
देश का पहला विशेष ‘अग्निवीर सेल’ स्थापित करने की तैयारी, सरकारी सेवाओं में आरक्षण से लेकर स्वरोजगार और होमस्टे तक मिलेगा सहयोग
- हिमांतर वेब डेस्क, देहरादून
देहरादून के कुआंवाला स्थित यूथ फाउंडेशन ट्रेनिंग एरिया में शुक्रवार का दिन सामान्य प्रशिक्षण दिवस जैसा नहीं था। सैन्य सेवा का सपना लेकर कठिन अभ्यास कर रहे युवाओं के बीच भविष्य, सम्मान और राष्ट्रसेवा को लेकर संवाद हो रहा था। अनुशासन से भरे इस वातावरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब कहा कि सेना में सेवा देने वाले प्रत्येक युवा को सम्मानजनक भविष्य मिलना चाहिए, तो उपस्थित युवाओं के लिए यह केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि उनके भविष्य को लेकर राज्य सरकार के संकल्प का संदेश था।
यूथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित ‘युवा अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अग्निवीरों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इनमें सबसे प्रमुख है सेवामुक्त होकर लौटने वाले अग्निवीरों को राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने के लिए एक समर्पित ‘अग्निवीर सेल’ की स्थापना। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तराखंड इस प्रकार की विशेष व्यवस्था लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।
यह सेल अग्निवीरों को केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके पुनर्वास, रोजगार, स्वरोजगार, प्रशिक्षण और विभिन्न विभागों में उपलब्ध अवसरों तक पहुंच बनाने में भी सहायता करेगा। सेना में चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद लौटने वाले युवाओं को नागरिक जीवन में नई शुरुआत करने के दौरान जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, यह व्यवस्था उन्हें उन चुनौतियों से उबरने में सहयोग प्रदान करेगी।
होमस्टे और सीमावर्ती गांवों में स्वरोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि पर्यटन विभाग की होमस्टे योजना के अंतर्गत पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को होमस्टे स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान दिया जाएगा। उत्तराखंड की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह पहल अग्निवीरों को अपने गांव और क्षेत्र में रोजगार स्थापित करने का अवसर दे सकती है।
इसके साथ ही सीमावर्ती गांवों में स्थानीय निवासियों, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों के लिए स्वरोजगार से संबंधित अवस्थापना सुविधाएं विकसित करने हेतु विशेष अनुदान स्वीकृत किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि सीमांत क्षेत्रों से पलायन रुके, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो और सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवा अपने अनुभव, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का उपयोग राज्य के विकास में कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अग्निवीरों का सम्मान राज्य सरकार की प्राथमिकता है और उनके उज्ज्वल भविष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है। भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण और निःशुल्क प्रशिक्षण की व्यवस्था भी की जा रही है।
सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण
सेना में सेवा पूरी कर लौटने वाले अग्निवीरों के लिए राज्य की सरकारी सेवाओं में अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। पुलिस, वन विभाग, आपदा प्रबंधन सहित विभिन्न सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
इसके साथ ही अधिकतम आयु सीमा में छूट और भर्ती प्रक्रियाओं में आवश्यक प्राथमिकता देने का प्रावधान भी किया गया है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा संवेदनशील राज्य में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं का अनुभव पुलिस, वन सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि अग्निवीर बनना केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च अवसर है। सेना में बिताए गए चार वर्ष उनके पूरे जीवन की महत्वपूर्ण पूंजी बनेंगे। इस दौरान प्राप्त अनुशासन, साहस, तकनीकी प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता उन्हें भविष्य की प्रत्येक चुनौती के लिए तैयार करेगी।
सैनिक परिवारों के प्रति सरकार का संकल्प
उत्तराखंड की पहचान लंबे समय से सैनिक बहुल राज्य के रूप में रही है। राज्य के हजारों परिवारों का सेना से सीधा संबंध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अग्निवीरों, सैनिकों, पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
