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स्कूली शिक्षा की वैकल्पिक राहें

स्कूली शिक्षा की वैकल्पिक राहें

शिक्षा
गांधी जी ने शिक्षा के सुन्दर वृक्ष के समूल विनाश के लिए अंग्रेजों को उत्तरदायी ठहराया था...प्रो. गिरीश्वर मिश्रस्कूली शिक्षा सभ्य बनाने के लिए एक अनिवार्य व्यवस्था बन चुकी है. शिक्षा का अधिकार संविधान का अंश बन चुका है. भारत में स्कूलों पर प्रवेश के लिए बड़ा दबाव है और अभी करोड़ों बच्चे because स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और जो स्कूल जा रहे हैं उनमें से काफी बड़ी संख्या में बीच में ही स्कूल की पढाई छोड़ दे रहे हैं. यानी शिक्षा के सार्वभौमीकरण का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है. दूसरी तरफ स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को ले कर भी सवाल खड़े होते रहे हैं. सभी बच्चों को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय सांस्कृतिक प्रासंगिकता आदि को दर किनार रख सभी को एक ही ढाँचे में एक ही तरह के सांचे में ढाल कर शिक्षा की व्यवस्था की जाती है.स्कूली शिक्षागांधी जी ने शिक्षा के सुन्दर वृक्ष के समूल विनाश के लिए ...
“वराहमिहिर के अनुसार भूमिगत शिलाओं से जलान्वेषण”

“वराहमिहिर के अनुसार भूमिगत शिलाओं से जलान्वेषण”

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-18डॉ. मोहन चंद तिवारीआधुनिक भूविज्ञान के अनुसार भूमि के उदर में ऐसी बड़ी बड़ी चट्टानें होती हैं जहां सुस्वादु जल के सरोवर बने होते हैं. केंद्रीय भूजल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार भारतीय प्रायद्वीप का लगभग because 70 प्रतिशत हिस्सा जिन ‘कड़ी चट्टानों’ (Aquifers) से बना है उन चट्टानों के नीचे पानी का विशाल भंडार मौजूद है जिसमें से सालाना 4.23 क.हे.मी. पानी काम में लाया जा सकता है जबकि आज केवल 1 क.हे.मी. ही काम आ रहा है. वराहमिहिर की बृहत्संहिता में इन्हीं भूमिगत जल के खजानों को खोजने के अनेक उपाय बताए गए हैं..बांबी (12मार्च, 2014 को ‘उत्तराखंड संस्कृत अकादमी’, so हरिद्वार द्वारा ‘आई आई टी’ रुडकी में आयोजित विज्ञान से जुड़े छात्रों और जलविज्ञान के अनुसंधानकर्ता विद्वानों के समक्ष मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य ‘प्राचीन भारत में जलविज्ञान‚ जलसंरक्षण और जलप्रबंधन’ से स...
उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी एवं राज संत हरिदत्त काण्डपाल

उत्तराखंड के स्वतंत्रता सेनानी एवं राज संत हरिदत्त काण्डपाल

स्मृति-शेष
पुण्यतिथि (24 सितम्बर) पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज 24 सितम्बर उत्तराखंड के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और राज संत श्री हरिदत्त काण्डपाल जी की पुण्यतिथि है. स्व. हरि दत्त कांडपाल ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पूरे पाली पछाऊं क्षेत्र में आजादी के becauseआंदोलन की अलख जलाई.आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेज हुक्मरानों की नाक में दम कर दिया था,जिसकी वजह से उन्हें कई बार कठोर कारावास हुई.आजादी के बाद स्व. हरिदत्त कांडपाल 1957 से 1974 तक लगातार द्वाराहाट क्षेत्र के विधायक रहे. यूपी शासनकाल में वह वनमंत्री भी थे.जागरी गौरतलब है कि अंग्रेजी हुकुमत के दौरान गांधी जी के आह्वान पर उत्तराखंड में स्वराज प्राप्ति के लिए स्वतंत्रता सेनानियों के जन आंदोलन के रूप में सल्ट क्रांति और सन 1942 में समूचे देश में 'भारत छोड़ो' आंदोलन का जो बिगुल बजा,उसमें पाली पछाऊं व द्वाराहाट- soरानीखेत क्षेत...
जागरी, बुबू और मैं (धामी लगा म्येरी चाल) अंतिम भाग

