September 20, 2020
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इतिहास

अन्वेषक अमर सिंह रावत के अमर उद्यमीय प्रयास

डॉ. अरुण कुकसाल सीरौं गांव (पौड़ी गढ़वाल) के महान अन्वेषक और उद्यमी अमर सिंह रावत सन् 1927 से 1942 तक कंडाली, पिरूल और रामबांस के कच्चेमाल से व्यावसायिक स्तर पर सूती और ऊनी कपड़ा बनाया करते थे. उन्होने सन् 1940 में मुम्बई (तब का बम्बई) में प्राकृतिक रेशों से कपड़ा बनाने के कारोबार में काम […]
उत्तराखंड

बादल फटने की त्रासदी से कब तक संत्रस्त रहेगा उत्तराखंड?

डॉ. मोहन चन्द तिवारी उत्तराखंड इन दिनों पिछले सालों की तरह लगातार बादल फटने और भारी बारिश की वजह से मुसीबत के दौर से गुजर रहा है.हाल ही में 20 जुलाई को पिथौरागढ़ जिले के बंगापानी सब डिवीजन में बादल फटने से 5 लोगों की मौत हो गई, कई घर जमींदोज हो गए और मलबे […]
संस्मरण

काणी मैं (मामी) उर्फ हल्या बौ (भाभी)

डॉ. अमिता प्रकाश पहाड़ हम पहाड़वासियों की रग-रग में इसी तरह बसा है जैसे शरीर में प्राण. प्राण के बिना जैसे शरीर निर्जीव है, कुछ वैसे ही हम भी प्राणहीन हो जाते हैं, पहाड़ के बिना. पहाड़ में हमारी जड़ें हैं जिनसे आज भी हम पोषण प्राप्त कर रहे हैं और जीवन के संघर्ष में […]
समाज/संस्कृति

आधुनिक ‘बुफे पद्धति’ और ‘कुक-शेफ़ों’ के बीच गायब होते ‘सरोला’

घरवात् (सहभोज) विजय कुमार डोभाल आज की युवा पीढ़ी होटल, पार्टी या पिकनिक पर जा कर सहभोज का आनन्द ले रही है क्योंकि यह पीढ़ी शहर में ही जन्मी, पली-बढ़ी, शिक्षित-दीक्षित हुई तथा शहरीकरण में ही रच-बस गई है. यह पीढ़ी अपने पहाड़ी जनमानस के सामाजिक कार्यों, उत्सवों और विवाहादि अवसरों पर दी जाने वाली […]
जल विज्ञान

सिन्धु सभ्यता के ‘धौलवीरा’ और ‘लोथल’ का जल प्रबंधन

भारत की जल संस्कृति-10 डॉ. मोहन चन्द तिवारी धौलवीरा का जल प्रबन्धन सन् 1960 में भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग ने सिन्धु सभ्यता से सम्बद्ध एक प्राचीन आवासीय बस्ती धौलवीरा का उत्खनन किया तो पता चला कि यह सभ्यता 3000 ई.पू. की एक उन्नत नगर सभ्यता थी. खदिर द्वीप के उत्तर-पश्चिम की ओर वर्तमान
संस्मरण

बाबिल की घास सिर्फ घास नहीं है

प्रकाश उप्रेती मूलत: उत्तराखंड के कुमाऊँ से हैं. पहाड़ों में इनका बचपन गुजरा है, उसके बाद पढ़ाई पूरी करने व करियर बनाने की दौड़ में शामिल होने दिल्ली जैसे महानगर की ओर रुख़ करते हैं. पहाड़ से निकलते जरूर हैं लेकिन पहाड़ इनमें हमेशा बसा रहता है। शहरों की भाग-दौड़ और कोलाहल के बीच इनमें ठेठ […]
संस्मरण

यादों में एक शहर

डॉ विजया सती दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से हाल में ही सेवानिवृत्त हुई हैं. इससे पहले आप विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हिन्दी–ऐलते विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी में तथा प्रोफ़ेसर हिन्दी – हान्कुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरन स्टडीज़, सिओल, दक्षिण कोरिया में कार्यरत रहीं. साथ ही महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं
समाज/संस्कृति

हुकम दास के हुक्म पर अंग्रेज घाम में खड़ा रहा

गंधर्व गाथा -1 पुष्कर सिंह रावत उत्तरकाशी में भागीरथी तट पर एक आश्रम है शंकर मठ. ये छोटा सा आश्रम हमारे जेपी दा (जयप्रकाश राणा) का रियाज करने का ठिकाना हुआ करता था. बता दूं कि जेपी दा खुद भी तबले में प्रभाकर हैं और लोक कलाकारों की पहचान करने में उन्हें महारथ है. करीब […]
पर्यावरण

ग्रेटा थनबर्ग: पर्यारण के लिए चिंतित एक आवाज

कमलेश चंद्र जोशी “My name is Greta Thunberg. I am sixteen years old. I come from Sweden and speak on behalf of future generations. I know many of you don’t want to listen to us. You say we are just children. But we are only repeating the message of the united climate science.” सोलह साल […]
समाज/संस्कृति

भड्डू और उसमें बनने वाली दाल के स्वाद से अपरिचित है युवा पीढ़ी

आशिता डोभाल पहाड़ की संस्कृति और रीति—रिवाज अपने आप में सम्पन्न, अनूठी और अद्भुत है. यह अपने में कई चीजों का समाए हुए है, पहाड़ की संस्कृति और रीति—रिवाज हमेशा एक कौतूहल और शोध का विषय रहा है. हमारी संस्कृति पर कुछेक शोध जरूर हुए हैं लेकिन वह ना के बराबर. हमारी प्राचीन संस्कृति पर […]