Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्‍ताह जानिए

कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्‍ताह जानिए

साप्ताहिक राशिफल
अंक ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 7 से 14 जून, 2021 कैसे जानें अपना मुख्य अंक (मूलांक) अंक ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल समझने के लिए सबसे पहले आपको आपना अंक ज्योतिष मूलांक जानना होगा. मूलांक व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण अंक है. जातक का जन्म महीने की जिस भी तारीख को होता है, उस अंक को इकाई में बदलने पर जो भी अंक बनता है, वो जातक का मूलांक होता है. मूलांक 1 से 9 अंक तक होता है, उदाहरण – जातक का जन्म महीने की 11 तारीख को हुआ है, तो आपका मूलांक 1 + 1 यानी 2 होगा. इसी तरह किसी भी महीने की 1 तारीख से लेकर 31 तारीख तक जन्मे लोगों का 1 से 9 के बीच मूलांक होता है. ज्योतिष अंक ज्योतिष का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि सभी अंकों का व्यक्ति के जन्म की तारीख से सीधा संबंध है. जैसा कि हमने इस लेख में नीचे, कि हर व्यक्ति की जन्म तिथि के हिसाब से उसका मुख्य अंक तय होता है और यह 1 से 9 तक के अंक अ...
लोक कलाकार सीना दा अनंत यात्रा पर…

लोक कलाकार सीना दा अनंत यात्रा पर…

स्मृति-शेष
इन्द्र सिंह नेगी देश के विभिन्न भागों में अपने ढोल वादन की विशेष छाप छोड़ने वाले कालसी विकासखंड के गास्की गांव निवासी सत्तर वर्षीय सीना दा आज अनंत यात्रा पर चल लिए ......वो पिछले छ: because माह से टीबी व पेट के इन्फेक्शन से जूझ रहे थे तथा उनका इलाज एम्स ऋषिकेश से चल रहा था. विगत में हरिद्वार में हुए नमो नाद कार्यक्रम में उन्हे "गुरू" की उपाधि से विभूषित किया गया था.अंक शास्त्र सीना दा राज्य के उन गिने-चुने ढोल because वादन के विशेषज्ञों में सम्मिलित थे जिन्हे इस विधा की बारीक समझ थी, वो अपनी कला से लोगों का मन मोह लेते थे. नौबत, बधाई, धार्मिक अनुष्ठान, पंडवाणी, झैन्ता, रासो वादन आदि से लेकर लोक गायन तक में उन्हे महारत हासिल थी.अंक शास्त्र हमारी लोक विरासत के ये जानकर धीरे-धीरे अनंत यात्रा पर निकलते जा रहे और उनके साथ उनकी लोक कलायें भी समाप्त होती जा रही है, हमारी सरकारों के एजें...
अजनबी

अजनबी

किस्से-कहानियां
ललित फुलारा जो सच है उसे छिपाना क्यों? मैं स्वछंद हूं. जो मन में आता है, बिना किसी के परवाह के करती हूं. उसने भी मुझे इसी रूप में स्वीकारा था. हाथ पकड़ कहा था, ‘जो बित गया, उससे मुझे कोई लेना नहीं.‘ मैं  फिर भी नहीं मानी थी. जानती थी पुरुष के कहने और करने में बहुत फर्क होता है. वो जिद्दी था. पूरे पांच साल इंतजार करता रहा. जब हम करीब आए, मैंने ऐसे बंधन की कल्पना नहीं की थी. वह मेरा दोस्त और लाल-पीले-नीले रंगों से भरी डायरी के पन्नों का राजदार था. छोटी-छोटी ख्वाहिशों, फरमाइशों से लेकर प्यार और चाहत हर चीज़ से वाकीफ. शादी के बाद क्या औरत की चाहत खत्म हो जाती है? वह तकिए को छाती से लगाकर किसी के ख्वाब नहीं समेट सकती. किसी का साथ, हाथों का स्पर्श और बातें उसे नहीं भा सकती. समझौतों से दबी, सारी चाहत दफ्न कर देती है एक औरत और वह मर्द कभी नहीं समझता जो ख्वाबों तक ले जाने का दंब भरता है.सपने...
धरती हमारी माँ है हम उसके बेटे, इस रिश्ते की समझ ही पर्यावरण को सरंक्षित कर सकती है: प्रो. नेगी

धरती हमारी माँ है हम उसके बेटे, इस रिश्ते की समझ ही पर्यावरण को सरंक्षित कर सकती है: प्रो. नेगी

