Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
गोरिल के पिता हालराई थे या झालराई?

गोरिल के पिता हालराई थे या झालराई?

धर्मस्थल
एक गवेषणात्मक विवेचनाडॉ. मोहन चंद तिवारीन्याय देवता गोरिल से सम्बंधित चर्चा के संदर्भ में प्रायः यह जिज्ञासा प्रकट की जाती रही है कि गोरिल के पिता का नाम हालराई था अथवा झालराई? यह जिज्ञासा इसलिए भी स्वाभाविक है कि मैंने प्रो.हरि नारायण दीक्षित जी द्वारा रचित महाकाव्य ‘श्रीग्वल्लदेवचरितम्’ के संदर्भ में जो समालोचनात्मक चर्चा चलाई है,उसके अनुसार ग्वेलदेवता के पिता because का नाम हालराय ही है. किन्तु सामान्य रूप से देखा जाए तो ग्वेलदेवता के पिता के सम्बंध में दोनों प्रकार की मान्यताएं लोक प्रचलन में हैं. कहीं जागर कथाओं में ग्वेल देवता के पिता का नाम झालराई तो कहीं हालराई गाया जाता है. ग्वेलदेवता विषयक लिखित साहित्य में भी दो तरह के संस्करण प्रचलित हैं.कहीं झालराई को तो कहीं हालराई को गवेल्ज्यू का पिता कहा गया है.नेता जीइतिहासकार ई टी एटकिंसन, तारादत्त गैरोला, डा. देवसिंह पो...
कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्ताह ?

कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्ताह ?

साप्ताहिक राशिफल
साप्ताहिक राशिफल (29 जून से 4 जुलाई)  मेष: इस सप्ताह आपको घर एवं बाहर दोनों जगह धीरे-धीरे तालमेल बनता हुआ नजर आयेगा. किसी प्रभावी व्यक्ति की मदद से रास्ते में आ रही अड़चनें दूर होंगी. अटके कार्यों में गति आयेगी लेकिन एक बात का पूरा ख्याल रखें कि आपकी सफलता बहुत हद तक आपकी ईमानदारी पर टिकी है. किसी भी चीज को करते समय अपना शत प्रतिशत दें. सप्ताह के मध्य में कोई घरेलू चिंता सता सकती है. आर्थिक स्थिति में सुधार के बावजूद खर्च की अधिकता बनी रहेगी. प्रेम संबंध प्रगाढ़ होंगे. दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी. उपाय: पक्षियों को दाना डालें. span style="display: none;">because 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं स: भौमाय नम:' मंत्र का जप करें.ज्योतिष वृष: वृष राशि के जातकों को इस सप्ताह तमाम चीजों को लेकर व्यस्तता बनी रहेगी. नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रुओं से सावधान रहने की आवश्यकता ह...
निर्भीक ‘निशंक’: न कोरोना तोड़ पाया, न ही डॉक्टरों की सलाह रोक पाई.. कर्तव्यपथ पर डटे रहे निशंक

निर्भीक ‘निशंक’: न कोरोना तोड़ पाया, न ही डॉक्टरों की सलाह रोक पाई.. कर्तव्यपथ पर डटे रहे निशंक

देश—विदेश
अरविन्द मालगुड़ी निशंक जिसे कोई शंका या डर न हो अर्थात  निर्भीक , अपने नाम के अनुरूप ही कार्य कर रहे हैं उत्तराखंड से सांसद और वर्तमान  में केन्द्र में शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक।  कैसे,  आपको बताते हैं।  केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल 'निशंक' अपनी जिजीविषा, दृढ़निश्चय, लगनपूर्ण  कार्य, कठोर मेहनत एवं सहृदयता के लिए जाने जाते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अस्वस्थ होने के बाद भी वह लगातार विभागीय कार्य में जुटे हुए हैं। पिछले 23 दिनों से पोस्ट कोविड की गंभीर समस्याओं  के चलते वे एम्स दिल्ली के  आई सी यू  में भर्ती रहे हैं और कोरोन को मात दे आई सी यू  से अभी कुछ समय पहले ही बाहर आये हैं।उनके करीबी लोग बताते हैं कि इस गंभीर स्थिति में भी निशंक जी ने काम को कभी बाधित नहीं किया और अपने मंत्रालय के सभी सहयोगियों को आई सी यू  से निर्दे...
सांच ही कहत और सांच ही गहत है!

सांच ही कहत और सांच ही गहत है!

