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अमृतसर में राज्यपाल ने किया एनबीटी के पुस्तक मेले का उद्घाटन

अमृतसर में राज्यपाल ने किया एनबीटी के पुस्तक मेले का उद्घाटन

साहित्यिक-हलचल
पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक की उपस्थिति में हुआ मेले का शुभारम्भ, 5 मार्च से 13 मार्च 2022 तक चलेगा मेलाहिमांतर वेब डेस्कखालसा कॉलेज, अमृतसर के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट, भारत का अमृतसर पुस्तक मेला 2022 का उद्घाटन 5 मार्च 2022 को पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित और एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक की उपस्थिति में किया गया. यह मेला 5 मार्च से 13 मार्च 2022 तक चलेगा. पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने अपने संबोधन में कहा कि देश की आजादी के साथ शुरू हुए विकास के सफर में एनबीटी समाज के हर वर्ग को जागरूक बनाने की दिशा में काम कर रहा है. एनबीटी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार हर हाथ एक किताब पहल के तहत देश भर में किताबें भी वितरित की हैं. उन्होंने कहा, पुस्तक मेले न केवल विभिन्न प्रकार के साहित्य को सुलभ बनाते हैं बल्कि संस्क...
…कविताएं नहीं लिखी है बल्कि आत्मा लिख दी!

…कविताएं नहीं लिखी है बल्कि आत्मा लिख दी!

पुस्तक-समीक्षा
पुस्तक समीक्षा : आत्मा का अर्धांशनीलम पांडेय नील, देहरादून, उत्तराखंड आत्मा का अर्धांश के रचनाकार पेशे से वानिकी वैज्ञानिक because शिशिर सोमवंशी का बचपन का काफी समय उत्तराखंड की पहाड़ियों में बीता है. जिसका प्रभाव उनकी कविताओं में प्रकृति और प्रेम के निश्छल सौंदर्य बोध से प्रतीत होता है. ज्योतिष वे मुख्यतः प्रेम, प्रकृति, और मानवीय संबंधों की जटिलता because पर लिखते रहे हैं. जैसे-जैसे मैंने शिशिर जी को पढ़ना शुरू किया तो एक ऐसे व्यक्तिव को समझना शुरू किया जो कविताओं की रहस्यमय दुनिया से इस तरह जुड़े हुए हैं जहां उनको पढ़ते हुए लगता है कि कवि ने कविताएं नहीं लिखी है बल्कि  आत्मा लिख दी है और आत्मा का संबंध तो युगों से होता है. ज्योतिष नया कुछ नहीं सभी मर रहे हैं धीरे - धीरे, किन्तु मैं बहुत तीव्रता से मरने लगा हूं.......... ज्योतिष शिशिर की कुछ कविताएं गहन विमर्श को प्रोत्साहित...
अग्नेरी देवी,चौखुटिया : महाभारत काल की राष्ट्रीय धरोहर

अग्नेरी देवी,चौखुटिया : महाभारत काल की राष्ट्रीय धरोहर

धर्मस्थल
 शोध लेख: कुमाऊं क्षेत्र के उपेक्षित मन्दिर-3डा. मोहन चंद तिवारीचौखुटिया से लगभग 0.5 कि.मी.दूर जौरासी रोड,रामगंगा नदी के तट पर धुदलिया गांव के पास स्थित अग्नेरी देवी का का प्राचीन मन्दिर कत्यूरी कालीन इतिहास की एक अमूल्य धरोहर है. because देवभूमि उत्तराखंड की पावन भूमि में बसी रंगीली गेवाड़ घाटी की कुमाऊंनी लोकसाहित्य और संस्कृति के निर्माण में अहम भूमिका रही है. यहां के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में कत्यूर की राजधानी लखनपुर,गेवाड़ की कुलदेवी मां अगनेरी का मंदिर, रामपादुका मन्दिर,मासी का भूमिया मंदिर विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. ‘राजुला मालूशाही’ की प्रेमगाथा के कारण भी बैराठ चौखुटिया की यह घाटी ‘रंगीली गेवाड़’ के नाम से प्रसिद्ध है.हरतालीयहां अग्नेरी देवी के मन्दिर में लगने वाला चैत्राष्टमी का मेला कुमाऊं का एक प्रसिद्ध मेला माना जाता है. यहां अपनी मनौतियों   को पूर्ण करने ह...
हाईकमान और आलाकमान की राजनीति में ‘कमानविहीन’ हुआ उत्तराखंड

