Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
चोखी ढाणी : राजस्थान की समृद्ध विरासत और रंगीली संस्कृति की झलक

चोखी ढाणी : राजस्थान की समृद्ध विरासत और रंगीली संस्कृति की झलक

ट्रैवलॉग
सुनीता भट्ट पैन्यूली कुछ यात्रायें किसी मनोरंजन व मन के परिवर्तन के लिए नहीं वरन अपनी  संतति के प्रति ज़िम्मेदारियों के वहन हेतु भी होती हैं.इस प्रकार की परिसीमित, निर्धारित व व्यवस्थित  यात्राओं में घुमक्कड़ी की कोई रूपरेखा या because बुनावट नहीं होती है किंतु फिर भी आनन-फानन में समय की तंगी और बोझिलता के बीच भी यदि समय हम पर कृपालु होकर स्वयं हमें सुखद क्षण दे देता है कुछ मनोरंजन के लिए तो और भी सोने पर सुहागा. ज्योतिष यदि समय का अभाव है और किसी एक राज्य से because दूसरे राज्य में विशेष काम से गये हैं तिस पर  वहां की संस्कृति को एक ही दिन में जानने की जिज्ञासा हो तो कतई संभव नहीं है उसका पूर्ण होना. ज्योतिष ख़ैर हमने ऐसी कोई परिकल्पना भी नहीं की थी because क्योंकि हमारी यात्रा औचक थी.क्या किया जाये?अनायास ही उठे हुए कदमों को जाना तो होता है मंज़िल की ओर किंतु कभी-कभी वे ठिठक भी जाते...
अल्मोड़ा अंग्रेज आयो… टैक्सी में

अल्मोड़ा अंग्रेज आयो… टैक्सी में

साहित्‍य-संस्कृति
विनोद उप्रेती ‘वागाबोंड’ अल्मोड़ा में अंग्रेज टैक्सी से आया या घोड़े पर, यह तो काल-यात्रा से ही पता लगेगा लेकिन उसका यहां तक पहुंचना, औपनिवेशिक विस्तार के बहुत बड़े आख्यान का छोटा सा हिस्सा भर है. जब अंग्रेज अल्मोड़ा आ रहा था, तब वह because सातों महाद्वीपों पर कहीं न कहीं और भी जा रहा था. ग्लोब के हर हिस्से में अपनी श्रेष्ठता की गंद मचाता वह कुदरत पर विजय हासिल करने के दंभ में चोटियों पर झंडे गाड़ रहा था, सागरों में नावें तैरा रहा था, और मछलियाँ मार रहा था.  पाताल से हीरे-जवाहरात चुरा रहा था, और जंगली जानवरों की खाल उतार जूते और बेल्ट बना रहा था.ज्योतिष इस ताकतवर लालची की भूख अनंत थी जो आज दुनियाभर के शासकों को संक्रमितकर धरती का नाश कर रही है. लेकिन इस ब्लैकहोल जैसी ताकत के पीछे-पीछे अन्वेषकों की जमातें भी संसार भर में घूमने लगीं. because हालाँकि इन खोजियों में से अधिकतर उसी रोग के मरीज ...
शास्त्र और सुघड़ के बरक्स लोक और अनगढ़

शास्त्र और सुघड़ के बरक्स लोक और अनगढ़

पुस्तक-समीक्षा
प्रकाश उप्रेती ‘उम्मीद’ और ‘सपना’ दोनों शब्द हर दौर में नए अर्थों के साथ because अपनी उपस्थिति साहित्य में दर्ज कराते रहे हैं. वेणु गोपाल की एक कविता है- "न हो कुछ / सिर्फ एक सपना हो/ तो भी हो सकती है/ शुरुआत/ और/ ये शुरुआत ही तो है कि / यहाँ एक सपना है". वेणु यह सपना 20वीं सदी के अंतिम दशक में देख रहे थे. उस दशक को देखें तो वेणु का यह 'सपना' सिर्फ सपना नहीं है बल्कि वही उम्मीद है जो 21वीं सदी के दूसरे दशक में नरेंद्र बंगारी जगाते हैं.ज्योतिष इधर नरेंद्र बंगारी का कविता संग्रह 'कठिन समय में उम्मीद' नाम से प्रकाशित हुआ. 'उम्मीदों' के संग्रह की पहली कविता ही 'काश!' की पीड़ा से आरम्भ होती है. यही समय का अंतर्विरोध भी है.  इस कविता का शीर्षक 'काव्य' है. because यह कविता काव्य के 'शास्त्र' पक्ष की बजाय व्यावहारिक/ लोक पक्ष को उद्घाटित करती है. वैसे भी इस कविता संग्रह का केंद्रीय स्वर भाषा,...
विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रवांई की कई शख्सियतों का सम्मान

विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए रवांई की कई शख्सियतों का सम्मान

उत्तरकाशी
युवा सामाजसेवी रूद्रा because एग्रों स्वायत्त सहकारिता के संस्थापक नरेश नौटियाल की पहल लाई रंग नीरज उत्तराखंडी, देवसारी नौगांवरूद्रा एग्रो स्वायत्त सहकारिता और सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा)  ने  नौगांव ब्लाक के देवसारी गांव में नागरिक अभिनंदन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया. ज्योतिष समारोह में होटल मैनेजमेंट सर्टीफिकेट वितरण, रवांई के पारम्परिक पकवानों because गढ़ भोज की प्रर्दशनी, विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य का निशुल्क परीक्षण दवा वितरण एवं because ई-श्रमिक कार्ड  बनवाने की सुविधा क्षेत्रवासियों को उपलब्ध करवाई गई. होटल मैनेजमैंट कोर्स करने वाले 250 छात्रों को  वितरित किये गये  प्रमाणपत्र. ज्योतिषइन शख्शियतों को किया गयाकृषि के क्षेत्र में उत्कृष्ट because कार्य के लिए - श्रीमती सुनीता राणा एवं श्रीमती प्रमिला राणा . स्वास्थ्य के क्षेत्र मे...
रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं!- रवांई के लोक की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार…

रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं!- रवांई के लोक की अनमोल सांस्कृतिक विरासत से साक्षात्कार…

पुस्तक-समीक्षा
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!शिक्षक, लेखक, कवि, लोकसंस्कृतिकर्मी और लोक से because जुड़े दिनेश रावत नई-नई पुस्तक रवांई के देवालय एवं देवगाथाएं को पढने का सौभाग्य मिला. पांच अध्याय में लिखी गयी इस पुस्तक में आपको रवाई घाटी की अनमोल सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का मौका मिलेगा साथ ही यहाँ की अनूठी परम्पराओं की जानकारी भी मिलेगी जिन्हें आपने आज तक नहीं सुना होगा. तु आया देवा, शांख क सबद, तु आया देवा ढोलू की नाद तु आया देवा, अंग मोड़ी-मोड़ी, तु आया देवा बांगुडी बांदुऊ…ज्योतिष लेखक दिनेश रावत ने देवताओं की स्तुति से ही इस because किताब की शुरुआत की है. लोक के प्रति गहरी समझ और लोक संस्कृति के सच्चे साधक की यही एक निशानी होती है. जिसके बाद किताब के अगले पन्नो में साहित्यकार डॉ प्रयाग जोशी और साहित्यकार व रवांई की पहचान महाबीर रवाल्टा जी द्वारा पुस्तक की उपयोगिता और महत्ता के बारे में ...
विश्व पृथ्वी दिवस: जीना है तो धरती की भी सुनें

विश्व पृथ्वी दिवस: जीना है तो धरती की भी सुनें

पर्यावरण
विश्व पृथ्वी दिवस पर (22 अप्रैल 2022) विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  जाने कब से यह धरती मनुष्यसमेत सभी प्राणियों, जीव - जंतुओं और वनस्पतियों आदि के लिए आधार बन कर जीवन और भरण-पोषण का भार वहन करती चली आ रही है. कभी मनुष्य भी (आज की तरह का) कोई विशिष्ट प्राणी न मान कर अपने को प्रकृति का अंग समझता था. मनुष्य की स्थिति शेष प्रकृति के अवयवों के  एक सहचर  के रूप में थी.  मनुष्य को प्रकृति के रहस्यों ने बड़ा आकृष्ट किया because और अग्नि, वायु, पृथ्वी, शब्द आदि सब में देवत्व की प्रतिष्ठा होने लगी और वे पूज्य और पवित्र माने गए. प्रकृति के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखते हुए उसके प्रति कृतज्ञता का भाव रखा गया . उसके  उपयोग को सीमित और नियंत्रित करते हुए त्यागपूर्वक भोग की नीति अपनाई गई. विराट प्रकृति ईश्वर की उपस्थिति से अनुप्राणित होने के कारण मनुष्य उसके प्रति स्नेह और प्रीति के रिश्तों से अभिभूत ...
अनुराग ठाकुर की सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा देश भर के तमाम सांसदों के लिए प्रेरणा

अनुराग ठाकुर की सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा देश भर के तमाम सांसदों के लिए प्रेरणा

देश—विदेश, समसामयिक
अरविन्द मालगुड़ी देव भूमि हिमाचल जहाँ के सुदूर पहाड़ी इलाकों में बसे तमाम गांवों के लोगों को अक्सर बीमार होने की स्थिति में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था । अस्पताल तक पहुंचने में उन्हें कई तरह की परेशानियां पेश आती थी। इसी सार्थक सोच को मूर्त रूप मिला मई 2018 में जब वर्तमान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में शुरू की गई सांसद मोबाइल स्वास्थ्य सेवा जो आज पूरे हिमाचल के लिए मील का पत्थर बन चुकी है जिसका असल मकसद ग्रामीण इलाकों के मरीजों को अस्पतालों की भीड़ और परेशानी से निजात दिलवा कर घर-द्वार पर स्वास्थ्य लाभ देना है।अनुराग ठाकुर जी के मन में ख्याल आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए कि अस्पताल को ही जरूरतमंदों के घरों तक लाया जाए और हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य की स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने के लिए और दूर-दराज के कोने में मेडिकल सेवा की पहुंच सुनिश्चित करने के ...
30 अप्रैल को दिल्ली में सजेगी उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत की महफ़िल, यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स का होगा आयोजन

30 अप्रैल को दिल्ली में सजेगी उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत की महफ़िल, यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स का होगा आयोजन

कला-रंगमंच
उत्तराखंडी सिनेमा एवं संगीत जगत एवं स्थानीय लोक-कलाकारों के प्रोत्साहन एवं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु दिल्ली में प्रवासियों की संस्था यंग उत्तराखंड द्वारा शुरू की गयी एक सांस्कृतिक पहल जो यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स अथवा युका के नाम से बहुत चर्चित है ....एक बार पुन: अपने १०वें  संस्करण के साथ उत्तराखंडी सिनेमा संगीत जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वालों को सम्मानित करने के लिए आगामी 30 अप्रैल 2022 को दिल्ली के डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन सभागार में यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स 2022 का आयोजन करने जा रही है ....इस अवार्ड शो में वर्ष 2019, 2020 एवं 2021 में उत्तराखंडी सिनेमा संगीत जगत में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलाकारों, व्यक्तियों अथवा संस्थानों को 8 श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। यंग उत्तराखंड संस्था 2010 से यह आयोजन करती आ रही है। पिछले 2 सालों में कोरोना वैश्विक महामारी के का...
विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

देहरादून
अर्जुन सिंह रावत विरासत किसके लिए. कहते हैं संगीत की because कोई सीमा कोई दायरा नहीं होता लेकिन लोक को जीवित रखने के लिए उसे बताना भी जरूरी है और नई पीढ़ी से मिलाना भी. सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन कहकर प्रचारित किए जा रहे विरासत में देवभूमि की विरासत नदारद है. आयोजकों ने इसे महज रस्म अदायगी तक सीमित कर दिया है.ज्योतिष उत्तराखंड के देहरादून में बड़े जोर-शोर से विरासत का आयोजन किया जा रहा है. ओएनजीसी जैसे बड़े-बड़े प्रायोजक भी हैं और संगीत जगत के कई धुरंधर भी. कबीर की वाणी भी मिलेगी, because सूफी कलाम भी मिलेगा, क्लासिकल डांस फॉर्म भी मिलेंगे, लेकिन नहीं है तो उत्तराखंड का लोकस्वर. उत्तराखंड के वाद्ययंत्र और जागर जैसी देव विधा की प्रस्तुति.ज्योतिष कितनी हैरानी है न, जिस ढोल सागर, जागर को सम्मान देते हुए प्रीतम भरतवाण जी, बसंती देवी जी जैसे लोक साधकों को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया ...
स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

बागेश्‍वर, लोक पर्व-त्योहार
स्याल्दे बिखौती मेला : 13-14-15 अप्रैल पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीसांस्कृतिक नगरी द्वाराहाट (Dwarahat) में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला स्याल्दे-बिखौती (Syalde Bikhauti Mela) का ऐतिहासिक मेला पिछले दो वर्षों से कोरोना (Corona Virus) प्रकोप के चलते प्रतीकात्मक रूप से ही मनाया जा रहा था. किन्तु इस वर्ष मेला समिति के निर्णयानुसार मेला विशेष धूम धाम से मनाया because जा रहा है. मेला समिति व नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश साह द्वारा ग्राम प्रतिनिधियों की बैठक में की गई घोषणा के अनुसार लगभग 64 वर्ष पूर्व मेले से अलग हुए ईड़ा, जमीनी वार व पार ग्राम पंचायतें पुन: इस वर्ष स्याल्दे मेले का हिस्सा बनने जा रही हैं. परम्परागत मान्यता के अनुसार इस वर्ष चैत्र मास की अन्तिम रात्रि ‘विषुवत्’ संक्रान्ति 13 अप्रैल को द्वाराहाट से 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित विभाण्डेश्वर महादेव में सारी रात बिखौती का मेला लगेगा...