Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस: पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस: पत्रकारों की सामाजिक सुरक्षा देने की मांग

देहरादून
राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस पर संगोष्ठी आयोजन,  फर्जी मुकदमों और बढ़ते हमलों पर जताई चिन्ताहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनराष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आज राजधानी देहरादून में पत्रकारों ने एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस आयोजन पर पत्रकारों ने मौजूूदा समय में पत्रकारिता की चुनौतियों because और समस्याओं पर चर्चा की. पत्रकारों ने इस बात की चिंता जताई कि मौजूदा समय में पत्रकारों पर हमले बढ़ गये हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा है. आयोजन में उपस्थित सभी पत्रकारों ने अपनी सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर सरकार से वार्ता करने की बात कही. साथ ही कहा गया कि पत्रकार और उनके आश्रितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर जोर दिया जाएगा. ज्योतिष संगोष्ठी में पत्रकारों ने सरकार से मांग की कि कोरोना काल में प्रभावित पत्रकारों के परिजनों को आर्थिक सहयोग के साथ ही उनको सरकारी नौकरी भी दी जाए. साथ ही because म...
पौड़ी के ऐरोली गांव में 40 साल बाद मनाई गई ईगास बग्वाल

पौड़ी के ऐरोली गांव में 40 साल बाद मनाई गई ईगास बग्वाल

पौड़ी गढ़वाल
हिमांतर ब्यूरो, पौड़ीराज्य सरकार तथा इसके सांसदों व विधायकों की अपील का लोगो पर असर दिखाई देने लगा है. सरकार की अपील कि ‘इगास-बग्वाल गांव में मनाये’ की तर्ज पर जनपद पौड़ी के चौबट्टाखाल because विधानसभा क्षेत्र के ऐरोली (तल्ली) में ग्रामवासियों द्वारा लगभग 40 बर्षो बाद गांव में इगास- बग्वाल मनाई गई. इस कार्यक्रम में दिल्ली, देहरादून, मुंबई, लखनऊ, कोटद्वार, हरिद्वार से 12 परिवार गांव पहुंचे तथा त्यौहार मनाया. ज्योतिष ऐरोली (तल्ली) विकासखंड पोखरा के because अंतर्गत एक पिछड़ा गांव है जहा पर आजादी के इतने साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. गांव में मोटरमार्ग भी नहीं है. इन्ही सब कारणों से गांव से विगत में काफी पलायन हुआ है आज गॉव में सिर्फ 4 परिवार वास करते है.ज्योतिष इस अवसर पर ग्रामीणों द्वारा एक सभा भी आयोजित की गई जिसमे  भविष्य में गांव के विकास पर चर्चा हुई. साथ ही बाहर बस र...
हिन्दी बने व्यवहार और ज्ञान की भाषा

हिन्दी बने व्यवहार और ज्ञान की भाषा

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  अक्सर भाषा को संचार और अभिव्यक्ति के एक प्रतीकात्मक माध्यम के रूप ग्रहण किया जाता है.  यह स्वाभाविक भी है. हम अपने विचार, सुख-दुख के भाव और दृष्टिकोण दूसरों तक मुख्यत: भाषा द्वारा ही पहुंचाते हैं और संवाद संभव होता है. निश्चय ही यह भाषा की बड़ी भूमिका है परंतु इससे भाषा की शक्ति का because केवल आंशिक परिचय ही मिलता है क्योंकि शायद ही कुछ ऐसा अस्तित्व में हो जो भाषा से अनुप्राणित न हो. भाषा से जुड़ कर ही वस्तुओं की अर्थवत्ता का ग्रहण हो पाता है. यही सोच कर भाषा को जगत की सत्ता और उसके अनुभव की सीमा भी कहा जाता है. सचमुच जो कुछ अस्तित्व में है वह समग्रता में भाषा से अनुविद्ध है. ज्योतिष सत्य तो यही है कि भाषा मनुष्य जाति की ऐसी रचना है जो स्वयं मनुष्य को रचती चलती है और अपनी सृजनात्मक शक्ति से नित्य नई नई संभावनाओं के द्वार खोलती चलती है. हम ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगि...
बाल साहित्य का स्पेस ‘मोबाइल’ की ‘स्क्रीन’ ने भर दिया

