• निशांत  

भारत के नौ राज्यों में तूफ़ान तौकते के कहर का सामना करने के सिर्फ़ एक हफ्ते बाद, देश अब बंगाल की खाड़ी में अपने दूसरे चक्रवाती तूफान यास के लिए कमर कस रहा है. because तौकते की यात्रा की तरह, उष्णकटिबंधीय तूफ़ान यास भी तेज़ी से तीव्र हो रहा है. तूफ़ान यास को वर्तमान में गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में देखा जा रहा है, जो पूर्व-मध्य और उससे सटी बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य में मंथन कर रहा है, जिसकी निरंतर हवा की गति 100-115 किमी प्रति घंटे है, और 125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक बढ़ जाती है (लाइव अपडेट यहां ट्रैक करें).

यूसर्क

वर्तमान में, तूफ़ान यास पारादीप से लगभग 320 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व, बालासोर से 430 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व और दीघा से 420 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व,और खेपुपारा से 470 किमी दक्षिण-दक्षिणपश्चिम पर है. ऋतुविज्ञानशास्रीयों (मौसम विज्ञानियों) के अनुसार, तूफ़ान यास अनुकूल मौसम की स्थिति की तरफ़ आगे बढ़ because रहा है और तूफ़ान 25 मई की दोपहर तक तेज़ी से एक बहुत ही गंभीर चक्रवात में बदल जाएगा, जिसमें 125-135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लेकर 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक की हवा चलेगी. इसके बाद के घंटों में लैंडफॉल तक इसके और अधिक तनावग्रस्त होने की संभावना है, जिससे हवा की गति बढ़ जाएगी.

यूसर्क

Skymet Weather (स्काईमेट वेदर) के मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार, उष्णकटिबंधीय तूफ़ान उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर ट्रैक करेगा, 26 मई को दोपहर 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच, बालासोर के आसपास पारादीप और सागर द्वीप के बीच, उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटों पर इसके लैंडफॉल बनाने की भारी because संभावना है. लैंडफॉल के समय, हम 160-170 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से 185 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवा चलने की आशा कर सकते हैं. व्यापक बारिश और आंधी के साथ तेज़ हवाएं ओडिशा के तटीय इलाकों और इससे सटे पश्चिम बंगाल तट पर शुरू हो गई हैं. तूफ़ान यास का अपेक्षित ट्रैक निम्नलिखित है.

यूसर्क

एक बार फिर से, साइक्लोजेनेसिस की वजह जलवायु परिवर्तन है. भारतीय समुद्र इस वर्ष सामान्य के मुक़ाबले असाधारण रूप से गर्म रहे हैं, जिससे वायुमंडलीय और समुद्र की स्थिति because चक्रवातों के बार-बार बनने और उनके तीव्र होने के लिए अनुकूल हो गई है. पलावत ने यह भी कहा है कि ध्यान केंद्रित करने का प्रमुख बिंदु रैपिड इंटेंसीफ़िकेशन (तेज़ गहनता) है, क्योंकि इसका बाढ़ और तेज हवाओं और निकासी प्रक्रिया के रूप में विनाश और बारिश पर सीधा प्रभाव पड़ेगा.

यूसर्क

तूफ़ान के निर्माण के लिए because समुद्र की सतह के तापमान (SSTs) (एसएसटी) के लिए थ्रेसहोल्ड वैल्यू (सीमा मूल्य) 28 डिग्री सेल्सियस है. वर्तमान में, बंगाल की खाड़ी के साथ-साथ अरब सागर पर एसएसटी लगभग 31 डिग्री सेल्सियस – 32 डिग्री सेल्सियस है.

यूसर्क

ऐसा ही रुख़ तूफ़ान तौकते because और अब तूफ़ान यास में देखा गया. हालांकि दोनों तूफ़ानों की  प्रतिक्रिया एक ही तरह की है लेकिन इन दोनों में भूगोल से संबंधित थोड़ा अंतर है.

यूसर्क

डॉ रॉक्सी मैथ्यू कोल, वैज्ञानिक, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान, प्रमुख लेखक, IPCC (आईपीसीसी) महासागरों और क्रायोस्फीयर, के अनुसार, “तूफ़ान यास because और तूफ़ान तौकते के बीच समानता यह है कि दोनों से पहले समुद्र की सतह के बहुत अधिक तापमान थे, जो 31-32 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचे. ये उच्च तापमान तूफ़ान तौकते के थोड़े समय में एक अत्यंत गंभीर चक्रवात में बदल जाने के लिए अनुकूल थे.

यूसर्क

इसी तरह, उच्च तापमान की तूफ़ान यास को भी तेज़ी से तीव्र करने में मदद करने की भविष्यवाणी करि जा रही है. पर, एक अंतर है. तूफ़ान तौकते कई दिन के लिए अरब सागर because में रहा, जहां वह लगातार गर्मी और नमी खींच सकता था, और 220 किमी / घंटा से अधिक की चरम तीव्रता तक पहुंचा. तूफ़ान यास के मामले में, यह बंगाल की उत्तरी खाड़ी में बना है, और लैंडफॉल तक की यात्रा दूरी कम है. नतीजतन, समुद्र के ऊपर तौकते की तीव्रता को ताक़तवर बनने के लिए लंबी अवधि नहीं मिलेगी. यहां सामान्य तत्व यह है कि दोनों घाटियों में समुद्र का because बढ़ता तापमान इन चक्रवातों को उनकी “रैपिड इंटेंसीफ़िकेशन” (“तेज़ गहनता”) प्रक्रिया में सहायता कर रहा है. अन्यथा, हम बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवातों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं देखते हैं, जैसा कि हम अरब सागर में देखते हैं.”

