त्यूणी में जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन का आयोजन, बच्चों ने लोकभाषा संरक्षण का दिया संदेश

Kavi Sammelan jaunsari

 

  • नीरज उत्तराखंडी

आखर लोक बोली भाषा समिति के तत्वावधान में पंडित शिवराम राजकीय महाविद्यालय, त्यूणी में जौनसारी बोउरी बाल कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और स्थानीय बाल प्रतिभाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जौनसारी बोली में कविता पाठ प्रस्तुत किया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, लोकसंस्कृति और पारंपरिक साहित्य से जोड़ना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। लोकभाषा संरक्षण के संदेश के साथ बच्चों ने जौनसारी बोउरी में सामाजिक जीवन, पहाड़ी संस्कृति, प्रकृति, रिश्तों और लोक परंपराओं पर आधारित कविताओं का प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण किया। बाल प्रतिभाओं की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और स्थानीय बोली के महत्व को पुनः रेखांकित किया।

सम्मेलन में मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय कुमार सिन्हा ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रतियोगिता में कोई हारता नहीं, बल्कि कोई जीतता है और कोई सीखता है। उन्होंने बच्चों को निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देते हुए कहा—
“बहती नदी से हवा तो आती है,
नाव जर्जर ही सही, टकराती तो है।”

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में रचनात्मकता, भाषा प्रेम और सांस्कृतिक चेतना को विकसित करते हैं।

Jaunsari Kavi Sammelan

प्रतियोगिता के परिणाम भी घोषित किए गए, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
त्यूणी की तनु वर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि टिकोची की अनुराधा द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं, त्यूणी की ही आयुषी नेगी ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन जीआईसी त्यूणी के प्रधानाचार्य सुनील शर्मा ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पूरण नाथ राजगुरु उपस्थित रहे। इस अवसर पर शिक्षकों, अभिभावकों, साहित्य प्रेमियों और स्थानीय बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता और बदलती जीवनशैली के बीच लोकभाषाएं धीरे-धीरे सीमित होती जा रही हैं। ऐसे में जौनसारी बोली जैसी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के लिए इस प्रकार के आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं। भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की पहचान, इतिहास और संस्कृति का आधार होती है।

आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी जौनसारी बोली, लोक साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि बच्चों में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व की भावना विकसित हो सके।

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *