उपयोग में लाते थे। कई विदेशी उनके मित्र और सहयोगी भी बने और उनके काम में हाथ बँटाया। उदार चरित वाले आत्मजयी गांधी मनुष्य मनुष्य के बीच भेद न करते हुए अन्य को अनन्य बनाने में माहिर थे।

आज के समय में अपने को दूसरों से भिन्न मानने का चलन बढ़ रहा है। प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दूसरों को अपने अधीन बनाने और अपने से कमतर आंक कर अपने लिए उपयोग करने से लोग बाज़ नहीं आते, चाहे वह शोषण ही क्यों न हो। मूल्यों में आई गिरावट, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंतहीन लोभ के जाल में फँस कर मानव बोध घट रहा है। हम यह भूल जाते हैं कि जीवन जीने की न्यूनतम ज़रूरतों का तो पता है परंतु अधिकतम सीमा निश्चित नहीं की जा सकती। वह मनुष्य के उद्यम, सृजनात्मकता और अवसर की उपलब्धता के अनुसार निरंतर बदलती रही है। भ्रमवश हम उस उच्च स्तर को ज़रूरी की श्रेणी में ले आते हैं। गांधी जी सादगी में विश्वास करते थे, मितव्ययी थे और साधारण के सौंदर्य का उदारता से उपयोग करते थे। उनके लिए लघु और सीमित में श्रेष्ठता देखना संभव था। आज जब धरती की धारण-क्षमता जबाब दे रही है और उस पर भार बढ़ता जा रहा है तो हमें सोचना होगा कि अपने पराए का भेद कैसे मिट सकता है और किस तरह अनावश्यक आत्माभिमान के बोझ को कम किया जा सकता है। मैं और तुम का हीनतावाची अंतर मिटाना ही होगा। मित्र, हितैषी और शुभचिंतक के रूप में अन्य (दूसरा) निश्चय ही अनन्य होता है और उसके साथ सहकार ही श्रेय का मार्ग साबित होगा। 

(लेखक शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपतिमहात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा हैं.)

UKSSSC के माध्यम से चयनित 226 अभ्यर्थियों को सीएम धामी ने सौंपे नियुक्ति पत्र

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में नगर निकायों की पालिका अकेन्द्रीयित सेवा के अंतर्गत उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से चयनित 226 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये। जिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये उनमें नगर निकायों में कर एवं राजस्व मोहर्रिरों/कर संग्रहकर्ता के 148 अभ्यर्थी एवं कनिष्ठ सहायक सह डाटा एन्ट्री ऑपरेटर के 78 अभ्यर्थी शामिल हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नगर निगम देहरादून द्वारा विकसित किये गये सिटीजन एप ‘वन स्टॉप सोल्यूशन’ भी लांच किया। ओडीएफ प्लस के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए जनपद हरिद्वार एवं जनपद टिहरी को और स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत सबसे अधिक श्रमदान करने के लिए देहरादून एवं उधमसिंह नगर जनपद को मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चयनित सभी 226 अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन पदों पर नियुक्तियां होने से जनता की परेशानियां दूर होंगी, कार्यों में भी तेजी आयेगी। मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को कहा कि जीवन में मानक बनाकर आगे बढ़ें। यदि हम अपने कार्यों को ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से करते हैं, तो इससे मन में संतोष का भाव आता है। जीवन को सफल और सार्थक बनाने के लिए उद्देश्य के साथ आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा तेजी से प्रयास किये जा रहे हैं। विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने के लिए प्रक्रियाएं तेजी से चल रही हैं। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को विभागों में रिक्त पदों का संज्ञान लेकर नियुक्ति प्रक्रियाओं में तेजी लाने के लिए जिम्मेदार दी गई है। राज्य में सभी प्रतियोगी परीक्षाएं पूर्ण पारदर्शिता के साथ हों, इसके लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कारवाई की गई। 80 से अधिक लोगों को जेल भेजा गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 9 वर्षों से देश में युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में जो अभियान चल रहा है, उसमें हाल में ही एक और कड़ी जुड़ी है और ये कड़ी है रोजगार मेले की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत का मान, सम्मान और स्वाभिमान बढ़ा है। भारत तेजी से महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है। 2047 तक भारत को बड़ी अर्थव्यवस्था और महाशक्ति के रूप में आगे बढ़ाने के लिए तेजी से कार्य किये जा रहे हैं। इसमें प्रत्येक भारतवासी का योगदान महत्वपूर्ण है। आजादी के अमृत महोत्सव में हम सभी को अपने-अपने क्षेत्रों में तेजी से कार्य कर आगे बढ़ना है। विकसित भारत बनाने के लिए सबको अपना योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर वर्ग के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध होकर निरंतर कार्य कर रही है। उत्तराखण्ड को 2025 तक देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सरकार के विकल्प रहित संकल्प की सिद्धि में सबका सहयोग जरूरी है।

शहरी विकास मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि आज जिन अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी गई हैं, इनके आने से शहरी विकास एवं निकायों के तहत होने वाले कार्यों में तेजी आयेगी। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों से आशा व्यक्त की कि अपने कार्यक्षेत्र में पूरी सेवा और समर्पण भाव से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्म दिवस 17 सितम्बर से 02 अक्टूबर, गांधी जयंती तक मनाये जा रहे स्वछता ही सेवा पखवाड़ा के अन्तर्गत प्रदेश में अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं।

इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, सचिव अरविन्द सिंह ह्यांकी, निदेशक शहरी विकास नितिन भदौरिया, अपर सचिव कर्मेन्द्र सिंह, नगर आयुक्त देहरादून मनुज गोयल एवं शहरी विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। 

पूर्व मंत्री स्व. पूरन चंद्र शर्मा के आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री धामी ने व्यक्त की सांत्वना

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हल्द्वानी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को  अविभाजित राज्य उत्तर प्रदेश में पूर्व मंत्री पर्वतीय विकास विभाग, स्व. पूरन चन्द्र शर्मा के निवास आनंद लोक कालोनी, देवलचौड पहुंचकर सांत्वना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने चरणों में स्थान देने के साथ ही शोक संतृप्त परिवार को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने के लिए भी प्रार्थना की। शोकाकुल परिवार में स्व. पूरन चन्द्र शर्मा की पुत्री अनुलेखा एवं पारिवारिक सदस्यों को ढांढस बंधाया।

इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्यमंत्री अजय भटट, विधायक रामसिंह कैडा, प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, मनोज पाठक, अजय कुमार, प्रदीप जनौटी, रंजन बर्गली, नवीन भटट, मोहन पाठक, जिला पंचायत उपाध्यक्ष आन्नद सिंह दरम्वाल, विनीत अग्रवाल के साथ ही डीआईजी डा. योगेन्द्र सिंह रावत, जिलाधिकारी वंदना, एसएसपी पी.एन. मीणा के साथ ही अन्य लोग मौजूद थे।

स्वच्छता अभियान पखवाड़े के तहत सीएम धामी ने पार्क में झाड़ू लगाकर की सफाई

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  • ‘मन में रखो एक ही सपना स्वच्छ बनाना है भारत अपना’ यह बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छता ही सेवा पखवाडा कार्यक्रम के तहत शहीद पार्क में कही।
  • सीएम शामी ने कहा लंदन दौरे से उत्तराखण्ड में 12 हजार 50 करोड के एमओयू से उत्तराखड में रोजगार के साथ ही पर्यटन को मिलेगा बढावा

हल्द्वानी: मुख्यमंत्री ने रविवार को शहीद पार्क में स्वच्छता ही सेवा पखवाडा में उपस्थित स्कूली बच्चों, महिलाओं, स्वयं सहायता समूह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं प्रधानमंत्री के सपनों को धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनता के स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर व गांव में 12 करोड़ इज्जत घर को बनवाकर स्वच्छता से जोड़ने के साथ ही देश की महिलाओं को सुरक्षा व सम्मान दिया है वह अनुकरणीय हैं। 2014 से शुरु हुआ स्वच्छता अभियान आज जन-जन का अभियान बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने अपने लंदन दौरे के दौरान जी 20 में भारत आए इंग्लैंड के मंत्रियों व डेलीगेट्स से मुलाकात के अनुभव साझा करते हुए कहा कि भारत की मेजबानी में इस वर्ष हुए जी 20 से उन्हें भारत को काफी नजदीकी से देखने को मिला। भारत के लगभग 200 स्थानों पर हुए इस कार्यक्रम से भारत की अनुपम सांस्कृतिक छटा के साथ ही भारत का एक नया उभरता स्वरूप भी देखने को मिला। उनका मानना था की नया भारत अपने विशालतम स्वरूप में विकसित राष्ट्र की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है। विकसित देशों की तरक्की का एक मुख्य कारण स्वच्छता है जिसे भारत ने भी जन अभियान के माध्यम से जोड़कर महाअभियान बना दिया है। आज भारत ने अपनी संकल्प शक्ति से दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्रों से नजदीकियां बढ़ाते हुए विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है।

भारत आए जी 20 के डेलीगेट्स भारत का संदेश लेकर पूरे विश्व में भारत के ब्रांड एंबेसडर बनकर भारत की ख्याति बिखेर रहे है। आज विदेशों की धरती पर भी भारत का नाम रोशन हो रहा है व श्रद्धा भाव से भारत को देखा जा रहा है। विदेशी डेलीगेट्स का मानना है कि उन्हें जी 20 के दौरान भारतीयों में वसुधैव कुटुंबकम् व भाईचारे की भावना पूर्ण रूप से देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने स्वच्छता अभियान पखवाड़े के तहत शहीद पार्क में झाड़ू लगाते हुए पार्क में सफाई भी की। साथ ही शहीद पार्क में शहीदों को श्रद्वासुमन अर्पित किये।

इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट प्रदेश, अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष बेला तोलिया, विधायक भीमताल राम सिंह कैड़ा, नैनीताल सरिता आर्य, मंडी, मेयर डा0 जोेगेन्द्र पाल सिहं रौतेला, अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल डब्बू, डी आई जी डॉक्टर योगेंद्र सिंह रावत, जिलाधिकारी वंदना सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी एन मीणा, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, हेमन्त द्विवेदी, सहित अन्य लोग मौजूद थे।

सीएम धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के आवास पर जाकर दी उन्हें जन्मदिवस की बधाई

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी को जन्मदिवस की बधाई देते हुए उनके स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री ने रविवार को खंडूरी के जन्मदिन के अवसर पर उनके वसंत विहार स्थित आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट एवं संगठन महामंत्री अजेय कुमार ने भी पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी से भेंट कर उनको जन्मदिवस की बधाई दी। 

