
विश्व पृथ्वी दिवस: जीना है तो धरती की भी सुनें
विश्व पृथ्वी दिवस पर (22 अप्रैल 2022) विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र
जाने कब से यह धरती मनुष्यसमेत सभी प्राणियों, जीव - जंतुओं और वनस्पतियों आदि के लिए आधार बन कर जीवन और भरण-पोषण का भार वहन करती चली आ रही है. कभी मनुष्य भी (आज की तरह का) कोई विशिष्ट प्राणी न मान कर अपने को प्रकृति का अंग समझता था. मनुष्य की स्थिति शेष प्रकृति के अवयवों के एक सहचर के रूप में थी. मनुष्य को प्रकृति के रहस्यों ने बड़ा आकृष्ट किया because और अग्नि, वायु, पृथ्वी, शब्द आदि सब में देवत्व की प्रतिष्ठा होने लगी और वे पूज्य और पवित्र माने गए. प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते हुए उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखा गया . उसके उपयोग को सीमित और नियंत्रित करते हुए त्यागपूर्वक भोग की नीति अपनाई गई. विराट प्रकृति ईश्वर की उपस्थिति से अनुप्राणित होने के कारण मनुष्य उसके प्रति स्नेह और प्रीति के रिश्तों से अभिभूत ...









