Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
 ‘जीवन जिससे पूर्ण सार्थक हो, वो मंजिल अभी दूर है’

 ‘जीवन जिससे पूर्ण सार्थक हो, वो मंजिल अभी दूर है’

पौड़ी गढ़वाल
प्रेरक व्यक्तित्व – डॉ. चरणसिंह 'केदारखंडी'डॉ. अरुण कुकसालमैं अचकचा गया हूं कि कहां पर बैठूं? कमरे के चारों ओर तो एक दिव्य और भव्य स्वरूप पहले ही से विराजमान है. मुझे सुखद आश्चर्य हुआ कि कमरे में करीने से because रखी पुस्तकें मेरे स्वागत में एक साथ मुस्करा दी हैं. मेरे हाथ श्रीअरविंद और श्रीमां के चित्रों की ओर स्वतः ही अभिवादन के लिए जुड़ गये हैं. मैं तुरंत सामने की किताब को सहला कर अपने को सहज करता हूं. हिन्दी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी की डिक्शनरियों की एक लम्बी कतार सामने के रैक पर सजी हैं. कमरे में दिख रही सभी किताबें धर्म के दायरे से बाहर निकलकर आध्यात्म का आवरण लिए हुये हैं.ज्योतिष पल भर पहले मैं असमजस में रहा कि पहले किताबों से बातें करूं या केदारखंडी जी से. पर पल में ही संशय मिटा कि इन किताबों का अंश केदारखण्डी जी में किसी न किसी रूप में है, तो फिर उन्हीं से बातें प...
अमृत पर्व कुम्भ: सनातन संस्कृति, परम्परा और ज्ञानामृत चेतना से पुनः संवाद….

अमृत पर्व कुम्भ: सनातन संस्कृति, परम्परा और ज्ञानामृत चेतना से पुनः संवाद….

पुस्तक-समीक्षा
डॉ. मोहन चंद तिवारीनववर्ष 2022 के अवसर पर, जब देश अपनी आजादी के 75वें अमृत महोत्सव की वर्षगांठ भी मना रहा है, यह बताते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि इस नए वर्ष में मेरी because चिर प्रतीक्षित पुस्तक "अमृत पर्व कुम्भ: इतिहास और परम्परा" देश के लब्धप्रतिष्ठ प्रकाशन, ईस्टर्न बुक लिंकर्स, दिल्ली के माध्यम से सुधीजन पाठकों के करकमलों में शीघ्रातिशीघ्र पहुंचने वाली है. ज्योतिष हमारे देश के बुद्धिजीवियों और सन्त महात्माओं ने आदिकाल से चली आ रही  कुम्भ परम्परा को महज एक धार्मिक मेले की नजरिए से ही देखा है, जिसका आयोजन चार तीर्थ स्थानों पर तीन सालों के अंतराल पर किया जाता है. किन्तु इस कुम्भ अवधारणा के पीछे नदियों के संरक्षण, प्रकृति संरक्षण,  नदीमातृक संस्कृति और पर्यावरण चिंतन because और अखंड राष्ट्रीय एकता का जो विचार हजारों वर्षों से इस भारत देश को राष्ट्रीय अस्मिता के भाव से जोड़ रहा था उसे ...
नए साल का जन एजेंडा क्या कहता है

नए साल का जन एजेंडा क्या कहता है

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  नया ‘रमणीय’ अर्थात मनोरम कहा जाता है. नवीनता अस्तित्व में बदलाव को इंगित करती है और हर किसी के लिए आकर्षक होती है. अज्ञात और अदृष्ट को लेकर हर कोई ज्यादा ही उत्सुक और कदाचित भयभीत भी रहता है. यह आकर्षण तब अतिरिक्त महत्व अर्जित कर लेता है जब कोविड जैसी लम्बी खिंची महामारी के बीच सामान्य अनुभव में एकरसता और ठहराव आ चुका हो. पर काल-चक्र तो रुकता नही  और सारा वस्तु-जगत बदलाव की प्रक्रिया में रहता है. गतिशील दुनिया में द्रष्टा की दृष्टि और और सृष्टि  दोनों ही परिवर्तनशील हैं और परिवर्तन में  संभावनाओं  की गुंजाइश बनी रहती है. इसलिए नए का स्वागत किया जाता है. नए वर्ष की आहट सुनाई पड़ रही है. इस घड़ी में सबका स्वागत है. इस अवसर पर देश की स्थिति पर गौर करते हुए वे अधूरे काम भी याद आ रहे हैं जो देश और समाज के लिए अनिवार्य एजेंडा प्रस्तुत करते हैं. कोविड-19 महामारी के  के  घाव ...
राष्ट्र-पुरुष के आराधक भारत-भारती के अमर सपूत  

