Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
प्रकाश पर्व है जीवन का आमंत्रण

प्रकाश पर्व है जीवन का आमंत्रण

लोक पर्व-त्योहार
दीपावली पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  लगभग दो सालों से चली आती कोविड की महामारी ने सबको यह बखूबी जना दिया है कि जगत नश्वर है और जीवन और दुनिया सत्य से ज्यादा आभासी है. ऎसी दुनिया में आभासी because (यानी वर्चुअल!) का राज हो तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए. सो अब आभासी दुनिया हम सब के बीच बेहद मजबूती से इस तरह पैठ-बैठ चुकी है कि वही सार लगती है शेष सब नि:सार है. उसमें सृजन और संचार की अतुलित संभावना सबको समेटती जा रही है. अब उसकी रीति-नीति के अभ्यास के बिना किसी का काम चलने वाला नहीं है. उसकी साक्षरता और निपुणता जीवन-यापन की शर्त बनती जा रही है. ऐसे में अब उत्सव और पर्व भी लोक-जीवन में यथार्थ से अधिक आभासी स्तर पर ही ज्यादा जिए जाने लगे हैं. ज्योतिष पढ़ें- मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है शरद ऋतु भारत में उत्सवों की ऋतु है because और प्रकृति में उमड़ते तरल स्नेह के साथ कार्तिक का म...
लाटी का उद्धार

लाटी का उद्धार

किस्से-कहानियां
नीमा पाठक केशव दत्त जी आज लोगों के व्यवहार से बहुत दुखी और खिन्न थे मन ही मन सोच रहे थे ऐसा क्या अपराध किया मैंने जो लोग इस तरह मेरा मजाक उड़ा रहे हैं. जो लोग रोज झुक झुक कर because प्रणाम करते थे वे ही लोग आज मुंह पर हँस रहे थे. हर जगह धारे में, नोले में, चाय की दुकान में, खेतों में, बाजार में उन्हीं की चर्चा थी. और तो और उनके खुद के स्कूल में चार लोगों को इकठ्ठा देख कर उनको लग रहा था यहाँ भी सब उन्हीं की चर्चा कर रहे हैं. लोगों का अपने प्रति ऐसा व्यवहार उनको गहरा आघात पहुंचा गया. उन्होंने दुखी होकर घर से बाहर निकलना बंद कर दिया, स्कूल नहीं जाने के भी बहाने ढूंढने लगे. ज्योतिष उनकी पत्नी उनके इस तरह के व्यवहार को जानने की कोशिश कर रही थी, तो पांडेय जी बोले, “लछुली तूने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा, मेरा लोगों में मुंह दिखाना मुश्किल हो गया है अब तो मेरा मन नौकरी पर जाने का भी नहीं है.”  उसी स...
कुमाऊं की ओखलियों में संरक्षित है वैदिक सभ्यता का इतिहास

कुमाऊं की ओखलियों में संरक्षित है वैदिक सभ्यता का इतिहास

इतिहास
डॉ. मोहन चंद तिवारीमेरे लिए दिनांक 28 अक्टूबर,2020 का दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इस दिन रानीखेत-मासी मोटर मार्ग में लगभग 40 कि.मी.की दूरी पर स्थित सुरेग्वेल के निकट 'मुनिया चौरा' में पुरातात्त्विक महत्त्व की महापाषाण कालीन तीन ओखलियों के पुनरान्वेषण में मुझे सफलता मिल पाई. सुरेग्वेल से एक किमी दूर 'मुनिया चौरा' गांव के पास एकदम खड़ी चढ़ाई वाले अत्यंत दुर्गम और बीहड़ झाड़ियों के बीच पहाड़ की चोटी पर because हजारों वर्षों से गुमनामी के हालात में स्थित इन ओखलियों तक पहुंचना बहुत ही कठिन कार्य था.अलग अलग पत्थरों पर खुदी हुई ये महापाषाण काल की तीन ओखलियां चारों ओर झाड़ झंकर से ढकी होने के कारण भी जन सामान्य के लिए अज्ञात ही बनी हुई थीं.ज्योतिष पर दिनांक 28 अक्टूबर,2020 को मैं मुनिया because चौरा के निवासी श्री बचीराम छिमवाल और अपने जोयूं ग्राम के बंधुओं श्री लीलाधर तिवारी,श्री दिनेश तिव...
ट्रैकर्स के आकर्षण का केन्द्र बन रहा है पीपलकोटी पांचुला ट्रैक

