Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
जोशीमठ भू-धंसाव : इस स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार?

जोशीमठ भू-धंसाव : इस स्थिति के लिए आखिर कौन जिम्मेदार?

चमोली
जोशीमठ में भू-धंसान की त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा घोषित की जाए!डॉ. मोहन चंद तिवारीधार्मिक,पौराणिक एवं ऐतिहासिक नगर जोशीमठ भू-धंसाव के कारण इस साल की सबसे बड़ी त्रासदी झेल रहा है. उत्तराखंड के जोशीमठ शहर में भू-धसाव की त्रासदी को लेकर हर तरफ चिंता है. जोशीमठ के डीएम ने बताया है कि नगर में कुल 561 भवनों में दरार आई है. साथ ही दो बहुमंजिला होटलों के खतरे की जद में आए पांच भवन खाली कराए गए हैं. उत्तराखंड डिजास्टर एंड एक्सीडेंट सिनोप्सिस (उदास) की रिपोर्ट के अनुसार, भी जोशीमठ में 500 घर रहने के लायक नहीं हैं. जोशी मठ की ग्राउंड जीरो से मिली मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कहा जा सकता है कि जोशीमठ में भू-धंसाव किसी बड़ी अनहोनी की ओर इशारा कर रहा है. इस ऐतिहासिक शहर में पड़ी दरारें, इस बात की गवाह हैं कि हालात ठीक नहीं. वहीं प्रशासन के राहत बचाव कार्य संतोष जनक नहीं हैं, जिससे प्रभावितों को ...
बचपन से देखी गरीबी, जंगल ने पेंटिंग सिखाई और बुरांश ने रंग भरना

बचपन से देखी गरीबी, जंगल ने पेंटिंग सिखाई और बुरांश ने रंग भरना

अभिनव पहल
पहाड़ की बेटियां — एकHimantar Web Deskनव वर्ष पर ‘हिमांतर पत्रिका एवं वेबसाइट’ की विशेष सीरीज़’ ‘पहाड़ की बेटियां’ में हम आपको 24 साल की एक ऐसी प्रतिभावान लड़की की कहानी बता रहे हैं, जो निम्न मध्यवर्गीय परिवार में पैदा हुई और बचपन से ही पहाड़ का संघर्ष देखा एवं उसे अभी भी जी रही है. पर कला के प्रति पूरी तरह से समर्पित है, because और उत्तराखंड की लोक कला ऐपण को देशभर के दूसरे राज्यों की लोक कलाओं के साथ जोड़कर सुंदर कलाकृतियां बना रही है. जिन्हें कला प्रेमी खूब पसंद कर रहे हैं. अभिनय का शौक है. कई कार्यक्रमों के लिए शूट कर चुकी हैं. इस लड़की का नाम है हिमानी कबडवाल.जलविज्ञान बचपन में जंगल की मिट्टी में उकेरती थी कलाकृतियां हिमानी कबडवाल कहती हैं कि उन्हें कलाकार because प्रकृति ने बनाया. जंगल ने पेंटिंग सीखाई. बुरांश ने रंग भरना और चीड़ के पेड़ से लीसा निकालने वाली तकनीक ने ...
नए वर्ष की चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

नए वर्ष की चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ

साहित्‍य-संस्कृति
प्रो. गिरीश्वर मिश्र  जब हम भारत और उसके कोटि-कोटि जनों के लिए सोचते हैं तो मन में भारत भूमि पर हज़ारों वर्षों की आर्य सभ्यता और संस्कृति की बहु आयामी यात्रा कौंध उठती है. विभिन्न सांस्कृतिक प्रभावों के संघात के बीच ज्ञान, विज्ञान, कला, साहित्य का अविरल प्रवाह राष्ट्रीय गौरव का बोध कराता है. साथ ही भारत का भाव हमें उस दाय को सँभालने के लिए भी प्रेरित करता है जिसके हम वारिस हैं. निकट अतीत का स्वाधीनता संग्राम देशवासियों को राष्ट्र को आगे ले जाने के दायित्व का भी स्मरण कराता है. स्वाधीनता आश्वस्त करती है पर हमारे आचरण को आयोजित करने के लिए कर्तव्य-मार्ग का निर्देश भी देती है ताकि वह सुरक्षित बनी रहे. इस तरह अतीत कभी व्यतीत नहीं होता बल्कि हमको रचता रहता है. आज भारत विकास के मार्ग पर एक यात्रा पर अग्रसर है. भारत के लिए अगले साल में क्या कुछ होने वाला है इस सवाल पर विचार इससे बात से भी जुड़ा...
अपना-अपना नया साल…