शहीद सैनिकों के परिवारों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दी गई है। शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में समायोजित करने की व्यवस्था की गई है। सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।
वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली सम्मान राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। युद्ध विधवाओं और दिव्यांग सैनिकों के लिए विशेष सहायता तथा पूर्व सैनिकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी राज्य सरकार ने की है।
सैनिक पुत्र का भावनात्मक जुड़ाव
अग्निवीरों से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री का सैनिक परिवार से जुड़ा व्यक्तिगत अनुभव भी सामने आया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं एक सैनिक के पुत्र हैं और बचपन से सैनिकों का अनुशासन, त्याग तथा राष्ट्र के प्रति समर्पण देखते आए हैं।
उन्होंने अपने पिता से संस्कार और अनुशासन सीखने का उल्लेख करते हुए कहा कि सैनिकों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के बीच होने की अनुभूति होती है। यही कारण है कि सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़े विषय उनके लिए केवल प्रशासनिक नीतियों का हिस्सा नहीं, बल्कि भावनात्मक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी हैं।
पारदर्शी भर्तियों से युवाओं में बढ़ा विश्वास
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में सरकारी भर्तियों और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भर्ती घोटालों से जुड़े मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया और राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया।
इस कानून में नकल माफिया के विरुद्ध उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, 100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया है। सख्त कानून और पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप पिछले पांच वर्षों में राज्य के 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।
उन्होंने कहा कि अब पात्र युवाओं को बिना किसी भेदभाव और दबाव के योग्यता के आधार पर नौकरी मिल रही है। इससे राज्य के युवाओं में सरकारी भर्ती व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।
विकास और रोजगार के केंद्र में युवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा है। प्रधानमंत्री ने बाबा केदार की भूमि से 21वीं सदी के तीसरे दशक को उत्तराखंड का दशक बताया था। राज्य सरकार इसी संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त नकल विरोधी कानून बनाने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे कदमों का उल्लेख किया। किसानों के लिए कीवी, एप्पल और तिमरू मिशन जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य ने सतत विकास लक्ष्यों की सूची में पहला स्थान हासिल किया है और उसे फिल्म फ्रेंडली स्टेट के रूप में भी सम्मानित किया गया है।
चारधाम यात्रा, आदि कैलाश यात्रा और शीतकालीन यात्रा जैसी पहलों से पर्यटन को बढ़ावा मिला है। मुख्यमंत्री के अनुसार, बीते चार वर्षों में 24 करोड़ से अधिक पर्यटक उत्तराखंड आए हैं। पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के विस्तार से अब राज्य के युवा अपने गांव और घर में ही रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं।
राष्ट्रसेवा से राज्य निर्माण तक
‘युवा अग्निवीर संवाद’ कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—सेना से लौटने वाला अग्निवीर केवल पूर्व सैनिक नहीं होगा, बल्कि वह प्रशिक्षित, अनुशासित और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार युवा होगा। राज्य सरकार की योजनाएं उसके सैन्य अनुभव को पुलिस, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, स्वरोजगार और सीमांत क्षेत्रों के विकास से जोड़ने का प्रयास हैं।
विशेष ‘अग्निवीर सेल’, सरकारी सेवाओं में आरक्षण, आयु सीमा में छूट, निःशुल्क प्रशिक्षण और स्वरोजगार के लिए विशेष अनुदान जैसी पहलें अग्निवीरों के सैन्य जीवन और नागरिक भविष्य के बीच मजबूत सेतु का काम कर सकती हैं।
उत्तराखंड के युवाओं की सेना में सेवा की गौरवशाली परंपरा रही है। अब राज्य सरकार का प्रयास है कि राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा करने वाला प्रत्येक युवा सेवा पूरी करने के बाद भी सम्मान, सुरक्षा और अवसरों से जुड़ा रहे। राष्ट्रसेवा से प्राप्त अनुभव उसके जीवन की अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि एक नए और सम्मानजनक भविष्य की शुरुआत बने।
कार्यक्रम में विधायक बृजभूषण गैरोला, यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेवानिवृत्त), मेजर जनरल गुलाब सिंह रावत (सेवानिवृत्त), देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल सहित अनेक अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
