Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
किसानों का असली दुश्मन, जलवायु परिवर्तन

किसानों का असली दुश्मन, जलवायु परिवर्तन

समसामयिक
निशांतफ़िलहाल देश में किसानों का because आन्दोलन मीडिया की सुर्खिया बटोर रहा है. किसानों से जुड़ी हर रिपोर्ट में एमएसपी और आढ़ती शब्द जगह बनाए हुए हैं. लेकिन जलवायु परिवर्तन एक ऐसा शब्द युग्म है जिसका प्रयोग किसानों और किसानी के संदर्भ में ज़्यादा से ज़्यादा होना चाहिए.मीडिया इसकी वजह यह है कि भारतीय किसानों का सबसे बड़ा दुश्मन जलवायु परिवर्तन है. लेकिन समस्या यह है कि इस दुश्मन को न किसान देख पा रहे हैं हैं उन्हें मीडिया दिखा रही है. because फ़िलहाल, ताज़ा ख़बर ये है कि भारतीय किसान पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों की चपेट में हैं. औसत वार्षिक तापमान बढ़ने से फसल की पैदावार/ उपज में गिरावट आई है और बेमौसम बारिश और भारी बाढ़ से फसल क्षति के क्षेत्र में वृद्धि हो रही है. यह सारी जानकारी आज क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा जारी एक रिपोर्ट से मिलती है. इस ब्रीफिंग रिपोर्ट में बताया गया है कि कै...
पेशवाओं की शान- हिमरू, संग पैठणी

पेशवाओं की शान- हिमरू, संग पैठणी

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-7मंजू कालाकुछ समय पहले का वाक्या साझा करना चाहती हूँ, इजरायल की एक राज​नयिक ने अपनी कुल जमा दो साड़ियों की ‘पूंजी’ शेयर करते हुए बड़ी मासूमियत से पूछा था- because ‘मेरे पास बस ये दो साड़ियां हैं, कौन सी बेहतर है?’ यह सिर्फ साड़ी के प्रति उनकी मुहब्बत नहीं थी, बल्कि इस देश की परंपराओं को लेकर उनके जज़्बाती मन का बयान था. आपको नहीं लगता कि साड़ी महज़ पहनावा नहीं है? साड़ी जज़्बात है, जश्न है, याद है, पहचान है. हालांकि पिछले कई सालों से पश्चिमी संस्कृति को ज्यादा तवज्जो मिलने लगी है और इसका असर हम हिंदुस्तानी औरतों के पहनावे पर साफ दिखता है. पहनावा चुनते वक्त सुविधा वाला पहलू ज्यादा मायने रखने लगा है.सलवार-कमीज़ पैंट, शर्ट, सलवार-कमीज़, स्कर्ट को because ज्यादा पसंद किया जा रहा है जबकि साड़ी खास अवसरों पर पहने जाने वाले परिधान के रूप में सिमटी है. बहरहाल, इस चुन...
भारत क्लाइमेट चेंज परफॉरमेंस इंडेक्स की टॉप टेन रैंकिंग में शामिल

भारत क्लाइमेट चेंज परफॉरमेंस इंडेक्स की टॉप टेन रैंकिंग में शामिल

पर्यावरण
दस सबसे अव्वल देशों में भारत के साथ मोरक्को और चिली जैसे दो और विकासशील देश, दुनिया का कोई मुल्क पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुकूल नहींनिशांतपेरिस समझौते के because पांच साल बाद भी कोई देश पेरिस समझौते के लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है. वहीं तीन विकासशील देश, क्लाइमेट चेंज परफॉरमेंस इंडेक्सस्ट की टॉप टेन  रैंकिंग में शामिल हैं.  इनमें मोरक्को -7वें, चिली -9वें और भारत 10वें स्थान पर है.पेरिस इस बात की जानकारी मिली because आज जारी हुए क्लाइमेट चेंज परफॉरमेंस इंडेक्स2021 से, जिसे जर्मनवाच और न्यूक्लाइमेट इंस्टीट्यूट ने क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (CAN) के साथ मिलकर प्रकाशित किया गया है.पेरिस यह रिपोर्ट 2030 के लिए जलवायु because लक्ष्यों पर यूरोपीय संघ के शिखर सम्मेलन और 12 दिसंबर को पेरिस समझौते की पांचवीं वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु महत्वाकांक्षा शिखर...
भारत के विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत जल संचयन प्रणालियां

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में परंपरागत जल संचयन प्रणालियां