बाल साहित्य का स्पेस ‘मोबाइल’ की ‘स्क्रीन’ ने भर दिया

साहित्‍य-संस्कृति
बाल दिवस पर विशेषप्रकाश उप्रेती पिछले कुछ समय से हमारी दुनिया बहुत तेजी से बदली है. इस बदलाव में एक पीढ़ी जहाँ बहुत पीछे रह गई तो वहीं दूसरी पीढ़ी बहुत आगे निकल गई है. इस बदलाव में जिसने because अहम भूमिका निभाई वह मोबाइल की स्क्रीन और एक क्लिक पर सबकुछ खोज लेना का भरोसा देने वाला इंटरनेट है. आज  बाल पत्रिकाओं के मुकाबले बच्चे मोबाइल की स्क्रीन पर यूट्यूब के जरिए कहानियाँ देख रहे हैं. उनका पूरा बौद्धिक स्पेस मोबाइल और इंटरनेट तक सिमट गया है.ज्योतिष हिंदी साहित्य के केंद्र में बाल साहित्य कभी नहीं रहा . हमेशा से बाल साहित्य को अगंभीर साहित्यिक कर्म के रूप में देखा गया . आज भी बाल साहित्य के अस्तित्व पर अलग से कम ही बात होती है. इसलिए कभी बचकाना साहित्य कह कर तो कभी साहित्यिक गंभीरता (जो कम ही दिखती है) के नाम पर बाल साहित्य को केंद्र because से बाहर ही रखा गया.  इसके बावजूद हिंदी मे...
डीडीहाट महोत्सव: सिराकोट मंदिर तक बनेगा रोपवे!

डीडीहाट महोत्सव: सिराकोट मंदिर तक बनेगा रोपवे!

पिथौरागढ़
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं घोषणा कीहिमांतर ब्यूरो, पिथौरागढ़मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिथौरागढ़ के डीडीहाट में आयोजित पांच दिवसीय डीडीहाट महोत्सव के समापन अवसर पर कुमाऊंनी भाषा में संबोधित करते हुए क्षेत्र के विकास हेतु विभिन्न घोषणाएं कि जिसमें, डीडीहाट नगर से सिराकोट मंदिर तक रोपवे का निर्माण करने, जीजीआइसी डीडीहाट का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय देव सिंह because डसीला के नाम किए जाने, डीडीहाट खेल मैदान के विस्तारीकरण करने की कार्यवाही हेतु जिलाधिकारी को प्रस्ताव तैयार करते हुए शासन को प्रेषित करने की घोषणा, घसाड़ विद्यालय का उच्चीकरण किए जाने, डीडीहाट नगर के आंतरिक मार्गों के निर्माण व सौंदर्यीकरण किए जाने की स्वीकृति की घोषणा, डीडीहाट महोत्सव को प्रत्येक वर्ष राजकीय मेले के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई. मुख्यमंत्...
उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

साहित्‍य-संस्कृति
चन्द्रशेखर तिवारी प्राचीन समय में समस्त उत्तराखण्ड में परम्परागत तौर पर विभिन्न पादप प्रजातियों के because तनों से प्राप्त रेशे से मोटे कपड़े अथवा खेती-बाड़ी व पशुपालन में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों का निर्माण किया जाता था. पहाड़ में आज से आठ-दस दशक पूर्व भी स्थानीय संसाधनों से कपड़ा बुनने का कार्य होता था. ट्रेल (1928) के अनुसार उस काल में पहाड़ के कुछ काश्तकार लोग कुछ जगहों पर कपास की भी खेती किया करते थे.ज्योतिष कुमाऊं में कपास की बौनी किस्म से कपड़ा बुना जाता था. कपड़ा बुनने के इस काम को तब शिल्पकारों की उपजाति कोली किया करती थी. हाथ से बुने इस कपड़े को 'घर बुण’ के नाम से जाना जाता था. टिहरी रियासत में कपड़ा बुनने वाले बुनकरों को because पुम्मी कहा जाता था. भारत की जनगणना 1931, भाग-1, रिपोर्ट 1933 में इसका जिक्र आया है. उस समय यहां कुमाऊं के कुथलिया बोरा व दानपुर के बुनकर तथा गढ़वाल के ...
अशोक चक्र विजेता शहीद हवलदार बहादुर सिंह बोहरा

अशोक चक्र विजेता शहीद हवलदार बहादुर सिंह बोहरा

पिथौरागढ़
प्रकाश चन्द्र पुनेठा उत्तराखण्ड राज्य के जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ से लगभग 79 किलोमीटर दूर पश्चिम में गंगोलीहाट तहसील में लगभग 29 किलामीटर दूर रावलखेत गाँव है. रावलखेत गाँव हमारे देश के शाँन्तिकाल के सर्वाच्च वीरता पुरुस्कार अशोक चक्र विजेता, 10वीं बटालियन पैराशूट रेजिमेंट के स्वर्गीय हवलदार बहादुर because सिंह बोहरा का गाँव है. वर्तमान में जिला पिथौरागढ़ में शहीद हवलदार बहादुर सिंह बोहरा एकमात्र अशोक चक्र विजेता है. जब भी हम किसी गाँव में जाते है तो देखते है कि अक्सर गाँव में कई मकान एक दूसरे से सटकर बने हुए हैं, मकानों के आँगन आपस में मिले हुए है, गाँव का मुख्य मार्ग, मकानों के छोटे-छोटे मार्गों से जुड़ा होता है. जिस कारण गाँव में रहने वाले लोग एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं.ज्योतिष इसके विपरीत शहर से दूर पहाड़ों के मध्य घनघोर बीहड़ जंगल के मध्य स्थित रावलखेत गाँव, विस्तृत क्षेत्र में बि...
भाषा और अनुवाद का विराट व कौतूहल वर्धक संसार…! 

