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क्या है चालदा महाराज के प्रवास यात्रा क्रम? जानिए…

क्या है चालदा महाराज के प्रवास यात्रा क्रम? जानिए…

देहरादून
भारत चौहानकश्मीर से हनोल की महासू महाराज की प्रवास यात्रा का एक लंबा क्रम है, हनोल में प्रकटीकरण के पश्चात बोटा महाराज हनोल में ही विराजित रहते हैं जबकि चालदा because महाराज जौनसार बावर, उत्तरकाशी एवं हिमाचल प्रदेश में प्रवास करते हैं ज्योतिष चालदा महाराज की प्रवास यात्रा के इतिहास की लंबी कढ़ी है परंतु ब्रिटिश सरकार ने चालदा महाराज के प्रवास को दो भागों में विभक्त किया एक भाग साटी बिल (तरफ) मतलब जौनसार बावर एवं आंशिक हिमाचल का क्षेत्र जिसके वजीर दीवान सिंह जी है जो बावर क्षेत्र के बास्तील गांव के निवासी है और दूसरा भाग पासी बिल because मतलब उत्तरकाशी जनपद व हिमाचल प्रदेश का क्षेत्र. जिसके वजीर जयपाल सिंह जी है जो ठडीयार गांव के निवासी है. (यहां यह बात ध्यान रखने योग्य है कि चालदा महाराज के वजीर महाराज के प्रवास यात्रा की संपूर्ण व्यवस्था करते हैं. कहां पर कब प्रवास होना है यह तय करन...
पिथौरागढ़ के मूनाकोट में केन्द्रीय रक्षामंत्री एवं मुख्यमंत्री ने किया शहीद सम्मान यात्रा का शुभारम्भ

पिथौरागढ़ के मूनाकोट में केन्द्रीय रक्षामंत्री एवं मुख्यमंत्री ने किया शहीद सम्मान यात्रा का शुभारम्भ

पिथौरागढ़
हिमांतर ब्यूरो, पिथौरागढ़उत्तराखंड में पांचवा धाम सैन्यधाम बन रहा है. because सैन्यधाम में शहीद सैनिकों की आंगन की मिट्टी आयेगी और भविष्य में भी जो वीर सपूत देश के लिए शहीद होगें, उनके आंगन की मिट्टी भी सैन्यधाम में लाई जायेगी. ज्योतिष आज केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ के मूनाकोट में शहीद सम्मान यात्रा का शुभारम्भ किया एवं इस अवसर पर शहीद सैनिकों के परिजनों को किया गया because सम्मानित भी किया. इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, बिशन सिंह चुफाल, सांसद अजय टम्टा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एव विधायक मदन कौशिक, विधायक चन्द्रा पंत उपस्थित थे. ज्योतिष उत्तराखंड, देवभूमि, तपोभूमि और वीरभूमि- केन्द्रीय रक्षा मंत्री इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीदों को नमन करते हुए कहा कि हमा...
हंसध्वनि थियेटर में उत्तराखंड के कलाकारों ने बांधा समा

हंसध्वनि थियेटर में उत्तराखंड के कलाकारों ने बांधा समा

देश—विदेश
40वें भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारम्भहिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीप्रगति मैदान में चल रहे 40वें भारत अन्तर्राष्ट्रीय because व्यापार मेले में उत्तराखंड दिवस समारोह के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या एवं उत्तराखंड पैवेलियन में बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड के पर्यटन, तीर्थाटन, धार्मिक मेले एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने दीप प्रज्वलित कर शुभारम्भ किया.ज्योतिष इस अवसर पर हंसध्वनि थियेटर because में उत्तराखंड के कलाकारों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गये. सांस्कृतिक सन्ध्या के माध्यम से राज्य की विशिष्ट संस्कृति का अवलोकन विभिन्न क्षेत्रों से आये दर्शकों द्वारा किया गया.ज्योतिष कोविड-19 के पश्चात् प्रथम बार आयोजित हो रहे भारत अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज द्वा...
हरिद्वार की यात्रा बिना ऋषिकेश जाए पूरी नहीं होती…

