बाल-चौपाल

बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026 से सम्मानित होंगे महावीर रवांल्टा

बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान-2026 से सम्मानित होंगे महावीर रवांल्टा

बाल-चौपाल, साहित्यिक-हलचल
 नीरज उत्तराखंडीबाल साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वरिष्ठ साहित्यकार महावीर रवांल्टा को उनकी चर्चित कृति ‘गोलू पढ़ेगा’ के लिए वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘बालप्रहरी बाल साहित्य सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें आगामी 14 जून 2026 को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) डीडीहाट, पिथौरागढ़ में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में प्रदान किया जाएगा। यह जानकारी ‘बालप्रहरी’ त्रैमासिक पत्रिका के संपादक एवं बाल साहित्य संस्थान, अल्मोड़ा के सचिव उदय किरौला द्वारा जारी विज्ञप्ति में दी गई। समारोह में देशभर के 10 चयनित बाल साहित्यकारों को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र, अंगवस्त्र एवं नगद राशि देकर सम्मानित किया जाएगा। महावीर रवांल्टा पिछले चार दशकों से बाल साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी रचनाओं में बच्चों की संवेदनाओं, जीव...
हिप्पू का साहस

हिप्पू का साहस

बाल-चौपाल
बाल कहानीललित शौर्य“तुम्हें अभी वहां नहीं जाना चाहिए. because वहां बहुत खतरा है.”, हिप्पू हाथी की माँ ने कहा. “नहीं माँ, मुझे जाने दो. मुझे अपने दोस्त but की जान बचानी है.वो चार दिन से भूखे प्यासे हैं.”, हिप्पू ने कहा. खतरा दरअसल भयंकर बारिस और बाढ़ के कारण because हिप्पू के दोस्त जंगल के एक टीले पर फंसे हुए थे. हिप्पू को जब ये बात पता चली वो तब से बहुत परेशान था. वो अपने दोस्तों को बचाना चाहता था. हिप्पू के पापा दूसरे जंगल में किसी काम से गए हुए थे. वो भी भारी बारिस के कारण because उधर ही फंसे हुए थे. माँ के मना करने पर हिप्पू ने माँ को बहुत समझाया. आखिर में माँ ने उसे मदद के लिए भेज ही दिया. हाथी की माँसबसे पहले हिप्पू ने because अपने खेतों से केले की बड़ी–बड़ी घड़ियाँ काट ली. वो उन्हें अपनी पीठ पर लाद कर चल दिया. हाथी की माँ पूरे जंगल में ये बात आग की तरह फ़ैल चुकी...