पकड़ा गया फर्जी DM, नौकरी के नाम पर लगाया चूना, मकान और कार भी हड़पी

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हरिद्वार: ठगी के हर दिन मामले सामने आते रहते हैं। इन मामलों में ठगी का तरीका अलग-अलग होता है। कई बार ठगी के लिए लोग ऐसे-ऐसे कारनामों को अंजाम देते हैं, जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। ऐसा ही एक मामला हरिद्वार में सामने आया है। यहां लोगों को ठगने वाला ठग खुद फर्जी DM बन गया। वो अपने साथ गाड़ियों को काफिला लेकर चलता था और साथ में गनर भी रखता था। नौकरी के नाम पर 70 लाख की धोखाधड़ी के एक मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार आरोपी गैंग बनाकर लोगों को सरकारी नौकरी लगाने का झांसा देता था और नौकरी के नाम पर मोटी रकम वसूल लेता था। इतना ही नहीं उसने नौकरी दिलाने के नाम पर प्लॉट और कार तक हड़प ली थी। हरिद्वार SSP ने बताया कि 21 सितंबर को ज्वालापुर कोतवाली में चेतना अरोड़ा निवासी खन्ना नगर ने मुकदमा दर्ज कराया था। निहार कर्णवाल निवासी खन्नानगर ने उसे खुद को DM बताकर PWD में निरीक्षण अधिकारी और फिर SDM के पद पर नौकरी लगवाने का झांसा देकर धोखाधड़ी की थी।

आरोपी ने खुद को ऊधमसिंहनगर का डीएम बताकर SDM के पद पर नौकरी लगाने के नाम पर 70 लाख मांगे थे। उसने अपने साथी मैमकिला व निशांत कुमार गुप्ता के साथ मिलकर चेतना के भाई का मकान 70 लाख में खरीदने के लिए कहा। 30 अगस्त को रजिस्ट्री ऑफिस में लिखा-पढ़ी कर मकान हड़प लिया। करीब 70 लाख की धोखाधड़ी होने पर जब पैसे वापस मांगे तो वो मर्डर करने की धमकी देने लगा।

मामले की जांच के दौरान एक और मामला सामने आया। आरोपी की मंगेतर ने रानीपुर कोतवाली में शादी का झांसा देकर नौकरी लगवाने के नाम पर उसके माता-पिता से प्लॉट और फर्जी दस्तावेज बनाकर कार हड़पने की शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने का मुकदमा भी दर्ज कराया है। इससे परेशान होकर आरोपी भागने की फिराक में था। लेकिन, ज्वालापुर CO निहारिका सेमवाल, ज्वालापुर कोतवाल कुंदन सिंह राणा, रानीपुर कोतवाल नरेंद्र सिंह बिष्ट ने टीम के साथ आरोपी निहार कर्णवाल को गिरफ्तार कर लिया।

CO निहारिका सेमवाल ने बताया कि आरोपी अपने साथी निशांत कुमार गुप्ता, निखिल बेनिवाल व उसकी माता मेमकिला के साथ मिलकर एक गिरोह के तौर पर काम कर रहे थे। बेरोजगार युवक-युवतियों को साजिश के तहत फंसाकर नौकरी का लालच देकर ठगते थे। आरोपी निहार खुद को DM बताता था इसलिए गाड़ियों और गनर का इंतजाम निशांत करता था। जाल में फंसे बेरोजगारों को नौकरी लालच देकर प्रॉपर्टी डीलर निखिल बेनीवाल के माध्यम से उसके परिवार के नाम जमीन को गिफ्ट करवा लेता था। बाद में आगे दूसरी पार्टी को जमीन बेचते थे। 

कैप्टन गुमान सिंह चिराल : प्रशिक्षण के समय बहाया पसीना युद्ध में खून को बचाता है!

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Captain Guman Singh Chiral
Captain Guman Singh Chiral

प्रकाश चन्द्र पुनेठा, सिलपाटा, पिथौरागढ़

उत्तराखंड का सीमांत जिला पिथौरागढ़ के अन्तर्गत मुनस्यारी एक अति सुन्दर, रमणीय व प्राकृतिक सौन्दर्य युक्त विश्वप्रसिद्ध पर्यटक स्थल है, और तिब्बत की सीमा से लगा हुआ है. इसके अतिरिक्त मुनस्यारी परिश्रमी, बहादुर, शौर्यशाली, व साहसी लोगों की धरती है. मुनस्यारी के निकट, गोरी नदी के किनारे, मदकोट नामक सुन्दर कस्बा है. पिथौरागढ़ से मदकोट की दूरी लगभग 123 किलोमीटर है. मदकोट के दूर-दराज गांवों के नवयुवक भारतीय सेना का अभिन्न अंग बनने के अधिक लालायित रहते हैं. इस क्षेत्र के अधिकतर नवयुवक सत्रह वर्ष की आयु पूरी होते ही सेना में भर्ती होने को प्राथमिकता देते हैं. इसलिए कह सकते है कि मदकोट एक सैनिक बहुल क्षेत्र है.

मदकोट से लगभग 8 किलोमीटर दूर चैना गांव के कैप्टन गुमान सिंह चिराल का सैनिक जीवन वृतांत भी संघर्षमय रहा है. गुमान सिंह जब मात्र दो माह की शिशु अवस्था में थे तो इनके पिता हयात सिंह का निधन हो गया था. तब इनका पालन-पोषण इनके आमा-बूबू व ईजा ने किया था. गांव में इनके परिवार के पास कृषी योग्य लगभग 30 नाली भूमी थी.