अपना-अपना नया साल…

संस्मरण
सुनीता भट्ट पैन्यूली कल नये साल का पहला दिन है। हे ईश्वर ! विश्व के समस्त प्राणियों ,मेरे घर-परिवार में, नये साल में जीवन के शुभ गान और स्फूरित राग हों,इसी अन्तर्मन से बहती हुई प्रार्थना में हिलोरें मारती हुई मैं अपनी दैनंदिन क्रिया के अहम हिस्से का निर्वाह करने, अपने ओसारे में आ गयी, जैसे ही तुलसी के चौबारे में दिया जलाया,तभी दिवार की उस तरफ से आवाज़ आई। कैसी हो बेटी? मैं सुबह से देख रहा था तुम्हें, तुम आज दिखाई नहीं दी। मैंने दीये की पीत वर्ण और बिछुड़ते हुए सूरज की रक्ताभ मिश्रित नारंगी लौ में ताऊजी को देखा। ताऊजी प्रणाम, मैं ठीक हूं आप कैसे हैं ? हां!आज थोड़ी सी व्यस्त थी मैं। कल नया साल का पहला दिन है ना? सोचा आज ही गाजर का हलुआ बनाकर रख लूं कल के लिए..वही सब गाजर को घिसकर उसे दूध में उबाल रही थी। अच्छा! नये साल के स्वागत की तैयारी चल रही है.. मैंने भी तो मनाना था बेटी नया...
उत्तराखंड के गांधी: जब मैनें उन्हें पहली बार उदास, हताश और निराश देखा! 

उत्तराखंड के गांधी: जब मैनें उन्हें पहली बार उदास, हताश और निराश देखा! 

टिहरी गढ़वाल
सूर्य प्रकाश सेमवाल पहाड़ के गाँधी कहलाने वाले हिमालय गौरव स्व. इन्द्रमणि बडोनी अपने विराट एवं उदात्त  व्यक्तित्व तथा सादगी व सहज व्यवहार के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए ही नहीं वरन् सामान्य जनमानस के लिए भी सदैव प्ररणाप्रद एवं वदनीय बने रहेंगे. अपने अनुकरणीय आचरण एवं निश्च्छल कार्यशैली के बल पर जहां उन्होंने दलगत व क्षेत्रीय भावना से ऊपर होकर समूचे पहाड़ी क्षेत्र में अपनी एक विशेष पहचान व साख बनाई थी वहीं संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, पर्यटन और सामाजिक जागरण से जुड़े अन्य विविध क्षेत्रों में क्रांतिकारी पहल की. बडोनी जी चीन के तिब्बत बॉर्डर से सटे अंतिम सीमांत गाँव गंगी से लेकर पूरे टिहरी गढ़वाल, पर्वतीय क्षेत्र, लखनऊ और दिल्ली तक भी सभी  लोगों के बीच आदरणीय बने रहे. पृथक उत्तराखंड आंदोलन के पुरोधा व उत्तराखंड क्रांति दल के संस्थापकों में से एक जनता के लोकप्रिय प्रतिनिधि बडोनी जी...
रैबार—2022: उत्तराखंड का देश की सुरक्षा में अहम योगदान: सीडीएस जनरल अनिल चौहान

रैबार—2022: उत्तराखंड का देश की सुरक्षा में अहम योगदान: सीडीएस जनरल अनिल चौहान

देश—विदेश
हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीतीन बार ‘रैबार’ उत्तराखंड में करने के बाद इस बार ‘रैबार’ का आयोजन दिल्ली एनसीआर में बसे उत्तराखंडियों के बीच किया गया. 17 दिसंबर 2022 को दिल्ली में हो रहे ‘रैबार’ संवाद कार्यक्रम की थीम - विजन ऑफ न्यू उत्तराखंड 2030’ है. इस थीम के साथ हम उत्तराखंड राज्य की भविष्य की योजनाओं और सपनों को सरकार करने लिए प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों के प्रबुद्ध लोगों के माध्यम से समझेंगे. इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर तराई के मैदानों तक की समझ रखने वाले रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, उत्तराखंड को लेकर विकास की एक नई सोच के प्रतीक राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और चीफ ऑफ डिफेंस जनरल अनिल चौहान, उत्तराखंड सराकर में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, डीजी इंडियन स्पेस एसोसिएशन लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट और प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी की गरिमामयी उपस्थिति में इस ’विजन फ़ॉर न्यू ...
पहाड़ और स्वयं के भीतरी तापमान को समझने में नाकाम रही बीजेपी

पहाड़ और स्वयं के भीतरी तापमान को समझने में नाकाम रही बीजेपी

हिमाचल-प्रदेश
प्रकाश उप्रेती पहाड़ों में गिरते तापमान के बीच चुनाव परिणामों ने हिमाचल के मौसम में गर्माहट पैदा कर दी है. इस बार के चुनाव परिणामों ने नब्बे के दशक से चले आ रहे पैटर्न को दोहराते हुए भी कई बड़े संकेत दिए हैं. इन संकेतों को “पाँच साल कांग्रेस और फिर पाँच साल बीजेपी” वाले फार्मूले से हटकर देखने की जरूरत हैं क्योंकि एक तरफ जहां बीजेपी राष्ट्रीय मुद्दों और चेहरों के साथ राज्य-दर-राज्य जीत रही है वहीं कांग्रेस लगातार कमजोर हो रही है. साथ ही इधर के कुछ वर्षों में बीजेपी ने जिस तरह से चुनाव लड़े हैं उसे देखकर भी इन परिणामों को सिर्फ पैटर्न के तौर पर नहीं देखा जा सकता है. बीजेपी निकाय से लेकर लोकसभा तक के चुनावों को पूरी ताकत से लड़ती है. हिमाचल में तो पाँच साल उसकी सरकार रही है और केंद्र में अनुराग ठाकुर जैसे बड़े कद के मंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसी प्रदेश से आते हैं. ऐसे में हिमाचल में बीजेपी क...
बेटियों की सुरक्षा के लिए माता-पिता का उनसे संवाद जरूरी : श्री कृपाशंकर