राष्ट्र-पुरुष के आराधक भारत-भारती के अमर सपूत  

स्मृति-शेष
अटल बिहारी वाजपेयी जन्म दिवस (25 दिसम्बर) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  भारत जमीन का टुकड़ा नहीं, जीता जगता राष्ट्रपुरुष है. हिमालय मस्तक है, कश्मीर किरीट है, पंजाब और बंगाल दो विशाल कंधे हैं. पूर्वी और पश्चिमी घाट दो विशाल जंघाएँ हैं. कन्याकुमारी इसके चरण हैं, सागर इसके पग पखारता है. यह चन्दन की भूमि है, अभिनन्दन की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है, यह अर्पण की भूमि है, इसका कंकर-कंकर शंकर है, इसका बिंदु-बिंदु गंगाजल है. हम जिएंगे तो इसके लिए मरेंगे तो इसके लिए. ज्योतिष -अटल बिहारी वाजपेयी भारतवर्ष की सभ्यता निरंतर गतिमान और सृजनशील रही है. साहित्य और कला ही नहीं सामाजिक जीवन और राजनीति के क्षेत्र में भी यह सृजनात्मकता दिखती है. पर दोनों का एक ही व्यक्ति में सम्मिलन होना अद्भुत है. श्री अटल बिहारी वाजपेयी में इन दोनों धाराओं का संगम होता है. ऊपर उद्धृत काव्य पंक्तियों में ...
नदी द्वीप- माजुली और मलाई कोठानी

नदी द्वीप- माजुली और मलाई कोठानी

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-23मंजू काला‘एकांत कभी-कभी सबसेअच्छा समयहोता है.’ - जान मिल्टन, इन पैराडाइज़ लास्ट मिल्टन की उपरोक्त पंक्तियों को परिभाषित करती हैं जाड़ों की बोझिल और ठिठुररती शामें. इन ठिठुररती शामों के  दौरान मै बैठे-ठाले ही यात्राएँ करने लगती हूँ. असल में कुछ यात्राएँ हम रेल मार्ग से करते हैं, because कुछ सड़क मार्ग से, कुछ हवाई मार्ग से और कुछ स्मृति मार्ग से.  स्मृति के माध्यम से की जाने वाली यात्राओं का फायदा यह है कि इसके लिए कुछ खर्च नहीं करना पड़ता. सहुलियत रहती है, बस जब भी, और जहाँ भी एकांत उपलब्ध हो जाये वहीं से यात्राएँ शुरू हो सकती है. आज जब सांझ की बेला,  हाड़ कंपाती ठंडी में दांत बजाते हुए अपनी चादर समेटने की तैयारी कर रही थी कि तभी क्षितिज में डूबते  मटियाले और धुंधलाते सूरज दा ने प्यार से अपनी गर्माहट का लिहाफ मुझे ओढाया और ढकेल दिया   स्मृति की ट्रेन में. "क...
सनातन हिन्दू धर्म की आत्मा है गीता : महात्मा गांधी

सनातन हिन्दू धर्म की आत्मा है गीता : महात्मा गांधी

साहित्‍य-संस्कृति
डॉ. मोहन चंद तिवारीहिन्दू-धर्म का अध्ययन करने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक हिन्दू के लिए यह गीता एकमात्र सुलभ ग्रंथ है और यदि अन्य सभी धर्मशास्त्र जलकर भस्म हो जाये तब भी इस अमर ग्रंथ के because सात सौ श्लोक यह बताने के लिए पर्याप्त होंगे कि हिन्दू-धर्म क्या है? और उसे जीवन में किस प्रकार उतारा जाए? मैं सनातनी होने का दावा करता हूँ; क्योंकि चालीस वर्षो से उस ग्रंथ के उपदेशों को जीवन में अक्षरशः उतारने का मैं प्रयत्न करता आया हूँ. - महात्मा गांधीआधुनिक युग में भारतीय पुनर्जागरण की वैचारिक परंपरा को सुदृढ आधार देने के लिए एव आध्यात्मिक भारत के पुनर्निर्माण के लिए जो जन आंदोलन चले उन्हें प्रोत्साहित करने में गीता के चिंतन की अहम भूमिका रही थी. गीता के निष्काम कर्मयोग से प्रेरणा लेते हुए ही आधुनिक युग के विचारकों, समाज सुधारकों और स्वन्त्रता आंदोलन के because सेनानियों ने ब्रिटिश साम्...
संस्कृति और जमीन बचाने के जुलूस के साथ उत्तराखंड महिला मंच ने मनाया अपना 28वां स्थापना दिवस

संस्कृति और जमीन बचाने के जुलूस के साथ उत्तराखंड महिला मंच ने मनाया अपना 28वां स्थापना दिवस

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनउत्तराखंड महिला मंच ने आज अपना 28 वां स्थापना दिवस, गांधी पार्क से शहीद स्थल तक एक सांस्कृतिक जुलूस निकालते हुए मनाया. इस सांस्कृतिक जुलूस की शुरुआत करते हुए, गांधी पार्क में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्तराखंडी वेशभूषा में उत्तराखंडी वाद्य यंत्रों की गर्जना के साथ अपने अलग-अलग क्षेत्रीय सामूहिक सांस्कृतिक गीतों व नृत्य का प्रदर्शन करते हुए उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने के लिए भारी नारेबाजी भी की.भारी संख्या मे महिलाओं के अलावा आज मंच के स्थापना दिवस पर उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने के लिए "भू-कानून संयुक्त संघर्ष मोर्चा" से जुड़े युवा शक्ति संगठन के युवाओं ने भी भारी संख्या में इस अवसर पर अपनी भागीदारी दी, इसके अलावा मोर्चा से जुड़े आंदोलनकारी मंच, गढ़वाल सभा,  अन्य संघर्षशील भू-कानून संघर्ष समर्थक जन संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में जु...
भद्रज मंदिर मानो बांज की सरणी से चमकती मणि