पूर्व में हमारे पहाड़ में, प्रत्येक परिवार अपने घर के सदस्यों की उदरपूर्ती के लिए, अपने खेतों से अनाज का भरपूर उत्पादन कर लेता था. तथा खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए खेत में गोबर डालते थे. गाय-भैंस-बैलों से गोबर मिल जाता था. जिस परिवार के पास अधिक खेत, उस परिवार के अधिक पशु धन पाया जाता था. गुमान सिंह के परिवार में, न खेती लायक जमीन कम थी, न पशु धन की.

प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर, स्वच्छ वातावरण में रहते हुए गुमान सिंह का बचपन व्यतीत हुआ. ग्रामीण वातावरण में रहते हुए गुमान सिंह ने कक्षा 6 तक की पढ़ाई गांव के निकट स्कूल से की. पिता के जीवित न रहने से ईजा तथा आमा-बूबू की छत्र छाया में गुमान सिंह का जीवन व्यतीत हो रहा था. गुमान सिंह का शरीर उम्र के साथ बड़ते हुए से हष्ट-पुष्ट हो रहा था. सत्रह वर्ष की आयु में गुमान सिंह एक बलिष्ट शरीर के स्वामी बन गए थे. बचपन से ही गुमान सिंह को सेना में भर्ती होने का शौक था. इस शौक के चलते हुए नवयुवक गुमान सिंह दिनांक 14 जनवरी सन् 1962 के दिन सेना की कुमाऊं रेजिमेनट में भर्ती हो गए.

प्रशिक्षण काल का समय बहुत अधिक कठोर परिश्रम का होता है. सेना में प्रशिक्षण प्राप्त करते समय प्रत्येक कार्य स्थल में अक्सर लिखा होता है,  “प्रशिक्षण के समय बहाया पसीना युद्ध में खून को बचाता है.” प्रशिक्षण काल के समय रंगरुटों को बहुत कठीन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है. गुमान सिंह अपने प्रशिक्षण काल को पूरा करने के पश्चात् भविष्य में जीवन की, नई आशाओं के साथ अरुणाचंल प्रदेश स्थित अपनी रेजिमेन्ट 6 कुमाऊं में पहुँचे हुए मात्र दो-तीन हुए थे कि पड़ौसी देश चीन ने एकाएक आक्रमण कर दिया.

उस समय हमारे देश की सेना के पास आधुनिक हथियार नहीं थे, न गोला बारुद और न युद्ध के लिए तैयारी. हमारे सैनिकों के पास .303 राईफल और मात्र पाँच राउंड उपलब्ध होते थे. जो पर्याप्त नही थे. फिर भी 6 कुमाऊं के सैनिक बहुत बहादुरी के साथ शत्रु देश चीन के साथ लड़े. लेकिन चीन के सैनिक संख्या बल में हमारी सेना के तुलना में बहुत अधिक थे, और आधुनिक हथियारों से सज्जित थे.

जब बिना किसी योजना के कोई कार्य करना पढ़ता है तो वह कार्य सुचारु रुप से नही हो पाता है, वह कार्य अनियंत्रित हो जाता है. हमारे देश की चीन के विरुद्ध युद्ध करने की किसी प्रकार की योजना नही थी, जब चीन ने अचानक आक्रमण कर दिया तो कुछ वीर सैनिक युद्ध भूमी में चीन की सेना का सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए, कुछ सैनिक कैद हो गए और कुछ चीन की सेना की  गिरफ्त से बचने के लिए अनजान वालोंग के जंगल में अपने आप को छुपा लिए. अरुणांचल प्रदेश का अधिकांश क्षेत्र, घने जंगलों वाला पर्वतीय क्षेत्र है. हमारी सेना के जो जवान वालोंग के जंगल में छुप गए थे. उनके संम्मुख भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई. क्योकि वह जवान अपने शरीर में पहने वस्त्रों व अपनी .303 राईफल, बिना गोलियों के, (गोलियां, आक्रमणकारी चीन के सेना के उपर झाौंक चुके थे) इसके अतिरिक्त और कुछ नही ले पाए थे. पेट भरने के  लिए न खाने को कुछ था, न पीने को पानी, न रहने को सिर के उपर छत थी.

जब भूख से बेहाल हो गए, तो इन भूखे प्यासे जवानों ने जंगल में पेड़ों की कोमल पत्तियों को, नरम मुलायम घास को, जंगली कंदमूल फलों को या जंगल में बसे गांव के आदिवासियों द्वारा खेतों में उत्पादित मंडुवा की बालियों को कच्चा खाकर अपनी भूख-प्यास मिटाई.

जंगल में गुमान सिंह भी इन भूखे-प्यासे जवानों के मध्य था. गुमान सिंह व उसके साथ के अन्य जवान, बहुत कष्ट व विपत्तियों को सहन करते हुए, लगभग सोलह दिन तक ब्रह्मपुत्र नदी के सहारे सुरक्षित दिशा में चलते रहे. मार्ग में जो कुछ खाने योग्य समझा, पेड़ों की पत्तियाँ हों, कोमल घास हो, कोई जंगली फल या मंडुवा की बालियों को खाते रहे और चलते रहे. जब 21 नवंबर, सन् 1962 के दिन  के दिन चीन ने एकतरफा युद्ध विराम की घोषणा की, तब इन जवानों की सुध ली गई. हवाई जहाज के द्वारा इनको भोजन के पैकेट नीचे जंगल में गिराए गए, तब इनको खाने को मिल पाया. इन जवानों को आसाम के छबुआ में एकत्रित कर पुनस्र्थापित किया गया

