Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
उसके साथ से मैंने सीखा लिखना… और प्यार को भूलना…

उसके साथ से मैंने सीखा लिखना… और प्यार को भूलना…

पुस्तक-समीक्षा
मनोहर चमोली ‘मनु’रूसी साहित्यकार मारीना के व्यक्तित्व और कृतित्व को पूरे जीवनवृत्त के साथ अब किताब ‘मारीना’ में पढ़ा जा सकता है. पाठकों के लिए यह किताब हिन्दी में आई है. कवयित्री, लेखिका, स्तम्भकार और शिक्षा के सरोकारों से जुड़ी प्रतिभा कटियार ने एक अलग अंदाज़ में मारीना को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है. पाठक सहजता से बीते 130 साल की यात्रा कर लेता है. हालांकि मारीना का देहांत 1941 में because हो गया था. किताब आल्या के बहाने 1975 की यात्रा कर लेता है. आल्या मारीना की पहली संतान थी. फिर भी पाठक स्वंय प्रतिभा के लिखे बुकमार्क के ज़रिए किताब के अंत तक मौजूदा दौर से स्वयं को जोड़कर रखता है.ज्योतिष मैं इसे महज जीवनी की किताब नहीं लिखना चाहूंगा. जीवनी विधा में लिखी गई अक्सर किताब में तथ्य अधिक होते हैं. व्यक्ति के बारे में लेखक जन्म से लेकर की मृत्यु की तथ्यात्मक यात्रा के साथ उसके बचपन, ...
सौगात : देहरादून और रुद्रपुर में जल्द खुलेंगे सैनिक स्कूल!

सौगात : देहरादून और रुद्रपुर में जल्द खुलेंगे सैनिक स्कूल!

देहरादून
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव पर लगी मोहरहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनसैनिक बाहुल्य उत्तराखंड को जल्द दो और सैनिक स्कूलों की सौगात मिलने जा रही है. धामी सरकार ने इसको लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी है. राज्य के कुमाऊं और गढ़वाल में खुलेगा एक-एक सैनिक स्कूल खुलेगा. because कुमाऊं मंडल में रूद्रपुर और गढ़वाल मंडल देहरादून में सैनिक स्कूल खुलेंगे. इन प्रस्तावों पर मुख्य सचिव डॉ एसएस संधू की अध्यक्षता में हुई बैठक में मोहर लगी है. अभी उत्तराखंड में केवल एक ही सैनिक स्कूल है. जो कि कुमाऊं मंडल के घोड़ाखाल में है.ज्योतिष शिक्षा महानिदेशक उत्तराखंड बंशीधर तिवारी ने जानकारी देते हुए कहा राजीव गांधी नवोदय विद्यालय और रुद्रपुर में एएन झां इंटर कॉलेज को सैनिक स्कूल के रूप में चलाने का प्रस्ताव रखा है. जिसको केंद्र के पास मंजूरी के because लिए भेजा जा रहा है. शिक्षा महानिदेशक बंश...
सियूड़िया मेला :  जहां  देव पश्वा अपने मुंह में डालते हैं लोहे व चांदी के सुये

सियूड़िया मेला :  जहां  देव पश्वा अपने मुंह में डालते हैं लोहे व चांदी के सुये

उत्तरकाशी
देव पशवा का मुंह में लोहे वचांदी की छड़ डालना रहता है मेले का मुख्य आकर्षण. रामा गांव में लगता है 12 because गांव का कैलापीर, नरसिंह एवं सियूड़ियादेवता का मेला. हिमाचल के डोडरा का है सियूड़ियादेवता, रामा सिरांई क्षेत्र का सबसे पुराना गांव है रामा.  नीरज उत्तराखंडी, पुरोला रामा सिरांई पट्टी के 12 गांव  का सियूड़िया देवता, केलापीर एवं नरसिंह देवताओं के मेले में बुधवार को रामा गांव में क्षेत्र की भारी भीड उमडी,हर वर्ष 22 गते भाद्रपद को 7 सितंबर सियूड़िया देवता के पशवा का मुहं because में लोहे व चांदी की छड सियूडा डालना लोगों के आस्था, आकर्षक का केंद्र है जिस रोचक नजारे देखने को कमल सिरांई व मोरी त्यूणी, पर्वत क्षेत्र व नौंगाव समेत सरबडियाड़ व दूर दराज गांव से सैकडों की भीड उमड़ती है.ज्योतिषमेले के दिन केलापीर व नरसिंह देव पशवा because की मौजदूगी में सियूड़िया महाराज ...
भाजपा नेता शादाब शम्स बने उत्तराखण्ड वक़्फ़ बोर्ड के नए अध्यक्ष