पर्यावरण
डॉ. राकेश रयालविश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तराखंड मुक्तविश्वविद्यालय मुख्यालय हल्द्वानी में विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं भू विज्ञान स्कूल की ओर से 'पारस्थितिकी और उसका पुनरुत्थान' विषय पर एक ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित की गई. संगोष्ठी से पूर्व विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी, कुलसचिव प्रो. एच एस नयाल, अन्य प्रोफ़ेसरों व because अधिकारियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया, जिसमे लगभग 25 विभिन्न प्रजातियों के पौधे शामिल थे. विश्वविद्यालय प्रत्येक वर्ष इस दिवस पर वृक्षारोपण एवं पर्यावरण सरंक्षण को लेकर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करता है.अंक शास्त्र वृक्षारोपण के पश्चात ऑनलाईन संगोष्ठी (वेबिनार) की शुरूआत की गई, जिसकी अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओ. पी. एस. नेगी ने की. मुख्यातिथि के रूप में because चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति प्रो. डीआर सिंह...
प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा ही राष्ट्रवाद और सनातन धर्म का मूल विचार है

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा ही राष्ट्रवाद और सनातन धर्म का मूल विचार है

पर्यावरण
विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारी 5 जून को हर साल ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से स्वीडन स्थित स्टॉकहोम में विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन 5 जून, सन् 1972 को आयोजित किया गया था,जिसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी के because सिद्धान्त को वैश्विक धरातल पर मान्यता मिली.इसी सम्मेलन में ‘संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम' (यूएनईपी) का भी जन्म हुआ. तब से लेकर प्रति वर्ष 5 जून को भारत में भी ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.प्रदूषण एवं पर्यावरण की समस्याओं के प्रति आम जनता के मध्य जागरूकता पैदा करना इस पर्यावरण दिवस का मुख्य प्रयोजन है.पर चिन्ता की बात है कि अब ‘पर्यावरण दिवस’ का आयोजन भारत के संदर्भ में महज एक रस्म अदायगी बन कर रह गया है.पर्यावरण दि...
विकास की होड़ में पर्यावरण का विनाश

विकास की होड़ में पर्यावरण का विनाश

पर्यावरण
विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेषप्रकाश उप्रेती भारत में विकास की होड़ ने पर्यावरण के संकट को जन्म दिया. विकास के मॉडल का परिणाम ही है कि आज हर स्तर पर पर्यावरणीय संकट मौजूद है. विकास के मॉडल को because लेकर आजाद भारत में दो तरह की सोच और नीतियाँ रहीं हैं. एक जिसे नेहरू का विकास मॉडल कहा गया. जिसका ज़ोर मानव श्रम से ज़्यादा मशीनी संचालन में था जिसका आधार औद्योगिक और तकनीकी को बढ़ाव देना था, तो वहीं दूसरा मॉडल गांधी का था जोकि कुटीर और लघु उद्योगों के साथ मानव श्रम पर ज़ोर देता है. लेकिन भारत ने नेहरू के विकास मॉडल को अपनाया और गांधी धीरे-धीरे पीछे छूटते गए. अब यह पूँजी आधारित और संचालित विकास मॉडल धीरे-धीरे प्रकृति को नष्ट करने को आमादा है. इसका परिणाम पर्यावरण को लेकर उभरे अनेक आंदोलन और संघर्ष हैं.राजनैतिकविकास की आँधी में जल, जंगल और ज़मीन के अंधाधुंध दोहन ने पर्यावरण के प्रति ठ...
वैदिक संस्कृति का अनुपालन ही पर्यावरण संरक्षण का सर्वोत्तम विकल्प है

वैदिक संस्कृति का अनुपालन ही पर्यावरण संरक्षण का सर्वोत्तम विकल्प है

पर्यावरण
विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून पर विशेषभुवन चंद्र पंत पूरा विश्व आज पर्यावरण की समस्या से जूझ रहा है, इसमें दो राय नहीं कि इस समस्या के पीछे हमारी अतिभोगवादी मनोवृत्ति रही है. अति का इति निश्चित है. ’ईट, ड्रिंक एण्ड बी because मैरी’ का विचार पश्चिम की देन है, हमारी विचारधारा तो वैदिक काल से लेकर महात्मा गान्धी तक अपरिग्रह की पोषक रही है. उन्होंने भोग में सुख तलाशा है, तो सनातन संस्कृति ने त्याग में वास्तविक सुख को प्रमुखता दी है. मुझे यह कहने में तनिक भी संकोच नहीं कि आज की पर्यावरण की समस्या के लिए पश्चिम की भोगवादी संस्कृति उत्तरदायी है, लेकिन दुर्भाग्य है कि आज हम उसी संस्कृति का अनुकरण कर और तथाकथित आधुनिक बनकर स्वयं को भी मुसीबत की ओर धकेल रहे हैं.नैनीतालहवि में गाय का घी एक प्रमुख घटक है, इसके अतिरिक्त विभिन्न औषधीय वनस्पतियों व आम के लकड़ियों का प्रयोग बताया गया है. ये सभी घट...
पहाड़ों में शिकार पर फ़िरंगी राजकुमार: 1876