हरिद्वार की यात्रा बिना ऋषिकेश जाए पूरी नहीं होती…

ट्रैवलॉग
   डॉ. कायनात काजी फोटोग्राफर, ट्रैवल राइटर और ब्लॉगर, देश की पहली सोलो फिमेल ट्रैवलर  हरिद्वार की यात्रा बिना ऋषिकेश जाए पूरी नहीं होती, आप जब भी हरिद्वार जाएं एक दिन एक्स्ट्रा लेकर जाएं जिससे ऋषिकेश भी घूम आएं. ऋषिकेश हरिद्वार से 25 किमी दूर है. because तीन दिशाओं से पहाड़ियों से घिरा, जिसके बीचों बीच से पावन नदी गंगा बहती है. इसे देवभूमि भी कहते हैं. जहां हरिद्वार लोगों से भरा हुआ लगता है जैसे वहां हमेशा एक मेला लगा हो वहीं ऋषिकेश एक शांत जगह है. हिमालय की चोटियों से निकल कर गंगा मैदानों में यहीं से प्रवेश करती है.यहीं पर लक्ष्मण झूला स्थित है. ऐसी मान्यता है कि यहां श्री लक्ष्मण जी ने कभी जूट की रस्सियों से बने झूले से गंगा नदी को पार किया था.ज्योतिष लक्ष्मण झूला करीब 1929 में बना था. because यह झूला शहर को एक सिरे से दूसरे सिरे तक जोड़ता है. इसकी लम्बाई लगभग 450 फीट औ...
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में फले और फैलेगी वंशबेल

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में फले और फैलेगी वंशबेल

देहरादून
प्रकाश उप्रेतीउत्तराखंड राज्य ने ही 21 पूरे नहीं किए हैं बल्कि उत्तराखंड की राजनीति को भी 22वां लग गया है. इन बीते वर्षों को अगर खलिया टॉप और द्रोणागिरी से देखेंगे तो लगेगा because कि 21 वर्षों में हम उल्टे पाँव चले हैं. वहीं अगर ऋषिकेश, देहरादून, अल्मोड़ा और कोटद्वार में बचे किसी खेत के किनारे बैठकर 21 वर्षों की यात्रा को देखा जाए तो महसूस होगा कि हम सिर्फ 'बहे' हैं. पार लगे भी तो वहाँ जाकर जहाँ अब एम्स बन रहा है. इन परिस्थितियों की जिम्मेदार वह ठेकेदारी वाली राजनीति है जिसने पहाड़ को फोड़कर 'मैदान' कर दिया. हर चुनाव में पहाड़ पहले से और ज्यादा  मैदान हुए तो वहीं राजनीति सुगम.ज्योतिष प्रदेश में इस बार because का चुनाव 22वे पर ही है. मतलब हर नेता जोर लगा रहा कि इस बार टिकट बेटा- बेटी या घर के किसी सदस्य को मिल जाए. यह कवायद दोनों (भक) पार्टियों में चल रही है. उत्तराखंड का यह चुनाव वंश...
जैनेटिक विज्ञान का नया दावा : क्या जल से पहले पौधों की उत्पत्ति हुई?

जैनेटिक विज्ञान का नया दावा : क्या जल से पहले पौधों की उत्पत्ति हुई?

जल-विज्ञान
डॉ. मोहन चंद तिवारीक्या है भारतीय सृष्टि विज्ञान की अवधारणा? दो साल पहले उपर्युक्त शीर्षक से लिखे अपने  फेसबुक लेख को अपडेट करते हुए इस लेख के माध्यम से यह जानकारी देना चाहता हूं कि भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बसु (1858-1937) because ने उन्नीसवीं शताब्दी में जैनेटिकविज्ञान के क्षेत्र में यह खोज पहले ही कर दी थी कि पौधों में भी जीवन होता है. आधुनिक बायोफिजिक्स के क्षेत्र में उनका सबसे बड़ा योगदान यह था की उन्होंने अपने अनुसंधानों द्वारा यह दिखाया की पौधो में उत्तेजना का संचार वैद्युतिक (इलेक्ट्रिकल ) माध्यम से होता हैं न की केमिकल के माध्यम से. बाद में इन दावों को वैज्ञानिक प्रोयोगों के माध्यम से सच साबित किया गया था.ज्योतिष आचार्य बसु ने सबसे पहले माइक्रोवेव के वनस्पति के टिश्यू पर होने वाले असर का अध्ययन किया था. उन्होंने पौधों पर बदलते हुए मौसम से होने वाले असर का अध्ययन किया...
सफर खूबसूरत हो…

