Tag: हिमाचल प्रदेश

उत्तरकाशी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लौटी परिजनों की मुस्कान, रोहड़ू से सकुशल बरामद हुए चार मासूम

उत्तरकाशी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लौटी परिजनों की मुस्कान, रोहड़ू से सकुशल बरामद हुए चार मासूम

उत्तराखंड हलचल
 हिमांतर ब्यूरो,  मोरी/उत्तरकाशीघर से बिना बताए लापता हुए चार मासूम बच्चों को उत्तरकाशी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू क्षेत्र से सकुशल बरामद कर उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बच्चों की सुरक्षित वापसी से परिजनों ने राहत की सांस ली और पुलिस का आभार जताया। जानकारी के अनुसार, बीते 11 मार्च को चौकी आराकोट, थाना मोरी में एक व्यक्ति ने सूचना दी कि उसके चार बच्चे, जिनकी उम्र लगभग 12 से 15 वर्ष के बीच है, 10 मार्च को घर से बिना बताए कहीं चले गए हैं और वापस नहीं लौटे। बच्चों के अचानक लापता होने से परिवार में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती कमलेश उपाध्याय के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक जनक सिंह पंवार के निकट पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष मोरी दीपक रावत के नेतृत्व में तत्काल एक पुलिस टीम का गठन कर बच्चों की तल...
ढांटु: महिला के सिर की सर्वोच्च आन-बान-शान

ढांटु: महिला के सिर की सर्वोच्च आन-बान-शान

देहरादून, साहित्‍य-संस्कृति, हिमालयन अरोमा
 फकीरा सिंह चौहान स्नेही वरिष्ठ कवि, गायक कलाकार तथा गीतकार ग्राम गोरछा, जौनसार जौनसारी विवाहित महिलाओं के सिर पर धारण किया जाने वाला ढांटु मात्र एक रंगीन कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि गौरव और गरिमा की पहचान है। जौनसार-बावर, रवांई-जौनपुर, बंगाण, बिनार तथा हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में सिर पर ढांटु बांधना केवल एक परिधान या आवरण नहीं, बल्कि मान-सम्मान, स्वाभिमान, मर्यादा और जिम्मेदारी का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। ढांटु धारण करने की परंपरा विरासत, संस्कृति और नारीत्व की गरिमा को दर्शाती है। इसे नारी स्वाभिमान का मुकुट और सिर की शोभा माना जाता है। किसी के सामने सम्मानपूर्वक ढांटु उतारना विश्वास, जिम्मेदारी तथा क्षमा-याचना का अत्यंत महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। जौनसार-बावर क्षेत्र में विवाहित महिलाओं के लिए ढांटु धारण करना सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और गौरव का प्रतीक है...
क्यों पिछड़ गयी हिमाचल की हिंदी कविता?

क्यों पिछड़ गयी हिमाचल की हिंदी कविता?

हिमाचल-प्रदेश, पुस्तक-समीक्षा
पुस्तक समीक्षागगनदीप सिंह हिमाचल प्रदेश में लगभग 35 सालों से लगातार छप रही सरकारी हिंदी त्रैमासिक पत्रिका 'विपाशा' की साहित्यक हलकों में ठीक-ठाक शाख है. हिमाचल के साहित्यकारों को और देश की 'मुख्यधारा’ के साहित्यकारों के बीच एक पुल का काम यह लंबे समय से निभाती आ रही है. हिमाचल के हिंदी साहित्य पर हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग की छाप पूरी तरह से देखी जा सकती है. एक तरह से कहा जा सकता है कि हिमचाल का साहित्य सरकारी छत्रछाय में पला बढ़ा है. इस विभाग द्वारा हर साल जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई कार्यक्रम आयोजित और प्रायोजित किये जाते हैं. साहित्यकारों को मिलने वाली मानदेय की सुविधा इनकी बहुत मदद करती है. पिछले 35 सालों में छपे विशेषांकों और खासकर कविता विशेषांकों से अगर तुलना की जाए तो इस बार का कविता विशेषांक केवल रस्मी तौर पर विशेषांक नहीं था बल्कि यह सचमु...
क्या है चालदा महाराज के प्रवास यात्रा क्रम? जानिए…