ट्रैकर्स के आकर्षण का केन्द्र बन रहा है पीपलकोटी पांचुला ट्रैक

पर्यटन
जेपी मैठाणीसरकार की उदासीनता के बावजूद शोध अध्ययन कर किया जा रहा है प्रचारित-प्रसारित देहरादून से लगभग 265 किमी0 की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर लगभग 4000 फीट (1300 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित है एक पर्यटक स्थल पीपलकोटी. पीपलकोटी अपनी खूबसूरत घाटी, पीपल के पेड़ों,  सीढ़ीनुमा खेतों के साथ-साथ अच्छी व्यवस्था वाले होटलों, ढाबों, पर्यटक आवास गृह के लिए जाना जाता है. because पीपलकोटी में ही प्रदेश के पहले बायोटूरिज़्म पार्क (जिसकी स्थापना 1999-2001 में हुई थी) भी स्थित है. पुरातन समय से ही पीपलकोटी बद्रीनाथ यात्रा मार्ग की एक प्रमुख चट्टी/ पड़ाव रहा है.ज्योतिष पीपलकोटी से अनेक ट्रैकिंग रूट्स जो कि कम जाने जाते हैं या नहीं जाने जाते हैं उनका प्रचार-प्रसार एवं मार्केटिंग का कार्य आगाज़ संस्था कर रही है. इन्हीं में से एक because महत्वपूर्ण ट्रैकिंग पीपलकोटी से हस्तशिल्प ग्राम किरूली होते हुए...
हंगरी से उत्तराखंड की विहंगम यात्रा

हंगरी से उत्तराखंड की विहंगम यात्रा

ट्रैवलॉग
पीटर शागि सहायक व्याख्याता, ऐल्ते विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी एवं ठेठ घुमक्कड़ पहाड़ है ही अलग. मेरे हंगरी से फिर तो निश्चित ही. दुना-डेन्यूब के किनारे बसे मेरे बुदापेश्त से हम लोग कुछ ऐसी ललचाई आँखों से उनकी ओर देखते हैं, जैसे दिल्ली शहर. इतने साल पहले भारत में because जब पहला लंबा समय बिताया था, मैदान के कई शहरों के अजूबों को देखने के बाद हिमालय की ओर देखा. हिमाचल और उत्तराखंड मेरे नसीबों में रहा, सचमुच यह सोचने पर देवभूमि पधारने और ऊपर वाले की बरकत मिलने की अनुभूति होती है. जब भी याद करूँ.ज्योतिष यूँ तो हंगरी के इर्द-गिर्द कारपैथ के पहाड़ हैं, ट्रांसिलवानिया (आज रोमानिया) का माहौल बहुत कुछ कुमाऊँ जैसा है और स्लोवाकिया की तात्रा शृंखला भी आपको गढ़वाल का आभास करवाएगी. because आज भी कहीं-कहीं गडरिये अपने भेड़ों के झुंड बुग्याल ले जाते हुए दिखते हैं. ऊँची-ऊँची, काली-काली, काई, खाई, ची...
युवा साहित्यकार ललित शौर्य को मिला हिंदी सेवा रत्न सम्मान

युवा साहित्यकार ललित शौर्य को मिला हिंदी सेवा रत्न सम्मान

साहित्यिक-हलचल
हिमांतर ब्यूरो, पिथौरागढ़उत्तराखंड के युवा साहित्यकार ललित शौर्य को देहरादून में हिंदी सेवा रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया है. स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित मेले में कार्यक्रम की because मुख्य अतिथि भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महामंत्री दीप्ति रावत, स्वदेशी जागरण मंच के प्रान्त संयोजक सुरेंद्र, स्वदेशी जागरण मंच के प्रान्त संघर्ष वाहिनी प्रमुख प्रवीण पुरोहित, स्वदेशी जागरण मंच के महानगर प्रचार प्रमुख आधार वर्मा व समाजसेवी रजनीश कौंसवाल ने संयुक्त रूप से शौर्य को यह सम्मान प्रदान किया.ज्योतिष दीप्ति रावत ने कहा कि ललित शौर्य प्रसंशनीय कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कम उम्र में बाल साहित्य को अप्रतिम योगदान प्रदान किया है. उनकी साहित्य साधना प्रभावित करती है. because स्वदेशी जागरण मंच के प्रांत संयोजक सुरेंद्र ने कहा कि ललित शौर्य का बाल साहित्य नई पीढ़ी को गढ़ने का कार्य कर रहा है...
इस दीपावली लें लोकल उत्पादों की खरीदारी का संकल्प :  नरेश बंसल  

इस दीपावली लें लोकल उत्पादों की खरीदारी का संकल्प :  नरेश बंसल  

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड से राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि देश में पहली बार नरेन्द्र मोदी सरकार ने आजादी के बाद भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का सीधा लाभ आमजन को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इस दीपावली पर हम सभी को लोकल फॉर वोकल के मंत्र को संकल्पित करते हुए भारत के 'आत्मनिर्भर भारत because अभियान' को साकार करने का संकल्प लेना चाहिए. दीपोत्सव के इस पर्व पर हम सभी को दीपावली में लोकल उत्पादकों को सशक्त बनाने के लिए लोकल चीजें ही खरीदनी चाहिए, हमारे इस प्रयास से हमारे लोकल चीजों को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादक सशक्त होंगे. ज्योतिष नरेश बंसल ने कहा कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार का निरंतर यह प्रयास है कि अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचे. प्रदेश की डबल इंजन की सरकार आज मूलभूत सुविधाओं को because आम नागरिक तक पहुंचाने का काम कर रही है. देश व प्रदेश के संपूर्ण विकास का काम...
देव कन्या ने उतारा ‘देवभूमि हिमाचल’ का नकाब!

