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सुखादेवी: शुकवती का उद्गम व सरस्वती का संगम स्थल

सुखादेवी: शुकवती का उद्गम व सरस्वती का संगम स्थल

धर्मस्थल
कुमाऊं क्षेत्र के उपेक्षित मन्दिर - 4 डॉ. मोहन चंद तिवारीद्वाराहाट में गर्ग आश्रम से निकलने वाली गार्गी नदी गगास के पौराणिक इतिहास के बारे में तो सब जानते हैं किंतु 'सुखादेवी' (Sukhadevi) आश्रम से निकलने वाली इस नदी की बड़ी बहिन गुमनाम 'शुकवती' के बारे में कोई नहीं जानता. आजकल महावतार बाबा की गुफा दिखाने वाली टूरिस्ट संस्थाओं द्वारा भी विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करने के लिए पुराण प्रसिद्ध 'शुकवती' because नदी के उद्भव स्थान 'सुखादेवी' को 'स्वेता देवी' का एक नया नाम देकर  द्रोणगिरि क्षेत्र और इस देवी स्थल को शुकदेव मुनि की तपःस्थली बताकर द्रोणगिरि और गगास घाटी की समूची नदी परम्परा और उसके निकट बसे ऐतिहासिक शैव मंदिरों के इतिहास की भी विकृत व्याख्या की जा रही है.जिस सरस्वती नदी की वेदों में श्रेष्ठतम माता, श्रेष्ठतम नदी और श्रेष्ठतम देवी के रूप में स्तुतिगान हुआ है,उसे 'स्वेता देवी...
बॉलीवुड कलाकारों के साथ ‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का समापन

बॉलीवुड कलाकारों के साथ ‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का समापन

देश—विदेश
फिल्मी झलक पत्रिका के संपादक राजाराम सिंह ने सभी का जताया आभारहिमांतर ब्यूरो, मंबईफिल्मी झलक पत्रिका के बैनर तले आज मुंबई के अंधेरी स्थित ऑडिटोरियम में ‘‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का आयोजन किया गया, इस शानदार अवॉर्ड शो में बॉलीवुड की गई हस्तियों ने हिस्सा लिया. इस अवसर पर बॉलीवुड के जानेमाने कलाकारो ने शिरकत की जिनमें मुख्यरूप से रमेश गोयल, टार्जन फेम हेमंत बिरजे, गीतकार सुधाकर शर्मा, तुश्री मुखर्जी, योगेश खोखर व कई अन्य लोग उपस्थित होकर सभी ने शो का आनंद लिया. इस आवार्ड समारोह की यह खास बात यह रही कि इसमें बॉलीवुड जगत के कई बड़े कलाकारों के साथ युवा कलाकारों को एक मंच प्रदान किया गया. इसके अलावा सामाजिक जीवन में समाज सेवा करने वाले समाजसेवियों को भी आवार्ड देकर सम्मानित किया गया.फिल्मी झलक पत्रिका के संपादक राजाराम सिंह पिछले दो दशक से मुंबई म...
सवाल गर्व का नहीं शर्म का है…

सवाल गर्व का नहीं शर्म का है…

देश—विदेश
प्रकाश उप्रेती(पहाड़ ने दौड़ाया, पहाड़ दौड़ा, पहाड़ ने देखा और पहाड़ ने गर्व किया) पिछले दो दिनों से पहाड़ ट्विटर से लेकर because फेसबुक और खबरों में छाया हुआ है। पहाड़ का एक लड़का नोएडा की सड़कों पर दौड़ रहा है और हमारा समाज गर्व कर रहा है. कितने गर्व की बात है न कि पहाड़ ने दौड़ाया, पहाड़  दौड़ा, पहाड़ ने देखा और पहाड़ ने गर्व किया। दो दिनों से हमारा समाज उस लड़के की लगन, परिश्रम, ज़ज्बे, साहस, पर बिना आईना देखे गर्व से भर गया है.ज्योतिष बड़े-बड़े संस्थानों में बैठे मठाधीशो, because नेताओं के साथ गलबहियां करने वाले पहाड़ के गर्बिले लोगो, अगर तुम्हारे काँच के मकानों में कहीं आईना हो तो because उसके सामने खड़े होकर अपना चेहरा देखते हुए सोचना कि अल्मोड़ा का वह लड़का सेना में भर्ती होने के लिए सुबह 8 बजे से रात के 11 बजे तक यानी 15 घण्टे मैक्डोनाल्ड में काम करने के बाद 10 किलोमीटर नोएडा की कोल्तार की सड़कों...
कश्मीर फाइल्स को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताने वाले नफ़रत का बीज बोने वाले हैं

कश्मीर फाइल्स को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताने वाले नफ़रत का बीज बोने वाले हैं

सोशल-मीडिया
Kashmir Files Film: फिल्म कश्मीर फाइल्स को 'मु्स्लिम विरोधी' बताने वाले असल में नफ़रत के बीच बोने वाले हैं. जबकि इस नरसंहार के चश्मदीद मुस्लिम भी यह मानते हैं कि वह अपने कश्मीरी पंडित भाइयों को बचाने में नाकाम रहे थे. घाटी के मुस्लिम परिवारों ने भी इस फिल्म के आने के बाद कश्मीरी पंडितों से माफी मांगी है. मुस्लिमों का भी कहना है कि इस फिल्म में जो दिखाया गया है, वो हकीकत है जिसे छिपाया जा सकता है, झुठलाया नहीं जा सकता. यकीन नहीं हो रहा तो इस नरसंहार के चश्मदीद जावेद वेग का कहा पढ़ लीजिए. उन्होंने तो साफ कहा है कि यह फिल्म दु्ष्प्रचार नहीं, बल्कि हकीकत है.अब दूसरी तरफ आप वामपंथी और कांग्रेस गठजोड़ वाले दरबारी कुबुद्धीजीवियों को देखिये जो पहले इसके तथ्यों को गलत बता रहे थे और बाद में जब कुछ हाथ नहीं लगा तो इस डॉक्योड्रामा को 'मु्स्लिम विरोधी' बताकर अपना एजेंडा भुनाने में लगे हैं.क्या ...
अंतर्मन की शांति है प्रसन्नता की कुंजी

अंतर्मन की शांति है प्रसन्नता की कुंजी

देश—विदेश
विश्व प्रसन्नता दिवस, 20 मार्च 2023प्रो. गिरीश्वर मिश्र  वैसे तो क्रोध और भय जैसे कई भाव और संवेग मनुष्यों और पशु दोनों में मिलते हैं परन्तु जितनी विविधता मनुष्य में दिखती है वह आश्चर्यजनक है. अवसाद, प्यार, आनंद, और ईर्ष्या आदि भाव सिर्फ मनुष्यों में मिलते हैं. हम सब इनके प्रति बड़े संवेदनशील होते हैं. शायद यही कहना ठीक होगा कि हमारे दुःख-सुख ही हमको परिभाषित करते हैं. तीव्र अवसाद हो या  सुख की because अनुभूति के क्षण हों हमारा पूरा वजूद ही बदल जाता है. शायद इसी जीवन्तता के कारण नाट्य शास्त्र में इन तत्वों को रस का नाम दिया गया. रस सचमुच जीवन-रस होते हैं और नीरस जीवन व्यर्थ होता है. जीवन को सरस कैसे बनाया जाय यह एक बड़ी पहेली है.  मजेदार बात यह है कि जिस रूप में रस का हम अनुभव करते हैं वह उस रूप में पहले से मौजूद नहीं होता है, वरन वह कुछ घटनाओं के क्रम में पैदा होता है या उपजता है. शारी...
UP चुनाव से अनुराग ठाकुर ने फिर किया खुद के लीडरशिप गुण को साबित, बने और भरोसेमंद।

UP चुनाव से अनुराग ठाकुर ने फिर किया खुद के लीडरशिप गुण को साबित, बने और भरोसेमंद।

देश—विदेश
अरविन्द मालगुड़ी, वरिष्ठ पत्रकार उत्तर प्रदेश के चुनावी रण में बीजेपी ने जहाँ सभी को मात दे कर अपना परचम लहरा दिया वहां उसने एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में अनुराग ठाकुर जैसा नेता जिसने राजनीतिक कुशलता से विपक्ष की धार कुंद करने का काम किया को परखा और अनुराग कसौटी पर खरे उतरे। कई बार अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय दे चुके अनुराग ठाकुर युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं ,यूपी में इस बार जिस तरीके से अनुराग ठाकुर ने यूपी को अपना घर बना लिया और दौरे किये साथ ही चुनाव को एक धार दे कर सबको अपना मुरीद बना लिया। उनके धारदार चुनाव प्रचार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं में अलग ही उर्जा दी और इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजों में देखने को मिला है। योगी जी भी जीतने के बाद जब दिल्ली पहुंचे तो उनसे मिलने उनके घर पर पहुंचकर उनकी धमक को दिखा दिया।उत्तर प्रदेश भारत के उन राज्यों में है जहाँ पर युवा मतदाताओ...
जनादेश का आशय : जनता क्या चाहे?

जनादेश का आशय : जनता क्या चाहे?

समसामयिक
प्रो. गिरीश्वर मिश्र इसमें कोई संदेह नहीं कि गोवा के सागर तट , उत्तराखंड के पहाड़ , उत्तर प्रदेश कि गंगा-जमुनी मैदान और पूर्वोत्तर भारत में पर्वत-घाटी वाले मणिपुर से आने वाले चुनाव परिणामों से भारतीय जनता पार्टी की छवि राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त और ऊर्जावान राजनैतिक दल के रूप में निखरी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक नायक के रूप स्वीकृति पर फिर मुहर लगी है. इस तरह के स्पष्ट राष्ट्रव्यापी जन-समर्थन को मात्र संयोग कह कर कमतर नहीं आंका जा सकता  और  न इसे जाति, धन because और धर्म के आधार पर ही समझा जा सकता है. इसे दिशाहीन विपक्ष की मुफ़्त की सौग़ात भी कहना उचित न होगा क्योंकि जहां पंजाब के परिणाम वहाँ की सरकार के विरुद्ध गए हैं और विपक्ष को पूरा अवसर मिला था उसके ठीक विपरीत भाजपाशासित प्रदेशों में मिले मुखर जनादेश शासन में आम जन का भरोसा और विश्वास को प्रकट करते हैं. साथ साथ ही वे यह...
युवा उम्र के छिछोरेपन एवं जीवन संघर्ष का अद्भुत उपन्यास है ‘घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी’

युवा उम्र के छिछोरेपन एवं जीवन संघर्ष का अद्भुत उपन्यास है ‘घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी’

साहित्‍य-संस्कृति
डॉक्टर कुसुम जोशीयुवा लेखक ललित फुलारा का प्रथम उपन्यास ''घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी" पढ़ा, छात्र जीवन की वास्तविकता के साथ- साथ युवा मन की कल्पनाओं के ताने- बाने के साथ बुना गया यह एक ऐसा उपन्यास है जिसमें प्रवाह है और एक सांस में पढ़ने को प्रेरित करता है, भाषा सामान्य बोलचाल और भारतीय पुरुषों के जबान में रची- बसी गालियां जो राह चलते सुनाई पड़ती है, कह सकते हैं कि ये अल्हड़ और युवा उम्र के छिछोरेपन और जीवन संघर्ष का एक अद्भुत उपन्यास है जो पात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि, समय काल, ज्ञान-अज्ञान को प्रतिबिंबित करता है। (Book Review of Ghasi Lal Campus Ka Bhagwadhari)यह उन युवाओं का उपन्यास है जो सूदूर गांवों -कस्बों से जीवन को एक धार देने के लिए चले आते हैं और बहुत सारे काल्पनिक सपनों के साथ रूमानियत के संसार में विचरते हुए जब यथार्थ के धरातल में आकर अपनी क्षमताओं को परखते हैं तब तक ब...
उत्तराखंड चुनाव परिणाम : हरीश रावत की हट, कांग्रेस सफाचट!

उत्तराखंड चुनाव परिणाम : हरीश रावत की हट, कांग्रेस सफाचट!

देहरादून
निर्दलीय उम्मीदवार का जीतना कहीं न कहीं उत्तराखंड की राजनीति में आ रहे बदलावों की ओर संकेत करता हैप्रकाश उप्रेती लोकतंत्र में चुनाव ही वह कसौटी है जिसके आधार पर किसी पार्टी और प्रतिनिधि का मूल्यांकन होता है. जनता अपने वोट के जरिए यह मूल्यांकन करती है. 5 राज्यों में हुए चुनावों का नतीजा आया तो उसमें 4 राज्यों में because बीजेपी गठबंधन और पंजाब में जनता ने आप को बहुमत दिया. अब सवाल इन चुनावों  के 'पाठ' का है. इस पाठ के लिए अगर उत्तराखंड को लिया जाए तो हम देखते हैं कि इस बार के नतीजे भी कमोबेश पिछले चुनावों की तर्ज पर ही रहे हैं. परंतु इस बार के नतीजे उत्तराखंड की राजनीति में आ रहे बदलावों की तरफ भी संकेत करते हैं. उत्तराखंड का वोटर अब पार्टी लाइन से हटकर भी वोट कर रहा है.ज्योतिष उत्तराखंड बनने से लेकर आज तक के चुनावों को देखा जाए तो यहाँ मुकाबला हमेशा बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही र...
वह सिंधुघाटी के ‘आद्य शिव’ नहीं, कत्यूरीकालीन ‘वृषानना’ योगिनी है

वह सिंधुघाटी के ‘आद्य शिव’ नहीं, कत्यूरीकालीन ‘वृषानना’ योगिनी है

इतिहास
प्रेस विज्ञप्ति लेखडा. मोहन चंद तिवारी5 मार्च ,2022 को दून पुस्तकालय एवं शोध केन्द्र (Doon Library And Research Centre) से जुड़ी एक प्रेसवार्ता के अनुसार उत्तरकाशी (Uttarkashi) के देवल गांव (deval village) से पत्थर की महिष (भैंसा) मुखी एक because चतुर्भुज मानव प्रतिमा खोजने का समाचार सामने आया है. शोध केंद्र के निदेशक प्रोफेसर बीके जोशी ने इस मूर्ति को 'आद्य शिव' की सिंधुकालीन मूर्ति होने का दावा किया है. कहा गया है कि इस दुर्लभ प्रतिमा का प्रकाशन रोम से प्रकाशित शोध पत्रिका “ईस्ट एंड वैस्ट” के नवीनतम अंक में हुआ है.हरताली इस मूर्ति को सिंधुकालीन होने का औचित्य सिद्ध because करते हुए शोध केंद्र से जुड़े पुरातत्त्वविद प्रो.महेश्वर प्रसाद जोशी का भी कहना है कि उत्तराखंड की यमुना घाटी में पहले भी सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े अवशेष मिल चुके हैं,इसलिए यह मूर्ति भी सिंधुकालीन मूर्ति ...