
गांधी जयंती : गांधी-प्रश्न : हम कहाँ खड़े हैं?
गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2026) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र
शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा
महात्मा गांधी का स्मरण एक कृतज्ञ राष्ट्र द्वारा राष्ट्रपिता को सम्मान देने मात्र की बात नहीं है, बल्कि आज के बर्बर होते समय की एक खास मानवीय जरूरत भी है। चीजों की अनुपस्थिति या अभाव भी उनके महत्व के ज्ञान का कारण बनता है। आज के दौर में जब धैर्य, सत्य, अहिंसा, करुणा, भाईचारा, सहयोग, पारस्परिकता और विश्वास जैसे शब्द दैनिक जीवन और व्यवहार से बाहर होते जा रहे हैं, तब उनकी जरूरत भी शिद्दत से महसूस हो रही है। ऐसे क्षणों में गांधी प्रासंगिक हो उठते हैं। उनका जीवन मानवीय चेतना के रूपांतरण की एक असाधारण कोशिश के रूप में सभ्य जगत के आधुनिक इतिहास में दर्ज एक मिसाल बन गया है। भारत के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में उनका कर्मठ जीवन और चिंतन आज भी प...








