September 21, 2020
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साहित्यिक हलचल

संसारभर का दुख बाँटती महादेवी  

मीना पाण्डेय महादेवी mahadevi vermaनिशा को, धो देता राकेश चाँदनी में जब अलकें खोल, कली से कहता था मधुमास बता दो मधुमदिरा का मोल; गए तब से कितने युग बीत हुए कितने दीपक निर्वाण! नहीं पर मैंने पाया सीख तुम्हारा सा मनमोहन गान. महादेवी महादेवी जितनी छायावाद की एक महान कवयित्री के रूप में महत्वपूर्ण
संस्मरण

‘एक अध्यापक की कोशिश और कशिश की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति’

डॉ. अरुण कुकसाल जीवन के पहले अध्यापक को भला कौन भूल सकता है. अध्यापकों में वह अग्रणी है. शिक्षा और शिक्षक के प्रति बालसुलभ अवधारणा की पहली खिड़की वही खोलता है. जाहिर है एक जिम्मेदार और दूरदर्शी पहला अध्यापक बच्चे की जीवन दिशा में हमेशा मार्गदर्शी रहता है. चंगीज आइत्मातोव का विश्व चर्चित उपन्यास ‘पहला […]
समाज/संस्कृति

वैदिक साहित्य में पितर अवधारणा और उसका उत्तरवर्त्ती विकास

डॉ. मोहन चंद तिवारी पितृपक्ष चर्चा पितृपक्ष के इस कालखंड में पितर जनों के स्वरूप और उसके ऐतिहासिक विकासक्रम की जानकारी भी बहुत जरूरी है. इस लेख में वैदिक काल से लेकर धर्मशात्रों और निबन्धग्रन्थों (मध्यकाल) तक की पितर परम्परा का विहंगमावलोकन किया गया है. भारतीय चिंतन परम्परा में वैदिक काल से ही समूचे ब्रह्मांड […]
किस्से/कहानियां

शुभदा

कहानी डॉ. अमिता प्रकाश यही नाम था उसका शुभदा! शुभदा-शुभता प्रदान करने वाली. शुभ सौभाग्य प्रदायनी. हँसी आती है आज उसे अपने इस नाम पर और साथ ही दया के भाव भी उमड़ पड़ते हैं उसके अन्तस्थल में, जब वह इस नाम को रखने वाले अपने पिता को याद करती है…. कितने लाड़ और गर्व […]
आधी आबादी

लड़ना होगा और आगे बढ़ना होगा

भावना मसीवाल एक ओर देश कोरोना महामारी से जुझ रहा है, दूसरी ओर अपराध की बढ़ती जघन्य से जघन्य घटनाएँ आपको भीतर तक उद्वेलित कर देती हैं. हम अपने आसपास कितने सुरक्षित हैं इसका अंदाजा लूटपाट, हत्या और यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं से लगाया जा सकता है. जिसमें बुजुर्ग से लेकर बच्चें तक असुरक्षित […]
शिक्षा

किसके हाथों शिक्षा की पतवार

कमलेश उप्रेती इक्कीसवीं सदी के बहुत प्रतिभाशाली बुद्धिजीवी और हिब्रू यूनिवर्सिटी युरोशलम में प्रोफेसर युवाल नोवा हरारी अपने एक लेख में बताते हैं “मनुष्य हमेशा से उपकरणों के आविष्कार करने में माहिर रहा है उन्हें उपयोग करने में नहीं. 1950 के दशक में जब आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की खोज हुई तो वैज्ञानिकों का सपना इसके द्वारा […]
स्मृति शेष

स्वंत्रता संघर्ष के क्रांतिकारी जननायक पं.गोविंद बल्लभ पंत 

पं. गोविंद बल्लभ पंत की जन्मजयंती (10 सितंबर) पर डॉ. मोहन चंद तिवारी भारत के स्वतंत्रता संग्राम की संघर्ष पूर्ण कहानी आज भी लोगों के दिलों में क्रांति की अलख जलाती है. ऐसे ही स्वतंत्रता संघर्ष के  क्रांतिकारी जननायकों में से पंडित गोविंद बल्लभ पंत जी की आज जन्म जयंती है. उत्तराखंड के प्रसिद्ध स्वतन्त्रता […]
उत्तराखंड

एक उजड़े गाँव की दास्तां

डॉ. गिरिजा किशोर पाठक इतिहास का अवलोकन किया जाये तो देखने को मिलेगा कि कई शहर, गाँव, कस्बे कालखंड विशेष में बसते और उजड़ते रहते हैं. कई सभ्यतायें और संस्कृतियाँ इतिहास का पन्ना बन कर रह जाती हैं. मोसोपोटामियां, सिंधु घाटी से लेकर कई सभ्यतायें आज पुरातात्विक अनुसंधान के विषय हैं. हाँ,  यह सच है […]
जल विज्ञान

प्राचीन भारत में मेघविज्ञान और बादलों के प्रकार

भारत की जल संस्कृति-14 डॉ. मोहन चंद तिवारी (7 फरवरी, 2013 को रामजस कालेज, ‘संस्कृत परिषद्’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्राचीन भारत में जलवायु विज्ञान’ के अंतर्गत मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य “प्राचीन भारत में मेघविज्ञान” का संशोधित लेख) भारत प्राचीन भारतीय मेघविज्ञान का इतिहास भी अन्य विज्ञानों की भांति वेदों से प्रारम्भ होता है.because […]
इतिहास

बिखरी हुई कांग्रेस को जब महामना ने पुनर्जीवित किया

पितृपक्ष में पुण्यात्मा महामना मदन मोहन मालवीय जी का पुण्यस्मरण! डॉ. मोहन चंद तिवारी आजादी से पहले कांग्रेस पार्टी में एक ऐसा भी दौर आया था, जब अंग्रेजों की कूटनीतिक चाल के कारण कांग्रेस के नेता बुरी तरह से बिखरकर तीन-चार खेमों में बँट चुके थे.अंग्रेज हुक्मरान ‘फूट डालो राज करो’ की रणनीति के तहत […]