Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
उत्तराखंड में स्‍वरोजगार का जरिया बन सकती है कैमोमाइल की खेती

उत्तराखंड में स्‍वरोजगार का जरिया बन सकती है कैमोमाइल की खेती

खेती-बाड़ी, ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-17मंजू कालाजहाँ... कैमोमाइल का फूल सुंदरता, सादगी because और शांति का प्रतीक माना जाता है, वहीं निकोटिन रहित होने के कारण  यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है. पेट के रोगों के लिए यह रामबाण औषधि है, वहीं त्वचा रोगों में भी कैमोमाइल काफी लाभकारी है. यह जलन, अनिद्रा, घबराहट और चिड़चिड़ापन में... भी लाभकारी है. कोलकाता उत्तराखंड के... परिपेक्ष में इस जादू के फूल की...बात करें... तो भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन ने खेती... और… किसानी को गहरे तक प्रभावित किया है. because अविभाजित उत्तर प्रदेश में यहां आठ लाख हेक्टेयर में खेती होती थी, जबकि 2.66 लाख हेक्टेयर जमीन बंजर थी. राज्य गठन के बाद अब खेती का रकबा घटकर सात लाख हेक्टेयर पर आ गया है, जबकि बंजर भूमि का क्षेत्रफल बढ़कर 3.66 लाख हेक्टेयर हो गया है. सगंध खेती की मुहिम अब राज्य के 109 एरोम...
वियोगी मन की ‘आह’ से नहीं बल्कि ‘बेचैनी’ से उपजी कविताएँ 

वियोगी मन की ‘आह’ से नहीं बल्कि ‘बेचैनी’ से उपजी कविताएँ 

पुस्तक-समीक्षा
 प्रकाश उप्रेतीयह दौर कहन का अधिक है. सब कुछ एक साथ कह जाने की होड़ में बहुत कुछ छूट रहा है. साहित्य में भी यही परम्परा दिखाई दे रही है. यहाँ भी ठहराव और अर्थवता की जगह आभासी दुनिया ने ले ली है. रामचन्द्र शुक्ल जिस कवि कर्म को समय के साथ कठिन आंक रहे थे वह आज ज्यादा आसान दिखाई दे रहा है. ठीक इससे पहले की सदी जिसे कथा साहित्य की सदी कहा गया. वह जीवन के जटिल और संश्लिष्ट यथार्थ को अभिव्यक्त करने में काफी हद तक सफल रही. कविता इसमें कहीं चूक गई. इसीलिए सदी के अंत तक एक ओर ‘कविता के अंत’ की बात हो रही थी तो दूसरी तरफ ‘कविता की वापसी’ की घोषणा हो रही थी. आलोचक कविता का अंत लिख रहे थे तो वहीं कवि, कविता की वापसी करवा रहे थे. एक ही समय में कविता दो राहों पर थी. कहा जा रहा था कि कविता संचार के मकड़जाल में तेजी से बदलते समय को पकड़ने में चूक रही है और वह अपने समय के यथार्थ को नहीं पकड़ पा रही है. गद...
आओ हिल-मिल जिएँ और भारत को जोड़ें

आओ हिल-मिल जिएँ और भारत को जोड़ें

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  स्वाधीनता क्या है? इसका अर्थ और उसका स्मरण समय बीतने के साथ धूमिल न होने पाए, राष्ट्र स्वाधीनता के मूल्य को पहचान सके तथा इसके लिए जिन्होंने सर्वस्व न्योछावर कर दिया था so उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करे इसके लिए देश स्वतंत्रता का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहा है. यह इसलिए भी जरूरी है कि आज के भारतीय समाज के सदस्यों में अधिकाँश का जन्म 1947 के बाद हुआ था. उसके पहले जन्मे लोगों की संख्या कम होती जा रही है और स्वतंत्रता के अभाव की पीड़ा और अंग्रेजों के अत्याचार को सह चुके लोगों की दुखान्तिका भी दृष्टि से ओझल हो रही है हालांकि जलियांवाला बाग़ जैसे कई पुरावशेष अभी भी उस अत्याचार की मुखर गवाही देते हैं. अंग्रेजों के शासन के अधीन रहते हुए भारत के सामाजिक-आर्थिक और मानसिक दुनिया का बदलाव जिस तरह हुआ उसके बीच देश के लिए स्वतंत्रता अर्जित करना एक बड़ी चुनौती थी पर बीसवीं सदी के आरंभ...
नरेन्द्र सिंह नेगी: लोक संस्कृति के भी मर्मस्पर्शी गीतकार