क्या है चालदा महाराज के प्रवास यात्रा क्रम? जानिए…

देहरादून
भारत चौहानकश्मीर से हनोल की महासू महाराज की प्रवास यात्रा का एक लंबा क्रम है, हनोल में प्रकटीकरण के पश्चात बोटा महाराज हनोल में ही विराजित रहते हैं जबकि चालदा because महाराज जौनसार बावर, उत्तरकाशी एवं हिमाचल प्रदेश में प्रवास करते हैं ज्योतिष चालदा महाराज की प्रवास यात्रा के इतिहास की लंबी कढ़ी है परंतु ब्रिटिश सरकार ने चालदा महाराज के प्रवास को दो भागों में विभक्त किया एक भाग साटी बिल (तरफ) मतलब जौनसार बावर एवं आंशिक हिमाचल का क्षेत्र जिसके वजीर दीवान सिंह जी है जो बावर क्षेत्र के बास्तील गांव के निवासी है और दूसरा भाग पासी बिल because मतलब उत्तरकाशी जनपद व हिमाचल प्रदेश का क्षेत्र. जिसके वजीर जयपाल सिंह जी है जो ठडीयार गांव के निवासी है. (यहां यह बात ध्यान रखने योग्य है कि चालदा महाराज के वजीर महाराज के प्रवास यात्रा की संपूर्ण व्यवस्था करते हैं. कहां पर कब प्रवास होना है यह तय करन...
स्‍त्री देह आकार और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विख्‍यात है रेणुका झील

स्‍त्री देह आकार और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विख्‍यात है रेणुका झील

हिमाचल-प्रदेश
दीपा कौशलम हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सिरमौर जिले में रेणुका झील एक रमणीय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. ये एक लंबाकार झील है जो नाहन और संगराह के बीच स्थित है. रेणुका झील (Renuka Lake) अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने वाला स्थान है जहां चारों तरफ फैली हरियाली मन मोह because लेती है. रेणुका झील समुद्र तल से 672 मीटर उपर एक आद्रभूमि है जहां झील के अतिरिक्त सैंचुरी और चिड़ियाघर भी है जिसमें विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों को देखा जा सकता है. सन् 1987 में इस जगह को वाइल्ड लाइफ सैंचुरी घोषित किया गया और सन्  2005 में अद्वितीय जैव विविधता के कारण रामसर क्षेत्र में शामिल कर दिया गया. हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक इस झील को देखने आते हैं .आसपास क्षेत्रीय लोगों के अनुसार रेणुका झील की उत्पत्ति की धार्मिक कथा इस प्रकार है- रेणु न...
अद्भुत प्राकृतिक छटा, बौद्ध सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है लाहौल-स्पीति 

अद्भुत प्राकृतिक छटा, बौद्ध सभ्यता व संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है लाहौल-स्पीति 