हाईकमान और आलाकमान की राजनीति में ‘कमानविहीन’ हुआ उत्तराखंड

समसामयिक
प्रकाश उप्रेती उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके पिछले कुछ दिनों से भयंकर ठंड से ठिठुर रहे हैं वहीं चुनावी तापमान ने देहरादून को गर्म कर रखा है. देहरादून की चुनावी तपिश से पहाड़ के इलाके बहुत प्रभावित तो नहीं होते लेकिन दुर्भाग्य because यह है कि उनके भविष्य का फैसला भी इसी तपिश से होता है. इसलिए ही जब उत्तराखंड के लोग गैरसैंण राजधानी की माँग करते हैं तो उसके पीछे पर्वतीय प्रदेश की संरचना और जरूरतें हैं क्योंकि देहरादून की नज़र तो दिल्ली की तरफ और पीठ पहाड़ की तरफ होती है. दिल्ली ही देहरादून को चलाती है. इसलिए उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके अलग उत्तराखंड राज्य के 21 वर्ष पूरे हो जाने के बाद भी स्वास्थ्य, शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, जमीन, रोजगार, कृषि, जलसंकट और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं.ज्योतिष उत्तराखंड को बने 21 वर्ष हो गए हैं. इन 21 वर्षों में 11 मुख्यमंत्रियों के साथ बीजेपी- कांग्रेस की सरकारे...
एक वर्जित क्षेत्र की कथा यात्रा

एक वर्जित क्षेत्र की कथा यात्रा

पुस्तक-समीक्षा
आशुतोष उपाध्यायतिब्बत पुरातन काल से ही वर्जित because और रहस्यमय रहा है. एक अत्यंत कठिन और दुर्गम भूगोल जहां जीवित रहने के लिए शरीर भी अपनी जैविक सीमाओं का विस्तार चाहता है. यह भी कम आश्चर्यजनक नहीं कि बेहद दुष्कर व जन विरल होने के बावज़ूद तिब्बत यूरेशियाई ताक़तों की टकराहट और ज़ोर-आज़माइश का अखाड़ा बना रहा. आज 21वीं सदी में दुनिया के ‘ग्लोबल’ हो जाने के बाद भी तिब्बत की वर्जनाएं कमोबेश जस की तस हैं. ज्योतिषमेरे लिए तिब्बत से पहला परिचय उन शरणार्थी परिवारों के ज़रिये हुआ, जो पिछली सदी के 60वें दशक में दलाई लामा के पीछे चलकर भारत पहुंचे और विभिन्न पहाड़ी इलाकों में बसाए गए. हमारे छोटे से पहाड़ी क़स्बे में भी कुछ तिब्बती परिवारों की आमद हुई. कुछ अलग तरह की वेशभूषा पहने तिब्बती महिलाएं सड़क के किनारे औरतों व बच्चों के सस्ते सामान और कुछ हिमालयी मसाले आदि बेचा करती थीं. because उनके घरों में ...
चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर की सार्थक पहल, उत्तराखंड की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी की स्थापना

चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर की सार्थक पहल, उत्तराखंड की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी की स्थापना

उत्तराखंड हलचल
हिमांतर ब्यूरो, ऋषिकेश बसंत पंचमी के दिन चलत मुसाफ़िर because और बस्तापैक एडवेंचर ने साथ मिलकर दो कार्यक्रम का आयोजन किया. पहला कार्यक्रम था, उत्तराखंड की पहली स्ट्रीट लाइब्रेरी की स्थापना, जिसका उद्घाटन उत्तराखंड रत्न पद्मश्री योगी एरन ने किया. यह लाइब्रेरी तपोवन के सार्वजनिक घाट में लगाई गई है. इस मौके पर योगी एरन ने टीम की प्रसंशा करते हुए कहा, “हमें ऐसे ही युवाओं की ज़रूरत है जो सोसाइटी के बारे में सोचे. चलत मुसाफ़िर की फाउंडर मोनिका मरांडी और प्रज्ञा श्रीवास्तव, because बस्ता पैक के फाउंडर गिरिजांश गोपालन और प्रदीप भट्ट की ये मुहिम कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी.” घाट पर आए पर्यटकों ने लाइब्रेरी को देखते हुए टीम से ये राय साझा की, “स्ट्रीट लाइब्रेरी एक बेहतरीन मुहिम है और ऐसी मुहिमों को लगातार होना चाहिए. ऐसी मुहिम से लोगों को पढ़ने की इच्छा जागेगी जो पैसों के अभाव में पढ़ नही...
विश्व वैटलैंड्स डे: जैव विविधता के संरक्षण का दिन

विश्व वैटलैंड्स डे: जैव विविधता के संरक्षण का दिन

देश—विदेश
डॉ. मोहन चंद तिवारीआज 2 फरवरी को भारत सहित दुनियाभर के देशों में 'विश्व वैटलैंड्स डे' मनाया जा रहा है,जिसका उद्देश्य है- विश्व में आर्द्रभूमि को विलुप्त होने से बचाना और उसके सरक्षण के लिए लोगों में जागरूकता पैदा करना. 'विश्व आर्द्रभूमि दिवस' पर आर्द्रभूमि को लुप्त होने से बचाने का यह विचार एक पर्यावरणवादी आंदोलन भी है,जिसकी सफलता के लिए हर प्रकार के मानवीय, राजनीतिक और वित्तीय धरातल पर प्रयत्न किए जाने चाहिए, ताकि जिन आर्द्र भूमियों को हमने अब तक लुप्त होने दिया है,उन्हें पुनर्स्थापित किया जा सके. 30 अगस्त 2021 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के तहत इस वर्ष 'विश्व वैटलैंड्स दिवस' 2022 का थीम रखा गया है- 'वेटलैंड्स एक्शन फॉर पीपल एंड नेचर'. जिसका हिंदी में आशय है लोगों और प्रकृति के लिए आर्द्रभूमि के प्रति कार्यवाही,जो मनुष्यों और ग्रहों की अनुकूलता के लिए भी आर्द्र...
नर से नारायण की यात्रा

