Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

विरासत से पहाड़ की विरासत गायब!

देहरादून
अर्जुन सिंह रावत विरासत किसके लिए. कहते हैं संगीत की because कोई सीमा कोई दायरा नहीं होता लेकिन लोक को जीवित रखने के लिए उसे बताना भी जरूरी है और नई पीढ़ी से मिलाना भी. सबसे बड़ा सांस्कृतिक आयोजन कहकर प्रचारित किए जा रहे विरासत में देवभूमि की विरासत नदारद है. आयोजकों ने इसे महज रस्म अदायगी तक सीमित कर दिया है.ज्योतिष उत्तराखंड के देहरादून में बड़े जोर-शोर से विरासत का आयोजन किया जा रहा है. ओएनजीसी जैसे बड़े-बड़े प्रायोजक भी हैं और संगीत जगत के कई धुरंधर भी. कबीर की वाणी भी मिलेगी, because सूफी कलाम भी मिलेगा, क्लासिकल डांस फॉर्म भी मिलेंगे, लेकिन नहीं है तो उत्तराखंड का लोकस्वर. उत्तराखंड के वाद्ययंत्र और जागर जैसी देव विधा की प्रस्तुति.ज्योतिष कितनी हैरानी है न, जिस ढोल सागर, जागर को सम्मान देते हुए प्रीतम भरतवाण जी, बसंती देवी जी जैसे लोक साधकों को पद्मश्री सम्मान प्रदान किया ...
स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

स्याल्दे बिखौती : कत्युरीकाल की  सांस्कृतिक विरासत का मेला

बागेश्‍वर, लोक पर्व-त्योहार
स्याल्दे बिखौती मेला : 13-14-15 अप्रैल पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीसांस्कृतिक नगरी द्वाराहाट (Dwarahat) में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला स्याल्दे-बिखौती (Syalde Bikhauti Mela) का ऐतिहासिक मेला पिछले दो वर्षों से कोरोना (Corona Virus) प्रकोप के चलते प्रतीकात्मक रूप से ही मनाया जा रहा था. किन्तु इस वर्ष मेला समिति के निर्णयानुसार मेला विशेष धूम धाम से मनाया because जा रहा है. मेला समिति व नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश साह द्वारा ग्राम प्रतिनिधियों की बैठक में की गई घोषणा के अनुसार लगभग 64 वर्ष पूर्व मेले से अलग हुए ईड़ा, जमीनी वार व पार ग्राम पंचायतें पुन: इस वर्ष स्याल्दे मेले का हिस्सा बनने जा रही हैं. परम्परागत मान्यता के अनुसार इस वर्ष चैत्र मास की अन्तिम रात्रि ‘विषुवत्’ संक्रान्ति 13 अप्रैल को द्वाराहाट से 8 कि.मी. की दूरी पर स्थित विभाण्डेश्वर महादेव में सारी रात बिखौती का मेला लगेगा...
देवलांग से रू-ब-रू करवाता दिनेश रावत द्वारा लिखित एक तथ्यात्मक गीत

देवलांग से रू-ब-रू करवाता दिनेश रावत द्वारा लिखित एक तथ्यात्मक गीत

सोशल-मीडिया, साहित्‍य-संस्कृति
पूर्णता एवं तथ्यात्मकता के साथ देवलांग की विशेषताओं से परिचय करवाता दिनेश रावत का यह गीतशशि मोहन रवांल्टा सीमांत जनपद उपर साहित्यकार दिनेश रावत द्वारा लिखित गीत अब तक का सबसे पूर्णता एवं तथ्यात्मकता गीत है. रवांई घाटी के सुप्रसिद्ध देवलांग उत्सव की विशेषताओं को दर्शाता यह गीत रामनवमी के अवसर पर लॉन्च किया गया. because गीत साहित्यकार दिनेश रावत ने लिखा, जिसे रवांई घाटी सुप्रसिद्ध गायिका रेश्मा शाह ने आवाज दी और राजीव नेगी ने संगीतबद्ध किया है. गाने को इस तरह से पिरोया गया है कि उसमें देवलांग के आयोजन को आसानी से समझा जा सकता है. देवलांग पर लिखे गए इस गीत को हारूल शैली में गाया व संगीतबद्ध किया गया है.हरताली गीत में देवलांग की तैयारियों से लेकर देवलांग के खड़े होने और वहां से आखिर ओल्ला को मड़केश्वर महादेव तक ले जाने की पूरी जानकारी दी गई है. देवलांग के आयोजन में एक—एक गाँव की हिस्से...
ऐश्वर्य और सहज आत्मीयता की अभिव्यक्ति श्रीराम

ऐश्वर्य और सहज आत्मीयता की अभिव्यक्ति श्रीराम

साहित्‍य-संस्कृति
राम नवमी पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  सनातनी यानी सतत वर्त्तमान की अखंड अनुभूति के लिए तत्पर मानस वाला भारतवर्ष का समाज देश-काल में स्थापित और सद्यः अनुभव में ग्राह्य सगुण प्रत्यक्ष को परोक्ष वाले व्यापक और सर्व-समावेशी आध्यात्म से जुड़ने का माध्यम because बनाता है. वैदिक चिंतन से ही व्यक्त और अव्यक्त के बीच का रिश्ता स्वीकार किया गया है और देवता और मनुष्य परस्पर भावित करते हुए श्रेय अर्थात कल्याण की प्राप्ति करते हैं (परस्परं भावयन्त: श्रेय: परमवाप्स्यथ - गीता). इस तरह यहाँ का आम आदमी लोक और लोकोत्तर (भौतिक और पारलौकिक) दोनों को निकट देख पाता है और उनके बीच की आवाजाही उसे अतार्किक नहीं लगती. सृष्टि चक्र और जीवन में भी यह क्रम बना हुआ है यद्यपि सामान्यत: उधर हमारा ध्यान नहीं जाता.ज्योतिष उदाहरण के लिए सभी प्राणी अन्न से उत्पन्न और जीवित हैं, अन्न वर्षा से उत्पन्न होता है. वर्षा ...
हिमालयीय वनस्पति ‘र् वेंण’ सुहागिनों की सिंदूर-फली

हिमालयीय वनस्पति ‘र् वेंण’ सुहागिनों की सिंदूर-फली

देहरादून
डा. मोहन चंद तिवारीसंस्कृत- 'कम्पिल्लक'  हिंदी- 'कमीला',  Mallotus philippensis लगभग आठ वर्ष पूर्व जम्मू-कश्मीर हिमालय में मां वैष्णो देवी के दर्शन करने के दौरान शिवखोड़ी की लगभग 4 कि.मी.की पैदल यात्रा करने का अवसर मिला तो वहां जंगलनुमा रास्ते में कम्पिल्लक के वृक्षों में लटकते 'कमीला' के because सिन्दूरी फलों को देखकर अपने गांव जोयूं, उत्तराखंड की वह याद ताजा हो आई जब मैं बचपन में अपने चाचा जी के साथ 'र् वेंण' के वृक्षों में लगे फलों से लाल रंग का पराग टटकाया करता था. चाचा जी ने बताया था कि इस फल के लाल पराग को माथे पर तिलक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पुराने जमाने में इसी रोली से स्त्रियां अपने सुहाग का सिन्दूर भरती थी.हमारे पाली पछाऊं में इसे 'र् वेंण' का फल कहा जाता है. हरताली शिव खोड़ी के मार्ग में पड़ने वाले मन्दिर मैं ठहरे एक साधु महात्मा ने यह बताकर मेरी जिज्ञासा को और ...
देश और आपके भविष्य के लिए कैसा रहेगा विक्रम संवत 2079