स्मृति-शेष
कबीर जयन्ती 24 जून  पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्रआज जब सत्य और अस्तित्व के प्रश्न नित्य नए-नए विमर्शों में उलझते जा रहे हैं और जीवन की परिस्थितियाँ विषम होती जा रही हैं सत्य की पैमाइश और भी because जरूरी हो गई है. ऐसा इसलिए भी है कि अब ‘सबके सच’ की जगह किसका सच और किसलिए सच के प्रश्न ज्यादा निर्णायक होते जा रहे हैं. इनके विचार सत्ता, शक्ति और वर्चस्व के सापेक्ष्य हो गए हैं. इनके बीच सत्य अब कई-कई पर्तों के बीच ज़िंदा (या दफ़न!) because रहने लगा है और उस तक पहुँचना एक असंभव संभावना because सी होती जा रही है. शायद अब के  यथार्थप्रिय युग में सत्य होता नहीं है,  सिर्फ उसका विचार ही हमारी पहुँच के भीतर रहता है. सत्य की यह मुश्किल किसी न किसी रूप में पहले भी थी जब तुलनात्मक दृष्टि से सत्य-रचना पर उतने दबाव न थे जितने आज हैं.संस्कृति सत्य के लिए साहस की जरूरत के दौर में कबीर का स्मरण ...
उत्तराखंड की लोककला ऐपण को नए कैनवास पर उकेर कर बनाया ब्रांड ‘चेली ऐपण’

उत्तराखंड की लोककला ऐपण को नए कैनवास पर उकेर कर बनाया ब्रांड ‘चेली ऐपण’

अभिनव पहल
आशिता डोभाल संस्कृति और सभ्यताओं because का समागम अगर दुनिया में कहीं है तो वह हमारी देवभूमि उत्तराखंड में है, जो हमारी देश—दुनिया में एक विशेष पहचान बनाते हैं, इसके संरक्षण का जिम्मा वैसे तो यहां के हर वासी का है पर इस लोक में जन्मे कुछ ऐसे साधक और संवाहक हैं जो इनको संजोने और संवारने की कवायद में जुटे हुए हैं.संस्कृति हम जब कहीं जाते हैं, तो वहां की संस्कृति और सभ्यता को देखने की ललक जब हमारे मन को लालायित करती है, सबसे पहले हम वहां देखते हैं कि लोक के प्राणदायक because वो कर्मयोगी कौन हैं जिनके तप और संकल्प से ये पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे पास धरोहर के रूप रहती है. ऐसे ही एक संस्कृति के सच्चे साधकों में है— नमिता तिवारी, जो पिछले दो दशक से अपने काम को नए—नए कलेवर और कैनवास पर अपनी कला के हुनर की छाप छोड़ रही है, जो आने वाली पीढ़ी के लिए बहुत है प्रेरणादायक सिद्ध होगी.परिवार 'संकल्प...
प्रकृति परमेश्वरी के प्रति सायुज्य यानी समर्पणभाव ही योग है

प्रकृति परमेश्वरी के प्रति सायुज्य यानी समर्पणभाव ही योग है

योग-साधना
अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारीभारत के लिए यह गौरव का विषय है कि विश्व आज फिर से अपने पूर्वजों के योग चिंतन की प्रासंगिकता को स्वीकार कर रहा है.अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य होना चाहिए कि भारत के ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर की रक्षा के लिए ऐसा कुछ करे,जिससे कि व्यक्ति और राष्ट्र दोंनों लाभान्वित हों because  और समूचा विश्व जो आज भुखमरी,कुपोषण, आर्थिक विषमता,आतंकवाद,अकाल, सूखा,ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, कोरोना महामारी जैसी प्राकृतिक आपदाओं की विभीषिकाएं झेल रहा है उनसे भी मुक्त हो सके. तभी अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रचारित किया जाने वाले सूक्ति वाक्य ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया:’की भावना को सही मायनों में विश्व पटल पर चरितार्थ किया जा सकेगा.योगभारत के सन्दर्भ में प्रकृति परमेश्वरी के साथ स...
योग ही है आज का युग धर्म

योग ही है आज का युग धर्म

योग-साधना
विश्व योग दिवस (21 जून) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्रयोग का शाब्दिक अर्थ सम्बन्ध (या जोड़ ) है और उस सम्बन्ध की परिणति भी. इस तरह जुड़ना , जोड़ना, युक्त होना, संयुक्त होना  जैसी प्रक्रियाएं योग कहलाती हैं जो शरीर, मन और सर्वव्यापी चेतन तत्व के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं. कुल मिला कर योग रिश्तों को पहचानने की एक अपूर्व वैज्ञानिक कला है जो मनुष्य को उसके अस्तित्व के व्यापक सन्दर्भ में स्थापित करती है. सांख्य दर्शन का सिद्धांत इस विचार-पद्धति की आधार शिला है जिसके अंतर्गत पुरुष और प्रकृति की अवधारणाएं  प्रमुख है. पुरुष शुद्ध चैतन्य है और प्रकृति मूलत: (जड़) पदार्थ जगत है. पुरुष प्रकृति का साक्षी होता है. वह शाश्वत, सार्वभौम, और अपरिवर्तनशील है. वह द्रष्टा और ज्ञाता है. चित्शक्ति भी वही है. प्रकृति जो सतत परिवर्तनशील है उसी से हमारी दुनिया या संसार रचा होता है. ज्योतिष हमारा शरीर भी ...
जानिए— स्वास्थ्य, कारोबार, रिलेशनशिप कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्ताह?