चीन के साथ युद्ध हाने के समाचार के पश्चात् गांव में गुमान सिंह का परिवार बहुत अधिक चिन्तित था. उस समय संपर्क के साधन एकमात्र पत्र हुआ करते थे. मदकोट से डाक द्वारा प्रेषित किया गया पत्र एक माह पश्चात् अरुणांचल प्रदेश में पहुंचता था. गुमान सिंह के अरुणांचल प्रदेश अपनी रेजिमेनट में पहुंचते ही चीन ने आक्रमण कर दिया था. फिर वालोंग के बीहड़ जंगल में  अपने साथी सैनिकों के साथ गुमनाम रहा. शेष संसार के किसी भाग से इनका, कही से भी संपर्क नही था. परिवार वाले अति दुःखद तथा दुविधा की स्थिति में थे. युद्ध विराम के पश्चात् इन जवानों को अपनी रेजिमेन्ट में पुनस्र्थापित होने के पश्चात्, इनके परिवार वालों को इन जवानों की कुशलता के बारे में जानकारी हो पाई.

Captain Guman Singh Chiral with wife
Captain Guman Singh Chiral with wife

गुमान सिंह अपने परिवार के प्रति उत्तरदायित्वों का निर्वाह करते हुए अपने सैनिक कर्मों का निर्वहन बहुत उचित प्रकार से कर रहे थे. सेना में रहते हुए सैनिकों को, देश के एक कोने से दूसरे कोने तक की, अनगिनत यात्राएं करनी पढ़ती हैं. यह यात्राएं सेना में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए, किसी प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने के लिए, स्थानान्तरण होने पर, अवकाश के मध्य अपने घर आने-जाने पर, किसी आपदा के आने पर बचाव हेतु या किसी वाह्य देश के आक्रमण करने की स्थिति में करनी पढ़ती हैं. तिब्बत की सीमा से लगे सीमांत जिले पिथौरागढ़ के मदकोट के दूरस्थ गांव चैना रहने वाले सीधे-सरल प्रकृति के गुमान सिंह हमारे देश के पूर्व में स्थित देश बर्मा की सीमा से सटे  नागालैंड राज्य में अपनी रेजिमेंट के साथ रहे. सर्वविदित है कि नागालैंड राज्य आतंकवाद से ग्रस्त है. गुमान सिंह नागालैंड में निर्भीक होकर आतंकवादियों का सामना करते हुए अपने सैनिक कर्म करते रहे.

6 कुमाऊं रेजिमेन्ट के नागालैंड में रहते हुए आतंकवादियों की गतिविधियाँ लगभग शून्य हो गई थी. 6 कुमाऊं रेजिमेन्ट का नागालैंड में कार्यकाल वीरता पूर्ण तथा शौर्यशाली रहा. नागालैंड के पश्चात्  रेजिमेंट मेरठ आ गई थी. 6 कुमाऊं रेजिमेन्ट का मेरठ में शांतिकालीन प्रवास था. रेजिमेंट के जवानों ने सोचा, कुछ समय मेरठ में आराम के साथ समय व्यतीत करगें. लकिन अचानक ही पाकिस्तान ने सितंबर में युद्ध आरंभ कर दिया. 6 कुमाऊं रेजिमेन्ट ने तुरंत अमृतसर के निकट अटारी की ओर कूच किया. अटारी भारतीय क्षेत्र का  अंतिम गांव है, उसके पश्चात् पाकिस्तान की सीमा लगती है. गुमान सिंह व उनकी 6 कुमाऊं रेजिमेंट ने, पाकिस्तानी सेना का मुंह तोड़ उत्तर देते हुए इच्छोगिल नहर पार कर, पाकिस्तानी गांव डोगराई तक, अपने अधिकार में ले लिया था.

Captain Guman Singh Chiral
Captain Guman Singh Chiral

पाकिस्तान का एक मात्र उद्देश्य था, भारत की पश्चिमी सीमा गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में एक साथ आक्रमण करके, भारत की सेना का ध्यान भटकाना और कश्मीर घाटी को अपने अधिकार में लेना. लेकिन पाकिस्तान की यह सोच, एक बहुत भयंकर भूल थी. पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी. हमारे देश भारत की सेना ने पाकिस्तान की सेना को परास्त करते हुए, उसके बहुत बड़े क्षेत्र को अपने अधिकार में ले लिया था. यहाँ तक की भारत की सेना लाहौर से मात्र 13 किलोमीटर दूर रह गई थी. हमारे देश की सेना बड़ी तीव्र गति से आगे बड़ रही थी, लेकिन तभी दोनों देशों के मध्य युद्धविराम की घोषणा कर दी गई.

6 कुमाऊं रेजिमेन्ट के नौजवान सैनिक गुमान सिंह ने पाकिस्तान के साथ हुए इस युद्ध में अपने युद्ध कौशल का बहुत उत्तम प्रर्दशन किया था. इसके पश्चात् गुमान सिंह अपनी रेजिमेन्ट के साथ हिमांचल प्रदेश में यौल कैम्प आ गए थे. गुमान सिंह ने अपने पाँच वर्ष के अल्प सैनिक जीवन में दो युद्धों का सामना कर चुके थे. इन युद्धों से वह और अधिक परिपक्व सैनिक बन चुके थे.

