
नदी द्वीप- माजुली और मलाई कोठानी
मंजू दिल से… भाग-23मंजू काला‘एकांत कभी-कभी सबसेअच्छा समयहोता है.’ - जान मिल्टन, इन पैराडाइज़ लास्ट
मिल्टन की उपरोक्त पंक्तियों को परिभाषित करती हैं जाड़ों की बोझिल और ठिठुररती शामें. इन ठिठुररती शामों के दौरान मै बैठे-ठाले ही यात्राएँ करने लगती हूँ. असल में कुछ यात्राएँ हम रेल मार्ग से करते हैं, because कुछ सड़क मार्ग से, कुछ हवाई मार्ग से और कुछ स्मृति मार्ग से. स्मृति के माध्यम से की जाने वाली यात्राओं का फायदा यह है कि इसके लिए कुछ खर्च नहीं करना पड़ता. सहुलियत रहती है, बस जब भी, और जहाँ भी एकांत उपलब्ध हो जाये वहीं से यात्राएँ शुरू हो सकती है. आज जब सांझ की बेला, हाड़ कंपाती ठंडी में दांत बजाते हुए अपनी चादर समेटने की तैयारी कर रही थी कि तभी क्षितिज में डूबते मटियाले और धुंधलाते सूरज दा ने प्यार से अपनी गर्माहट का लिहाफ मुझे ओढाया और ढकेल दिया स्मृति की ट्रेन में. "क...









