Tag: महात्मा गाँधी

उत्तराखंड की सल्ट क्रांति: ‘कुमाऊँ की बारदोली’

उत्तराखंड की सल्ट क्रांति: ‘कुमाऊँ की बारदोली’

इतिहास
शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर विशेषडॉ. मोहन चन्द तिवारीदेश की आजादी की लड़ाई में उत्तराखंड के सल्ट क्रांतिकारियों की भी अग्रणी भूमिका रही थी. 5 सितंबर 1942 को महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो’ राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन की प्रेरणा से जन्मे सल्ट के क्रांतिकारियों ने अपने क्षेत्र में स्वाधीनता आन्दोलन की लड़ाई लड़ते हुए सल्ट क्षेत्र के ‘खुमाड़’ नामक स्थान पर खीमानंद और उनके भाई गंगा राम, बहादुर सिंह मेहरा और चूड़ामणि चार क्रांतिकारी शहीद हो गए थे. किन्तु दुर्भाग्य यह रहा है कि साम्राज्यवादी इतिहासकारों और राजनेताओं को इन क्रांतिवीरों के बलिदान को जितना महत्त्व दिया जाना चाहिए उतना महत्त्व नहीं मिला है. आज राष्ट्रीय स्वतंत्रता आन्दोलन के इतिहास में सल्ट क्रांति और स्वतंत्रता के लिए शहीद होने वाले क्रांतिकारियों का कहीं नामोल्लेख तक नहीं मिलता यहां तक कि हमारे उत्तराखंड के लोगों को भी इस आन...
लंबे समय से हावी औपनिवेशिक स्वरूप से दिलाएगी मुक्ति : नई शिक्षा नीति-2020

लंबे समय से हावी औपनिवेशिक स्वरूप से दिलाएगी मुक्ति : नई शिक्षा नीति-2020

शिक्षा
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भाग-5डॉ गीता भट्ट मातृभाषा से शिक्षा देने के महत्व को महात्मा गांधी ने इस प्रकार व्यक्त किया है “मां के दूध के साथ जो संस्कार और मीठे शब्द मिलते हैं, उनके और पाठशाला के बीच जो मेल होना चाहिये, वह विदेशी भाषा के माध्यम से शिक्षा देने से टूट जाता है. इस संबंध को तोड़ने वालों का उद्देश्य पवित्र ही क्यों न हो, फिर भी वे जनता के दुश्मन हैं.” आज अगर गांधी होते, तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की समग्रता और राष्टीय चेतना से संचित रूपरेखा देख अत्यंत संतुष्ट होते. 34 वर्षों के उपरांत एक नीति जो रचनांतर होने के साथ-साथ शैक्षणिक मापदंडों में एक नयी सोच को लायी है और आने वाले समय में शिक्षा पर लंबे समय से हावी औपनिवेशिक स्वरूप को मूलतः भारतीय करने में मील का पत्थर साबित होगी. शिक्षा नीति पर विमर्श और प्रतिपुष्टि की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी. शिक्षा मंत्री रमेश...
‘करो या मरो’ अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

‘करो या मरो’ अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

इतिहास
9 अगस्त 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज नौ अगस्त को देश 'भारत छोड़ो' आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ मना रहा है.नौ अगस्त 1942 का दिन भारत की आजादी का एक ऐतिहासिक दिन है. इसी दिन गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए “भारत छोड़ो आंदोलन” के रूप में अपनी आखिरी मुहिम चलाई थी जिसे भारत के इतिहास में 'अगस्त क्रांति' के नाम से भी जाना जाता है.'करो या मरो' अगस्त क्रांति का बीजमंत्र था. महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में चले इस विशाल जन आन्दोलन के जरिए अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति चाहने वाले करोड़ों देशभक्तों ने अपना तन मन धन न्योछावर करते हुए ब्रिटिश शासन की चूल को हिलाकर रख दिया था. बाद में इसी आंदोलन ने 1947 में मिली आजादी की नींव भी रखी.1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उत्तराखंड के 21 स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए और हजारों को गिरफ्तार किया गया,जिसके परिण...