हमारे देश को भविष्य में अपनी सीमाओं की रक्षा के प्रति सतर्क व सावधान रहने की आवश्यकता महसूस हुई. सेना को शक्तिशाली व आधुनिक हथियारों से सज्जित होना आवश्यक समझा गया. इसी कड़ी में सेना में अनेक नई रेजिमेंटों का गठन किया गया. रानीखेत में कुमाऊं रेजिमेंट की एक नई 12 कुमाऊं रेजिमेंट का गठन किया गया. गुमान सिंह सन् 1966 में 6 कुमाऊं रेजिमेंट से 12 कुमाऊं रेजिमेंट में स्थानांतरित होकर चले गए. 12 कुमाऊं रेजिमेंट का यह सौभाग्य था कि गुमान सिंह जैसा आज्ञाकारी और कुशल सैनिक उनको मिल गया था.

12 कुमाऊं रेजिमेंट रानीखेत में उच्च प्रकार से स्थापित होकर देश के अनेक क्षेत्रों में गई और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्रत्येक स्तर में श्रेष्ठ प्रर्दशन किया. सेना की रेजिमेंटों को देश की सीमा में रक्षा के लिए तैनात रहना पढ़ता है. सीमा की रक्षा के साथ ही देश में विभिन्न प्रकार की जलवायु का सामना करने के लिए और विभिन्न प्रकार की धरातलीय प्राकृतिक बनावटों के मध्य रहने का अभ्यस्त होने के लिए वहाँ रहना पढ़ता है. सन् 1971 में जब 12 कुमाऊं रेजिमेंट नागालैंड में थी, उस समय पाकिस्तान ने अचानक हमारे देश के विरुद्ध युद्ध आरंभ कर दिया. 12 कुमाऊं रेजिमेंट अपने ब्रिगेड के साथ त्रिपुरा में उस समय के पूर्वी पाकिस्तान सीमा के निकट आ गई थी.

गुमान सिंह अपनी रेजिमेंट के आर.सी.एल. गन के विशेषज्ञ माने जाते थे. पाकिस्तान के साथ युद्ध आरंभ होने की आकंाशा के कारण गुमान सिंह को बंम्बई आर.सी.एल. गनों को लाने के लिए भेजा गया. बंबई से बड़ी कुशलता के साथ वह गनों के लेकर आए. तब तक पाकिस्तान के साथ युद्ध आरंभ हो चुका था. गुमान सिंह ने अपनी आर.सी.एल. गनों के द्वारा अचूक निशाने लगाकर पाकिस्तानी सेना के बड़े-बड़े बंकरों का विध्वंस किया. पाकिस्तान की सेना को पछाड़ते हुए 12 कुमाऊं रेजिमेंट पूर्वी पाकिस्तान के कोमिल्ला तक पहुँच गई थी. कोमिल्ला में 12 कुमाऊं रेजिमेंट ने ढाका की दिशा में जाने के लिए रणनीति तैयार की, वह अपने विजय अभियान को और अधिक आक्रमक बनाते हुए आगे बड़ते गई. 

12 कुमाऊं रेजिमेंट ने 6 दिसंबर को एंलोंटगंज में आक्रमण किया. पाकिस्तान की सेना को अत्यधिक जान-माल का नुकशान हुआ. पाकिस्तान के अनेक तोप, टैंक, गाड़ियाँ व जवान हताहत हुए और 12 कुमाऊं रेजिमेंट के चार जवान और एक जे. सी. ओ. नायब सूबेदार शंकर दत्त वीर गति को प्राप्त हुए. नायब सूबेदार शंकर दत्त को मरणोपरांत वीर चक्र अन्य चार जवानों को सेना मेडल से पुरस्कृत  किया गया. 12 कुमाऊं रेजिमेंट को एंलोंटगंज में विजय मिलने के के पश्चात् उनका विजय अभियान पूरी तैयारी के साथ और आगे अग्रसर हो गया. पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों का मुख्य केन्द्र दाउदकांदी शहर था. दाउदकांदी सेना मुख्यालय से ही पाकिस्तानी सेना को दिशा-निर्देश मिलते थे. अतः 12 कुमाऊं रेजिमेंट ने दाउदकांदी में स्थित पाकिस्तानी मुख्यालय को नष्ट करने का संकल्प लिया गया.

योजना के अनुसार 12 कुमाऊं रेजिमेंट ने दाउदकांदी को अपने फायरींग रैन्ज में ले लिया था. आर. सी. एल. टुकड़ी के कमांडर गुमान सिंह थे. उन्होंने अपने दिशा-निर्देश में, आर. सी. एल. गनों से फायर करवा कर पाकिस्तानियों के बंकर, पिलबाँक्स व अनेक महत्वपूर्ण स्थानों को तहस-नहस कर दिया था. गुमान सिंह के द्वारा आर. सी. एल. गनों का कराया गया फायर कभी व्यर्थ नही गया, हमेशा उनका पिशाना अचूक रहता था. गुमान सिंह द्वारा आर. सी. एल. गनों का फायर करने का अर्थ होता था, शत्रु की बरबादी. दाउदकांदी में पाकिस्तान की सेना को बहुत अधिक जान-माल का नुकशान हो चुका था. बाद में भारतीय सेना की तोपों ने गरजकर दाउदकांदी में आग के गोले बरसाने आरंभ कर दिए. इसके पश्चात् दाउदकांदी शहर पूरा बरबाद हो गया था.