बेटियों की सुरक्षा के लिए माता-पिता का उनसे संवाद जरूरी : श्री कृपाशंकर

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हिमांतर ब्यूरो,  नोएडाइस देश के अंदर आज भी सब लोग कानूनों के विषय में नहीं जानते,सिस्टम ऐसा बना है कि एक गरीब व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट तक नहीं जा पाता. हमारे यहाँ सनातन काल से नारी शक्ति स्वरूपा रही है,अबला नहीं शक्तिशाली रही है ,बेशक कुरीतियों के चलते महिलाओं के लिए कुछ सुरक्षा मानक बनाए गए थे. आज भी हमारी बेटियाँ एसपी बनकर असम के जंगलों में आतंकियों का खात्मा करने का साहस दिखा रही हैं,डॉक्टर,वकील,वैज्ञानिक और आदर्श शिक्षक की भूमिका निभा रही हैं,लेकिन आज बेटियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि माता-पिता एकांगी न बनकर घर की बेटी के साथ बैठकर संवाद करें . ये विचार पर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस के अवसर नोएडा के प्रेरणा भवन में आयोजित शक्तिपर्व संकल्प विचार गोष्ठी एवं हिमालयी मातृशक्ति सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचार प्रम...
कण्वाश्रम : हमारी वैदिक परंपराओं और संस्कृतियों की जन्म-स्थली!

कण्वाश्रम : हमारी वैदिक परंपराओं और संस्कृतियों की जन्म-स्थली!

साहित्‍य-संस्कृति
सुनीता भट्ट पैन्यूली "हिमालय के दक्षिण में, समुद्र के उत्तर में, भारत वर्ष है जहां भारत के वंशज रहते हैं" संभवतः मैं उसी जगह पर खड़ी हूं जहां हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत तथा शकुंतला के गंधर्व विवाह के पश्चात भरत का जन्म हुआ. कालांतर में शकुंतला के इसी पुत्र भरत अर्थात चक्रवर्ती राजा भरत के नाम पर  हमारे देश का नाम भारत पड़ा. मैं कण्वाश्रम में विचरते हुए सुखद कल्पना कर रही हूं कि कितना रमणीय व मंत्रमुग्धकारी होता होगा वह पुरातन समय? है ना? जहां वेद ऋचाओं की स्वर लहरियों से गुंजायमान विशुद्ध वातावरण,पवित्र होम की धूम का सघन वन में विचरण एवं विद्यार्थियों द्वारा अनेक क्रियाकलापों से गुम्फित गुरूकुल जहां भविष्य के लिए संस्कृतियों एवं सभ्यताओं के उपार्जन हेतु ज्ञान-विज्ञान, खोज, अविष्कार, उपचार, सिद्धांतों की बुनियाद खोदी जाती रही होगी. मेरे मन की ज़मीन पर वह परिदृश्य भी उछाल मार रहा है कि प्...
सलेकचंद जैन स्मृति सम्मान से होंगे सम्मानित युवा कवि-पत्रकार जगमोहन ‘आज़ाद’

सलेकचंद जैन स्मृति सम्मान से होंगे सम्मानित युवा कवि-पत्रकार जगमोहन ‘आज़ाद’

दिल्ली-एनसीआर
वियतनाम में आयोजित होने वाले 20वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन में प्रतिभाग करेंगेहिमांतर वेबडेस्क, नई दिल्लीदक्षिणपूर्व एशिया के खूबसूरत देश वियतनाम (हनोई,हो ची मीन्ह) में इस वर्ष 13 से 23 दिसंबर तक 10 दिवसीय 20वां अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है. वियतनाम में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में भारत से लगभग चालीस ख्यातनाम साहित्यकारों,बुद्धिजीवी और समाज से जुड़े विभिन्न प्रबुद्धजनों का दल सहभागिता कर रहा है. इस सम्मेलन में 14 लेखकों की विभिन्न विधाओं में प्रकाशित कृतियों का विमोचन किया जाएगा. साथ ही जनतंत्र का भविष्य, सांस्कृतिका, कथा,व्यंग्य, लघुकथा, कविता पर संगोष्ठी एवं राज्यवार गीत-नृत्य-संगीत की प्रस्तुति का आयोजन भी होगा. वियतनाम में आयोजित होने वाले 20वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन में उत्तराखंड से वरिष्ठ लेखक डॉ.हरिसुमन बिष्ट,डॉ.पुष्पा जोशी और युवा कवि-...