नरेन्द्र सिंह नेगी: लोक संस्कृति के भी मर्मस्पर्शी गीतकार

साहित्‍य-संस्कृति
नरेन्द्र सिंह नेगी के जन्मदिन पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीउत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को देश विदेश में पहचान देने वाले गढवाल के जाने माने लोकगायक व गीतकार श्री नरेन्द्र सिंह नेगी का आज जन्म दिन है.माना जाता है कि अगर आप उत्तराखण्ड और वहां के जीवन दर्शन, समाज और लोक संस्कृति, राजनीति, रीति रिवाज, विभिन्न ऋतुओं आदि के बारे में जानना चाहते हों तो केवल नरेन्द्र सिंह नेगी जी के सुरीले गीतों को सुन लो. उनमें वह सब कुछ मिल जाएगा. आसपास नेगी जी का जन्म 12 अगस्त 1949 को पौड़ी जिले के पौड़ी गाँव उत्तराखण्ड में हुआ. उन्होंने अपनी गायकी की शुरुआत पौड़ी से की थी और अब तक वे दुनिया भर के कई बडे-बडे देशों में जाकर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं. नेगी जी ने अपने गीतों के माध्यम से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति का इन्द्रधनुषी रंग बिखेरा है.इस क्षेत्र की वीरगाथाओं को सुरीले स्वर प्रदान किए हैं. जनम...
स्‍त्री देह आकार और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विख्‍यात है रेणुका झील

स्‍त्री देह आकार और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए विख्‍यात है रेणुका झील

हिमाचल-प्रदेश
दीपा कौशलम हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सिरमौर जिले में रेणुका झील एक रमणीय और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है. ये एक लंबाकार झील है जो नाहन और संगराह के बीच स्थित है. रेणुका झील (Renuka Lake) अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटकों को आकर्षित करने वाला स्थान है जहां चारों तरफ फैली हरियाली मन मोह because लेती है. रेणुका झील समुद्र तल से 672 मीटर उपर एक आद्रभूमि है जहां झील के अतिरिक्त सैंचुरी और चिड़ियाघर भी है जिसमें विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों को देखा जा सकता है. सन् 1987 में इस जगह को वाइल्ड लाइफ सैंचुरी घोषित किया गया और सन्  2005 में अद्वितीय जैव विविधता के कारण रामसर क्षेत्र में शामिल कर दिया गया. हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक इस झील को देखने आते हैं .आसपास क्षेत्रीय लोगों के अनुसार रेणुका झील की उत्पत्ति की धार्मिक कथा इस प्रकार है- रेणु न...
प्रकृति व जीवन के नए सृजन का आधार है माहवारी

प्रकृति व जीवन के नए सृजन का आधार है माहवारी

आधी आबादी
भावना मासीवाल  बचपन से पढ़ते और सुनते आ रहे हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है. स्वस्थ तन जो बीमारियों से कोसो दूर है और स्वस्थ मस्तिष्क जो जीवन के प्रति आशान्वित है. because स्वस्थ होना केवल तन का ही नहीं मस्तिष्क का भी अधिकार है. स्त्री के संदर्भ में स्वस्थ होना उसकी प्रोडक्टिविटी तक सीमित है. उससे अधिक स्वास्थ्य संबंधित शिक्षा उसे शायद ही कभी बचपन से अब तक मिली हो. बचपन जो अपने साथ बहुत सारे सपने संजोता है और उनमें जीता है. आज भी यादमुझे आज भी याद है 2002 अर्थात 18 साल पहले विद्यालय परिवेश में बारहवीं की विज्ञान की पुस्तक में रिप्रोडक्शन का एक अध्याय था और हमें कहा गया इसे आप सभी खुद पढ़ ले. because कन्या विद्यालय जैसे खुले परिवेश में पाठ का नहीं पढ़ाना उस विषय से संबंधित सामाजिक मनोविज्ञान को दिखाता है. गांधीस्त्री के बचपन की दुनिया फैंटेसी की होत...
भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

भारत छोड़ो आंदोलन अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

इतिहास
‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की 79वीं वर्षगांठ पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीअगस्त के महीने का भारत की आजादी के आंदोलनों से बहुत पुराना संबंध है. हमें जब आजादी नहीं मिली थी तब आज से 79 वर्ष पूर्व सन् 1942 में इसी महीने में नौ अगस्त को गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए “भारत छोड़ो आंदोलन” (क्विट इंडिया मूमेंट)  के रूप में अपनी आखिरी मुहिम चलाई थी जिसे भारत के because इतिहास में “अगस्त क्रांति” के नाम से भी जाना जाता है. वर्ष 2017 में देश नौ अगस्‍त को भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ मना चुका है. उस उपलक्ष्य में संसद के दोनों सदनों में एक दिन की विशेष बैठक का आयोजन किया गया था और इस दिन संसद के नियमित कामकाज को छोड़कर सांसदों द्वारा केवल देश की आज़ादी प्राप्त करने में 'भारत छोड़ो' आंदोलन की भूमिका के महत्व पर गम्भीरता से चर्चा की गई थी. महात्मा गांधी महात्मा गांधी जी के नेतृत्व म...
विभाण्डेश्वर महादेव को अतिप्रिय है श्रावण मास में पूजा-अर्चना

