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स्मृति-शेष

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राष्ट्र-पुरुष के आराधक भारत-भारती के अमर सपूत  

अटल बिहारी वाजपेयी जन्म दिवस (25 दिसम्बर) पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जगता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएँ हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है. यह चन्दन
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और, उसके बाद उन्होने जीवन में अंग्रेजी में बात नहीं की

प्यारी दीदी एलिजाबेथ व्हीलर  डॉ. अरुण कुकसाल ‘‘जीवन तो मुठ्ठी में बंद रेत की तरह है, जितना कसोगे उतना ही छूटता जायेगा. होशियारी इसी में है कि जिन्दगी की सीमायें खूब फैला दो, तभी तुम जीवन को संपूर्णता में जी सकोगे. डर कर जीना तो रोज मरना हुआ.’’ एलिजाबेथ व्हीलर दीदी ने इसी जीवन-दर्शन को […]
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भारत की जोन ऑफ आर्क सुशीला दीदी

सुनीता भट्ट पैन्यूली मैं स्त्री-स्वभाव वश स्त्रियों की because अभिरुचि, विचार, स्वभाव, आचरण, राष्ट्रीय विकास में उनके योगदान, उन्नयन का अध्यन करते-करते भारत के  स्वतंत्रता संग्राम के क्रान्तिकारी वीरों के बलिदान से संबद्ध उस इतिहास के पन्ने पर पहुंच गयी हूं जहां उनका साथ देने वाली महिला क्रांतिकारियों के बारे में शायद ही हम में […]
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शारदा, मैं अपना जीवन अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता  के लिए त्याग कर रहा हूँ!

जेपी मैठाणी देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे पर झूलने वाले महान क्रांतिकारी शहीद मेजर दुर्गामल्ल को शत शत नमन. शहीद मेजर दुर्गा मल्ल मूल रूप से देहरादून जिले के डोईवाला के रहने वाले थे. महान क्रांतिकारी दुर्गामल्ल का जन्म एक जुलाई  1913  को गोरखा राइफल के नायब सूबेदार गंगाराम मल्ल के घर […]
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सालम के क्रांतिकारी शहीदों को नहीं भुलाया जा सकता

शहीदी दिवस (25 अगस्त) पर विशेष   डॉ. मोहन चंद तिवारी आज के ही के दिन 25 अगस्त,1942 को जैंती तहसील के धामद्यो में देश की आजादी के लिए शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहे सालम के निहत्थे लोगों पर अंग्रेज सैनिकों द्वारा जिस बर्बरता से because गोलियां चलाई गईं,उसमें चौकुना गांव के नर सिंह धानक और […]
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यों ही नहीं कहा गया था प्रताप भैया को पहाड़ का मालवीय

ग्यारहवीं पुण्यतिथि विशेष भुवन चंद्र पंत कहते हैं कि यदि एक महिला को शिक्षित करोगे तो उसकी आने वाली पूरी पीढ़ी शिक्षित होगी और यदि एक स्कूल खुलेगा तो 100 जेलों के स्वतः दरवाजे बन्द होंगे. शिक्षा सभ्य because समाज का वह प्रवेश द्वार है, जहां से व्यक्तित्व के विकास के सारे दरवाजे खुलते हैं. […]
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‘गिर्दा’: उत्तराखंड आंदोलन के जनकवि और युगद्रष्टा चिंतक भी

गिर्दा’ की 11वीं पुण्यतिथि पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी     22 अगस्त को उत्तराखंड आंदोलन के जनकवि, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की 11वीं पुण्यतिथि है. गिर्दा उत्तराखंड राज्य के एक आंदोलनकारी जनकवि थे,उनकी जीवंत कविताएं अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देतीं हैं. वह लोक संस्कृति के इतिहास से जुड़े गुमानी पंत तथा गौर्दा का अनुशरण […]
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भारतराष्ट्र का गुणगान रवींद्रनाथ टैगोर का राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’

गुरुदेव रवींद्र की पुण्यतिथि पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज 7 अगस्त को गांधी जी को ‘महात्मा’ का सम्मान देने वाले कवि, उपन्‍यासकार, नाटककार, चित्रकार रवींद्रनाथ टैगोर की 80वीं पुण्यतिथि है. 7 अगस्त 1941 को गुरुदेव का निधन हो गया था. वे ऐसे मानवतावादी विचारक थे, जिन्‍होंने साहित्य, संगीत, कला और शिक्षा जैसे क्षेत्रों […]
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प्रेमचन्द का भारत-बोध

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  हिन्दी और उर्दू दोनों भाषाओं के सिद्धहस्त कथाकार मुंशी प्रेमचंद का तीन दशकों का लेखन भारत की सामुदायिक समरसता का एक अद्भुत दस्तावेज प्रस्तुत करता है. बीसवीं सदी के आरंभिक काल की उनकी रचनाएं आम आदमी की ख़ास उपस्थिति को रेखांकित करती हैं. मोहक आख्यान के कथा-सूत्रों से अपने पाठक को बाँध […]
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कारगिल के वीर सपूतों को भारतराष्ट्र का कोटि कोटि नमन

कारगिल ‘विजय दिवस’ पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज पूरे भारत में कारगिल विजय दिवस की 22वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।आज के ही दिन 26 जुलाई,1999 को जम्मू और कश्मीर राज्य में नियंत्रण रेखा से लगी कारगिल की पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए आतंकियों और उनके वेश में घुस आए पाकिस्तानी सैनिकों को भारतीय […]