देश और आपके भविष्य के लिए कैसा रहेगा विक्रम संवत 2079

साप्ताहिक राशिफल
कैसा रहेगा नव संवत्सर बता रहे हैं आचार्य यमुना पुत्र सुरेश उनियाल दो अप्रैल से हिंदू नव वर्ष का आरंभ होने जा रहा है. संवत्सर 2079 के राजा शनि और मंत्री बृहस्पति होंगे. समय का वास माली के घर रहेगा. इसके इस वर्ष पर्याप्त वर्षा के संकेत हैं. संवत 2079 का नाम नल है. because नल नामक संवत्सर का फलादेश शास्त्रों में इस प्रकार कहा गया है- 'नलाब्दे मध्य सस्यार्घ वृष्टिभि:प्रवराधरा।। नृपसंक्षोभ संजाता भूरि तस्करभीतय:.’ अर्थात नल संवत्सर में अन्न आदि का उत्पादन मध्यम रहेगा. वर्षा पर्याप्त होगी. वर्षा से पृथ्वी शस्य श्यामला बनेगी, किंतु नेताओं में परस्पर वैमनस्य बढ़ेगा. असामाजिक तत्व अव्यवस्था फैलाने में लगे रहेंगे.ज्योतिष संवत 2079 के राजा शनि होने के साथ-साथ धन,फसल और जल के महत्वपूर्ण पद भी रहेंगे. यह अपनी मर्जी से काम करेंगे. अति वर्षा, आंधी, तूफान और भूकंप के यदा-कदा योग बनेंगे एवं प्रत्येक ...
सुखादेवी: शुकवती का उद्गम व सरस्वती का संगम स्थल

सुखादेवी: शुकवती का उद्गम व सरस्वती का संगम स्थल

धर्मस्थल
कुमाऊं क्षेत्र के उपेक्षित मन्दिर - 4 डॉ. मोहन चंद तिवारीद्वाराहाट में गर्ग आश्रम से निकलने वाली गार्गी नदी गगास के पौराणिक इतिहास के बारे में तो सब जानते हैं किंतु 'सुखादेवी' (Sukhadevi) आश्रम से निकलने वाली इस नदी की बड़ी बहिन गुमनाम 'शुकवती' के बारे में कोई नहीं जानता. आजकल महावतार बाबा की गुफा दिखाने वाली टूरिस्ट संस्थाओं द्वारा भी विदेशी टूरिस्टों को आकर्षित करने के लिए पुराण प्रसिद्ध 'शुकवती' because नदी के उद्भव स्थान 'सुखादेवी' को 'स्वेता देवी' का एक नया नाम देकर  द्रोणगिरि क्षेत्र और इस देवी स्थल को शुकदेव मुनि की तपःस्थली बताकर द्रोणगिरि और गगास घाटी की समूची नदी परम्परा और उसके निकट बसे ऐतिहासिक शैव मंदिरों के इतिहास की भी विकृत व्याख्या की जा रही है.जिस सरस्वती नदी की वेदों में श्रेष्ठतम माता, श्रेष्ठतम नदी और श्रेष्ठतम देवी के रूप में स्तुतिगान हुआ है,उसे 'स्वेता देवी...
बॉलीवुड कलाकारों के साथ ‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का समापन

बॉलीवुड कलाकारों के साथ ‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का समापन

देश—विदेश
फिल्मी झलक पत्रिका के संपादक राजाराम सिंह ने सभी का जताया आभारहिमांतर ब्यूरो, मंबईफिल्मी झलक पत्रिका के बैनर तले आज मुंबई के अंधेरी स्थित ऑडिटोरियम में ‘‘इंडियाज स्टार टैलेंट अवार्ड एवं प्रेस मीडिया अवार्ड-2022’’ का आयोजन किया गया, इस शानदार अवॉर्ड शो में बॉलीवुड की गई हस्तियों ने हिस्सा लिया. इस अवसर पर बॉलीवुड के जानेमाने कलाकारो ने शिरकत की जिनमें मुख्यरूप से रमेश गोयल, टार्जन फेम हेमंत बिरजे, गीतकार सुधाकर शर्मा, तुश्री मुखर्जी, योगेश खोखर व कई अन्य लोग उपस्थित होकर सभी ने शो का आनंद लिया. इस आवार्ड समारोह की यह खास बात यह रही कि इसमें बॉलीवुड जगत के कई बड़े कलाकारों के साथ युवा कलाकारों को एक मंच प्रदान किया गया. इसके अलावा सामाजिक जीवन में समाज सेवा करने वाले समाजसेवियों को भी आवार्ड देकर सम्मानित किया गया.फिल्मी झलक पत्रिका के संपादक राजाराम सिंह पिछले दो दशक से मुंबई म...
सवाल गर्व का नहीं शर्म का है…

सवाल गर्व का नहीं शर्म का है…

देश—विदेश
प्रकाश उप्रेती(पहाड़ ने दौड़ाया, पहाड़ दौड़ा, पहाड़ ने देखा और पहाड़ ने गर्व किया) पिछले दो दिनों से पहाड़ ट्विटर से लेकर because फेसबुक और खबरों में छाया हुआ है। पहाड़ का एक लड़का नोएडा की सड़कों पर दौड़ रहा है और हमारा समाज गर्व कर रहा है. कितने गर्व की बात है न कि पहाड़ ने दौड़ाया, पहाड़  दौड़ा, पहाड़ ने देखा और पहाड़ ने गर्व किया। दो दिनों से हमारा समाज उस लड़के की लगन, परिश्रम, ज़ज्बे, साहस, पर बिना आईना देखे गर्व से भर गया है.ज्योतिष बड़े-बड़े संस्थानों में बैठे मठाधीशो, because नेताओं के साथ गलबहियां करने वाले पहाड़ के गर्बिले लोगो, अगर तुम्हारे काँच के मकानों में कहीं आईना हो तो because उसके सामने खड़े होकर अपना चेहरा देखते हुए सोचना कि अल्मोड़ा का वह लड़का सेना में भर्ती होने के लिए सुबह 8 बजे से रात के 11 बजे तक यानी 15 घण्टे मैक्डोनाल्ड में काम करने के बाद 10 किलोमीटर नोएडा की कोल्तार की सड़कों...
कश्मीर फाइल्स को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताने वाले नफ़रत का बीज बोने वाले हैं

कश्मीर फाइल्स को ‘मुस्लिम विरोधी’ बताने वाले नफ़रत का बीज बोने वाले हैं

सोशल-मीडिया
Kashmir Files Film: फिल्म कश्मीर फाइल्स को 'मु्स्लिम विरोधी' बताने वाले असल में नफ़रत के बीच बोने वाले हैं. जबकि इस नरसंहार के चश्मदीद मुस्लिम भी यह मानते हैं कि वह अपने कश्मीरी पंडित भाइयों को बचाने में नाकाम रहे थे. घाटी के मुस्लिम परिवारों ने भी इस फिल्म के आने के बाद कश्मीरी पंडितों से माफी मांगी है. मुस्लिमों का भी कहना है कि इस फिल्म में जो दिखाया गया है, वो हकीकत है जिसे छिपाया जा सकता है, झुठलाया नहीं जा सकता. यकीन नहीं हो रहा तो इस नरसंहार के चश्मदीद जावेद वेग का कहा पढ़ लीजिए. उन्होंने तो साफ कहा है कि यह फिल्म दु्ष्प्रचार नहीं, बल्कि हकीकत है.अब दूसरी तरफ आप वामपंथी और कांग्रेस गठजोड़ वाले दरबारी कुबुद्धीजीवियों को देखिये जो पहले इसके तथ्यों को गलत बता रहे थे और बाद में जब कुछ हाथ नहीं लगा तो इस डॉक्योड्रामा को 'मु्स्लिम विरोधी' बताकर अपना एजेंडा भुनाने में लगे हैं.क्या ...