सफर खूबसूरत हो…

किस्से-कहानियां
कुसुम भट्ट भय की सर्द लहर के बीच में झुरझुरी उठी. अनजानी जगह, अंधेरी रात, चांद का कहीं पता नहीं. अमावस है शायद. सुनसान शहर और वह एकदम अकेली! उसने सिहरते हुए देखा, because देह का जो चोला उन सब ने पहना था उसकी तरह किसी का भी नहीं था. गोया किसी तीसरी दुनिया के वाशिंदे थे जो कभी-कभार मूवी या सीरियल में दिखाई पड़ते थे जिनसे अपना कोई संबंध नहीं होता. बस शंका और भय की because नागफनी उगा करती है. वह कुछ कहना चाहती है पर जीभ तालू से चिपक रही है. इस कदर डरावना अहसास जिंदगी में पहली मर्तबा हो रहा था. भूख लगी थी सो चली आई. तवे-सी रंगत और चुहिया-सी काया वाली निर्मला दीवान के आदेश पर बच्चे की मानिन्द चली आई थी. ज्योतिष पेट की भूख से बड़ी कोई भूख नहीं, यही समझ में आया था. निर्मला दीवान के रूखे वाक्यों के पत्थर सब पर पड़े थे. ‘यहां किसी के लिए खाना नहीं आएगा. वहीं होटल चलना पड़ेगा.’ थोड़ी दूर खड़ी अंधेरे में...
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस: पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस: पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

देहरादून
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर संगोष्ठी आयोजन,  फर्जी मुकदमों और बढ़ते हमलों पर जताई चिन्ताहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनराष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आज राजधानी देहरादून में पत्रकारों ने एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस आयोजन पर पत्रकारों ने मौजूूदा समय में पत्रकारिता की चुनौतियों because और समस्याओं पर चर्चा की. पत्रकारों ने इस बात की चिंता जताई कि मौजूदा समय में पत्रकारों पर हमले बढ़ गये हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा है. आयोजन में उपस्थित सभी पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सरकार से वार्ता करने की बात कही. साथ ही कहा गया कि पत्रकार और उनके आश्रितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया जाएगा. ज्योतिष संगोष्ठी में पत्रकारों ने सरकार से मांग की कि कोरोना काल में प्रभावित पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक सहयोग के साथ ही उनको सरकारी नौकरी भी दी जाए. साथ ही because म...
पौड़ी के ऐरोली गांव में 40 साल बाद मनाई गई ईगास बग्वाल

पौड़ी के ऐरोली गांव में 40 साल बाद मनाई गई ईगास बग्वाल

पौड़ी गढ़वाल
हिमांतर ब्यूरो, पौड़ीराज्य सरकार तथा इसके सांसदों व विधायकों की अपील का लोगो पर असर दिखाई देने लगा है. सरकार की अपील कि ‘इगास-बग्वाल गांव में मनाये’ की तर्ज पर जनपद पौड़ी के चौबट्टाखाल because विधानसभा क्षेत्र के ऐरोली (तल्ली) में ग्रामवासियों द्वारा लगभग 40 बर्षो बाद गांव में इगास- बग्वाल मनाई गई. इस कार्यक्रम में दिल्ली, देहरादून, मुंबई, लखनऊ, कोटद्वार, हरिद्वार से 12 परिवार गांव पहुंचे तथा त्यौहार मनाया. ज्योतिष ऐरोली (तल्ली) विकासखंड पोखरा के because अंतर्गत एक पिछड़ा गांव है जहा पर आजादी के इतने साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. गांव में मोटरमार्ग भी नहीं है. इन्ही सब कारणों से गांव से विगत में काफी पलायन हुआ है आज गॉव में सिर्फ 4 परिवार वास करते है.ज्योतिष इस अवसर पर ग्रामीणों द्वारा एक सभा भी आयोजित की गई जिसमे  भविष्य में गांव के विकास पर चर्चा हुई. साथ ही बाहर बस र...
हिन्दी बने व्यवहार और ज्ञान की भाषा

हिन्दी बने व्यवहार और ज्ञान की भाषा

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  अक्सर भाषा को संचार और अभिव्यक्ति के एक प्रतीकात्मक माध्यम के रूप ग्रहण किया जाता है.  यह स्वाभाविक भी है. हम अपने विचार, सुख-दुख के भाव और दृष्टिकोण दूसरों तक मुख्यत: भाषा द्वारा ही पहुंचाते हैं और संवाद संभव होता है. निश्चय ही यह भाषा की बड़ी भूमिका है परंतु इससे भाषा की शक्ति का because केवल आंशिक परिचय ही मिलता है क्योंकि शायद ही कुछ ऐसा अस्तित्व में हो जो भाषा से अनुप्राणित न हो. भाषा से जुड़ कर ही वस्तुओं की अर्थवत्ता का ग्रहण हो पाता है. यही सोच कर भाषा को जगत की सत्ता और उसके अनुभव की सीमा भी कहा जाता है. सचमुच जो कुछ अस्तित्व में है वह समग्रता में भाषा से अनुविद्ध है. ज्योतिष सत्य तो यही है कि भाषा मनुष्य जाति की ऐसी रचना है जो स्वयं मनुष्य को रचती चलती है और अपनी सृजनात्मक शक्ति से नित्य नई नई संभावनाओं के द्वार खोलती चलती है. हम ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगि...