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समसामयिक

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सार्वजनिक जीवन में मर्यादा की जरूरत है   

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  देश को स्वतंत्रता मिली और उसी के साथ अपने ऊपर अपना राज स्थापित करने का अवसर मिला. स्वराज अपने आप में आकर्षक तो है पर यह नहीं भूलना चाहिए कि उसके साथ जिम्मेदारी भी मिलती है. स्वतंत्रता मिलने के बाद स्वतंत्रता का स्वाद तो हमने चखा पर उसके साथ की जिम्मेदारी और […]
देश—विदेश समसामयिक

अनुराग ठाकुर की सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा देश भर के तमाम सांसदों के लिए प्रेरणा

अरविन्द मालगुड़ी देव भूमि हिमाचल जहाँ के सुदूर पहाड़ी इलाकों में बसे तमाम गांवों के लोगों को अक्सर बीमार होने की स्थिति में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था । अस्पताल तक पहुंचने में उन्हें कई तरह की परेशानियां पेश आती थी। इसी सार्थक सोच को मूर्त रूप मिला मई 2018 में जब वर्तमान केंद्रीय […]
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जनादेश का आशय : जनता क्या चाहे?

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  इसमें कोई संदेह नहीं कि गोवा के सागर तट , उत्तराखंड के पहाड़ , उत्तर प्रदेश कि गंगा-जमुनी मैदान और पूर्वोत्तर भारत में पर्वत-घाटी वाले मणिपुर से आने वाले चुनाव परिणामों से भारतीय जनता पार्टी की छवि राष्ट्रीय स्तर पर एक सशक्त और ऊर्जावान राजनैतिक दल के रूप में निखरी है और […]
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हाईकमान और आलाकमान की राजनीति में ‘कमानविहीन’ हुआ उत्तराखंड

प्रकाश उप्रेती उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके पिछले कुछ दिनों से भयंकर ठंड से ठिठुर रहे हैं वहीं चुनावी तापमान ने देहरादून को गर्म कर रखा है. देहरादून की चुनावी तपिश से पहाड़ के इलाके बहुत प्रभावित तो नहीं होते लेकिन दुर्भाग्य because यह है कि उनके भविष्य का फैसला भी इसी तपिश से होता है. […]
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सयाना होता भारतीय गणतंत्र

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  मनुष्य द्वारा रची कुछ बेहद ताकतवर परिभाषाओं में देश, राज्य, राष्ट्र और गणतंत्र जैसी कोटियाँ भी आती हैं जो धरती पर सामुदायिक-सांस्कृतिक यात्रा में पथ प्रदर्शक की  भूमिकाएं अदा करती हैं.  इन परिभाषाओं  की  व्यावहारिक परिणति परस्परसहमति के  सापेक्ष्य होती है. इतिहास गवाह है कि असहमति  हिंसा को जन्म देती है और […]
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…ताकि ओडॉयर कि मौत की गूँज दुनिया भर को सुनाई दे!

फ़िल्म समीक्षा : एक खूबसूरत दर्दभरी कहानी है फिल्म ‘सरदार उधम सिंह’ कमलेश चंद्र जोशी माइकल ओडॉयर को गोली मारने के बाद उधम सिंह को ब्रिटिश जेल में जिस तरह की यातनाएँ दी गई उसके बारे में सोचकर भी किसी की रूह काँप जाए, लेकिन उधम सिंह मानो मौत का because कफन बाँधकर ही ओडॉयर को […]
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क्रांति और भ्रांति के बीच उलझी देश की जनता!

भावना मासीवाल इस वर्ष हम सभी देशवासी आज़ादी के पिचहत्तरवें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं. आजादी के यह वर्ष हम सभी के जीवन में बहुत सारे विरोध-प्रतिरोध को लेकर आया है. सामाजिक न्याय और व्यक्तिगत आजादी जैसे प्रश्न मुखर होकर उभरें हैं. ऐसा नहीं है कि इससे पूर्व तक यह प्रश्न मुखर नहीं थे. […]
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मेघ पिता है धरती माता, ‘पितृदेवो भव’

‘फादर्स डे’ 20 जून पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज 20 जून को महीने का तृतीय रविवार होने के कारण ‘फादर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है. ‘फादर्स डे’ पिताओं के सम्मान में मनाया जाने वाला दिवस है जिसमें पितृत्व (फादरहुड) के because प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाने की भावना संन्निहित रहती है. […]
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हिंदी पत्रकारिता का काल, कंकाल और महाकाल

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष प्रकाश उप्रेती हिन्दी पत्रकारिता का सफर कई उतार-चढाव से होकर गुजरा है. उसका कोई स्वर्ण काल जैसा नहीं रहा है और होना भी नहीं चाहिए लेकिन पत्रकारिता का भक्तिकाल शाश्वत सत्य है. वह लगभग इन 200 वर्षों की यात्रा में नजर आता है.मासिक, साप्ताहिक और दैनिक से लेकर 24×7 तक […]
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अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही पत्रकार का धर्म

हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेष डॉ. राकेश रयाल हिंदी भाषा में ‘उदन्त मार्तण्ड’ के नाम से पहला समाचार पत्र आज के ही दिन 30 मई 1826 में निकाला गया था. इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है. because हिंदी भाषा के प्रथम पत्रकार (सम्पादक)  पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने […]