Tag: स्वतंत्रता दिवस

आजादी के 80 वर्ष: भारत की स्वतंत्रता, स्वराज और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की चुनौती

आजादी के 80 वर्ष: भारत की स्वतंत्रता, स्वराज और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति की चुनौती

लोक पर्व-त्योहार
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2026)  पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा     स्वतंत्रता निश्चय ही सभ्य मानव समाज का सर्वोत्तम आविष्कार है जो मनुष्य को अपने चुने हुए लक्ष्यों को पाने के लिए सामर्थ्यसंपन्न बनाती है। आज विकास, प्रगति और उन्नति के मार्ग पर चलने के लिए स्वतंत्रता को सबसे ताकतवर हथियार माना जाता है। स्वतंत्रता समर्थ बनाती है यही सोच कर पराधीनताओं की बेड़ियों को तोड़ने के लिए विश्व में अनेक संग्राम होते आ रहे हैं। अभी भी म्यांमार जैसे कई देशों में तानाशाही के ख़िलाफ़ बेचैनी है और उसके आतंक का प्रतिरोध जारी है। वस्तुतः प्राणिमात्र उस नैसर्गिक परिस्थिति में ही जीना चाहता है जिसमें मुक्त हो कर अपनी शर्तों पर जिया जा सके। परतंत्र होने पर गोस्वामी तुलसीदास के शब्दों में सपने भी सुख नसीब नहीं होता: पराधीन सप...
स्वतंत्रता दिवस पर रैबासी फाउंडेशन की पहल, धारकोट के बच्चों को बांटी स्टेशनरी और मिठाई

स्वतंत्रता दिवस पर रैबासी फाउंडेशन की पहल, धारकोट के बच्चों को बांटी स्टेशनरी और मिठाई

पौड़ी गढ़वाल
  यमकेश्वर (उत्तराखंड)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रैबासी फाउंडेशन ने “हर घर तिरंगा” अभियान के तहत ग्राम धारकोट में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान गांव के प्राथमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के साथ स्वतंत्रता दिवस की खुशियां साझा की गईं और उन्हें स्टेशनरी सामग्री व मिठाई वितरित की गई।कार्यक्रम के दौरान बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के साथ ही राष्ट्रध्वज के सम्मान, देशप्रेम और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया गया। फाउंडेशन के सदस्यों ने बच्चों को “हर घर तिरंगा” अभियान का महत्व बताया और स्वतंत्रता दिवस के संदेश से अवगत कराया। स्टेशनरी और मिठाई मिलने से बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला।रैबासी फाउंडेशन के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य बच्चों को आवश्यक शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना तथा शिक्षा, संस्कार और राष्ट्...
स्वतंत्रता दिवस पर SP कमलेश उपाध्याय सहित उत्तरकाशी पुलिस के तीन अधिकारी-कर्मी होंगे सम्मानित

स्वतंत्रता दिवस पर SP कमलेश उपाध्याय सहित उत्तरकाशी पुलिस के तीन अधिकारी-कर्मी होंगे सम्मानित

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो,  उत्तरकाशीस्वतंत्रता दिवस-2026 के अवसर पर उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा कर्तव्यनिष्ठा, उत्कृष्ट सेवा, विशिष्ट कार्य एवं सराहनीय योगदान के लिए उत्तरकाशी पुलिस के तीन अधिकारी एवं कर्मियों को “पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति डिस्क” से सम्मानित किया जाएगा।पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती कमलेश उपाध्याय को विशिष्ट कार्य के लिए “पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति डिस्क-गोल्ड” प्रदान किया जाएगा। वहीं मुख्य आरक्षी श्रीमती बीना चौधरी को सेवा के आधार पर तथा आरक्षी श्री लायवर सिंह को विशिष्ट कार्य के लिए “पुलिस महानिदेशक प्रशस्ति डिस्क-सिल्वर” से सम्मानित किया जाएगा।इन सम्मान को उत्तरकाशी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पुलिस विभाग के अनुसार यह सम्मान पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय के कुशल नेतृत्व, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण एवं उत्कृष्ट कार्यशैली तथा सम्मानित...
भविष्य का भारत: स्वायत्त और स्वावलंबी!

भविष्य का भारत: स्वायत्त और स्वावलंबी!

लोक पर्व-त्योहार
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2025) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र, शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति पराधीन सपनेहु सुख नाहीं! अपनी अमूल्य कृति “रामचरितमानस “में गोस्वामी तुलसीदास जी की यह उक्ति प्राणि मात्र के जीवन की एक प्रमुख सच्चाई को दर्शाती है कि दूसरे के अधीन रहने वाले को सपने में भी सुख नसीब नहीं होता. पराधीन रहते हुए भारत वर्ष ने लगभग हज़ार वर्ष की लंबी अवधि तक अनेकानेक कष्ट सहे और यातनाएँ झेलीं. भारत की पहचान बदलने के लिए न सिर्फ़ नाम ही बदला गया, पहले हिन्दुस्थान फिर इंडिया, बल्कि उसके मानस, संस्थाओं और संस्कार सबको नए साँचे में ढालते रहने की कोशिश जारी रही. तरह-तरह के शोषण द्वारा विदेशी आक्रांताओं ने भारत को विपन्न बनाने की लगातार कोशिश की. अंग्रेज़ों ने उपनिवेश बना कर हद ही कर दी. उन्होंने भारत का भरपूर दोहन किया और शोषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. अपने ही देश में ख़ुद को अस्वीकृत ...
स्वतंत्रता दिवस : लाल किला में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड प्रवासियों के दल ने पारम्परिक वेशभूषा में किया प्रतिभाग

स्वतंत्रता दिवस : लाल किला में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड प्रवासियों के दल ने पारम्परिक वेशभूषा में किया प्रतिभाग

दिल्ली-एनसीआर
78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित लाल किले में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड प्रवासियों के दल ने उत्तराखण्ड के पारम्परिक वेशभूषा में प्रतिभाग किया. कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं वेशभूषा का प्रदर्शन दल द्वारा किया गया. इस वर्ष लाल किले में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सभी राज्यों के प्रवासी निवासियों के दलों को आमंत्रित किया गया. उत्तराखण्ड स्थानिक आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली के तत्वाधान में दिल्ली में निवास कर रहे उत्तराखण्डवासियों को लाल किला में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया. जिसमें 20 प्रवासी उत्तराखण्डवासियों के दल द्वारा स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया. दल में शामिल सदस्यों ने कहा कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व कर गौरवान्वित एवं प्रफुल्लित महसूस कर रहे है. इस अवसर पर नोडल अधिक...
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

देहरादून
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी है. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, अमर शहीदों, राज्य आंदोलनकारियों सहित राष्ट्र निर्माण के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की है. उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड को हर क्षेत्र में देश का सर्वश्रेष्ठ एवं अग्रणी राज्य बनाने का हमारा संकल्प ह. समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड बनाने के लिए हमारे प्रयास निरन्तर जारी है. अनुकूल औद्योगिक नीति, शांत औद्योगिक वातावरण, दक्ष मानव संसाधन और उदार कर लाभों तथा पूंजी निवेश में वृद्धि के कारण उत्तराखंड भारत में तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक बन गया है. नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा जारी 2023-24 की एसडीजी रिपोर्ट में उत्तराखण्ड ने सतत विकास लक्ष्यों की कसौटी पर खरा उतरते हुए पूरे देश में पहल...
स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रदेश से ‘विकसित भारत’ बनाने में सहयोग देने वाले होंगे ‘विशेष अतिथि’

स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रदेश से ‘विकसित भारत’ बनाने में सहयोग देने वाले होंगे ‘विशेष अतिथि’