जानिए— स्वास्थ्य, कारोबार, रिलेशनशिप कैसा रहेगा आपके लिए यह सप्ताह?

साप्ताहिक राशिफल
साप्ताहिक राशिफल (21 से 27 जून)  मेष- इस सप्ताह आपके लिए बहुत खूबसूरत रहेगा. आप परिवार की जिम्मेदारियों को समझेंगे. घरेलू कार्य में योगदान देंगे. आपके काम में मजबूती आएगी. इनकम भी बढ़ेगी. यात्रा के लिए सप्ताह का मध्य उत्तम रहेगा. आपके काम में बरकत आएगी because और आप आगे बढ़ेंगे.करियर-बिजनेस: इस सप्ताह अचल संपत्ति, कृषि, बीज, संपत्ति की खरीद-बिक्री, लौह अयस्क के सौदे आदि में नौकरी कर रहे लोग उत्कृष्ट प्रगति कर सकते हैं. अंतिम दो दिनों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें.भागीदारी के मामलों में आगे बढ़ने के लिए समय बेहतर है. किसी मामले में अचानक और बड़े बदलाव करने का विचार बार-बार आएगा.ज्योतिष रिलेशनशिप: इस सप्ताह प्रेम संबंधों में आगे बढ़ने के लिए अभी अच्छा समय है. जो लोग पहले से ही रिलेशनशिप में हैं वे कहीं घूमने जाने का प्लान कर because सकते हैं. विवाहित जातक सप्ताह के मध्य में उत्कृष...
स्मृतियों के उस पार…

स्मृतियों के उस पार…

संस्मरण
पिता की स्मृतियों को सादर नमनसुनीता भट्ट पैन्यूली समय बदल जाता है किंतु जीवन की सार्थकता जिन बिंदुओं पर निर्भर होती है उनसे वंचित होकर जीवन में क्यों, कैसे, किंतु और परंतु रूपी प्रश्न ज़ेहन में उपजकर  बद्धमूल रहते हैं हमारी चेतना में और झिकसाते रहते हैं  हमें ताउम्र मलाल बनकर लेकिन क्या कर सकते हैं ?जो समय रेत की तरह फिसल जाता है वह  मुट्ठी में कभी एकत्रित नहीं होता.  इंसानी फितरत या उसकी मजबूरी कहें कि चाहे कितना बड़ा घट जाये, जीवन के कथ्य तो वही रहते हैं किंतु जीने के संदर्भ बदल जाते हैं.नेता जी 8 अगस्त  से 10अगस्त 2015 के मध्य पिता के जन्मदिन का होना और उनकी विदाई की अनभिज्ञता के इन दो दिनों में  पिता के साथ मेरे उड़ते -उड़ते  संवाद आज तक कहीं ठौर ही नहीं बना पाये शायद इसीलिए  20 जून को पितृ दिवस पर मेरी पनीली आंखों में सावन का अषाढ़ कुछ अजीब सा हरा हो जाता है.नेता जी आज ...
मेघ पिता है धरती माता, ‘पितृदेवो भव’

मेघ पिता है धरती माता, ‘पितृदेवो भव’

समसामयिक
‘फादर्स डे’ 20 जून पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज 20 जून को महीने का तृतीय रविवार होने के कारण ‘फादर्स डे’ के रूप में मनाया जाता है. ‘फादर्स डे’ पिताओं के सम्मान में मनाया जाने वाला दिवस है जिसमें पितृत्व (फादरहुड) के because प्रभाव को समारोह पूर्वक मनाने की भावना संन्निहित रहती है. दुनिया के अलग अलग देशों में अलग अलग दिन और अलग अलग परंपराओं के कारण ‘फादर्स डे’ मनाया जाता है.नेता जी सबसे पहला ‘फादर्स डे’ अमेरिका की सोनोरा स्मार्ड डोड ने अपने पिता विलियम जैक्सन स्मार्ट की याद में 19 जून,1910 को मनाना शुरू किया था. क्योंकि उस साल इसी दिन जून का because तीसरा रविवार था. तबसे अमेरिका में जून के तीसरे रविवार को ‘फादर्स डे’ मनाया जाने लगा. जर्मनी में ‘फादर्स डे’ (वेतरताग) मनाने की परंपरा चर्च और यीशू मसीह के स्वर्गारोहण से जुड़ी हुई है. यह हमेशा ‘होली थर्स डे’ यानी पवित्र गुरुवार क...