जागरी, बुबू और मैं (धामी लगा म्येरी चाल) अंतिम भाग

संस्मरण
मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—51प्रकाश उप्रेतीनरसिंह देवता थोड़ा हिले लेकिन नाचे नहीं. बुबू कुछ समझ रहे थे क्योंकि वो उनके पुराने जगरी थे. उनके घर में पहली बार 'नौतार' (पहली-पहली बार) भी बुबू ने अवतरित किया था. becauseउस समय becauseनरसिंह ने गुरु के तौर पर 'हाथ मार' (वचन दिया) रखा था कि आगे से तुम ही मेरे गुरु रहोगे और तुम्हारे नाम लेने मात्र से ही मैं दर्शन दे दूँगा. ऐसा होने के बावजूद नरसिंह नहीं नाच रहे थे.जागरी बुबू ने एक बार फिर चाल लगाई. हुडुक की गमक फिर से गूँजने लगी और मैं साथ में थकुल 'मिसाने' में लगा हुआ था. बुबू अब नरसिंह देवता को 'हाथ मारने' (वचन देना) वाली बात भी यादbecause दिला रहे थे. हुडुक, थकुल और बुबू की आवाज से पूरा माहौल देवमय हो रखा था. वहाँ बैठे सभी लोग विनती-अर्जी कर रहे थे. जिनकी जागरी थी वो नरसिंह देवता के पांव में पड़कर विनती कर रहे थे. बुबू बीच-...
युवा मन के शेर: शमशेर 

युवा मन के शेर: शमशेर 

स्मृति-शेष
वराहमिहिरडॉ. अरुण कुकसाल ‘आज शाम ठीक 4 बजे चौघानपाटा में... के खिलाफ आम जन की आवाज बुलंद करने के लिए शमशेर बिष्ट एवं उनके साथी एक सभा को संबोधित करेगें.’ रैमजे इंटर कालेज, अल्मोडा के मेन फाटक पर हाथ में छोटा चैलेंजर (माइक) लिए एक युवा बाजार में चलते-फिरते लोगों को शाम की सभा की सूचना दे रहा था. शमशेर बिष्ट नाम becauseसे मैं अखबारों और पत्रिकाओं के माध्यम से वाकिफ था. वैसे पुरानी टिहरी में रहते हुए चिपकों की पद यात्राओं और कार्यक्रमों में जब भी कुमाऊं की बात आती तो उसमें शमशेर बिष्ट का जिक्र जरूर होता था. मैं बिल्कुल पास जाकर उस युवा को देखता हूं. दमदार आवाज, खूबसूरत चेहरा, छोटी और तीखी आखें, दशहरे के हल्के सर्द दिनों की सरसरी हवा उस युवा के माथे पर आये लम्बे-घने बालों को लहराते हुए उड़ा रही थी. पर उससे बेखबर वो शक्स शाम की सभा के बारे में और भी बातें बताता जा रहा था.बेखबर यार...
“वराहमिहिर के अनुसार दीमक की बांबी से भूमिगत जलान्वेषण”

“वराहमिहिर के अनुसार दीमक की बांबी से भूमिगत जलान्वेषण”