भाषा और अनुवाद का विराट व कौतूहल वर्धक संसार…! 

पुस्तक-समीक्षा
बहुविविध आयाम और उदेश्य हैं यह देवेशपथ सारिया जी के रचनात्मक संसार से परिचित होकर  मुझे ज्ञात हुआसुनीता भट्ट पैन्यूली कविताएं महज़ कल्पनाओं,मिथक और आस-पास के वातावरण से शरीर ही नहीं धारण करतीं अपितु कविताओं का उद्देश्य किसी संसार की व्यापकता में उसके सामाजिक रूप, संस्कृति, उसके प्राकृतिक सौंदर्य,मानव स्वभाव  और वहां के भौगोलिक वातावरण से पाठकों को परिचित कराना भी है. चाहे वह साहित्यिक क्षेत्र हो, समकालीन व because साम्राज्यवादी व्यवस्था हो कवि की मनोदशा या उसके सामाजिक जीवन का संघर्ष हो या उसकी अपने देश के प्रति प्रेम की प्रगाढ भावना हो अथवा उसका वैयक्तिक संघर्ष हो, जिसकी उदेश्य पूर्ति के लिए किसी भी भाषाओं में लिखी गयी कविताओं की विश्वव्यापी संप्रेषणीयता के लिए उनका अनुवाद एक विशिष्ट कारक है जो कविताओं की मूल जड़ों और उसके आच्छन्न उदेश्यों को हर प्रांत व दुनिया के जनमानस तक पहुंचाने ...
पिथौरागढ़ शरदोत्सव: मुख्यमंत्री धामी ने किया विकास प्रदर्शनी का शुभारम्भ

पिथौरागढ़ शरदोत्सव: मुख्यमंत्री धामी ने किया विकास प्रदर्शनी का शुभारम्भ

पिथौरागढ़
पिथौरागढ़ में 344 करोड़ की विकास योजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पणहिमांतर ब्यूरो, पिथौरागढ़मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने तीन दिवसीय भ्रमण पर पिथौरागढ़ पहुंचे. उन्होंने जिला मुख्यालय के देव सिंह मैदान में आयोजित शरदोत्सव एवं विकास प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए, जनपद के विकास के लिए कुल 34384.65 (तीन सौ तैतालिस करोड़ चौरासी लाख, पैंसठ हजार) की 126 योजनाओं तथा कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा पिथौरागढ़ के अंतर्गत 91.23 लाख रु. की लागत से निर्माणाधीन केएनयूराआइका पिथौरागढ़ के विद्यालय का पुननिर्माण एवं खेल मैदान का सुदृढ़ीकरण, 179.38 लाख रु. की लागत से एसडीएसराइका पिथौरागढ़ में मिटिंग हाल, प्रयोगशाला एवं हाईटेक शौचालय का निर्माण, 40.50 लाख की लागत से निर्माणाधीन राइका कुम्डार में लाइब्रेरी कक्ष एवं कम्प्यूटर कक्ष का निर्माण, 64.29 लाख की लागत से निर्म...
छठ: भारतराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा लोकपर्व

छठ: भारतराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा लोकपर्व

लोक पर्व-त्योहार
छठ पूजा पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीचार दिनों तक आयोजित होने वाले छठ पूजा के पर्व की 8 नवंबर को शुरुआत हो चुकी है,जिसका समापन 11 नवंबर को प्रातःकालीन सूर्य अर्घ्य के साथ होगा. सूर्य देवता और षष्ठी देवी को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों द्वारा मनाया जाता है.चार दिवसीय इस पर्व के चार अनुष्ठानपरक because आयाम हैं- नहाय-खाय, खरना, छठ पूजा और सूर्य देव को अ‌र्घ्य देना. इस त्यौहार के माध्यम से लोग सूर्य देवता, देवी उषा (सुबह की पहली किरण) और प्रत्युषा (शाम की आखिरी किरण) के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मान्यता है कि ब्रह्मांड में सूर्य ऊर्जा का पहला स्रोत है जिसे प्रकृति रूपा षष्ठी देवी धारण करती हैं तथा उसी के कारण पृथ्वी पर जीवन भरण संभव हो पाता है. बिहार का पर्व छठ चार दिनों तक मनाया जाने वाला लोकपर्व ...