भाजपा नेता शादाब शम्स बने उत्तराखण्ड वक़्फ़ बोर्ड के नए अध्यक्ष

देहरादून
निर्विरोध चुने गए उत्तराखण्ड वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्षसचिवालय में हुआ वक़्फ़ बोर्ड उत्तराखण्ड के नए अध्यक्ष का चुनाव
कहानी: शीशफूल

कहानी: शीशफूल

किस्से-कहानियां
सुनीता भट्ट पैन्यूली कहानियों का नदी की तरह कोई मुहाना नहीं होता ना ही सितारों की तरह उनका कोई आसमान. एक सजग दृष्टि और कानों की एकाग्रता किसी भी विषयवस्तु को कहानियों का चोला पहना देती हैं. पलायन, बाढ़ या भूकंप के कारण लोग अपना घर छोड़कर कुछ अरसे के लिए बाहर ज़रुर चले जाते हैं किंतु आफत कम होते ही वापस अपने घर-परिवेश में आ जाते हैं. किंतु स्त्रियों के संदर्भ में ऐसा विरल ही होता है. वह पलायन नहीं करती हैं किसी भी हारी-बीमारी और विपदा में. उन्हें तो पेड़ की तरह फलने-फूलने के लिए उनकी जड़ों को एक जगह से खोदकर दूसरी जगह पर विस्थापित कर दिया जाता है . यद्यपि,अपनी मूल जगह से जहां कि उनकी जड़ों को मनमाफ़िक खाद-पानी मिल रहा था,मुश्क़िल होता है उनके लिए वह सब छोड़कर दूसरी ज़मीन पर जड़ें जमाकर पुनः हरा-भरा होना. किंतु फिर भी उन्हें जन्म से मिले संस्कार और सीख का परिणाम है कि अपने पैरों को नयी  ...
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मानिला के तत्वावधान में पांच दिवसीय ‘शिक्षक पर्व’ का शुभारंभ

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मानिला के तत्वावधान में पांच दिवसीय ‘शिक्षक पर्व’ का शुभारंभ

अल्‍मोड़ा
हिमांतर संवाददाता, अल्मोड़ाराजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुणीधार, मानिला, अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) के तत्वावधान में पांच दिवसीय ‘शिक्षक पर्व’ का शुभारंभ किया गया. पांच दिवसीय शिक्षक पर्व के उद्घाटन सत्र में विचार गोष्ठी एवं  सह-नवागंतुक स्वागत समारोह की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. जया पांडे द्वारा की गयी. अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने छात्रों को डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन के जीवन प्रसंग पर विस्तार से बताया तथा शिक्षा, शिक्षक और छात्र संबंध पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए. इसी क्रम में डॉ. जया पांडे ने नवागंतुक छात्रों का महाविद्यालय परिवार में स्वागत भी किया. उद्घाटन सत्र के प्रथम चरण ‘विचार गोष्ठी’ में वक्ता के रूप में डॉ. रेखा, सहायक प्राध्यापिका, राजनीति विज्ञान विभाग व डॉ. धर्मेन्द्र यादव, सहायक प्राध्यापक, इतिहास विभाग ने शिक्षक दिवस का इतिहास, शिक्षा के विस्तार में प्...
टीचर्स डे: अनाथ बच्चों का भविष्य संवारेगी धामी सरकार!

टीचर्स डे: अनाथ बच्चों का भविष्य संवारेगी धामी सरकार!

देहरादून
टीचर्स डे पर सीएम धामी ने दिए छात्रों और शिक्षकों को कई तोहफेहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड की धामी सरकार न सिर्फ अनाथ बच्चों के आंसुओं को पोंछेगी बल्कि उनका भविष्य सँवार कर उनके चेहरे पर खुशियां लौटाएगी. इसको लेकर  राज्य सरकार जल्द बालाश्रय योजना शुरू करने जा रही है. इस योजना के अन्तर्गत बच्चों को पुस्तकें, गणवेश, बैग, जूते एवं मोजे, लेखन सामग्री आदि निःशुल्क दी जायेगी.राजीव गाँधी नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका छात्रावास एवं नेताजी सुभाष चन्द्र बोस आवासीय छात्रावास में छात्र-छात्राओं की भोजन व्यवस्था हेतु रू0 100 दिन की दर से धनराशि दी जायेगी तथा केन्द्र पोषित योजनान्तर्गत भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली धनराशि के अतिरिक्त होने वाला व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जायेगा.आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में राज्य सरकार ने शिक्षा व...
सल्ट का सत्याग्रह आंदोलन

