
आखिर क्यों भूल गये हम ‘कालू महर’ को
चन्द्रशेखर तिवारी
भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में उत्तराखण्ड के काली कुमाऊं यानि वर्तमान चम्पावत जनपद का अप्रतिम योगदान रहा है. स्थानीय जन इतिहास के आधार पर माना जाता है कि लोहाघाट के निकटवर्ती सुई-बिसुंग इलाके के लोगों की स्वाधीनता संग्राम में बहुत ही सक्रिय भूमिका रही थी. इनमें कालू महर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. स्थानीय लोग इन्हें प्रमुखतः ’काल्मारज्यू’ के नाम से जानते हैं. कालू महर का जन्म बिसुंग के थुवा महर गांव में 1831 में हुआ था. अपने किशोरावस्था के दौर से ही कालू महर ने बिट्रिश हुकूमत का विरोध करना प्रारम्भ कर दिया था.संस्कृति1857 में जब देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम लड़ा गया तब दुर्गम क्षेत्र होने के कारण उत्तराखण्ड में इसका विशेष प्रभाव तो नहीं पड़ा पर काली कुमाऊं की जनता ने अपने वीर सेनानायक कालू महरा की अगुवाई में विद्रोह कर ब्रिटिश प्रशासन की जडें एक तरह से हिला ही ...









