
चंदेरी साड़ियां : मी टू, अहिल्याबाई होल्कर
मंजू दिल से… भाग-19मंजू कालाकिसी भी भारतीय महिला की संदूकची, या अलमारी कोई ...खोजी पति... खंगालेगा (जो पत्नी के खजाने की टोह लेता हो ) तो उसे उनमें झिलमिल करती चंदेरी साड़ियां जरूर झांकते हुए नजर आ.. जायेंगी! मैं भी जब अपने साड़ियों के पिटारे को खोलती हूँ... (यह मेरा प्रिय शगल है! फुरसत पाते ही मैं अपना साड़ियों का पिटारा जरूर खोलती हूँ!) तो यही चंदेरी साड़ियां... मंद स्मित बिखेरते हुए मुझे मेरे विवाह के वक्त की याद दिला देती हैं मसलन.
माँ और पिताजी का मेरे विवाह की तैयारियों में संलग्न रहना, पडो़सन आंटियों का मेरी साड़ियों में फाल लगाने आना! मेरा चोरी- चोरी पतिदेव के चित्र को निहारना, माँ और दादी की नजर से छुपकर.. विवाह के लिए बनाए गए आभूषणों की आजमाईश..सखियों के साथ मिलकर करना... और हाँ माँ के साथ रिक्शा में बैठकर दर्जी के यहाँ जाना भी इसी में शामिल है! मेरी माँ...