यूसर्क

निरंतर जलवायु परिवर्तन के साथ because इस सदी में “रैपिड इंटेंसीफ़िकेशन” (“तेज़ गहनता”) के बारंबार रहने और अधिक लगातार होने की उम्मीद है. एक अध्ययन में पाया गया because कि इंटेंसीफ़िकेशन (गहनता) की दर जो अभी एक सदी में एक बार होती है, 2100 तक हर 5-10 साल में हो सकती है.

यूसर्क

महेश पलावत ने यह भी कहा कि, “यद्यपि तूफ़ान यास की तीव्रता तूफ़ान तौकते की तुलना में कम होगी लेकिन नुकसान के मामले में यह काफ़ी मज़बूत साबित होगा. because लैंडफॉल के समय, तूफ़ान यास की 165-175 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से 185 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार की हवा के साथ-साथ बाढ़ की बारिश होने की संभावना है. तटीय ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड में व्यापक मूसलाधार बारिश और विनाशकारी हवाओं के लिए रेड अलर्ट पर रहने की संभावना है.”

यूसर्क

तूफ़ानों की लहर में वृद्धि

तूफ़ान यास से संभावित तूफ़ानी लहर इस तूफ़ान का सबसे खतरनाक जोखिम हो सकता है. बढ़ते समुद्र के स्तर में वैश्विक जलवायु परिवर्तन एक योगदान कारक रहा है, because और इसके नतीजतन तूफ़ानों की लहर के जोखिम बढ़ने की संभावना है.

मानव कार्बन उत्सर्जन के परिणामस्वरूप वैश्विक समुद्र का स्तर पहले ही लगभग 23 सेमी बढ़ गया है – जिससे भयंकर रूप से उस दूरी बढ़ रही है जिस तक तूफान की लहर because पहुंच सकती है. हाल के वर्षों में उत्तर हिंद महासागर में समुद्र का स्तर अन्य स्थानों की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ा है.

यूसर्क

जर्नल नेचर में 2019 के एक प्रमुख अध्ययन के अनुसार, भारत और बांग्लादेश 2050 तक भयंकर वार्षिक तटीय बाढ़ का अनुभव कर सकते हैं, जिससे भारत में 36 मिलियन because और बांग्लादेश में 42 मिलियन लोग प्रभावित होंगे.

राज्य द्वारा संचालित IMD because (आईएमडी) द्वारा जारी चेतावनी के अनुसार: खगोलीय ज्वार से 2-4 मीटर अधिक ऊंचाई की ज्वार की लहरें लैंडफॉल के समय के आसपास झारग्राम, दक्षिण 24 परगना, मेदिनीपुर, बालासोर, भद्रक, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर के निचले तटीय इलाकों के जलमग्न होने की संभावना है.

यूसर्क

तूफ़ान का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

चरम मौसम की घटनाओं के because साथ-साथ जानमाल का नुकसान भी होता है और सामूहिक विनाश होता है जिसका सामाजिक-आर्थिक प्रभाव भी होता है. एक रिपोर्ट, काउंटिंग द कॉस्ट 2020: ए ईयर ऑफ़ क्लाइमेट ब्रेकडाउन बाई क्रिस्चियन ऐड, दिसंबर-2020 (दिसंबर-2020 में ईसाई सहायता द्वारा जलवायु ब्रेकडाउन का एक वर्ष) के अनुसार 2020 में जलवायु परिवर्तन-ट्रिगर्ड (जलवायु परिवर्तन because की बदौलत होने वाली) घटनाओं के कारण विश्व स्तर पर जीवन का अधिकतम नुकसान भारत में बाढ़ और तूफ़ान अम्फान द्वारा हुआ. वास्तव में, तूफ़ान अम्फान वर्ष का सबसे महंगा चक्रवात था और इसका आर्थिक प्रभाव 13 अरब डॉलर (लगभग 96,000 करोड़ रुपये) से अधिक पड़ा. रिपोर्ट में कहा गया है कि तूफ़ान अम्फान ने लगभग 4.9 मिलियन लोगों को विस्थापित करते हुए पश्चिम बंगाल के तटीय हिस्सों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया था, जो कि 2020 में दुनिया में कहीं भी चरम मौसम की घटना के कारण सबसे बड़ा विस्थापन था.

यूसर्क

तूफ़ान यास भारतीय तट, इस बार ओडिशा तट, के लिए भी ऐसा ही खतरा पैदा कर रहा है. मौसम विज्ञानी महेश पलावत के अनुसार, हम ओडिशा के तटीय ज़िलों में तबाही से बच because नहीं सकते हैं क्योंकि यास बहुत भीषण चक्रवाती तूफान के रूप में ज़मीन से टकराएगा. लैंडफॉल के समय, हम मूसलाधार बारिश के साथ-साथ 185 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं की उम्मीद रख सकते हैं, जो निचले इलाकों में बाढ़, और पेड़ों, बिजली के खंभे, छत और कच्चे और पक्के घरों के उखड़ने जैसे बड़े पैमाने पर विनाश का कारण बन सकती है.

यूसर्क

(लेखक लखनऊ because में निवासरत हैं एवं पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों में रुचि और इन विषयों को हिन्दी पत्रकारिता के पटल पर प्रासंगिक बनाने के इरादे से इससे जुड़ी जानकारियां लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत हैं.)

Share this:
About Author

Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *