Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
जल आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानन्द भारती: आधुनिक वराहमिहिर

जल आंदोलन के प्रणेता सच्चिदानन्द भारती: आधुनिक वराहमिहिर

जल-विज्ञान
भारत की जल संस्कृति-36डॉ. मोहन चंद तिवारीउत्तराखण्ड में जल-प्रबन्धन-7 (12मार्च,2014 को because ‘उत्तराखंड संस्कृत अकादमी’, हरिद्वार द्वारा ‘आई आई टी’ रुड़की में आयोजित विज्ञान से जुड़े छात्रों व जलविज्ञान के अनुसंधानकर्ता विद्वानों के समक्ष मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य ‘प्राचीन भारत में जलविज्ञान‚जलसंरक्षण और जलप्रबंधन’ से सम्बद्ध ‘भारतीय जलविज्ञान’ पर संशोधित लेख का सार)वाटर हारवैस्टिंग वृक्षों, वनस्पतियों द्वारा भूमिगत जल because नाड़ियों को सक्रिय करते हुए केवल तीन दशकों में ही सात सौ हेक्टेयर हिमालय भूमि पर जंगल उगाने और तीस हजार तालाब पुनर्जीवित करने वाले 'पाणी राखो' आंदोलन के प्रणेता उत्तराखण्ड के सच्चिदानन्द भारती को यदि आधुनिक वराहमिहिर की संज्ञा दी जाए तो अत्युक्ति नहीं होगी.वाटर हारवैस्टिंग उत्तराखण्ड के दूधातोली क्षेत्र में सच्चिदानन्द भारती ने प्राचीन जलवैज्ञान...
मानवता की मिसाल बना उत्तराखंड पुलिस का ‘मिशन हौसला’

मानवता की मिसाल बना उत्तराखंड पुलिस का ‘मिशन हौसला’

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनकोरोना संक्रमण काल में उत्तराखंड पुलिस ने सेवा की एक नई मिसाल कायम की है. पहाड़ के दुर्गम इलाके हों या सुदूर गांव सब जगह पुलिसकर्मी मदद पहुंचाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं. because उत्तराखंड पुलिस ने डीजीपी अशोक कुमार के नेतृत्व में पहली मई से 'मिशन हौसला' की शुरुआत की थी. कोरोना काल में उत्तराखंड पुलिस की भूमिका इसलिए भी अहम रही क्योंकि पहले लॉकडाउन, फिर महाकुंभ because और उसके बाद कोरोना कर्फ्यू के दौरान लोगों को मदद पहुंचाने के लिए जबरदस्त काम किया गया. डीजीपी अशोक कुमार लगातार अपने बल की हौसलाअफजाई करते रहे, साथ ही यह भी ताकीद करते रहे कि हमें किसी भी हाल में इंसानियत नहीं छोड़नी है. जितनी मदद हम लोगों की कर सकते हैं, उतनी हम करते रहें. अंक शास्त्रमिशन हौसला के तहत उत्तराखंड के हर जिले एवं बाटालियन में कोविड कंट्रोल रूम स्थापित कर उनके नंबर जारी किए गए...
इतिहास के पन्नों से : दिल्ली, दून और नहर की लड़ाई

इतिहास के पन्नों से : दिल्ली, दून और नहर की लड़ाई

इतिहास
स्वीटी टिंड्डे  वर्ष था 1841, देहरादून का वो हिस्सा जो यमुना और सीतला नदी के बीच का था वो बंजर था, न खेती और न ही जंगल. कृषि विकास में अंग्रेजों का जमींदारों पर because से विश्वास ख़त्म हो चुका था और सरकार धड़ल्ले से नहर की खुदाई करवा रही थी. देहरादून में ही एक नहर (बीजापुर) बन चुका था दूसरा (राजपुर) बन रहा था और तीसरे पर विचार हो रहा था. ये तीसरा था, कुत्था पुत्थौरbecause नहर जिससे 17000 एकड़ जमीन की सिंचाई होने वाली थी. भू-राजस्व विभाग ने अप्रैल में योजना बनाई, जुलाई में दिल्ली-करनाल क्षेत्र के राजस्व विभाग ने आपत्ति जाहिर की, अक्टूबर में मेरठ के कमिश्नर ने स्वीकृति दी, अगले साल अप्रैल तक राज्य सरकार ने स्वीकृति दे दी. बीजापुर90307 रुपए का खर्च बताया, सरकार ने एक लाख स्वीकृत कर दी. पाँच आने प्रति बीघा की दर से सिंचाई कर लगती जिससे सरकार को 7000 रुपए वार्षिक की आमदनी because होनी...
विवाद आयुर्वेद और एलोपैथी का नहीं ऊँची नाक व हनक का है…

विवाद आयुर्वेद और एलोपैथी का नहीं ऊँची नाक व हनक का है…

देश—विदेश
प्रकाश उप्रेतीबाबा, विवाद और बडबोलेपन का पुराना नाता है. योग के जरिए घर-घर तक पहचाने जाने वाले बाबा ने इसी ‘पहचान’ को धीरे-धीरे शक्ति के केंद्र में बदल लिया. वह योग शिविरों में आने वाले लोगों को ‘भीड़’ बताकर राजनैतिक गलियारों में पैठ मजबूत करते रहे.वोट बैंक नेताओं का लालच था तो शक्ति अर्जित करना बाबा की महत्वकांक्षा. इसी गठजोड़ के बल पर because बाबा योग से आयुर्वेद की तरफ मुड़े और फिर एक साम्राज्य स्थापित कर लिया. इसी साम्राज्य की शक्ति के बलपर ही बाबा भारतीय कानून व्यवस्था को भी चुनौती देने का साहस कर जाते हैं. राजनैतिक2014 में तहलका के लिए मनोज रावत की लिखी रिपोर्ट तफसील से बाबा और सत्ता के गठजोड़ की ‘जमीनी’ तह उजागर करती है. मनोज की रिपोर्ट का एक अंश-“साल 2004 की बात है. बाबा because रामदेव योगगुरु के रूप में मशहूर हुए ही थे. चारों तरफ उनकी चर्चा हो रही थी. टीवी चैनलों पर उनकी धूम ...
हिंदी पत्रकारिता का काल, कंकाल और महाकाल

हिंदी पत्रकारिता का काल, कंकाल और महाकाल

समसामयिक
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेषप्रकाश उप्रेतीहिन्दी पत्रकारिता का सफर कई उतार-चढाव से होकर गुजरा है. उसका कोई स्वर्ण काल जैसा नहीं रहा है और होना भी नहीं चाहिए लेकिन पत्रकारिता का भक्तिकाल शाश्वत सत्य है. वह लगभग इन 200 वर्षों की यात्रा में नजर आता है.मासिक, साप्ताहिक और दैनिक से लेकर 24x7 तक सफर कई तरह की विषम परिस्थितियों से गुजरा है. because बंगाल गज़ट से उदंत मार्तण्ड, सरस्वती, आज,  नई दुनिया, हिंदुस्तान से लेकर जनसत्ता तक प्रिंट मीडिया का सफर रहा तो वहीं दूरदर्शन से लेकर आजतक और फिर 24x7 तक इलोक्ट्रोनिक मीडिया ने अपनी यात्रा तय की. इस यात्रा के दौरान पत्रकारिता ने एक तरफ जहाँ ब्रिटिश शासन के खिलाफ खड़े होकर जनपक्षधरता दिखाई तो वहीं  मीडिया ने आजादी के आंदोलन में  भी महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई. लेकिन आजाद भारत में सरकार ने आपातकाल घोषणा के साथ ही पत्रकारिता का गला भी घोंट डाला. स...
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही पत्रकार का धर्म

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही पत्रकार का धर्म

समसामयिक
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर विशेषडॉ. राकेश रयालहिंदी भाषा में 'उदन्त मार्तण्ड' के नाम से पहला समाचार पत्र आज के ही दिन 30 मई 1826 में निकाला गया था. इसलिए इस दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है. because हिंदी भाषा के प्रथम पत्रकार (सम्पादक)  पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कोलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था. इसके प्रकाशक और संपादक भी वे खुद थे. इस तरह हिंदी पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले पंडित जुगल किशोर शुक्ल का हिंदी पत्रकारिता की जगत में विशेष नाम और सम्मान है.कोलकत्ता का हिंदी भाषा बाहुल्य क्षेत्र न because होने तथा हिंदी भाषा के कम पाठकों के चलते यह समाचार एक वर्ष कुछ माह ही प्रकाशित हो पाया. पत्र को हिंदी भषा क्षेत्रों में भेजने के लिए डाक सेवा का सहयोग लिया जाता था, लेकिन राजस्व के अभाव में उन्हें इसे बंद करना पड़ा.अंक शास्त...
साप्ताहिक राशिफल: जून के प्रथम सप्ताह में क्या कहते हैं आपके ​सितारे

साप्ताहिक राशिफल: जून के प्रथम सप्ताह में क्या कहते हैं आपके ​सितारे

साप्ताहिक राशिफल
अंक ज्योतिष साप्ताहिक राशिफल 31 मई से 6 जून, 2021 कैसे जानें अपना मुख्य अंक (मूलांक) अंक शास्त्र साप्ताहिक राशिफल जानने के लिए सबसे पहले आपको आपना अंक ज्योतिष मूलांक जानना जरूरी है. मूलांक व्यक्ति के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण अंक माना गया है. जातक का जन्म महीने की जिस भी तारीख को होता है, उस अंक को इकाई के अंक में बदलने के बाद जो भी अंक बनता है, वह जातक का मूलांक कहलाता है. because मूलांक 1 से 9 अंक तक कोई भी हो सकता है, उदाहरण के तौर पर – आपका जन्म किसी महीने की 10 तारीख को हुआ है तो आपका मूलांक 1 + 0 यानी 1 होगा. इसी तरह किसी भी महीने की 1 तारीख से लेकर 31 तारीख तक जन्मे लोगों के लिए 1 से 9 तक के मूलांकों की गणना की जाती है. इस प्रकार सभी जातक अपना मूलांक जानकर उसके आधार पर साप्ताहिक राशिफल जान सकते हैं. अंक शास्त्र अंक शास्त्र का हमारे जीवन पर गहरा because प्रभाव देखने को मिलता है, क्...
तिलाड़ी कांड: जब यमुना किनारे निहत्थों पर बरसाई गईं गोलियां

तिलाड़ी कांड: जब यमुना किनारे निहत्थों पर बरसाई गईं गोलियां

इतिहास
तिलाड़ी कांड 30 मई पर विशेषसुनीता भट्ट पैन्यूलीसीमांत जनपद उत्तरकाशी के रवांई घाटी के बड़कोट नगरपालिका के अन्तर्गत यमुना नदी के तट पर बसा हुआ एक स्थान है तिलाड़ी, जो अपने नैसर्गिक सौंदर्य और सघन वन because संपदा के लिए प्रसिद्ध है किंतु दु:ख कि बात है कि तिलाड़ी अपनी दूसरी वजह से हिन्दुस्तान के प्रमुख समाचार पत्रों विशेषकर गढ़वाल और कुमाऊं के साप्ताहिक पत्रों में सुर्खियों में आया जिसके 30 मई 1930 के रक्त रंजित इतिहास से हम उत्तराखंड के अधिकांश बाशिंदे शायद आज भी अनभिज्ञ हैं.आजादीउत्तराखंड के तिलाड़ी कांड के उस काले धब्बेनुमा इतिहास की मेरे सामान्य ज्ञान में अभिवृद्धि नहीं हो पाती यदि मैंने बृज भूषण गैरोला की “रियासती षड्यंत्रों का इतिहास” और स्व. विद्यासागर नौटियाल का “यमुना के बागी बेटे” न पढ़ा होता सोचा तिलाड़ी because कांड का इतिहास उससे जुड़े लोगों की शहादत, उनके अपन...
सीएम तीरथ सिंह रावत ने उत्तरकाशी में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास, बड़कोट में कोविड केयर सेंटर का किया निरीक्षण

सीएम तीरथ सिंह रावत ने उत्तरकाशी में विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास, बड़कोट में कोविड केयर सेंटर का किया निरीक्षण

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीमुख्यमंत्री  तीरथ सिंह रावत ने शनिवार को उत्तरकाशी में लगभग 52 करोड़ 37 लाख रूपये की 26 योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. जिसमें से 17 करोड़ 41 लाख रूपये की 12 योजनाओं का लोकार्पण  एवं 34 करोड़ 46 लाख रूपये की 14 योजनाओं के शिलान्यास किये गये. मुख्यमंत्री रावत ने जिन योजनाओं का लोकार्पण किया  उनमें 3 करोड़ 20 लाख रूपये की जनपद के विभिन्न मोटर मार्गों पर बिटुमिन्स कंक्रीट द्वारा सतह सुधारीकरण का कार्य, 2 करोड़ 94 लाख की लागत के उत्तरकाशी घनसाली तिलवाड़ा मोटर मार्ग पर बिटुमिन्स कंक्रीट द्वारा सतह सुधारीकरण का कार्य, 2 करोड़ 74 लाख की लागत के ज्ञानसू साल्ड मोटर मार्ग से ज्ञानसू उपला बस्ती मोटर मार्ग का निर्माण, 2 करोड़ 05 लाख की लागत के गंगोत्री में वरूणाघाटी में भराणगांव-उपरीकोट मोटर मार्ग के 5 किमी में 30 मीटर स्पान के 1.50 लेन स्टील गर्डर सेतु का निर्माण, 1 करो...
पहाड़ में महिलाओं के मासिक धर्म के वो पांच दिन

पहाड़ में महिलाओं के मासिक धर्म के वो पांच दिन

सेहत
मासिक धर्म स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेषनीलम पांडेय ‘नील’कुछ सालों पहले उत्तराखण्ड के गाँवों में कोई नई दुल्हन जब ससुराल में प्रवेश करती थी – उसकी पहली माहवारी, जिसे लोक भाषा में धिंगाड़ होना, छूत होना, अलग होना, because दिन होना या मासिक आदि नामों से जाना जाता है, के लिए एक अलग ही माहौल तैयार किया जाता था.माहवारी माहवारी के पहले दिन से ही उसे पता चल जाता था कि अब जब भी उसे माहवारी आती रहेगी, उसको माहवारी के नियमों को ओढ़ना होगा और खुद को उसमें रचना, बसाना होगा. because अपने दर्द और स्त्री सम्मान को भूलकर उसे अपनी सदियों से चली आ रही परंपराएं जीवित रखनी होंगी. शायद इन्हीं परंपराओं के कारण उस स्त्री को कभी अपने दर्द और सम्मान का अहसास भी नहीं हुआ या उसको उस समय इन नियमों के विरूद्ध जाने की हिम्मत नहीं हुई होगी.माहवारीगावों में इन प्रथाओं को खूब अच्छे से मानने वाली, ...