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-29डॉ. मोहन चंद तिवारीभारत में जलसंचयन और प्रबन्धन का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. विभिन्न प्रांतों और प्रदेशों में परम्परागत जलसंचयन या ‘वाटर हारवेस्टिंग’ के नाम और तरीके अलग अलग रहे हैं किन्तु इन सबका उद्देश्य एक ही है वर्षाजल का संरक्षण और भूमिगत जल का संचयन और संवर्धन. उत्तराखंड में नौले, खाल,चाल, becauseराजस्थान में खड़ीन,कुंड और नाडी, महाराष्ट्र में बन्धारा और ताल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बन्धी, बिहार में आहर और पयेन, हिमाचल में कुहल, तमिलनाडु में एरी, केरल में सुरंगम, जम्मू क्षेत्र के कांडी इलाके के पोखर, कर्नाटक में कट्टा पानी को because सहेजने और एक से दूसरी जगह प्रवाहित करने के कुछ अति प्राचीन साधन थे, जो आज भी प्रचलन में हैं. इसी सम्बन्ध में प्रस्तुत है भारत के विभिन्न क्षेत्रों की परंपरागत जल प्रबंधन और जल संचयन से सम्बंधित प्रमुख जल प्रणाल...
भारतीय भाषाओं के लिए विश्वविद्यालय की पहल स्वागत योग्य है

भारतीय भाषाओं के लिए विश्वविद्यालय की पहल स्वागत योग्य है

शिक्षा
प्रो. गिरीश्वर मिश्रभारतवर्ष  भाषाओं की दृष्टि से एक अत्यंत समृद्ध देश है. यहां की भाषाई  विविधता अनोखी  है  और उनमें अपार संभावनाएं  विद्यमान हैं यह उनकी आतंरिक जीवनशक्ति और लोक-जीवन में व्यवहार  में  प्रयोग ही था कि   विदेशी आक्रांताओं  द्वारा विविध प्रकार से सतत हानि पहुंचाये जाने के बावजूद  भी  वे  बची  रहीं. because पिछली कुछ सदियों इन भाषाओं को सतत संघर्ष करना पड़ा था. मुगल शासन काल में फारसी  को  महत्व मिला.  फिर  अंग्रेजों के उपनिवेश के दौर में अंग्रेजी को निर्भ्रान्त प्रश्रय दिया गया और  उसे नौकरी चाकरी से  जोड़  दिया गया. परन्तु यह भी सत्य है कि स्वतंत्रता संग्राम में लोक संवाद के साथ  देश को एक साथ ले चलने में हिन्दी  और अन्य भारतीय भाषाओं ने विशेष  भूमिका निभाई. so स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अंग्रेजों के दौर की नीतियों के अनुसरण करते रहने के फलस्वरूप अंग्रेजी का प्रभुत्व जीवन...
सामाजिक समता के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर

सामाजिक समता के शिल्पकार बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर

स्मृति-शेष
अम्बेडकर परिनिर्वाण दिवस पर विशेष      डॉ. मोहन चंद तिवारीभारतीय संविधान के निर्माता भारतरत्न बाबा साहेब डॉ.भीमराव अम्बेडकर भारत में एक ऐसे वर्ग विहीन समाज की संरचना चाहते थे जिसमें जातिवाद, वर्गवाद, सम्प्रदायवाद तथा because ऊँच-नीच का भेद नहीं हो और प्रत्येक मनुष्य अपनी अपनी योग्यता के अनुसार सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करते हुए स्वाभिमान और सम्मानपूर्ण जीवन जी सके. दलितों को स्वावलम्बी बनाने के लिए अम्बेडकर ने दलित समाज को त्रिसूत्री आचार संहिता प्रदान की जिसके तीन सूत्र हैं - शिक्षित बनो, संगठित होओ तथा संघर्ष करो. बाबा साहेब ने इस त्रिसूत्री आन्दोलन के माध्यम से समाज के उपेक्षित, कमजोर तथा so सदियों से सामाजिक शोषण से संत्रस्त दलित वर्ग को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने का अभूतपूर्व कार्य ही नहीं किया बल्कि एक समाज सुधारक विधिवेत्ता की हैसियत से भी उन्होंने दलितवर्ग को भारतीय...
स्मृतियों के उस पार…

स्मृतियों के उस पार…

संस्मरण
सुनीता भट्ट पैन्यूलीकोई अदृश्य शक्ति किसी because हादसे के उपरांत स्वयं को संबल देने या मज़बूत बनाने की प्रक्रिया के अंतर्गत भावनाओं का उत्स है, यह किसी अदृश्य, दैवीय शक्ति को नकारने वालों का मत हो सकता है किंतु अपने संदर्भ में कहूं तो मेरा हृदय सहर्ष स्वीकार करता है कि मैंने जिंदगी में किसी अदृश्य शक्ति को  अपने जीवन में बार-बार महसूस किया है. ब्रह्मांड ईश्वर और अदृश्य शक्ति एक हैं नहीं जानती ह़ूं but किंतु ब्रह्मांड तक किसी दुखी दिल की आवाज़ पहुंचती है यह बहुत अच्छे से जानती हूं मैं बशर्ते आवाज़ किसी दूसरे दिल की अतल  से नि:स्वार्थ  निकल रही हो. बात उन दिनों की है जब पिता को गये साल भर हो चला था वक़्त अपनी रफ़्तार से बढ़ रहा था,मेरी ज़िन्दगी की गाड़ी भी कभी पीछे मुड़ती कभी आगे देखती अपनी दिशा में गतिमान हो रही थी.so हुआ यूं कि पहले वायरल  और फिर डेंगू के चपेट में आ जाने से घर ही घ...
न्यायदेवता ग्वेलज्यू की जन्मभूमि कहां? धूमाकोट में, चंपावत में या नेपाल में?