हिमाचल-प्रदेश
आदिकाल से देवताओं, गन्धर्वों, किन्नरों और मनुष्यों की मिली जुली जातियों का संगम स्थल रहा है लाहुलसुनीता भट्ट पैन्यूलीदेवभूमि हिमाचल प्रदेश जहां अपने because नैसर्गिक सौंदर्य के लिए प्रचलित है वहीं इसी प्रदेश का एक विश्व-प्रसिद्ध पर्यटक स्थल लाहौल-स्पीति अपनी अद्भुत प्राकृतिक छटा, बौद्ध सभ्यता और संस्कृति के लिए जाना जाता है.हिमाचल लाहौल और स्पीति  भारत का एक ऐसा क्षेत्र so जिसके अस्तित्व की भारत के मानक-चित्र में उपस्थिति की जानकारी  संभवतः बहुत कम लोगों को है, हिमाचल प्रदेश की दो पृथक हिमालयी घाटियां लाहौल और स्पीति हैं जो भारत तिब्बत सीमा पर स्थित हैं. लाहौल घाटी जहां प्राकृतिक रूप से समृद्ध, चंद्र but और भागा नदियों द्वारा पोषित व फलीभूत है वहीं स्पीति अपने विस्तीर्ण बर्फीले रेगिस्तानों, लुभावने ट्रैक, घाटियों और मठों के लिए प्रसिद्ध है.रोहतांग दर्रे को पार करते ...
एक ‘खामोश नायक’ का ‘जीवंत किवदंती’ बनने का जीवनीय सफ़र

एक ‘खामोश नायक’ का ‘जीवंत किवदंती’ बनने का जीवनीय सफ़र

स्मृति-शेष
डॉ. अरुण कुकसाल ‘श्री नलनीधर जयाल आज किन्नौर की खूबसूरत वादियों में एक ‘जिंदा कहानी’ के तौर पर लोगों के दिल-दिमागों, वहां के बाग-बगीचों, खेत-खलिहानों, स्कूलों, लोगों के शानदार रोजगारों और प्राकृतिक एवं मानवीय समृद्धि के अनेकों रंग-रूपों में रचे-बसे हैं. वह किन्नौर में एक ‘जीवंत किवदंती’ हैं. किसी भी इंसान के जीवन में सफलता का इससे सुंदर और क्या मुकाम हो सकता है, कि वह अपने कामों और नेक-नियत के बदौलत लोगों के दिल-दिमागों में एक जीवंत किवदंती ही बन जाए.’ (कुसुम रावत, पृष्ठ-130)जांबाज फाइटर पाइलट से लोकप्रिय पर्यावरणविद बनने के जीवनीय सफर के दौरान श्री जयाल काबिल नौकरशाह, साहसी पर्वतारोही, शानदार फोटोग्राफर, चर्चित लेखक, कुशल प्रशिक्षक, अग्रणी सामाजिक कार्यकर्ता, जिज्ञासू अघ्येता, और दूरदर्शी चिंतक रहे. उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के और भी आयाम हैं. परन्तु यह भी सच है कि उनका व्यक्तित्व प...
किन्नौर का कायाकल्प करने वाला डिप्टी कमिश्नर

किन्नौर का कायाकल्प करने वाला डिप्टी कमिश्नर

संस्मरण, हिमाचल-प्रदेश
कुसुम रावतमेरी मां कहती थी कि किसी की शक्ल देखकर आप उस ‘पंछी’ में छिपे गुणों का अंदाजा नहीं लगा सकते। यह बात टिहरी रियासत के दीवान परिवार के दून स्कूल से पढ़े मगर सामाजिक सरोकारों हेतु समर्पित प्रकृतिप्रेमी पर्वतारोही, पंडित नेहरू जैसी हस्तियों को हवाई सैर कराने वाले और एवरेस्ट की चोटी की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने लाने वाले एअरफोर्स पायलट, किन्नौर की खुशहाली की कहानी लिखने वाले और देश में पर्यावरण के विकास का खाका खींचने वाले वाले दूरदर्शी नौकरशाह नलनी धर जयाल पर खरी बैठती है। देश के तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले इस ताकतवर नौकरशाह ने हमेशा अपनी क्षमताओं से एक मील आगे चलने की हिम्मत दिखाई जिस वजह से वह भीड़ में दूर से दिखते हैं। जीवन मूल्यों के प्रति ईमानदारी, प्रतिबद्वता व संजीदगी से जीने का सलीका इस बेजोड़ 94 वर्षीय नौकरशाह की पहचान है। यह कहानी एक रोचक संस्मरण है कि क...