भद्रज मंदिर मानो बांज की सरणी से चमकती मणि

ट्रैवलॉग
भद्रज मंदिर: यात्रा वृत्तांतसुनीता भट्ट पैन्यूली जिज्ञासा से था आकुल मन वह मिट्टी, हुई कब तन्मय मैं, विश्वास मांगती थी प्रतिक्षण आधार पा गयी निश्चय मैं! बाधा-विरोध अनुकूल बने अंतर्चेतन अरूणोदय में, पर भूल विहंस मृदु फूल बने मैं विजयी प्रिय,तेरी जय में. -सुमित्रा नंदन पंत जिस चरम पर पहुंचकर आकांक्षाओं की पूर्ति तो हो जाती है, किंतु जिज्ञासायें नये स्वरूप में जन्म लेकर मन को और विस्मित कर देती हैं,ऐसी भावनाओं को शब्दों में कैसे अभिव्यक्त किया जाये ? जब अंतर्मन में  प्रश्न उठते हैं. हम यहां क्यों आये हैं?कौन सी अदृश्य शक्ति हमें यहां खींच लायी है? हम नहीं आते तो क्या उस सर्वशक्तिमान की अनूस्यूत सत्ता को महसूस करने से हम वंचित न रह जाते? क्यों विराजती है यह सर्वोच्चमान शक्ति मानवीय पहुंच से इतनी दूर? शायद धार्मिक यात्राओं के दौरान मानव की इस चित्तवृत्ति  हेतु कि हम कहां जा रहे है...
हिमाचल: करसोग में दिखाए गए विलुप्त होते पुराने अनाजों के बीज और खिलाए गए व्यंजन

हिमाचल: करसोग में दिखाए गए विलुप्त होते पुराने अनाजों के बीज और खिलाए गए व्यंजन

हिमाचल-प्रदेश
करसोग में बनाया जाएगा जैविक कृषि के लिए बाजार बनेगा फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशनहिमांतर, करसोगएक समय था जब हमारे देश में अनाज की कमी हो गई थी. उस समय सरकारों ने अपने देशी बीजों को विकसित करने की बजाए विदेशी हाइब्रिड बीजों को तवज्जो दी गई. इन बीजों से अनाज की कमी तो पूरी हो गई लेकिन इन बीजों के कारण हमारे देश की खेती विदेशी कंपनियों के हाथों का खिलौना बन गई. बाहर से जो बीज आए उनके लिए भरी मात्रा में रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल भी किया गया. अत्यधिक पानी का दोहन किया गया। इसका दुष्परिणाम ये हुआ कि हमारे देश की मिट्टी बर्बाद हो गई, इंसानों में कई किस्म की बीमारियों को बढ़ावा मिला. इन सबके बुरे परिणाम हुए उनको ठीक करने की कोशिश के तहत पर्वतीय टिकाऊ खेती अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश द्वारा पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. महिला मंडलों के साथ मिलकर पुराने अनाजो...
हाथी स्वांग के साथ नौ दिवसीय पांडव मंडाण का समापन

हाथी स्वांग के साथ नौ दिवसीय पांडव मंडाण का समापन

उत्तरकाशी
अंतिम दिवस पर पांडव मंडाण के साथ ही हाथी नृत्य कर किया समापननीरज उत्तराखंडीविकासखण्ड के कमल सिराईं पट्टी के करड़ा गांव में नौ दिवसीय पांडव नवरात्रों का सोमबार सांय को पांडव मंडाण लगाकर हाथी स्वांग के साथ पांडव नवरात्रों का पूजा अर्चना के because साथ समापन किया गया. मंगशीर की दीपावली के दूसरे दिन बलिराज से सुरु हुए पांडव नवरात्रों का सोमबार देर सांय तक चले हाथी स्वांग, पांडव मंडाण व हवन पूजन कर गांव की सुख, समृद्धि की मंगल कामनाओं के साथ समापन किया गया. ज्योतिष बताते चले कि रवांई घाटी के नौगांव व पुरोला विकासखण्ड में मुख्यतः सभी गांवों में थात पूजन के साथ साथ पांडव नवरात्रों की भी एक धार्मिक व अनूठी लोक परम्परा सदियों से चली because आ रही है. क्षेत्र में लगभग सभी गांवों में मुख्यतः पांडव नवरात्रों का आयोजन मंगशीर माह में होने वाली बग्वाल व देवलांग पर्व के बाद बलिराज के दिन से शुर...