नर से नारायण की यात्रा

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव (swatantrata ka amrit mahotsav) भारत की देश-यात्रा का पड़ाव है जो आगे की राह चुनने का अवसर देता है. इस दृष्टि से पंडित दीन दयाल उपाध्याय की चिंतनपरक सांस्कृतिक दृष्टि में जो भारत का खांचा था बड़ा प्रासंगिक है. वह समाजवाद और साम्यवाद से अलग सबके उन्नति की खोज पर केन्द्रित था. वह सर्वोदय के विचार को सामने रखते है और सोच की यह प्रतिबद्धता भारतीय राजनैतिक सोच को औपनिवेशक सोच से अलग करती है. उनका स्पष्ट मत था कि समाजवाद और साम्यवाद सिर्फ शरीर और मन तक सीमित हैं और इच्छा (काम) because और धन (अर्थ) तक ही चुक जाते हैं. वे मनुष्य के समग्र अस्तित्व की उपेक्षा करते हैं. एक व्यापक आधार चुनते हुए वह मानव अस्तित्व के सभी पक्षों अर्थात शरीर, और मन के साथ बुद्धि तथा आत्म का भी समावेश करते हैं. इन्हीं के समानांतर धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष के पुरुषार्थों को भी...
द्वाराहाट क्षेत्र का ‘बागेश्वर’ : सदियों से उपेक्षित पांडवकालीन तीर्थ

द्वाराहाट क्षेत्र का ‘बागेश्वर’ : सदियों से उपेक्षित पांडवकालीन तीर्थ

धर्मस्थल
कुमाऊं क्षेत्र के उपेक्षित मन्दिर-1डॉ. मोहन चंद तिवारीउत्तराखंड देव संस्कृति का उद्गम स्थल है और वहां के मन्दिरों के स्थापत्य और अद्भुत मूर्तिकला ने भारत के ही नहीं विश्व के कला प्रेमियों को भी अपनी ओर आकर्षित किया है. किंतु पुरातत्त्वविदों और स्थापत्यकला के विशेषज्ञों द्वारा द्वाराहाट,जागेश्वर, because बैजनाथ के मन्दिरों के स्थापत्य और मूर्तिकला का सतही तौर से ही आधा अधूरा मूल्यांकन किया गया है. स्थानीय लोक संस्कृति के धरातल पर तो मूल्यांकन बिल्कुल ही नहीं हुआ है. इनके अलावा दूर दराज के गांवों और नौलों के मन्दिरों का स्थापत्य और मूर्तियों का कलात्मक मूल्यांकन आज भी उपेक्षित और अनलोचित ही पड़ा है.  उत्तराखंड की अधिकांश मूर्तियां धर्म द्वेषियों द्वारा खंडित कर दी गई हैं. किंतु इन खंडित मूर्तियों में भी उत्तराखंड का आदिकालीन इतिहास और देव संस्कृति की झलक आज भी इतनी शक्तिशाली है कि व...
सयाना होता भारतीय गणतंत्र

सयाना होता भारतीय गणतंत्र

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  मनुष्य द्वारा रची कुछ बेहद ताकतवर परिभाषाओं में देश, राज्य, राष्ट्र और गणतंत्र जैसी कोटियाँ भी आती हैं जो धरती पर सामुदायिक-सांस्कृतिक यात्रा में पथ प्रदर्शक की  भूमिकाएं अदा करती हैं.  इन परिभाषाओं  की  व्यावहारिक परिणति परस्परसहमति के  सापेक्ष्य होती है. इतिहास गवाह है कि असहमति  हिंसा को जन्म देती है और आक्रमण, युद्ध और संधियों ने  इन संरचनाओं को  लगातार प्रभावित किया है. because अनेक देशों में सैन्य शासन ने चुनी सरकार को सत्ता से बेदखल किया है. लोभ में अनेक बार युद्ध , नर संहार और लूट मचती रही  है. सभ्यता के बढ़ते कदम के साथ क्रूरता, बर्बरता, छल-छद्म और कुटिलता के नए नए रूप आते रहे हैं. न्यूक्लियर तकनालाजी ने इस परिदृश्य को और भी जोखिम भरा बना दिया है. ऐसे में विकसित, विकासशील और अविकसित देशों के बीच की खाई पटती नजर नहीं आती. मुसीबत यह भी है कि ‘विकसित’ कहे जाने व...