देव कन्या ने उतारा ‘देवभूमि हिमाचल’ का नकाब!

पुस्तक-समीक्षा, हिमाचल-प्रदेश
गगनदीप सिंहइस किताब की सबसे बड़ी सफलता ये हैं कि इसका विमोचन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने हाथों से किया था. मुख्यमंत्री ने लेखिका के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लेखिका ने अपनी कहानियों के माध्यम से पहाड़ी महिलाओं के संघर्षों और मनोदशाओं को चित्रित करने में सफलता प्राप्त की है. उन्होंने कहा कि because कहानियां अच्छी तरह से तैयार की गई हैं और भाषा, शैली और स्वर में सरल हैं, और लेखक ने पहाड़ियों में प्रचलित कलात्मक प्रयोग, परंपराओं और रीति-रिवाजों को एक नई ऊंचाई दी है. ज्योतिषदेव कन्या ठाकुर ने अपनी कहानियों में जो विषय चुना है, उस पर हिमाचल में आम तौर पर चर्चा वर्जित हैं, वर्जित इस रूप में हैं कि अगर आप इस विषय पर खुल कर बोलोगे, because रीति-रिवाज के नाम से थोपे जा रहे सामंती मूल्यों के खिलाफ बोलोगे तो इसके नतीजे आपको भुगतने होंगे.ज्योतिष देव कन्या ठा...
भाजपा का मिशन 2022: घर-घर गंगा जल पहुंचाकर जीत की तैयारी

भाजपा का मिशन 2022: घर-घर गंगा जल पहुंचाकर जीत की तैयारी

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनभारतीय जनता पार्टी का दावा है कि वह 2022 के विधानसभा चुनाव में जीत का नया रिकॉर्ड दर्ज करेगी. इसके लिए संपर्क अभियान से लेकर बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने की पूरी तैयारी कर ली गई है. संगठन युवाओं से लेकर बुजुर्गों के बीच संपर्क अभियान में जुटा हुआ है और सुदूर पहाड़ों तक भी कमल की छाप because की मुहर लगा दी गई है. गांव-गांव संपर्क अभियान जोरों पर है. संगठन पिछले एक साल से ही भाजपा से छिटके हुए अंसतुष्ट लोगों को संतुष्ट करने में जुटा हुआ था, जिसमें उसे कामयाबी भी मिली है. पुराने कार्यकर्ताओं के घर-घर जाकर संपर्क अभियान से न केवल पुरानी पीढ़ी, बल्कि नई पीढ़ी के बीच भी पार्टी ने भरोसा कायम किया है. भाजपा इस वक्त सूबे में सबसे मजबूत स्थिति में दिख रही है और संगठन का पूरा फोकस 2022 फतह करने में है. ज्योतिषपार्टी इसके लिए हिंदुत्व की राजनीति को एक नई धार दे रही है. ...
सम्प्रेषण की अद्भूत क्षमता रखते हैं कुमाउंनी लोकभाषा के समयबोधक शब्द

सम्प्रेषण की अद्भूत क्षमता रखते हैं कुमाउंनी लोकभाषा के समयबोधक शब्द

साहित्‍य-संस्कृति
भुवन चन्द्र पन्तशब्द अथवा शब्दों के समुच्चय से कोई भाव या विचार बनता है. यदि मात्र एक शब्द से ही हम किसी भाव को अभिव्यक्त करने मे समर्थ हों, तो यह भाषा की बेहतरीन खूबी है. इस दिशा में दूसरी because भाषाओं की अपेक्षा लोक भाषाओं का शब्द भण्डार ज्यादा समृद्ध दिखता है. एक भाव को प्रकट करने के लिए कुछ शब्दों का समूह अथवा पूरे वाक्य का प्रयोग करने के बजाय एक ही शब्द से भाव उजागर हो जाय, यह विशेषता कुमाउंनी लोकभाषा को दूसरी भाषाओं से एक कदम आगे दिखती है.ज्योतिष पांच ज्ञानेन्द्रियों आंख, कान, नाक, जिह्वा, तथा त्वचा द्वारा अनुभूत रूप, ध्वनि, गन्ध, रस तथा शब्द या नाद के भेद को अभिव्यक्त करने के लिए सामान्यतः सीमित शब्द उपलब्ध होते हैं- यथा स्वाद के लिए तिक्त, कसाय, मीठा, खट्टा,आदि, गन्ध के लिए सुगन्ध या दुर्गन्ध इसी तरह ध्वनि के लिए मन्द,तीव्र, कठोर आदि. यद्यपि विभिन्न जानवरों व because पक्...