न्यायदेवता ग्वेलज्यू की जन्मभूमि कहां? धूमाकोट में, चंपावत में या नेपाल में?

अल्‍मोड़ा
डॉ. मोहन चन्द तिवारीउत्तराखंड के न्याय देवता ग्वेलज्यू के जन्म से सम्बंधित विभिन्न जनश्रुतियां एवं जागर कथाएं इतनी विविधताओं को लिए हुए हैं कि ग्वेल देवता की वास्तविक जन्मभूमि निर्धारित करना आज भी बहुत कठिन है. because न्याय देवता की जन्मभूमि धूमाकोट में है,चम्पावत में है या फिर नेपाल में? इस सम्बंध में भिन्न भिन्न लोक मान्यताएं प्रचलित हैं. कहीं ग्वेल देवता को ग्वालियर कोट चम्पावत में राजा झालराई का पुत्र कहा गया है तो किसी जागर कथा में उन्हें नेपाल के हालराई का पुत्र बताया जाता है. विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित पारम्परिक जागर कथाओं और लोकश्रुतियों में भी but न्यायदेवता ग्वेल की जन्मभूमि के बारे में अनिश्चयता की स्थिति देखने में आती है. पिछले कुछ वर्षों में जो ग्वेल देवता से सम्बंधित लिखित साहित्य सामने आया है,उसमें भी जन्मभूमि के सम्बंध में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. उदाहरण के लिए मथ...
ब्रिटेन की जलवायु नीति ने बनाया तमाम देशों पर सही फ़ैसले लेने का दबाव

ब्रिटेन की जलवायु नीति ने बनाया तमाम देशों पर सही फ़ैसले लेने का दबाव

पर्यावरण
12 दिसंबर को आयोजित होगा 'क्लाइमेट एम्बिशन समिट' निशांतजलवायु को लेकर ब्रिटेन के ऊंचे लक्ष्‍यों के कारण दुनिया के बाकी देशों पर आगामी 12 दिसम्‍बर को आयोजित होने वाली क्‍लाइमेट एम्‍बीशन समिट से पहले जलवायु सम्‍बन्‍धी चुनौती के सामने उठ खड़े होने का दबाव बढ़ गया है. ब्रिटेन ने सही दिशा में आगे बढ़ने का मौका लपक लिया है. उम्मीद है कि इससे अन्य देशों को भी वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे ही रखने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रेरणा मिलेगी. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉन्सन ने प्रदूषणकारी तत्‍वों के उत्सर्जन में कटौती करने के ब्रिटेन के 2030 तक के लक्ष्य में उल्लेखनीय बढ़ोत्‍तरी करेंगे, ताकि अगले दशक में कार्बन मुक्ति के प्रयासों को तेज किया जा सके और अगले साल ग्लासगो में आयोजित होने जा रही सीओपी 26 में जलवायु परिवर्तन से निपटने की दौड़ की वैश्विक अगुव...
हिप्पू का साहस

हिप्पू का साहस

बाल-चौपाल
बाल कहानीललित शौर्य“तुम्हें अभी वहां नहीं जाना चाहिए. because वहां बहुत खतरा है.”, हिप्पू हाथी की माँ ने कहा. “नहीं माँ, मुझे जाने दो. मुझे अपने दोस्त but की जान बचानी है.वो चार दिन से भूखे प्यासे हैं.”, हिप्पू ने कहा. खतरा दरअसल भयंकर बारिस और बाढ़ के कारण because हिप्पू के दोस्त जंगल के एक टीले पर फंसे हुए थे. हिप्पू को जब ये बात पता चली वो तब से बहुत परेशान था. वो अपने दोस्तों को बचाना चाहता था. हिप्पू के पापा दूसरे जंगल में किसी काम से गए हुए थे. वो भी भारी बारिस के कारण because उधर ही फंसे हुए थे. माँ के मना करने पर हिप्पू ने माँ को बहुत समझाया. आखिर में माँ ने उसे मदद के लिए भेज ही दिया. हाथी की माँसबसे पहले हिप्पू ने because अपने खेतों से केले की बड़ी–बड़ी घड़ियाँ काट ली. वो उन्हें अपनी पीठ पर लाद कर चल दिया. हाथी की माँ पूरे जंगल में ये बात आग की तरह फ़ैल चुकी...