देहरादून
उत्तराखंड के विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ‘विशेष अतिथि’ के रूप में 78वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने के लिए किया गया आमंत्रित देहरादून. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है. इसी कड़ी में 78वें स्वतंत्रता दिवस की थीम है ‘विकसित भारत. विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए देश और राज्यों के कई विभाग उल्लेखनिय कार्य कर रहे हैं और विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं से कई जरूरतमंद लाभांवित हो रहे हैं. गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी पूरे देश से लगभग 6000 ‘विशेष अतिथियों’को भारत सरकार ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली आमंत्रित किया है. उत्तराखंड के विभिन्न केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थी और विभागों में उल्लेखनिय कार्य कर रहे लगभग 110 लोग 15 अगस्त 2024 को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में विशेष अतिथि के रूप में 78वें स्वतंत्रता दि...
स्वतंत्रता दिवस: पारम्परिक वेशभूषा में दिखे प्रवासी उत्तराखंडी

स्वतंत्रता दिवस: पारम्परिक वेशभूषा में दिखे प्रवासी उत्तराखंडी

दिल्ली-एनसीआर
नई दिल्ली. 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित लाल किले में आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखण्ड प्रवासियों के दल ने पारम्परिक वेशभूषा में प्रतिभाग किया. कार्यक्रम में उत्तराखण्ड की संस्कृति एवं वेशभूषा का प्रदर्शन दल द्वारा किया गया है.  इस वर्ष लाल किले में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सभी राज्यों के प्रवासी निवासियों के दलों को आमंत्रित किया गया. सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग, उत्तराखण्ड द्वारा दिल्ली में निवास कर रहें उत्तराखण्डवासियों को लाल किला में आयोजित कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया. जिसमें 45 प्रवासी उत्तराखण्डवासियों के दल द्वारा स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया गया. दल में शामिल सदस्यों ने कहा कि लाल किले में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखण्ड राज्य की ओर से प्रतिनिधित्व कर गौरवान्वित एवं प्रफुल्लित महसूस कर रहे है. दल के सदस्यों में श्री कमल किशोर,...
स्वतंत्र भारत में स्वराज की प्रतिष्ठा

स्वतंत्र भारत में स्वराज की प्रतिष्ठा

साहित्‍य-संस्कृति
स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त, 2022) पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  आज़ादी मिलने के पचहत्तर साल बाद देश स्वतंत्रता का ‘अमृत महोत्सव’ मना रहा है तो यह विचार करने की इच्छा और स्वाभाविक उत्सुकता पैदा होती है कि स्वतंत्र भारत का जो स्वप्न देखा गया था वह किस रूप में यथार्थ के धरातल पर उतरा. स्वाधीनता संग्राम का प्रयोजन यह था कि भारत को न केवल उसका अपना खोया हुआ स्वरूप वापस मिले बल्कि वह विश्व में अपनी मानवीय because भूमिका को भी समुचित ढंग से निभा सके. देश या राष्ट्र का भौगोलिक अस्तित्व तो होता है पर वह निरा भौतिक पदार्थ नहीं होता जिसमें कोई परिवर्तन न होता हो. वह एक गत्यात्मक रचना है और उसी दृष्टि से विचार किया जाना उचित होगा. बंकिम बाबू ने भारत माता की वन्दना करते हुए उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में ‘सुजलां सुफलां मलयज शीतलां शस्य श्यामलां मातरं वन्दे मातरं‘ का अमर गान रचा था. ‘सुखदां वरदां म...
‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

समसामयिक
डॉ. मोहन चंद तिवारीदेश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की 74वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. हर देश का स्वतंत्रता प्राप्ति के आंदोलन से जुड़ा एक संघर्षपूर्ण इतिहास होता है. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी एक क्रांतिकारी और देशभक्ति पूर्ण इतिहास है, जिसकी जानकारी प्रत्येक भारतवासी को होनी चाहिए. हमें अपने संविधान सम्मत राष्ट्रगान, 'जन गण मन' राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ और तिरंगे झंडे के इतिहास के बारे में भी यह तथ्यात्मक जानकारी होनी चाहिए कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इन राष्ट्रीय प्रतीकों की कितनी अहम भूमिका रही थी? यह इसलिए भी आवश्यक होना चाहिए जैसे हम हर वर्ष 15 अगस्त को लालकिले पर राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराना राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाते हैं, उसी तरह स्वन्त्रता आंदोलन को प्रेरित करने वाले राष्ट्रगान 'जन गण मन', राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ तथा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में जानकारी ...