
युवा उम्र के छिछोरेपन एवं जीवन संघर्ष का अद्भुत उपन्यास है ‘घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी’
डॉक्टर कुसुम जोशीयुवा लेखक ललित फुलारा का प्रथम उपन्यास ''घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी" पढ़ा, छात्र जीवन की वास्तविकता के साथ- साथ युवा मन की कल्पनाओं के ताने- बाने के साथ बुना गया यह एक ऐसा उपन्यास है जिसमें प्रवाह है और एक सांस में पढ़ने को प्रेरित करता है, भाषा सामान्य बोलचाल और भारतीय पुरुषों के जबान में रची- बसी गालियां जो राह चलते सुनाई पड़ती है, कह सकते हैं कि ये अल्हड़ और युवा उम्र के छिछोरेपन और जीवन संघर्ष का एक अद्भुत उपन्यास है जो पात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि, समय काल, ज्ञान-अज्ञान को प्रतिबिंबित करता है। (Book Review of Ghasi Lal Campus Ka Bhagwadhari)यह उन युवाओं का उपन्यास है जो सूदूर गांवों -कस्बों से जीवन को एक धार देने के लिए चले आते हैं और बहुत सारे काल्पनिक सपनों के साथ रूमानियत के संसार में विचरते हुए जब यथार्थ के धरातल में आकर अपनी क्षमताओं को परखते हैं तब तक ब...









