
रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ती महिलाएं
अशिता डोभालपुराने समय में एक कहावत थी कि यदि कोई व्यक्ति थका हुआ सा दिखता था तो कहा जाता था कि तुम कौन सा "हल चला कर आए हो या हल लगाकर आए हो".
वर्तमान समय में कोरोना वायरस के प्रकोप से सभी लोग अपने—अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं. सभी अपना समय अपने तरीके से व्यतीत कर रहे हैं. कोई पेंटिंग, बागवानी, नगदी फसल उगाकर कर रहे तो कोई खाने पीने की चीजों पर अपना हाथ आजमा रहे हैं. मैंने भी शुरुआत में रवांई घाटी के परम्परागत व्यंजनों पर अपना हाथ आजमाया, फिर कभी—कभार ऑफिस के छोटे—मोटे काम करके समय का पता नहीं चलता था पर लॉकडॉउन में एक अनुभव लेने का मौका मेरे हाथों में आ गया, वो था हल चलाना. पिछले कुछ समय से मेरे दिमाग में एक बात रह रहकर आ रही थी कि जिंदगी में लगभग सारे कामों में हाथ आजमाया है, एक बार हल पकड़ने का मौका मिल जाए तो मानो सारा जहां मिल जाए. रोज शाम को हम टहलने के लिए निकलते हैं, कभी क...