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-17डॉ. मोहन चंद तिवारीवराहमिहिर ने भूमिगत जल को खोजने के लिए वृक्ष-वनस्पतियों के साथ साथ भूमि के उदर में रहने वाले मेंढक, मछली, सर्प, दीमक आदि जीव-जन्तुओं को निशानदेही का butआधार इसलिए बनाया है क्योंकि ये सभी जीव-जन्तुओं को आद्रता बहुत प्रिय है और अपने जीवन धारण के लिए ये भूमिगत जल की नाड़ियों को सक्रिय करते हुए जल का स्तर सदा ऊपर उठाए रखते हैं. आधुनिक वैज्ञानिकों ने भी दीमक से जुड़ी वराहमिहिर की जलवैज्ञानिक मान्यताओं पर अनुसन्धान करते हुए इन्हें सत्य पाया है.वराहमिहिर (12मार्च, 2014 को ‘उत्तराखंड संस्कृत अकादमी’, but हरिद्वार द्वारा ‘आई आई टी’ रुडकी में आयोजित विज्ञान से जुड़े छात्रों और जलविज्ञान के अनुसंधानकर्ता विद्वानों के समक्ष मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य ‘प्राचीन भारत में जलविज्ञान‚ जलसंरक्षण और जलप्रबंधन’ से सम्बद्ध ‘भारतीय जलविज्ञान’ पर संशोधित लेख “द...
जागरी, बूबू और मैं (घात-मघता, बोली-टोली) भाग-2

जागरी, बूबू और मैं (घात-मघता, बोली-टोली) भाग-2

संस्मरण
मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—50प्रकाश उप्रेतीहुडुक बुबू ने नीचे ही टांग रखा था लेकिन किसी ने उसे उठा कर ऊपर रख दिया था. बुबू ने हुडुक झोले से निकाला और हल्के से उसमें हाथ फेरा, वह ठीक था. उसके बाद वापस झोले में रख दिया. so हुडुक रखने के लिए एक काला सा थैला था. उसी में but रखा रहता था. बुबू के हुडुक पर कोई हाथ लगा दे यह उनको मंजूर नहीं था. तब ऐसे किस्से भी बहुत प्रचलित थे कि मंत्रों से कोई हुडुक या जगरी की आवाज़ बंद कर देता है. वो कहते थे कि "आवाज मुनि गे".जागरी जागरी अंदर लगनी थी. देवताओं के आसन लग चुके थे. बुबू और मेरे लिए आसन लगा हुआ था. एक आदमी सबको पिठ्या लगा रहा था. मुझे भी उन्होंने पिठ्या लगाया और 10 रुपए दक्षिणा दी. मैंने उन्हें सीधे अपने झोले में रखे तौलिए के किनारे में बांध दिया. अब एक तरफ देवताओं के आसन लगे हुए थे और ठीक उनके सामने मैं, बुबू और दो 'ह्वो' becau...
जलवायु परिवर्तन हिमालय के भूगर्भीय जलस्तर को घटा रहा है : शोध

जलवायु परिवर्तन हिमालय के भूगर्भीय जलस्तर को घटा रहा है : शोध

पर्यावरण
ग्लेशियर पिघलने से जल स्रोतों की स्वतंत्रता पर गंभीर संकट…निशांतपानी के चश्मे हिमालय क्षेत्र के ऊपरी तथा बीच becauseके इलाकों में रहने वाले लोगों की जीवन रेखा हैं. लेकिन पर्यावरणीय स्थितियों और एक दूसरे से जुड़ी प्रणालियों की समझ और प्रबंधन में कमी के कारण यह जल स्रोत अपनी गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं. भूमिगत जल यह कहना है इंडियन स्‍कूल ऑफ बिजनेस के भारती but इंस्‍टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी में रिसर्च डायरेक्‍टर एवं एडजंक्‍ट एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्‍टर अंजल प्रकाश का. ऑब्‍जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित डॉक्‍टर अंजल प्रकाश के इस अध्ययन के मुताबिक़ पानी के यह चश्मे जलापूर्ति के प्रमुख स्रोत है और वह भूतल और भूगर्भीय जल प्रणालियों के अनोखे संयोजन से फलते-फूलते और बदलते हैं. so माकूल हालात में जलसोते या चश्मे के जरिए भूगर्भीय जल रिसकर बाहर आता है. यह संपूर्ण हिमालय क्षेत्र के तमाम शहर...