पहाड़ों में शिकार पर फ़िरंगी राजकुमार: 1876

इतिहास
स्वीटी टिंड्डे हिंदुस्तान के कई हिस्सों के आलीशान राजाओं और उनके दरबारों का मजा लेते हुए राजकुमार 7 फरवरी 1876 में ट्रेन से मुरादाबाद, नैनीताल और कुमाऊं होते हुए नेपाल because तराई के घने जंगलों में बाघ और हाथी का शिकार करते हुए गुजरना था जो डाकुओं, बाग़ियों, so और ख़ूँख़ार जानवरों के लिए जाना जाता था. नाना साहब समेत 1857 के तमाम बाग़ी (स्वतंत्रता सेनानी) हारने के बाद इन्हीं जंगलों में आकर छुपे और और उनमे से ज्यादातर इस ख़ूँख़ार जंगल के भेंट चढ़ गए थे. नैनीतालदावा किया जाता है कि इस शिकार के दौरान राजकुमार ने एक ही दिन में 6 बाघ मार डाले जिनमें से दो बाघ तो एक ही गोली से मर गए थे बिना निशाना चुके. because राजकुमार इतने मंझे हुए शिकारी थे कि हाथी को पकड़कर पहले सजाया जाता था, रंग लगाया जाता था फ़र फिर जंगल में शिकार होने के लिए छोड़ जाता था और राजकुमार उसे ढूँढकर शिकार करते थे.नैन...
कोरोनाकाल में मदद को आगे आ रहे सामाजिक संगठन

कोरोनाकाल में मदद को आगे आ रहे सामाजिक संगठन

चमोली
हिमांतर ब्यूरो, चमोलीकोरोना के इस संकटकाल में जनपद चमोली के सुदूरवर्ती विकासखण्ड घाट स्थित सामुदायिक चिकित्सालय के प्रभारी डाॅ मुकेश पाल और पूर्व जिला पंचायत सदस्य श्रीमती उषा रावत, पिलंग वार्ड दशोली द्वारा दूरस्थ गाँवों के लिए स्वास्थ्य सुविधायें जुटाने का प्रयास किया जा रहा है. उनके इन प्रयासों को सहयोग करने के लिए सामाजिक संगठन उनका साथ दे रहे हैं. इसी क्रम में आगाज़ फैडरेशन पीपलकोटी के आग्रह पर देहरादून स्थित सामाजिक संस्था आसरा ट्रस्ट ने सामुदायिक चिकित्सालय घाट को 2 आक्सीजन कंसन्ट्रेटर इनवर्टर के साथ, कोरोना के इलाज के लिए आवश्यक उपकरण जैसे- ग्लव्स, मास्क, फेस शील्ड, सेनिटाइज़र, दवायें, हेयर नेट, थर्मामीटर, पल्स आक्सीमीटर, पीपीई किट सहित 28 से अधिक दवायें और उपकरण घाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को उपलब्ध कराये गये. आसरा ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री अमित बलोदी ने ...
DRDO ने हल्द्वानी में तीन हफ्ते में तैयार किया 500 बेड का ‘जनरल बीसी जोशी कोविड केयर सेंटर’

DRDO ने हल्द्वानी में तीन हफ्ते में तैयार किया 500 बेड का ‘जनरल बीसी जोशी कोविड केयर सेंटर’

नैनीताल
हिमांतर ब्‍यूरो, हल्द्वानीरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) ने तीन सफ्ताह के भीतर हल्द्वानी में 500 बेड का अस्थायी कोविड केयर सेंटर तैयार कर दिया है. इस सेंटर को उत्तराखंड मूल के पहले थलसेना अध्यक्ष जनरल विपिन चंद्र जोशी का नाम दिया गया है. because सीएम तीरथ सिंह रावत रावत ने इस सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया. 10 हजार वर्गफीट में बनाए गए इस आधुनिक सुविधायुक्त कोविड केयर सेंटर में 375 ऑक्सीजन बेड, 125 आईसीयू एवं वेंटिलेटर की व्यवस्था की गई है. बच्चों के लिए अलग because वार्ड के साथ ही उनके अभिभावकों के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई है. इसमें ब्लैक फंगस (म्यूकरमायोसिस) के मरीजों के लिए भी अलग वार्ड बनाया गया है. इस सेंटर का क्लीनिकल मैनेजमेंट डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल द्वारा किया जाएगा. सुशीला तिवारीमुख्यमंत्री तीरथ सिंह के मुताबिक, केंद्र एवं राज्य के समन्वित प्रया...