Sena Medal

12 कुमाऊं रेजिमेंट की ब्रेबो कम्पनी ने पूरे दाउदकांदी को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया. इस वीरतापूर्ण कार्य को करने के उपरांत ब्रेबो कम्पनी के कम्पनी कमांडर को वीर चक्र तथा सैंकन्ड-इन-कमांड को मैंनसनडिस्पैच दिया गया. इसके पश्चात् 12 कुमाऊं रेजिमेंट जल और वायु मार्ग से होते हुए ढाका के निकट नारायणगंज पहुंच गई. पाकिस्तान की सेना की भारत की सेना के हाथों करारी हार हुई.

सर्वविदित है कि सन् 1971 के युद्ध में हमारा देश भारत विशाल रुप से विजयी रहा, पाकिस्तान के 90,000 से अधिक सैनिकों ने भारत की सेना के समक्ष आत्मसमर्पण किया था. गुमान सिंह अपनी रेजिमेंट के साथ पाकिस्तानी कैदियों, उनके हथियारों तथा गोला-बारुद की सुरक्षा में तैनात रहे. गुमान सिंह इस मध्य अपने सैन्य कर्म करते हुए बहुत अधिक व्यस्त रहे, इतने अधिक व्यस्त रहे कि दो वर्ष तक वह अपने घर, अपने परिवार से मिलने अवकाश तक नही जा पाए. युद्ध समाप्त होने के पश्चात् अन्य सैन्यकर्म करने के बाद गुमान सिंह अपने परिवार के पास अवकाश पर पहुँचे.

गुमान सिंह एक अनुशासित, कर्मठ और आज्ञाकारी सैनिक होने से समय-समय में सिपाही से लेकर सूबेदार, आर्डनरी कैप्टन के पद में उन्नति पाते रहे. सन् 1984 में उड़ी में एल.ओ.सी के निकट गुमान सिंह सूबेदार के पद में रहते हुए एक पोस्ट में तैनात थे. इस पोस्ट में पाकिस्तान की सात पोस्टों से फायर आता था. सीमा पार से फायरिंग में गुमान सिंह व एक जवान जयभान सिंह घायल हो गए थे. जिस कारण चिकित्सा के लिए श्रीनगर के एम.एच. में लगभग दो माह से अधिक समय तक रहे. स्वस्थ हाने के पश्चात् जवान जयभान सिंह को सेना मेडल व गुमान सिंह को कमन्डेशन कार्ड दिया गया. गुमान सिंह ने बहुत लगन के साथ अपना सेना सेवा का शेष समय बहुत स्वाभिमान के साथ व्यतीत किया. और जनवरी सन् 1990 में कैप्टन गुमान सिंह चिराल, सेवामुक्त होकर अपने घर आ गए.

संदर्भः कैप्टन गुमान सिंह चिराल वर्तमान में, इस समय वह मदकोट कस्बे में अपने परिवार के साथ स्वस्थ और वह सुखी जीवन व्यतीत कर रहे है. 87 वर्ष आयु और लम्बी-चैड़ी कद-काठी के कैप्टन गुमान सिंह लगभग जोश और आत्मविश्वास से भरपूर है. अपने सैनिक जीवन के संस्मरण कैप्टन गुमान सिंह चिराल ने लेखक को स्वयं सुनायें.

(लेखक सेना के सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं. एक कुमाउनी काव्य संग्रह बाखली व हिंदी कहानी संग्रह गलोबंध, सैनिक जीवन पर आधारित ‘सिलपाटा से सियाचिन तक’ प्रकाशित. कई राष्ट्रीय पत्र—पत्रिकाओं में कहानियां एवं लेख प्रकाशित.)

 

कैबिनेट मंत्रियों ने सीएम धामी के ब्रिटेन दौरे को निवेश की दृष्टि से राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने वाला बताया, मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए जताया आभार

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का लंदन दौरे के बाद देहरादून पहुंचने पर कैबिनेट मंत्रियों सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल तथा रेखा आर्या द्वारा उनका स्वागत किया गया। राज्य में निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए लंदन और बर्मिंघम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुए रोड शो और बैठकों में 12 हजार 05 सौ करोड़ से अधिक के प्रस्तावों पर सहमति बनने पर सभी ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

कैबिनेट मंत्रियों ने मुख्यमंत्री के ब्रिटेन दौरे को निवेश की दृष्टि से राज्य की आर्थिकी को मजबूत करने वाला बताया। मुख्यमंत्री के यू.के. भ्रमण से वहां के उद्यमियों के साथ ही प्रवासी उत्तराखण्डवासियों द्वारा राज्य में निवेश के लिये की गई पहल निश्चित रूप से मुख्यमंत्री की अन्य देशों के प्रस्तावित दौरे तथा देश के प्रमुख शहरों में आयोजित होने वाले रोड शो में भी राज्य के प्रति और अधिक निवेशक आकर्षित होंगे। ये प्रयास माह दिसम्बर में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 2.50 लाख करोड के निवेश के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी मददगार होंगे।

उन्होंने प्रवासी उत्तराखण्डवासियों और उत्तराखंड सरकार के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करने तथा उनके निवेश प्रस्तावों पर त्वरित कार्यवाही करने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में एक उत्तराखण्ड अप्रवासी सेल बनाये जाने के मुख्यमंत्री के निर्णय की भी सराहना की है। सभी मंत्रीगणों का मानना है कि मुख्यमंत्री द्वारा राज्यहित में की गई पहल निश्चितरूप से राज्य के पर्यटन तथा उद्योगों को भी गति प्रदान करने वाला होगा। इससे राज्य के युवाओं को रोजगार के अवसर तो उपलब्ध होंगे ही साथ ही प्रदेश की आर्थिकी को भी नया संबल प्राप्त होगा।

ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री द्वारा फ्रांस के पोमा ग्रुप के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्रों और सुदूर क्षेत्रों को रोपवे द्वारा जोड़ने तथा जन परिवहन की दृष्टि से इस माध्यम को प्रयोग में लाने के लिये 02 हजार करोड़ रुपए का करार किया गया। पोमा ग्रुप द्वारा राज्य में देश का पहला रोपवे मैन्युफैक्चरिंग पार्क विकसित किए जाने के संदर्भ में संभावनाएं तलाशने हेतु कार्य करने का भी प्रस्ताव दिया गया। उसके बाद इंग्लैंड में स्थित भारतीय दूतावास में पर्यटन क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियों में शामिल लोगों के साथ बैठक में उत्तराखंड में पर्यटन गतिविधियों में तेजी लाने हेतु कार्ययोजना पर मंथन किया गया तथा उन्हें प्रदेश की नई पर्यटन नीति के संबंध में जानकारी दी गई।

यही नही उत्तराखंड में विभिन्न स्थानों पर केबल कार परिवहन व्यवस्था विकसित करने तथा औली, दयारा बुग्याल और मुनस्यारी में शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने हेतु विंटर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन विकसित किए जाने हेतु सहमति जताते हुए अमेरिका के के.एन. ग्रुप के साथ 4800 करोड़ रुपए का निवेश करार किया गया। ब्रिटिश पार्लियामेंट के लार्ड मेयर तथा बर्मिंघम विश्वविद्यालय के कुलपति बिली मोरया के साथ हुई बैठक में उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं के विषय में चर्चा की गई। तथा उत्तराखंड में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाने हेतु सहमति जताई गई। उत्तराखण्ड में निवेश हेतु विभिन्न कंपनियों के 80 डेलिगेशनों के साथ ही सघन बैठक (लंदन रोड शो) में लगभग 1250 करोड़ रूपये के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किये गये।

मुख्यमंत्री द्वारा ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर में आयोजित, उत्तराखंड में निवेश हेतु विभिन्न कंपनियों के 250 डेलिगेशनों के साथ हुई सघन बैठक (बर्मिघम रोड शो) में लगभग 1500 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए गए। तथा ब्रिटेन में कार्यरत विभिन्न उद्योग समूहों के साथ हुई बैठक में पर्यटन एवं विनिर्माण क्षेत्रों में हुए करार के अंर्तगत 3300 करोड़ रुपए के अनुबंध पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। 

भव्य स्वागत : मुख्यमंत्री के प्रयासों से राज्य में 12 हजार 05 सौ करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर हुआ करार

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के यूनाइटेड किंगडम दौरे के बाद देहरादून पहुंचने पर रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल के मैदान में मंत्रीगणों, विधायकगणों एवं पार्टी पदाधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। राज्य में निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए लंदन और बर्मिंघम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुए रोड शो और बैठकों में 12हजार 05 सौ करोड़ से अधिक के प्रस्तावों पर सहमति बनने पर मंत्रीगणों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए यू.के. में आयोजित विभिन्न बैठकों में राज्य में लगभग 12 हजार 05 सौ करोड़ रूपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर करार हुआ। ब्रिटेन के पर्यटन मंत्री के साथ उत्तराखंड और ब्रिटेन के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने हेतु कार्ययोजना बनाने के लिए सहमति भी बनी।

मुख्यमंत्री के यूनाइटेड किंगडम से उत्तराखंड आगमन पर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, प्रेमचंद अग्रवाल, गणेश जोशी, सुबोध उनियाल, रेखा आर्या, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायकगणों एवं पार्टी पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

उत्तराखंड के सभी स्कूलों में रविवार को चलेगा स्वच्छता अभियान, शिक्षा महानिदेशक के निर्देश पर आदेश हुए जारी

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देहरादून।  महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा एवं परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा बंशीधर तिवारी के निर्देश पर समग्र शिक्षा के अपर निदेशक डॉक्टर मुकल सती के द्वारा सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं कि स्वच्छ शहर स्वच्छ गांव बनाने हेतु प्रधानमंत्री द्वारा दिनांक 01 अक्टूबर 2023 को प्रातः 11ः00 बजे सभी नागरिकों द्वारा सामूहिक रूप से स्वच्छता के लिए 1 घण्टे के श्रमदान का आह्वान किया गया है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के लिए उनकी जयन्ती की पूर्व संध्या पर एक स्वछांजलि होगी। इस स्वच्छता अभियान में प्रदेश के सभी विद्यालयों में दिनांक 01 अक्टूबर 2023 को प्रातः 10ः00 बजे स्वच्छता के लिए श्रमदान हेतु सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु निम्न कार्यवाही की जाय।

1. सभी विद्यालयों में 01 अक्टूबर 2023 को प्रभात फेरी निकाली जाय, तथा इसके उपरान्त विद्यालयों की साफ सफाई की जाय।

2. विद्यालय परिसर में कूड़ा/प्लास्टिक एकत्रित न हो, तथा प्लास्टिक का उपयोग न करने पर निरन्तर बल दिया जाय।

3. कार्यालयों में प्रातः 10ः00 बजे साफ-सफॉई की जाय।

4. हमारा स्वच्छ विद्यालय हमारा स्वच्छ कार्यालय का प्रचार प्रसार किया जाय।

5. छात्र-छात्राओं को गन्दगी से फैलने वाले रोगों एवं उनसे बचाव की जानकारी दी जाय।