September 19, 2020
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समाज/संस्कृति

पुत्र अपने कुल को ही तारता है, पुत्रियां दो-दो कुलों को तारतीं हैं

डॉ. मोहन चंद तिवारी   पितृपक्ष के अवसर पर प्राय: यह जिज्ञासा प्रकट की जाती है कि श्राद्ध का अधिकार किस किस को है? क्या पुत्र के अतिरिक्त पुत्री या पत्नी को भी श्राद्ध करने का अधिकार है या नहीं? कुछ पितृसत्तात्मक परंपरागत समाजों में स्थानीय मान्यताओं के कारण केवल पुत्र को या पुरुष को ही […]
इतिहास

‘गो-बैक मेलकम हैली’ ‘भारत माता की जय’

6 सितम्बर, 1932 पौड़ी क्रान्ति के नायक-  जयानन्द ‘भारतीय’ डॉ. अरुण कुकसाल हाथ में तिरंगा उठा, नारे भी गूंज उठे,  भाग चला, लाट निज साथियों की रेल में, जनता-पुलिस मध्य, शेर यहां घेर लिया, वीर जयानन्द, चला पौड़ी वाली जेल में. – शान्तिप्रकाश ‘प्रेम’ ‘मैं वीर जयानन्द ‘भारतीय’ का शुक्रिया अदा
उत्तराखंड

अनाज भंडारण की अनूठी परम्परा है कोठार

आशिता डोभाल कोठार यानी वह गोदाम जिसमें अनाज रखा जाता है, अन्न का भंडारण का वह साधन जिसमें धान, गेंहू, कोदू, झंगोरा, चौलाई या दालें सालों तक रखी जा सकती है. कोठार में रखे हुए इन धनधान्य के खराब होने की संभावना न के बराबर होती है. कोठार को पहाड़ी कोल्ड स्टोर के नाम से […]
पुस्तक समीक्षा

कुछ अच्छी बातें सिर्फ गरीबी में ही विकसित होती हैं…

डॉ. अरुण कुकसाल ‘बाबा जी (पिताजी) की आंखों में आंसू भर आये थे. मैंने नियुक्ति पत्र उनके हाथौं में दिया तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया. वह बहुत कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे. सिर्फ़ मेरे सिर पर हाथ फेरते रहे… मैं उसी विभाग में प्रवक्ता बन गया […]
उत्तराखंड

धार, खाळ, खेत से सैंण तक

विजय कुमार डोभाल पहाड़ी क्षेत्र में जन्मे, पले-बढ़े, शिक्षित-दीक्षित होने के बाद यहीं रोजगार (अध्यापन- कार्य) मिलने के कारण कभी भी यहां से दूर जाने का मन ही नहीं हुआ. वैसे भी हम पहाड़ी-लोगों की अपनी कर्मठता, आध्यात्मिकता तथा संघर्षशीलता अपनी अलग ही पहचान रखती है. हमारा अपना संसार पहाड़ के विभिन्न
इतिहास

उत्तराखंड की सल्ट क्रांति: ‘कुमाऊँ की बारदोली’

शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर विशेष डॉ. मोहन चन्द तिवारी देश की आजादी की लड़ाई में उत्तराखंड के सल्ट क्रांतिकारियों की भी अग्रणी भूमिका रही थी. 5 सितंबर 1942 को महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो’ राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन की प्रेरणा से जन्मे सल्ट के क्रांतिकारियों ने अपने क्षेत्र में स्वाधीनता
संस्मरण

अंतरावलोकन

संस्मरण : स्कूल की यादें सुनीता अग्रवाल आप चाहे उम्र के जिस पड़ाव पर खड़े हो इनसे आपका संवाद किसी न किसी रूप में चलता रहता है. आज अपने मन की भीतरी तहों तक जाकर अपने उन  संवादों को शब्द देने की कोशिश कर रही हूं जिनकी यादें आवाज़ें बनकर बड़ी ही स्पष्टता से साधिकार […]
अध्यात्म

पितृपक्ष में पितरों का ‘श्राद्ध’ क्यों किया जाता है? 

डॉ. मोहन चंद तिवारी इस साल 1 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है,जिसका समापन 17 सितंबर, 2020 को होगा. भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से लेकर आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिनों का पितृपक्ष प्रतिवर्ष ‘महालय’ श्राद्ध पर्व के रूप में मनाया जाता है. ‘निर्णयसिन्धु’ ग्रन्थ के अनुसार आषाढी कृष्ण
पर्यावरण

प्रदूषित गंगा और हम!

कमलेश चंद्र जोशी कहते हैं प्रकृति हर चीज का संतुलन बनाकर रखती है. लेकिन अधिकतर देखने में यह आया है कि जहां-जहां मनुष्य ने अपना हाथ डाला वहां-वहां असंतुलन या फिर समस्याएं पैदा हुई हैं. इन समस्याओं का सीधा संबंध मनुष्य की आस्था, श्रद्धा, स्वार्थ या तथाकथित प्रेम से रहा है. गंगा को हमने मॉं […]
संस्मरण

इनसे खेत आबाद रहे, हमसे जो बर्बाद हुए

प्रकाश उप्रेती मूलत: उत्तराखंड के कुमाऊँ से हैं. पहाड़ों में इनका बचपन गुजरा है, उसके बाद पढ़ाई पूरी करने व करियर बनाने की दौड़ में शामिल होने दिल्ली जैसे महानगर की ओर रुख़ करते हैं. पहाड़ से निकलते जरूर हैं लेकिन पहाड़ इनमें हमेशा बसा रहता है। शहरों की भाग-दौड़ और कोलाहल के बीच इनमें ठेठ […]