विभाण्डेश्वर महादेव को अतिप्रिय है श्रावण मास में पूजा-अर्चना

अध्यात्म
डॉ. मोहन चंद तिवारीकुमाऊं मंडल के अल्मोड़ा जिले में द्वाराहाट से आठ कि.मी.की दूरी पर स्थित विभांडेश्वर महादेव उत्तराखंड का प्रसिद्ध तीर्थधाम है. स्कंदपुराण के मानसखंड में भी इस शैव तीर्थ के विशेष because माहात्म्य का वर्णन मिलता है.मान्यता है कि भगवान शिव के विश्राम के दौरान यहां शिव का दायां हाथ पड़ा था. इस तीर्थ क्षेत्र की विशेष महिमा यह है कि मंदिर में विद्यमान त्रिजुगी धूनी त्रेतायुग से लगातार प्रज्ज्वलित रही है. पौराणिक मान्यता के अनुसार सुरभि, नंदिनी और गुप्त सरस्वती की त्रिवेणी के संगम पर स्थित इस मंदिर को उत्तराखंड की काशीधाम की मान्यता प्राप्त है.ज्योतिष ऐतिहासिक दृष्टि से विभाण्डेश्वर महादेव मंदिर शक सम्वत 376 (ईसवी सन 301) में स्थापित हुआ था. मंदिर का वर्तमान स्वरूप 11वीं सदी में कत्यूरी शासकों द्वारा निर्मित किया गया.चंद because राजाओं के शासन काल में भी मंदिर में नियमि...
हैदराबाद निजाम की सेना से कुमाऊँ रेजिमेंट तक, कुमाउँनियों की सैनिक जीवन यात्रा

हैदराबाद निजाम की सेना से कुमाऊँ रेजिमेंट तक, कुमाउँनियों की सैनिक जीवन यात्रा

इतिहास
प्रकाश चन्द्र पुनेठा विश्व के इतिहास का अध्यन करने से ज्ञात होता है कि इतिहास में उस जाति का नाम विशेषतया स्वर्ण अक्षरों से उल्लेखित किया गया है, जिस जाति ने वीरतापूर्ण कार्य किए हैं. विश्व के but इतिहास में अनेक प्रकार की युद्ध की घटनाओं का विस्तृत वर्णन मिलता हैं. इन युद्ध की घटनाओं में वीरतापूर्ण संधर्ष करने वाले वीर व्यक्तियों की गाथा का वर्णन अधिक किया गया है. शक्तिशाली, साहसी तथा वीर व्यक्तियों ने अपने स्वयं के जीवन का बलिदान देकर अपने कुल, परिवार व जाति का नाम वीर जाति में सम्मिलित किया गया हैं. हमारे देश में भी अनेक वीर जातियों का नाम उनके वीरतापूर्ण कार्यो से, व आत्मबलिदान से हमारे देश के इतिहास में दर्ज हैं. इन बहादुर जातियों ने रणक्षेत्र हो या खेल का क्षेत्र दोनो जगह अपनी श्रेष्ठता का झंडा बुलंद किया हैं.नेपाल किसी शक्तिशाली राष्ट्र की शक्ति का आभास उस राष्ट्र की सेना के अ...
मां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी…

मां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी…

कविताएं
विश्‍व स्‍तनपान सप्‍ताह (1 अगस्त से 7 अगस्त) इस बार की थीम 'स्‍तनपान की रक्षा करें- एक साझा जिम्‍मेदारी' है। इस थीम का उद्देश्‍य लोगों को स्‍तनपान के लाभ बताना और उसके प्रति लोगों को जागरूक करना है। इसी उपलक्ष्य नीलम पांडेय 'नील' की कवितामां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी.....मां, तेरे दूध की पहली धार को, सिर्फ दूध नहीं कहूंगी। प्रेम की बयार कहूंगी, मेरे चेहरे पर होने वाली स्नेह बारिश की, पहली सी फुहार कहूंगी। मां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी। सुरक्षा का टीका कहूंगी, आजीवन तेरे स्नेह का मेरे लिए उपहार कहूंगी, तेरे ममत्व को बेमिसाल कहूंगी। मां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी। रक्षा का चक्र कहूंगी, जीवन को वरदान कहूंगी, तेरे दूध की हर बूंद को दृढ़ विश्वास कहूंगी।मां, तेरे दूध को सिर्फ दूध नहीं कहूंगी। स्तन चूसन की पीड़ा को ढक, मन्द मन्द मुस्कान त...