सल्ट का सत्याग्रह आंदोलन

इतिहास
चंद्रशेखर तिवारीउत्तराखण्ड में स्थित अल्मोड़ा जनपद का पश्चिमी सीमावर्ती इलाका सल्ट कहलाता है. तीखे ढलान वाले रुखे-सूखे पहाड़, पानी की बेहद कमी, लखौरी मिर्च की पैदावार और पशुधन के नाम पर हष्ट-पुष्ट बैल इस इलाके की खास पहचान है. प्रशासनिक व्यवस्था के तहत सल्ट का इलाका चार पट्टियों (राजस्व इकाई) में बंटा हुआ है. दूधातोली पर्वत़ श्रेणी के पनढाल से निकलने वाली पश्चिमी रामगंगा नदी चैखुटिया, मासी व because भिकियासैण होकर सल्ट इलाके को छूते हुए भाबर प्रदेश को चली जाती है. स्थानीय लोक गाथाओं के अनुसार यह इलाका ’राजा हरुहीत’ की कर्मभूमि रहा है. राजा हरुहीत का जन्म आज से तकरीबन 200 साल पहले तल्ला सल्ट पट्टी के गुजड़ूकोट गांव में हुआ था. राजा हरुहीत अपनी वीरता के साथ ही अपनी दयालुता व न्यायप्रियता के लिए प्रसिद्ध थे. इनके बारे में मान्यता है कि अपनी अथक मेहनत से इन्होंने बंजर पड़ी जमीन को खेती-पाती स...
शिक्षक की गरिमा : पुनर्प्रतिष्ठा की अनिवार्यता

शिक्षक की गरिमा : पुनर्प्रतिष्ठा की अनिवार्यता

साहित्‍य-संस्कृति
शिक्षक दिवस पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  भारतीय संस्कृति में गुरु या शिक्षक को ऐसे प्रकाश के स्रोत के रूप में ग्रहण किया गया है जो ज्ञान की दीप्ति से अज्ञान के आवरण को दूर कर जीवन को सही मार्ग पर ले चलता है. इसीलिए उसका स्थान सर्वोपरि होता है. उसे ‘साक्षात परब्रह्म’ तक कहा गया है.  आज भी सामाजिक, आध्यात्मिक और निजी जीवन में बहुत सारे लोग किसी न किसी गुरु से जुड़े मिलते हैं. because गुरु से प्रेरणा पाने और उनके आशीर्वाद से मनोरथों की पूर्ति की कामना एक आम बात है यद्यपि गुरु की संस्था में इस तरह के विश्वास को कुछ छद्म  गुरु  नाजायज़ फ़ायदा भी उठाते हैं और गुरु-शिष्य के पावन सम्बन्ध को because लांछित करते हैं. शिक्षा के औपचारिक क्षेत्र में गुरु या शिक्षक एक अनिवार्य कड़ी है जिसके अभाव में ज्ञान का अर्जन, सृजन और विस्तार सम्भव नहीं है . भारत में शिक्षक दिवस डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की स...
भ्रष्टाचार भी विशेषाधिकार है: सुनो मेरे राज्य के नौजवानो

भ्रष्टाचार भी विशेषाधिकार है: सुनो मेरे राज्य के नौजवानो

देहरादून
प्रकाश उप्रेती पर्वतीय राज्य का सपना देखने वाले लोग भी किस मिट्टी के बने होंगे न! इस राज्य के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों का सपना क्या होगा, कैसी दृढ़ता उनके विचारों में होगी? क्या ये प्रश्न आपके दिमाग में नहीं आते because हैं. तब भी नहीं आते जबकि यह राज्य संसाधनों की लूट से लेकर सपनों की लूट में गर्दन तक डूब चुका है. आपको नहीं लगता है कि इस राज्य के लिए शहीद हुए लोगों के सपनों को हमने 22 वर्षों में ही मिट्टी में मिला दिया है. ऐसा राज्य देखने के लिए  हमारे लोगों ने गोली खाई होगी ? इसके लिए लड़े होंगे! कल 1 सितंबर को खटीमा गोलीकांड और आज 2 सितंबर को मसूरी गोलीकांड में शहीद हुए लोगों को हम याद कर रहे हैं. परन्तु आज हम अपने शहीदों की शहादत को भूलते जा रहे हैं. उस सपने को हम भूल रहे हैं जो उन्होंने उत्तराखंड राज्य के लिए देखा था.ज्योतिषराज्य का दुर्भाग्य यह है कि यहाँ bec...